एक बार फिर से अमेरिका और ईरान ने युद्ध विराम तोड़ते हुए एक दूसरे पर ताबड़तोड़ हमले शुरू कर दिए हैं। इसकी शुरुआत कार्गो विमान पर हमले के बाद हुई जिसके बाद अमेरिका भड़क उठा। ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए उन पर ड्रोन और मिसाइलों से हमला कर दिया। तो ईरान ने भी अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाया है। कुछ दिन पहले ही दोनों देशों के बीच शांति समझौता हुआ था। लेकिन होर्मुज पर नियंत्रण को लेकर बात बिगड़ गई और अब एक दूसरे को दबाने के लिए हमले शुरू हो गए। मगर इन हमलों के बीच भारत के जहाज ने कुछ ऐसा किया कि सब देखते रह गए। दरअसल जिस वक्त ईरान और अमेरिका की ओर से बमों की बारिश हो रही थी उसी दौरान भारतीय झंडे वाला मालवाहक जहाज एपीजे प्रीति टू होर्मुज को पार कर गया।
हॉर्मूज से सुरक्षित निकलने वाला ये जहाज भारत के किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी लेकर आया है। इस जहाज में करीब 65,000 मीट्रिक टन उर्वरक लदा है। यह जहाज उन जहाजों की प्राथमिक लिस्ट में शामिल था जिन्हें सबसे पहले सुरक्षित बाहर निकालने की योजना बनाई गई थी। जहाज ने ईरान की ओर से तय किए गए रास्तों का इस्तेमाल करते हुए होमज को पार किया। इस जहाज का आना भारत के किसानों के लिए राहत की खबर इसलिए है क्योंकि खरीफ की फसलों की बुवाई शुरू हो गई है। जिस जोखिम भरी जगह को हमारा जहाज पार करके निकला है। यह वही इलाका है जहां कुछ घंटे पहले एक तेल टैंकर पर हमला हुआ था। जिसके बाद समुद्री सुरक्षा एजेंसियों ने खतरे का स्तर बढ़ा दिया।
एक रिपोर्ट के मुताबिक फारस की खाड़ी में होर्मुज के पश्चिम में 15 भारतीयों वाले जहाज अब भी फंसे हुए हैं। इनमें एक ऊर्जा कारगो जहाज, चार उर्वक ले जाने वाले जहाज और 10 अन्य जहाज शामिल हैं। सरकार इन सभी जहाजों को जरूरत पड़ने पर सुरक्षित निकालने की तैयारी में है। अब तक भारत आने वाले 44 जहाज और मुझ पार कर चुके हैं। जिसमें 17 भारतीय झंडे वाले और 27 विदेशी झंडे वाले जहाज शामिल हैं। इनमें कच्चे तेल के टैंकर, एलपीजी और एलएनजी कैरियर, बल कैरियर, कंटेनर जहाज और अन्य मालवाहक पोत भी शामिल है। दरअसल ईरान ने स्टेट ऑफ फार्मच को बहुत जल्द दोबारा खोले जाने का दावा किया है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अगारची ने इसे ईरान और अमेरिका के बीच साइन हुए समझौते का हिस्सा बताया। इसके तहत औरच अगले 30 दिनों में ठीक उसी तरह खुल जाएगा जैसे वह जंग से पहले था। हालांकि ईरानी मंत्री ने कहा किच का प्रबंधन पूरी तरह से ईरान के तय की गई व्यवस्था के तहत होगा। ईरान ने यह भी साफ किया है कि अगर होमज में किसी भी तरह की दखलअंदाजी की गई तो इसे फिर से खोलने में देरी होगी और क्षेत्र में तनाव का स्तर और बढ़ जाएगा।
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मध्य पूर्व एक बार फिर बड़े युद्ध के मुहाने पर खड़ा हो गया है। होर्मुज जलडम मध्य में पनामा के झंडे वाले तेल टैंकर एमटी कीकू और सिंगापुर में एक मालवाहक जहाज पर हुए संदिग्ध ड्रोन हमलों के बाद अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। महज कुछ दिन पहले 18 जून को दोनों देशों के बीच हुआ संघर्ष विराम अब पूरी तरह टूट चुका है। दोनों महाशक्तियां आमने-सामने हैं और एक दूसरे के खिलाफ विनाशकारी सैन्य कार्यवाही को अंजाम दे रही हैं। इस घटनाक्रम ने न केवल खाड़ी देशों में दहशत फैला दी है बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और कच्चे तेल की आपूर्ति प्रणाली को भी हिला कर रख दिया है। तनाव की ताजा कड़ी तब शुरू हुई जब हुर्मूडम मध्य से गुजर रहे अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार ईरान समर्थित ताकतों ने पनामा के तेल टैंकर पर ड्रोन हमला किया। अमेरिका ने इस हरकत को अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों और हाल ही में हुए सीज फायर समझौते का खुला उल्लंघन करार दिया।
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने तुरंत एक्शन मोड़ में आते हुए नौसेना और वायुसेना को जवाबी हमले के निर्देश जारी कर दिए। जहाजों पर हुए हमले के जवाब में अमेरिकी लड़ाकू विमानों और मिसाइलों ने हुरूम जलडम मध्य के रणनीतिक रूप से संवेदनशील इलाकों में भारी बमबारी की। अमेरिकी सेना ने ईरान के सिरीक, बंदर लेंगे और केशम द्वीप पर स्थित कम से कम 10 प्रमुख ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इन हमलों में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर के ड्रोन अड्डों, रडार प्रणालियों और मिसाइल डिपो को भारी नुकसान पहुंचने का दावा किया गया।
अमेरिकी सेना का कहना है कि कारवाई अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग को सुरक्षित रखने और ईरान की आक्रामक क्षमताओं को पंगू बनाने के लिए जरूरी था। इस सैनिक कारवाही के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान को अब तक की सबसे भयानक चेतावनी दी है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा कि अगर ईरान ने अपनी हरकतों को तुरंत नहीं रोका तो अमेरिका ऐसी सैन्य कारवाई करेगा जो ईरान के अस्तित्व को ही समाप्त कर देगी। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में ईरान को पूरी तरह तबाह करने और उसे दुनिया के नक्शे से मिटा देने की धमकी दी है। राष्ट्रपति ने साफ किया है कि अमेरिका अपने और अपने सहयोगियों के जहाजों की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। अमेरिकी हमलों और ट्रंप की विनाशकारी धमकी के बाद ईरान ने भी पीछे हटने से साफ इंकार कर दिया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर अमेरिकी हवाई हमलों की निंदा की और इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर का घोर उल्लंघन बताया। ईरान ने पनामा के तीन टैंकर पर की गई कारवाही का बचाव करते हुए दावा किया कि उनका टैंकर बिना अनुमति के अनधिकृत मार्ग से होकर गुजर रहा था और उसने खाड़ी के समुद्री नियमों को तोड़ा था।
ईरान के सर्वोच्च नेता मुस्तफा खामई के सैन्य सलाहकार मोहन रजाई ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि वाशिंगटन ने सीज फायर की शर्तों को तोड़ा है। इसलिए ईरान की तरफ से त्वरित और विनाशकारी जवाब दिया जाएगा। अपनी इसी चेतावनी को सच करते हुए ईरान के Iआरजीसी ने कुवैत और बहरीन में स्थित कम से कम आठ अमेरिकी सैन्य ठिकानों और जहाजों पर ताबड़तोड़ मिसाइलें और आत्मघाती ड्रोन दागे। ईरान ने दावा किया है कि इस जवाबी हमले में अमेरिकी ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास सराची ने दो टूक शब्दों में कहा कि हुरमुस जलडमरू मध्य का पूरा प्रबंधन और सुरक्षा नियंत्रण केवल ईरान के हाथों में रहेगा और किसी भी बाहरी देश की दादागिरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ईरान ने यह भी धमकी दी है कि अगर अमेरिका ने हमले नहीं रोके तो वह भविष्य की सभी शांति वार्ताओं को हमेशा के लिए निलंबित कर देगा। इस भीषण सैन्य टकराव के बाद बहरीन, कुवैत और अन्य खाड़ी देशों में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है।
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