इवेको के अधिग्रहण से टाटा मोटर्स सीवी बनेगी दुनिया की चौथी सबसे बड़ी कमर्शियल व्हीकल मैन्युफैक्चरर : एन चंद्रशेखरन
नई दिल्ली, 29 जून (आईएएनएस)। टाटा मोटर्स कमर्शियल व्हीकल (सीवी) के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने सोमवार को कहा कि इवेको के अधिग्रहण से कंपनी की वार्षिक बिक्री शुरुआत में करीब 6 लाख यूनिट्स तक पहुंच जाएगी। यह आंकड़ा कंपनी को दुनिया की चौथी सबसे बड़ी कमर्शियल व्हीकल मैन्युफैक्चरर बनाएगा।
चंद्रशेखरन ने कंपनी की दूसरी एनुअल जनरल मीटिंग में शेयरधारकों को संबोधित करते हुए कहा कि टाटा मोटर्स सीवी का लक्ष्य आने वाले वर्षों में इस आंकड़े को 10 लाख यूनिट्स तक ले जाना है।
चंद्रशेखरन ने यह बयान ऐसे समय पर दिया है, जब टाटा मोटर्स सीवी इवेको के कारोबार को अपने कारोबार में एकीकृत करने पर काम कर रही है।
चंद्रशेखरन ने आगे कहा कि प्रस्तावित इवेको अधिग्रहण से टाटा मोटर्स के ग्लोबल लक्ष्यों को तेजी मिलेगी। इस अधिग्रहण के लिए रेगुलेटरी मंजूरी का इंतजार है और उम्मीद है कि यह इस वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही तक पूरा हो जाएगा।
इस डील से टाटा मोटर्स को एडवांस्ड पावरट्रेन और अगली पीढ़ी की टेक्नोलॉजी मिलेंगी, साथ ही इससे कंपनी की ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग और प्रोडक्ट पोर्टफोलियो मजबूत होगा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी मौजूदगी काफी बढ़ेगी।
इसके अतिरिक्त, टाटा मोटर्स कमर्शियल व्हीकल ने हाल ही में अपने कमर्शियल वाहनों की कीमतों में 2.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी का ऐलान किया है और नई कीमतें 1 जुलाई से लागू होंगी।
एक्सचेंज फाइलिंग में कंपनी ने कहा कि इस बढ़ोतरी की वजह कमोडिटी की कीमतों में बढ़ोतरी होना और लागत का बढ़ना है। यह बढ़ोतरी अलग-अलग मॉडल पर विभिन्न होगी और 2.5 प्रतिशत तक सीमित होगी।
इस बढ़ोतरी से टाटा मोटर्स कमर्शियल व्हीकल्स भी उन कंपनियों में शामिल हो गई है, जिन्होंने मध्य पूर्व संकट के चलते कच्चे माल और लागत में बढ़ोतरी के कारण कीमतों में इजाफा किया है।
इससे पहले, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल (टीएमपीवी) ने 12 जून को अपनी ईंधन (पेट्रोल, डीजल और सीएनजी) और इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमतों में 1.5 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी करने का ऐलान किया। नई कीमतें एक जुलाई से लागू होंगी।
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डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
इंग्लैंड: टीबी से मौत को लेकर स्टडी में नया खुलासा, समय पर पहचान न होने से हर सप्ताह जा रही एक शख्स की जान
लंदन, 29 (आईएएनएस)। इंग्लैंड में टीबी से मौत को लेकर एक नया खुलासा किया गया है। एक नए अध्ययन में सामने आया है कि इंग्लैंड में हर सप्ताह एक व्यक्ति की तपेदिक (टीबी) का समय पर पता न चल पाने के कारण मौत हो जाती है। ऐसे मामलों में बीमारी का पता केवल मृत्यु के बाद (पोस्टमार्टम के दौरान) चलता है, जिससे मरीज को इलाज का अवसर ही नहीं मिल पाता।
यह शोध जर्नल थोरेक्स में प्रकाशित किया गया है। शोधकर्ताओं के अनुसार, ब्रिटेन में जन्मे और अधिक उम्र के पुरुषों में मृत्यु के बाद टीबी की पहचान हो पाई। इससे संकेत मिलता है कि स्वास्थ्यकर्मी इन मरीजों में टीबी की आशंका को लेकर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रहे हैं।
विशेषज्ञों ने कहा कि मृत्यु के बाद टीबी का पता चलना एक नेवर इवेंट माना जाना चाहिए, यानी ऐसी घटना जो किसी भी हालत में नहीं होनी चाहिए और जिसकी तत्काल जांच होनी चाहिए। उन्होंने इसे निदान में सबसे बड़ी देरी बताया।
इंग्लैंड में टीबी के मामलों की दर पिछले 10 वर्षों में सबसे अधिक हो गई है। वर्ष 2024 में प्रति एक लाख आबादी पर 9.4 मामले दर्ज किए गए, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के निर्धारित कम संक्रमण वाले देश की सीमा के बेहद करीब है।
मीडिया आउटलेट द गार्डियन के मुताबिक, आमतौर पर इंग्लैंड में टीबी के अधिकांश मरीज विदेश में जन्मे होते हैं और उनकी औसत आयु 36 वर्ष होती है। लेकिन थोरेक्स जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में पाया गया कि मृत्यु के बाद जिन लोगों में टीबी की पहचान हुई, वे ज्यादातर ब्रिटेन में जन्मे और अधिक उम्र के थे।
अध्ययन की सह-लेखिका और लिवरपूल यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल्स एनएचएस फाउंडेशन ट्रस्ट की रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. एलेनोर मॉर्गन के अनुसार, जब टीबी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, तब हमें हर मरीज के बारे में यह सवाल पूछते रहना चाहिए क्या यह टीबी हो सकती है? भले ही वह सामान्य जोखिम वाले समूह में न आता हो।
अध्ययन में पाया गया कि मृत्यु के बाद टीबी की पहचान उन लोगों में अधिक हुई जो लंदन के बाहर रहते थे और जिनका शराब या नशीले पदार्थों के सेवन का इतिहास था।
इसके अलावा, चार वर्ष से कम उम्र के बच्चों में भी जोखिम अधिक पाया गया। शोधकर्ताओं के अनुसार, इसका कारण उनका अपरिपक्व प्रतिरक्षा तंत्र, सामान्य जैसे दिखने वाले लक्षण और छोटे बच्चों से जांच के लिए नमूने लेना कठिन होना हो सकता है।
टीबी आज भी दुनिया की सबसे घातक संक्रामक बीमारी बनी हुई है। वर्ष 2024 में लगभग 12.3 लाख लोगों की मौत टीबी से हुई, जबकि 1.07 करोड़ लोग इस बीमारी से संक्रमित हुए।
हालांकि, टीबी रोकथाम योग्य और पूरी तरह इलाज योग्य बीमारी है। विशेष एंटीबायोटिक दवाओं से इसका उपचार संभव है, और हाल के वर्षों में नई दवाओं की मदद से, यहां तक कि दवा-प्रतिरोधी टीबी के इलाज की अवधि भी काफी कम हुई है।
अध्ययन के वरिष्ठ लेखक और लिवरपूल स्कूल ऑफ ट्रॉपिकल मेडिसिन के डॉ. टॉम विंगफील्ड ने अपने शोध पत्र में कहा कि जिस तरह एमआरएसए या क्लॉस्ट्रिडियोइड्स डिफिसाइल जैसे सुपरबग से होने वाली मौतों की एनएचएस में नियमित जांच होती है, उसी तरह टीबी से जुड़ी हर मौत की भी गहन जांच होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी मौतों को रोका जा सके।
उन्होंने कहा कि इंग्लैंड में टीबी के बढ़ते मामले चिंता का विषय हैं क्योंकि बीमारी का देर से पता चलने पर मरीज की स्वास्थ्य, सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ता है और संक्रमण दूसरों तक फैलने की संभावना भी बढ़ जाती है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि यह घबराने की बात नहीं है, क्योंकि टीबी का सफल इलाज संभव है।
--आईएएनएस
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