बच्चों पर 'परफेक्ट बनने' का दबाव बेहद खतरनाक, 'पुशी पेरेंटिंग' मेंटल हेल्थ करता है खराब
नई दिल्ली, 29 जून (आईएएनएस)। आज के समय में हर माता-पिता अपने बच्चे को सबसे बेहतर देखना चाहते हैं, लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब माता-पिता अपनी इन उम्मीदों को बच्चों पर थोपने लगते हैं और उन्हें 'परफेक्ट' बनने के लिए मजबूर करते हैं। इसे साइकोलॉजिकल भाषा में 'पुशी पेरेंटिंग' कहा जाता है। यह देखने में बाहर से भले ही अनुशासन और सफलता जैसी दिखे, लेकिन अंदर ही अंदर यह बच्चे के मानसिक विकास के लिए खतरनाक है।
91 साल की उम्र में भी झप्सी महतो का लिवर हेल्दी, जानें क्या खाते हैं ये
Liver Health : आज के प्रदूषण और खराब लाइफस्टाइल के कारण 50 साल की उम्र तक आते-आते लोगों के लिवर, गुर्दे खराब होने लगते हैं लेकिन झप्सी महतो इसका अपवाद हैं. पूर्वी चंपारण के नया गांव के रहने वाले 91 वर्षीय झप्सी महतो इसका मिसाल बनकर उभरे हैं. इतनी अधिक उम्र होने के बाद भी उनका लिवर पूरी तरह स्वस्थ है और वे एक जवान व्यक्ति की तरह भोजन पचा लेते हैं. झप्सी महतो की इस लंबी और स्वस्थ उम्र का राज उनका शाकाहारी भोजन और अनुशासन है. जवानी में अपेंडिक्स के ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों की सलाह पर उन्होंने मांस-मछली और तेल-मसाले वाली चीजों को हमेशा के लिए छोड़ दिया. तब से वे शुद्ध शाकाहारी हैं. उनकी दिनचर्या बहुत सरल है. वे सुबह भरपेट दाल-चावल-सब्जी, दोपहर में सत्तू या भुजा और रात में सादा भोजन, रोटी-सब्जी लेते हैं. दही-चूड़ा उनका पसंदीदा आहार है और वे एक बार में आसानी से एक किलो दही खा लेते हैं, जिससे उन्हें कोई पाचन समस्या नहीं होती. वे अपने क्षेत्र के सबसे बुजुर्ग व्यक्ति हैं और लोगों के लिए एक प्रेरणा स्रोत हैं. झप्सी महतो का मानना है कि लंबी और निरोगी काया के लिए शाकाहार अपनाना और खान-पान में संयम रखना ही सबसे बड़ा मंत्र है. उनका जीवन हमें सिखाता है कि सादा जीवन और सही खान-पान से उम्र के नौवें दशक में भी स्वस्थ रहा जा सकता है.



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