Pension Scheme: सिर्फ ₹55 महीने जमा करें, 60 साल के बाद हर महीने मिलेंगे ₹3,000; जानें कौन कर सकता है आवेदन
Pension Scheme: क्या आप मजदूरी या फिर खेती किसानी करते हैं और आपके पास आय का कोई स्थिर साधन नहीं है? ऐसे में बुढ़ापे की चिंता होना स्वाभाविक है। लेकिन आपको बुढ़ापे के लिए अधिक चिंता करने की जरूरत नहीं हैं क्योंकि केंद्र सरकार द्वारा एक ऐसी योजना चलाई जा रही है, जिसके जरिए आप 60 की उम्र के बाद भी हर महीने 3000 रुपए की पेंशन पा सकते हैं।
इस योजना का नाम- प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना है। इसका लाभ उठाने के लिए आपको ऑनलाइन आवेदन करना होता है। यहां हम आपको आवेदन की प्रक्रिया, पात्रता और योजना से जुड़ी अन्य सभी डिटेल्स के बारें में बता रहे हैं।
क्या है प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना?
प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन (PM-SYM) केंद्र सरकार की एक पेंशन योजना है, जिसे खास तौर पर असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों और कृषि मजदूरों के लिए शुरू किया गया है। इस योजना की शुरुआत 15 फरवरी 2019 को हुई थी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बुढ़ापे में श्रमिकों को नियमित आय मिल सके और उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना न करना पड़े।
इस योजना में लाभार्थी हर महीने एक तय राशि जमा करता है और केंद्र सरकार भी उतनी ही राशि उसके खाते में योगदान करती है। 60 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद पात्र लाभार्थी को हर महीने 3,000 रुपये की न्यूनतम सुनिश्चित पेंशन दी जाती है, जिससे वृद्धावस्था में आर्थिक सहारा मिलता है।
कौन उठा सकता है इस योजना का लाभ?
प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना का लाभ असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों को दिया जाता है। इसमें कृषि मजदूर, घरेलू कामगार, रिक्शा चालक, रेहड़ी-पटरी विक्रेता, निर्माण श्रमिक, प्लंबर, दर्जी, ड्राइवर, मोची, धोबी, बीड़ी श्रमिक, हैंडलूम और पावरलूम श्रमिक सहित अन्य असंगठित क्षेत्र के कामगार शामिल हैं। योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक की मासिक आय 15,000 रुपये या उससे कम होनी चाहिए और उसकी आयु 18 से 40 वर्ष के बीच होनी आवश्यक है।
किस उम्र में कितना देना होगा योगदान?
योजना में जितनी कम उम्र में शामिल होंगे, उतना कम मासिक अंशदान देना होगा।
- 18 वर्ष – ₹55 प्रति माह
- 20 वर्ष – ₹61 प्रति माह
- 25 वर्ष – ₹80 प्रति माह
- 30 वर्ष – ₹105 प्रति माह
- 35 वर्ष – ₹150 प्रति माह
- 40 वर्ष – ₹200 प्रति माह
सरकार भी हर महीने लाभार्थी के बराबर राशि अपने हिस्से से जमा करती है।
60 साल के बाद क्या मिलेगा?
यदि लाभार्थी नियमित रूप से अंशदान जमा करता है तो 60 वर्ष की आयु पूरी होने पर हर महीने 3,000 रुपये की न्यूनतम सुनिश्चित पेंशन सीधे उसके बैंक खाते में भेजी जाती है। यह राशि बुजुर्गावस्था में दैनिक खर्चों और आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में मदद करती है।
सदस्य की मृत्यु होने पर क्या होगा?
यदि योजना से जुड़े सदस्य की मृत्यु हो जाती है तो उसका जीवनसाथी योजना को जारी रख सकता है। वहीं यदि सदस्य पेंशन प्राप्त कर रहा था और उसके बाद निधन हो जाता है, तो जीवनसाथी को 50 प्रतिशत पारिवारिक पेंशन दी जाती है।
कौन नहीं उठा सकता योजना का लाभ?
इन लोगों को योजना का लाभ नहीं मिलेगा—
- EPFO के सदस्य
- ESIC से जुड़े कर्मचारी
- NPS के सदस्य
- आयकर (Income Tax) भरने वाले व्यक्ति
बीच में योजना छोड़ने पर क्या होगा?
यदि कोई सदस्य 10 वर्ष से पहले योजना छोड़ता है, तो उसे उसकी जमा राशि बचत खाते की ब्याज दर के अनुसार वापस मिल जाती है। वहीं 10 वर्ष पूरे होने के बाद लेकिन 60 वर्ष से पहले बाहर निकलने पर जमा राशि के साथ निर्धारित ब्याज भी लौटाया जाता है। यदि किसी कारण से किस्त जमा नहीं हो पाती, तो बकाया राशि और ब्याज जमा कर योजना को दोबारा सक्रिय किया जा सकता है।
आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज
- आधार कार्ड
- बैंक या जनधन खाता
- मोबाइल नंबर
कैसे करें आवेदन?
योजना में शामिल होने के लिए नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाएं। वहां आधार कार्ड, बैंक खाते और मोबाइल नंबर की जानकारी देकर आवेदन किया जा सकता है। पहली किस्त जमा होने के बाद रजिस्ट्रेशन पूरा हो जाता है और लाभार्थी को श्रम योगी कार्ड जारी किया जाता है।
हेल्पलाइन नंबर
योजना से जुड़ी जानकारी या सहायता के लिए श्रमिक टोल फ्री नंबर 1800-267-6888 पर संपर्क कर सकते हैं।
Global Intelligence Update: जिनपिंग का 'एंटी-करप्शन' हंटर या सेना में बगावत का डर? संसद से 6 टॉप मिलिट्री कमांडर हटाए गए
चीनी कम्युनिस्ट पार्टी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपनी ही सेना 'पीपल्स लिबरेशन आर्मी' (PLA) के भीतर चल रही अंदरूनी हलचल को दबाने के लिए अब तक की सबसे बड़ी दंडात्मक कार्रवाई को अंजाम दिया है। चीन की सरकारी न्यूज एजेंसी 'शिन्हुआ' द्वारा जारी आधिकारिक जानकारियों के मुताबिक, देश की सर्वोच्च विधायाी संस्था 'नेशनल पीपल्स कांग्रेस' (NPC) की स्टैंडिंग कमेटी ने एक विशेष नोटिस जारी कर छह बड़े सैन्य सांसदों की सदस्यता को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया है।
इसके अलावा, इस कार्रवाई की जद में चीन के कई शीर्ष राजनीतिक चेहरे और पूर्व वित्तीय नीति निर्माता भी आए हैं, जिससे बीजिंग के सत्ता गलियारों में हड़कंप मच गया है।
जनरल शू शुयुछियांग और वेस्टर्न थिएटर कमांड के जनरल ली फेंगबियाओ समेत ये नाम शामिल
जांच एजेंसियों के अनुसार, जिन बड़े सैन्य अधिकारियों को हटाया गया है, उनमें जनरल शू शुयुछियांग का नाम सबसे ऊपर और संवेदनशील माना जा रहा है। जनरल शू चीन की सेना के लिए हथियार और अत्याधुनिक उपकरण बनाने, उन्हें खरीदने और उनकी टेस्टिंग का जिम्मा संभालने वाले 'सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के इक्विपमेंट डेवलपमेंट डिपार्टमेंट' के सर्वेसर्वा थे। इसके साथ ही, वे साल 2022 से चीन के सबसे महत्वाकांक्षी 'मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम' के कमांडर-इन-चीफ का पद भी संभाल रहे थे।
उनके अलावा, भारत से सटी सीमा की कमान संभालने वाली पीएलए की वेस्टर्न थिएटर कमांड में पॉलिटिकल कमिश्नर के पद पर तैनात जनरल ली फेंगबियाओ और पीएलए एयरफोर्स में पॉलिटिकल कमिश्नर के तौर पर काम कर रहे जनरल गुओ पुशियाओ को भी उनके पद से बेदखल कर दिया गया है। अन्य कमांडरों में ईस्टर्न थिएटर कमांड से वांग कांगपिंग, साइबरस्पेस फोर्स से झांग मिंगहुआ और आर्मी के सीनियर अधिकारी यिन होंगशिंग शामिल हैं।
पोलित ब्यूरो सदस्य मा शिंगरुई और पूर्व वित्तीय नियामक प्रमुख ली युंझे पर भी गिरी गाज
इस मिलिट्री पर्ज के दायरे में केवल सेना के कमांडर ही नहीं, बल्कि चीनी सरकार के बड़े नीति निर्माता भी शामिल हैं। जिनपिंग प्रशासन ने हाल ही में गंभीर जांच के घेरे में आए पूर्व वित्तीय नियामक प्रमुख ली युंझे और कम्युनिस्ट पार्टी की सबसे ताकतवर इकाई पोलित ब्यूरो की सदस्य मा शिंगरुई को भी उनके पदों से हटा दिया है।
चूंकि नेशनल पीपल्स कांग्रेस चीन की सबसे बड़ी कानून बनाने वाली संस्था है, इसलिए इसके भीतर एक साथ इतने बड़े सैन्य और राजनीतिक चेहरों में फेरबदल होना चीनी शासन प्रणाली में किसी बड़े आंतरिक संकट की तरफ इशारा कर रहा है।
एंटी-करप्शन अभियान या बगावत को कुचलने की कोशिश? रक्षा विशेषज्ञों में छिड़ी बहस
अंतरराष्ट्रीय मीडिया और रॉयटर्स की रिपोर्ट्स के अनुसार, हालांकि नेशनल पीपल्स कांग्रेस के नोटिस में इन सभी शीर्ष जनरलों और नेताओं को अचानक हटाए जाने की कोई स्पष्ट वजह दर्ज नहीं की गई है, और न ही चीन के रक्षा मंत्रालय ने इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है। लेकिन सामरिक और रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह पूरी कार्रवाई राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा चलाए जा रहे 'भ्रष्टाचार विरोधी अभियान' का ही एक हिस्सा है, जो पिछले कई सालों से लगातार जारी है।
दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक इस बात की आशंका भी जता रहे हैं कि ताइवान संकट और वैश्विक मोर्चे पर बढ़ते दबाव के बीच चीनी सेना के भीतर पनप रही किसी भी संभावित बगावत या असंतोष को कुचलने के लिए जिनपिंग ने अपने इस 'एंटी-करप्शन हंटर' का इस्तेमाल किया है। फिलहाल, हटाए गए इन सभी छह जनरलों को अज्ञात ठिकानों पर रखा गया है और वे किसी भी बाहरी संपर्क में नहीं आ पा रहे हैं।
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