बंकिमचंद्र के वंशज बोले-सोनिया ने वंदे मातरम् का अपमान किया:बिना शर्त माफी मांगें; कांग्रेस मुख्यालय में बार-बार राष्ट्रीय गीत रोकने का इशारा किया था
बंगाल के नैहाटी से BJP विधायक और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के वंशज सुमित्रो चटर्जी ने वंदेमातरम् के अपमान पर सोनिया गांधी से बिना शर्त माफी मांगने को कहा है। दरअसल, सोनिया ने स्वतंत्रता दिवस पर कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम् को रुकवाने का इशारा किया था। चटर्जी का दावा है कि सोनिया ने वंदे मातरम का पूरा संस्करण गाने को लेकर असहजता दिखाई और इसे रोकने की बार-बार कोशिश की। BJP विधायक चटर्जी ने सोनिया गांधी के नाम एक लेटर लिखा है। जिसमें उन्होंने खुद को आम नागरिक, देशभक्त और बंकिमचंद्र का सीधा वंशज बताया। उन्होंने कहा कि इस घटना के कारण उन्हें गहरा दर्द है। उन्हें गुस्सा आ रहा है। क्योंकि ये शहीदों का अपमान है। पहले देखिए कांग्रेस मुख्यालय की वीडियो क्लिप… चटर्जी बोले- कांग्रेस ने ऐतिहासिक गलती दोहराई चटर्जी ने जो लेटर लिखा है उसमें कहा है कि 15 अगस्त की घटना केवल दुर्भाग्यपूर्ण नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक गलती को बेशर्मी से दोहराना है। उन्होंने अरविंद की उस बात का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने वंदे मातरम को देश को ‘देशभक्ति के धर्म’ में दीक्षित करने वाला मंत्र बताया था। 5 पॉइंट में पढ़ें, लेटर में और क्या है… कांग्रेस की ‘दोहरी नीति’ पर सवाल उठाया सुमित्रो ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की ‘दोहरी नीति’ कोई नई बात नहीं है। उन्होंने कहा- “1937 में पार्टी ने मोहम्मद अली जिन्ना की आपत्तियों के आगे झुककर उसी साल अक्टूबर में गीत को छोटा कर दिया था। उस समझौते की परछाई एक बार फिर कांग्रेस के आचरण में दिखाई दे रही है।” चटर्जी ने कांग्रेस की पश्चिम बंगाल इकाई के छात्र संगठन छात्र परिषद के नारे का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि छात्र परिषद ‘मंत्र मोदेर संजीवन, वंदे मातरम’ नारे का इस्तेमाल करती है। इसके बाद उन्होंने सवाल किया कि पार्टी की टॉप लीडरिशप इसी गीत को लेकर असहज क्यों है। वंदे मातरम किसी एक पार्टी की संपत्ति नहीं सुमित्राे ने अपने लेटर में लिखा है कि वंदे मातरम किसी एक राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं है। यह देश की सामूहिक स्मृति, बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की अमर विरासत और शहीदों के खून और बलिदान से मिला पवित्र राष्ट्रीय प्रतीक है। इस गीत का सम्मान करना भारत के स्वतंत्रता संघर्ष के इतिहास का सम्मान करने के बराबर है। इस घटना से पश्चिम बंगाल के लोगों की भावनाएं गहराई से आहत हुई हैं। सोनिया गांधी से आत्ममंथन करने और सभी देशवासियों, खासकर पश्चिम बंगाल के लोगों से बिना किसी शर्त के माफी मांगने की अपील की।
पंजाब के किसानों का दिल्ली कूच, खनौरी बॉर्डर पर रोके:DC से मीटिंग जारी, डल्लेवाल बोले- आगे नहीं जाने दिया तो यहीं बैठेंगे
पंजाब से दिल्ली जा रहे 55 किसानों को खनौरी-दाता सिंहवाला बॉर्डर पर हरियाणा पुलिस ने रोक दिया है। इसके बाद किसानों की जींद की DC डॉ वैशाली शर्मा के साथ मीटिंग जारी है। पुलिस ने बॉर्डर पर बैरिकेडिंग, कंटीली तार, कंक्रीट ब्लॉक और कंटेनर लगाकर रास्ता बंद किया हुआ है। भारी पुलिस बल तैनात है। किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल के नेतृत्व में 55 किसान रवाना हुए हैं। इससे पहले जत्थे ने 2024 के किसान आंदोलन के दौरान शुभकरण सिंह की मौत वाले स्थान से मिट्टी उठाई। डल्लेवाल ने कहा- “अब रास्ता किसानों ने नहीं, हरियाणा पुलिस ने रोका है। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट को इस पर संज्ञान लेना चाहिए। थोड़ी संख्या में किसान दिल्ली जाकर अपनी बात रखना चाहते हैं। हमारे 5 नेता पुलिस से बात करेंगे। अगर आगे नहीं जाने दिया गया तो आज रात यहीं रुकेंगे।” किसानों ने कहा कि यात्रा पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगी। इसका उद्देश्य किसानों से जुड़े मुद्दों के साथ अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील के विरोध की आवाज केंद्र सरकार तक पहुंचाना है। 29 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचने का लक्ष्य किसान नेताओं ने बतााय कि यात्रा में एक किसान मुख्य रूप से पैदल चलेगा, जबकि उसके साथ कुछ किसान रहेंगे, जो उसका सामान उठाएंगे। रास्ते में जगह-जगह पड़ाव होंगे और जत्था चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेगा। किसानों का लक्ष्य 29 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचने का है। वहां एक दिन की किसान पंचायत आयोजित की जाएगी। इसके बाद सरकार को किसानों की मांगों से संबंधित मांग पत्र सौंपने का प्रयास किया जाएगा। संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में खनौरी-दाता सिंहवाला बॉर्डर से दिल्ली के जंतर-मंतर तक ‘किसान बचाओ पदयात्रा’ निकालने का ऐलान किया था जानिए किसान नेता डल्लेवाल ने क्या कहा… SP बोले- धारा 163 लागू, किसानों को आगे नहीं जाने देंगे जींद SP कुलदीप सिंह भी दाता सिंहवाला बॉर्डर पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि आम जनता को किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी। दिल्ली कूच करने पहुंचे किसानों को बताया जाएगा कि इलाके में धारा 163 लागू है, इसलिए उन्हें आगे जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। सुरक्षा के मद्देनजर जगह-जगह नाके लगाए गए हैं। कौन थे किसान शुभकरण, जिनकी खनौरी बॉर्डर पर मौत हुई शुभकरण सिंह पंजाब के बठिंडा जिले के बल्लो गांव के युवा किसान थे और 2020-21 के किसान आंदोलन में भी शामिल हुए थे। फरवरी 2024 में MSP की कानूनी गारंटी समेत अन्य मांगों को लेकर किसानों के दिल्ली कूच के दौरान वह 13 फरवरी को खनौरी बॉर्डर पहुंचे थे। 21 फरवरी को किसानों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव के दौरान शुभकरण गंभीर रूप से घायल हुए और पटियाला के राजिंदरा अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पोस्टमॉट्रम में उनके सिर में धातु के छर्रे मिले थे। उनकी मौत के बाद किसान संगठनों ने इसे आंदोलन के दौरान हुई मौत बताते हुए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की। 28 फरवरी को पंजाब पुलिस ने उनके पिता की शिकायत पर अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की और 29 फरवरी को उनके पैतृक गांव में अंतिम संस्कार किया गया। शुभकरण की मौत के बाद किसान संगठनों ने उन्हें आंदोलन का शहीद माना और खनौरी बॉर्डर पर उनकी याद में शहीदी स्थल बनाया।
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