3 दिन में चंपत राय छोड़ देंगे अयोध्या? बार एसोसिएशन ने जारी किया चौंकाने वाला फरमान
Ram Mandir Donation Controversy: अयोध्या में राम मंदिर चंदा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। चंदा गबन के आरोप के बीच ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके बाद भी उनकी मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। सोमवार को पहले पुलिस ने चंपत राय के बयान दर्ज किया। दोपहर बार अयोध्या बार एसोसिएशन ने चंपत राय को अयोध्या छोड़ने का अल्टीमेटम दे दिया।
दरअसल, सोमवार को राम मंदिर चंदे में कथित हेराफेरी के मामले पर फैजाबाद एडवोकेट्स एसोसिएशन (अयोध्या बार एसोसिएशन) की बैठक हुई। इस दौरान बार के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्रा समेत सभी पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक में चंदा चोरी विवाद पर वकीलों का कड़ा रुख देखने को मिला। बार एसोसिएशन ने ट्रस्ट के पूर्व पदाधिकारी चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राय को 3 दिनों के भीतर अयोध्या छोड़ने को कहा है। बार ने कहा कि अगर 3 दिनों के भीतर ये लोग अयोध्या नहीं छोड़ते हैं, तो पूरी अयोध्या को जाम कर दिया जाएगा, किसी को अयोध्या मे आने नहीं दिया जाएगा।
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#WATCH | Ayodhya, Uttar Pradesh | alleged Ram Mandir donation embezzlement case | Kalika Prasad Mishra, President, Ayodhya Bar Association says, "It has been decided that lawyers will not represent the accused. A committee comprising various office-bearers has been formed to… pic.twitter.com/e5McbIoSnJ
— ANI (@ANI) June 29, 2026
अभियोजन पक्ष के लिए बनेगी कमेटी
एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्रा ने कहा कि यह तय किया गया है कि वकील आरोपियों का पक्ष नहीं रखेंगे। अभियोजन पक्ष का मामला देखने के लिए अलग-अलग पदाधिकारियों की एक कमेटी बनाई गई है। इस कमेटी में लगभग 15 से 20 सदस्य हैं, जो सभी क्रिमिनल लॉ (आपराधिक कानून) के जानकार और जाने-माने वकील हैं; उन्हें अभियोजन पक्ष का प्रतिनिधित्व करने के लिए अधिकृत किया गया है। इस बारे में जल्द ही एक औपचारिक पत्र जारी किया जाएगा।
CBI जांच की हुई मांग
बैठक में एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा कि CBI जांच की मांग की जा रही है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि भगवान को चढ़ावा चढ़ाने का क्या मतलब है, जब पांच लोगों का एक समूह उसे हड़प सकता है। उनका तर्क है कि हालांकि अभी जेल में बंद आरोपियों पर औपचारिक रूप से आरोप तय किए गए हैं, लेकिन कुछ अन्य लोग भी हैं जो इसमें शामिल हैं और कहीं ज्यादा दोषी हैं। इतनी बड़ी घटना इन दूसरे लोगों की जानकारी के बिना नहीं हो सकती थी, जैसे चंपत राय, गोपाल राव और अनिल मिश्रा।
आरोपी के वकील पर 5 लाख जुर्माना
अयोझ्या के वकीलों ने चंदा गबन में आरोपी का केस लड़ने से इनकार कर दिया है। वकीलों का साफ कहना है कि अयोध्या बार एसोसिएशन का कोई वकील आरोपी का केस नहीं लड़ेगा। कहा कि इस मामले में कोई भी वकील आरोपी का पक्ष नहीं रखेगा और अगर कोई ऐसा करता है, तो उस पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
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ग्राम सभाओं की सहभागिता को मजबूत करने को लेकर नीति आयोग जारी करने जा रहा अहम रिपोर्ट
नई दिल्ली, 29 जून (आईएएनएस)। एक आधिकारिक बयान में सोमवार को कहा गया कि देश भर में ग्राम सभाओं में लोगों की भागीदारी का अध्ययन करने वाली एक राष्ट्रीय रिपोर्ट में पाया गया है कि ग्राम सभाओं में नागरिकों की उपस्थिति अभी भी कम है। साथ ही इसमें उन प्रमुख कारणों की पहचान की गई है, जिनकी वजह से लोगों की भागीदारी प्रभावित होती है। बयान के अनुसार, यह रिपोर्ट 30 जून को जारी की जाएगी।
पंचायती राज मंत्रालय ने बयान में कहा है कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ग्राम सभाओं में कम भागीदारी विषय पर तैयार राष्ट्रीय अध्ययन रिपोर्ट को नीति आयोग के सदस्य डॉ. आर. बालासुब्रमण्यम द्वारा राष्ट्रीय राजधानी में जारी किया जाएगा।
यह रिपोर्ट राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान (एनआईआरडीपीआर) ने पंचायती राज मंत्रालय के लिए तैयार की है। इसके लिए 26 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की करीब 400 ग्राम पंचायतों में व्यापक सर्वेक्षण किया गया। अध्ययन के दौरान करीब 7,790 लोगों से बातचीत की गई, जिनमें पेसा (पीईएसए) क्षेत्रों और महिला नेतृत्व वाली ग्राम पंचायतों को भी शामिल किया गया।
रिपोर्ट में यह समझने की कोशिश की गई है कि ग्राम सभाओं में लोगों की भागीदारी किन-किन पहलुओं से प्रभावित होती है। इसमें लोगों की जागरूकता, सूचना पहुंचाने की व्यवस्था, सभी वर्गों की भागीदारी, संस्थागत जवाबदेही, प्रशासनिक कार्यप्रणाली, उपलब्ध बुनियादी सुविधाएं और नागरिकों की सोच जैसे कई पहलुओं का विस्तृत अध्ययन किया गया है। इसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर लोकतांत्रिक भागीदारी को मजबूत करने के लिए व्यावहारिक उपाय सुझाना है।
रिपोर्ट में ऐसे सुझाव भी दिए गए हैं, जो नीति निर्माण, संस्थागत सुधार और ग्राम सभाओं में नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने में उपयोगी साबित हो सकते हैं।
बयान के अनुसार, संविधान के अनुच्छेद 243ए के तहत ग्राम सभा को स्थानीय स्तर पर सहभागी लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण इकाई माना गया है।
यह राष्ट्रीय अध्ययन रिपोर्ट उन कारणों की पहचान करने का प्रयास करती है, जिनकी वजह से लोग ग्राम सभाओं में कम शामिल होते हैं। साथ ही इसमें ऐसे उपाय सुझाए गए हैं, जिनसे ग्राम सभाओं को अधिक सक्रिय, समावेशी और जवाबदेह बनाया जा सके तथा देश भर में पंचायती राज संस्थाओं को और मजबूत किया जा सके।
भारत की ग्राम पंचायतों ने अब तक ई-ग्रामस्वराज प्लेटफॉर्म के माध्यम से 3 लाख करोड़ रुपए से अधिक के भुगतान किए हैं। वहीं, एआई-संचालित सभासार मीटिंग टूल अब 23 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है।
ई-ग्रामस्वराज के माध्यम से भुगतान सीधे विक्रेताओं और सेवा प्रदाताओं के खातों में रियल टाइम में किए जाते हैं, जिससे प्रत्येक ट्रांजैक्शन का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है।
इसके अलावा, यह प्लेटफॉर्म पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (पीएफएमएस) से भी जुड़ा हुआ है, जिससे ग्राम पंचायतों में योजना निर्माण, लेखांकन और खर्च की प्रक्रिया अधिक सरल और पारदर्शी हो गई है।
इस डिजिटल व्यवस्था ने नकद और कागजी प्रक्रिया की जगह तेज, जवाबदेह और धोखाधड़ी की संभावना को कम करने वाली प्रणाली विकसित की है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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