बच्चों पर 'परफेक्ट बनने' का दबाव बेहद खतरनाक, 'पुशी पेरेंटिंग' मेंटल हेल्थ करता है खराब
नई दिल्ली, 29 जून (आईएएनएस)। आज के समय में हर माता-पिता अपने बच्चे को सबसे बेहतर देखना चाहते हैं, लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब माता-पिता अपनी इन उम्मीदों को बच्चों पर थोपने लगते हैं और उन्हें परफेक्ट बनने के लिए मजबूर करते हैं। इसे साइकोलॉजिकल भाषा में पुशी पेरेंटिंग कहा जाता है। यह देखने में बाहर से भले ही अनुशासन और सफलता जैसी दिखे, लेकिन अंदर ही अंदर यह बच्चे के मानसिक विकास के लिए खतरनाक है।
मनोविज्ञान के अनुसार, पुशी पेरेंटिंग का मतलब है बच्चे पर अपनी इच्छाएं थोपना और उसे हमेशा परफेक्ट बनने के लिए मजबूर करना। इसमें देखने में लगता है कि बच्चा अच्छा कर रहा है, लेकिन अंदर ही अंदर वह तनाव महसूस करता रहता है। बच्चा खेल, सीखने और खुशी से ज्यादा केवल परफॉर्मेंस के बारे में सोचने लगता है।
पुशी पेरेंटिंग में माता-पिता हमेशा बच्चे से सबसे ज्यादा नंबर या हर काम में नंबर वन आने की उम्मीद करते हैं। अगर बच्चा अच्छे नंबर भी ले आए, लेकिन टॉप नहीं कर पाया, तो उसे डांट मिलती है। इससे बच्चे को लगने लगता है कि उसकी मेहनत की कोई कीमत नहीं है। धीरे-धीरे उसके अंदर डर पैदा हो जाता है। वह खुद को तभी अपनाता है जब वह दूसरों की उम्मीदों पर खरा उतरता है।
पुशी पेरेंटिंग के दूसरे संकेत में बच्चे की पसंद को नजरअंदाज कर दिया जाता है। कई बार बच्चे को किसी खेल, कला या शौक में रुचि होती है, लेकिन माता-पिता उसे अपनी मर्जी के करियर या पढ़ाई की तरफ धकेलते हैं। इससे बच्चा अपनी खुशी और रुचि को दबाने लगता है और केवल वही करने की कोशिश करता है जिससे माता-पिता खुश हों।
इसके अलावा, जब बच्चों की तुलना दूसरों से की जाती है, तो यह आदत बच्चे के आत्मविश्वास को कमजोर कर देती है। वह खुद को दूसरों से कम समझने लगता है और धीरे-धीरे उसके मन में हीन भावना आ सकती है। मनोवैज्ञानिक इसे सेल्फ-डाउट पैटर्न कहते हैं, जिसमें बच्चा खुद पर भरोसा करना छोड़ देता है।
अक्सर देखा जाता है कि माता-पिता बच्चे के हर छोटे-बड़े फैसले खुद लेने लगते हैं। जैसे क्या पहनना है, क्या खाना है, किससे दोस्ती करनी है या खाली समय में क्या करना है। जब बच्चे को अपने फैसले खुद लेने का मौका नहीं मिलता, तो वह आत्मनिर्भर नहीं बन पाता। बड़े होकर भी उसे हर बात के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता है।
मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि बच्चों को दिशा देना जरूरी है, लेकिन उन पर दबाव डालना सही नहीं है।
--आईएएनएस
पीके/एएस
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Shakun Shastra: चलते-चलते रास्ते पर दिख जाएं ये चीजें तो कभी न करें लांघने की गलती, दुर्भाग्य और कंगाली पड़ जाएगी पीछे!
Shakun Shastra: सड़क पर चलते हुए अगर आपके रास्ते पर ऐसी कोई चीज आती है जिसे लांघने से पहले आप एक पल के लिए रुकते हैं. अगर आपके मन में अचानक उस चीज को देखकर ख्याल आता है कि आखिर ये है क्या? अगर वो काला कपड़ा है या फिर कुछ अजीब सी चीज है तो शायद आपको उसे क्रॉस नहीं करना चाहिए. आपका सोचना भी बिल्कुल सही था. क्योंकि धार्मिक ग्रंथों में और विष्णु पुराण में ऐसी कई वस्तुओं के बारे में उल्लेख मिलता है कि उन्हें हमें लांघना नहीं चाहिए. शकुन शास्त्र में इस बारे में बताया जाता है. इन चीजों को लांघने से उचित घटनाएं नहीं होती हैं. आइए जानते हैं आखिर वो कौन सी 7 चीजे हैं.
ज्योतिषाचार्य क्या कहते हैं?
ज्योतिषाचार्य हरीगोपाल शर्मा कहते हैं कि आजकल की बदलती भौतिक जिंदगी ने लोगों को बहुत ज्यादा ही प्रैक्टिकल बना दिया है. ये लोग हर चीज के पीछे साइंस की तलाश कर रहे हैं. मगर हिंदू शास्त्र में आज भी जीवन से जुड़े गूढ़ रहस्य है और चेतावनियां मौजूद हैं. दुर्भाग्यवश, आजकल की जेनेरशन इन चीजों पर विश्वास कम दिखाती है. और यही कारण है कि उन्हें अपने कार्यों में मुश्किलों का सामना करना पड़ जाता है.
इन 7 चीजों को कभी न लांघे
1.अस्थियां
अस्थियां चाहे इंसान की हो या फिर मृत जानवर की. रास्ते पर अगर ऐसा पड़ा हुआ हो तो वहां से गुजरना नहीं चाहिए. अक्सर रास्ते पर मृत पशुओं की हड्डियां होती हैं, इन्हें लांघना भी नहीं चाहिए. न ही उस मार्ग से गुजरना उचित माना जाता है. कहते हैं कि इन स्थानों पर नकारात्मक ऊर्जाओं का प्रभाव रहता है.
2.बाल
अक्सर लोग बालों को कंघी करके नीचे रास्ते पर फेंक देते हैं. वहीं, कई बार कटे हुए बाल भी सड़क पर पड़े हुए दिख जाते हैं. शास्त्रों में इन्हें बिल्कुल शुभ नहीं माना जाता है. मान्यता है कि बालों में व्यक्ति की ऊर्जा होती है. इसलिए, उसे लांघना उचित नहीं होता है. बालों को भी लांघकर जाने से बचें.
3.भस्म
भस्म पवित्र पूजा या हवन की भी हो सकती है. भस्म किसी तांत्रित क्रिया से जुड़ी भी हो सकती है. इसलिए, अगर रास्ते पर भस्म पड़ी है तो मार्ग को बदल देना चाहिए. इन्हें लांघने से पाप लग सकता है.
4.तांत्रिक क्रियाओं में लगने वाली चीजें
शकुन शास्त्र के अनुसार, नींबू, मिर्च, मिठाइयां और पान आदि दिखे तो उसे भी नहीं लांघना नहीं चाहिए. ये वस्तुओं कई बार किसी उतारे की और तांत्रिक प्रक्रिया से जुड़ी हुई होती हैं. इन्हें लांघने से नकारात्मक प्रभाव भी पड़ सकते हैं.
5.कांटों वाला रास्ता
शास्त्रों के मुताबिक, कांटों से भरे मार्ग को भी दुर्भाग्य का प्रतीक कहते हैं. ऐसे रास्ते से गुजरने से इंसान को चोट लग सकती है. इसे अशुभ संकेत माना जाता है. इसलिए, इस मार्ग से नहीं जाना चाहिए.
6.,स्नान का गिरा हुआ जल
शकुन शास्त्र में बताया जाता है कि स्नान के दौरान शरीर से अशुद्धियां निकलती हैं. ऐसे में यदि किसी के स्नान का जल रास्ते पर हैं तो उस मार्ग से गुजरना नहीं चाहिए. या फिर उस पानी को लांघने से बचना चाहिए. इस पानी को लांघने से दरिद्रता और कष्ट जीवन में भर जाता है.
7.गंदगी
शास्त्रों में बताया जाता है कि मल, मूत्र और थूक आदि को बिल्कुल नहीं लांघना नहीं चाहिए. ये सिर्फ अस्वच्छता नहीं बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक माना जाता है. इन्हें लांघने से शारीरिक परेशानियां भी हो सकती हैं. ये चीजें भी नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती है.
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