6 साल बाद एक्सिस बैंक के सीएफओ पुनीत शर्मा ने दिया इस्तीफा
मुंबई, 29 जून (आईएएनएस)। देश के तीसरे सबसे बड़े निजी क्षेत्र के बैंक एक्सिस बैंक ने सोमवार को घोषणा की कि उसके मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) पुनीत शर्मा ने इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपने पेशेवर जीवन के अगले चरण की शुरुआत करने के लिए यह फैसला लिया है।
बैंक की ओर से एक्सचेंज फाइलिंग में दी गई जानकारी के अनुसार, पुनीत शर्मा ने 28 जून 2026 को अपना इस्तीफा सौंपा।
वह 31 अगस्त 2026 तक अपने पद पर बने रहेंगे। इसके बाद वह बैंक के मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ), प्रमुख प्रबंधकीय कर्मी (की मैनेजेरियल पर्सनेल) और वरिष्ठ प्रबंधन टीम के सदस्य के रूप में अपनी जिम्मेदारियां छोड़ देंगे।
पुनीत शर्मा मार्च 2020 से एक्सिस बैंक के सीएफओ के रूप में कार्यरत थे। बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और कंसल्टिंग क्षेत्र में उनके पास 23 वर्षों से अधिक का अनुभव है। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने बैंक की वित्तीय गतिविधियों और रणनीतिक योजना को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
एक्सिस बैंक से जुड़ने से पहले पुनीत शर्मा ने लगभग 12 वर्षों तक टाटा कैपिटल में काम किया, जहां उन्होंने कई वरिष्ठ नेतृत्व पदों पर जिम्मेदारी निभाई। वर्ष 2014 से वह ग्रुप चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (ग्रुप सीएफओ) रहे, जहां उनके जिम्मे वित्तीय नियंत्रण, वित्तीय योजना, अकाउंटिंग और टैक्सेशन से जुड़े कार्य थे।
वह इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (आईएसबी), हैदराबाद के पूर्व छात्र हैं।
इसके अलावा, उन्होंने सिटीबैंक में भी कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया, जहां उन्होंने स्ट्रक्चर्ड कैश सॉल्यूशंस, ट्रेजरी ऑपरेशंस और रिस्क मॉनिटरिंग जैसे क्षेत्रों में जिम्मेदारी संभाली।
बैंक ने कहा कि पुनीत शर्मा ने अपने पेशेवर करियर के अगले चरण में आगे बढ़ने के उद्देश्य से इस्तीफा दिया है। हालांकि, एक्सिस बैंक ने अभी तक उनके उत्तराधिकारी के नाम की घोषणा नहीं की है।
इसी बीच बैंक के निदेशक मंडल ने नॉमिनेशन एंड रिम्यूनरेशन कमेटी की सिफारिश पर दो निदेशकों की दोबारा नियुक्ति को भी मंजूरी दी है।
सीएच एस. एस. मल्लिकार्जुन राव को स्वतंत्र निदेशक (इंडिपेंडेंट डायरेक्टर) के रूप में दूसरे कार्यकाल के लिए चार साल के लिए दोबारा नियुक्त किया गया है। उनका नया कार्यकाल 1 फरवरी 2027 से 31 जनवरी 2031 तक रहेगा। यह नियुक्ति शेयरधारकों की मंजूरी के अधीन होगी।
इसके अलावा, मुनीश शारदा को पूर्णकालिक निदेशक (होल-टाइम डायरेक्टर) और कार्यकारी निदेशक (एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर) के रूप में 27 फरवरी 2027 से 26 फरवरी 2030 तक तीन वर्षों के लिए दोबारा नियुक्त करने को मंजूरी दी गई है। उनकी नियुक्ति भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और बैंक के शेयरधारकों की मंजूरी के बाद प्रभावी होगी।
सोमवार को कारोबार समाप्त होने पर बीएसई पर एक्सिस बैंक के शेयर 1.37 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,357.70 रुपए पर बंद हुआ।
--आईएएनएस
डीबीपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
बेहतर प्रशासन के लिए प्रशासनिक डेटा को राष्ट्रीय संपत्ति बनाना आवश्यक: पीएम के प्रधान सचिव
नई दिल्ली, 29 जून (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी.के. मिश्रा ने सोमवार को कहा कि भारत के अलग-अलग विभागों में बिखरे प्रशासनिक डेटा को एक रणनीतिक राष्ट्रीय संपत्ति में बदलने की जरूरत है। उनका कहना है कि यदि सरकारी डेटा का बेहतर एकीकरण किया जाए तो इससे सुशासन, नीति निर्माण और सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता में बड़ा सुधार होगा, साथ ही गोपनीयता और सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकती है।
सांख्यिकी दिवस के 20वें समारोह को संबोधित करते हुए मिश्रा ने कहा कि भारत में तेजी से हो रहे डिजिटल परिवर्तन के कारण सरकारी योजनाओं, नियामक संस्थानों और सार्वजनिक सेवाओं के माध्यम से बड़ी मात्रा में प्रशासनिक डेटा तैयार हो रहा है।
हालांकि उन्होंने कहा कि यह मूल्यवान डेटा अभी भी अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों तक ही सीमित है, जिससे इसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।
उन्होंने कहा, इन डेटा सेट्स में आर्थिक गतिविधियों, सामाजिक विकास, बुनियादी ढांचे के निर्माण, वित्तीय समावेशन, स्वास्थ्य, शिक्षा और कल्याणकारी योजनाओं से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां मौजूद हैं। लेकिन इनकी समृद्धता और व्यापकता के बावजूद अधिकांश डेटा मंत्रालयों, विभागों और विभिन्न संस्थाओं में बिखरा हुआ है, जिससे नीति निर्माण और सुशासन में इसका पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है।
पी.के. मिश्रा ने आगे कहा कि प्रशासनिक डेटा को अब केवल विभागीय कामकाज का उप-उत्पाद (बाय-प्रोडक्ट) मानकर नहीं चलना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस डेटा को एक रणनीतिक राष्ट्रीय संसाधन के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, जिससे महत्वपूर्ण डेटा की कमी को दूर किया जा सके, बेहतर नीतियां बनाई जा सकें और सरकारी योजनाओं का लाभ सही लोगों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सके।
एकीकृत डेटा प्रणाली के फायदों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रशासनिक डेटा का बेहतर उपयोग सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को अधिक प्रभावी बना सकता है और सार्वजनिक सेवाओं की डिलीवरी को भी बेहतर कर सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि डेटा साझा करने और विभिन्न प्रणालियों को जोड़ने की प्रक्रिया में नागरिकों का भरोसा किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा, प्रशासनिक डेटा को विभागीय प्रक्रियाओं का उप-उत्पाद बनने के बजाय एक रणनीतिक राष्ट्रीय संपत्ति के रूप में विकसित करना होगा।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकारी एजेंसियों के बीच डेटा साझा करने और आपसी तालमेल बढ़ाने के दौरान नागरिकों की निजता, डेटा सुरक्षा और गोपनीयता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उनके अनुसार, प्राइवेसी बाय डिजाइन जैसे सिद्धांतों और मौजूदा कानूनी एवं नीतिगत ढांचे का पूरी तरह पालन किया जाना चाहिए।
पी.के. मिश्रा ने भरोसेमंद और आपस में जुड़े डेटा सिस्टम को भारत के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़ी महत्वाकांक्षाओं से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि विश्वसनीय डेटा भविष्य में शासन और सार्वजनिक प्रशासन में एआई के जिम्मेदार और प्रभावी उपयोग की मजबूत नींव साबित होगा।
--आईएएनएस
डीबीपी
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