GTRI की सलाह: Red Sea संकट के बीच नौसैनिक सुरक्षा व जल परिवहन मजबूत करे भारत
आर्थिक शोध संस्थान जीटीआरआई ने रविवार को कहा कि समुद्री आवाजाही के संकीर्ण मार्गों में बढ़ते व्यवधानों के बीच भारत को समुद्री असुरक्षा को एक निरंतर व्यापार जोखिम के रूप में देखना चाहिए। शोध संस्थान ने यह भी कहा कि देश को घरेलू जल परिवहन क्षमता, व्यापार वित्तपोषण, नौसैनिक सुरक्षा व वैकल्पिक परिवहन गलियारों को मजबूत करना चाहिए। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने कहा कि लाल सागर संकट के बिना किसी स्थायी समाधान के 1,000 दिन पूरे हो चुके हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सैन्य कार्रवाई मिसाइल को तो रोक सकती है लेकिन व्यावसायिक भरोसे को बहाल नहीं कर सकती।
जीटीआरआई ने कहा कि भारत के लिए इस संकट ने यूरोप, ब्रिटेन, उत्तरी अफ्रीका और अमेरिकी पूर्वी तट के साथ व्यापार को धीमा और महंगा बना दिया है, जिससे उच्च माल ढुलाई, बीमा और कार्यशील पूंजी लागत के जरिये एमएसएमई निर्यातकों को नुकसान पहुंचा है। जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘जैसे-जैसे शिपिंग अवरोध मार्ग बढ़ रहे हैं, भारत को समुद्री असुरक्षा को एक सतत व्यापार जोखिम के रूप में देखना चाहिए और घरेलू जल परिवहन क्षमता, व्यापार वित्त पोषण, नौसैनिक सुरक्षा और वैकल्पिक परिवहन गलियारों को मजबूत करना चाहिए।’’ हिंद महासागर और भूमध्य सागर के बीच एक महत्वपूर्ण समुद्री कड़ी लाल सागर है, जहां एशिया से जहाज अरब सागर, अदन की खाड़ी, लाल सागर और स्वेज नहर से होते हुए भूमध्य सागर में प्रवेश करते हैं। यह मार्ग भारत, पश्चिम एशिया, उत्तरी अफ्रीका और यूरोप सहित प्रमुख व्यापारिक क्षेत्रों को जोड़ता है, और यमन, जिबूती, सऊदी अरब तथा मिस्र जैसे देशों के करीब से गुजरता है।
जीटीआरआई ने कहा कि लाल सागर संकट ने 15 अगस्त को 1,000 दिन पूरे कर लिए। ‘‘जो एक क्षेत्रीय सुरक्षा समस्या के रूप में शुरू हुआ था, वह अब वैश्विक व्यापार के लिए एक दीर्घकालिक व्यवधान बन गया है।’’ श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘माल ढुलाई दरें सामान्य स्तर से लगभग 25-40 प्रतिशत अधिक बनी हुई हैं, जबकि जहाजों को युद्ध-जोखिम बीमा शुल्क का भी सामना करना पड़ रहा है।
PM Narendra Modi के FTA जोर से MSME को वैश्विक बाजार मिलेगा: निर्यातक
निर्यातकों ने कहा है कि सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) से भारत के बढ़ते मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के नेटवर्क का पूरा लाभ उठाने का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आह्वान समयानुकूल है। उनका है कि इन समझौतों से छोटे कारोबारियों को बड़े वैश्विक बाजारों तक पहुंच बनाने, वैश्विक मूल्य श्रृंखला से जुड़ने और अपनी प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ाने का अवसर मिलता है। निर्यातकों ने कहा कि कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में तरजीही बाजार पहुंच उपलब्ध होने के बाद वास्तविक अवसर इन समझौतों को निर्यात ऑर्डर में बदलने में है।
प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को कहा था कि भारत ने 2014 से अब तक करीब 40 देशों के साथ एफटीए को अंतिम रूप दिया है, जो देश के एमएसएमई के लिए बड़ा अवसर है। उन्होंने छोटे उद्यमों से इन अवसरों का लाभ उठाने और इस मौके को हाथ से न जाने देने का आह्वान किया था। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि भारतीय उत्पादों की वैश्विक पहुंच बढ़ाने की जरूरत है और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कपड़ा, मशीनरी तथा दवाओं जैसे उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचें।
चमड़ा निर्यातक परिषद (सीएलई) के पूर्व चेयरमैन अकील पनारूना ने कहा कि प्रगतिशील व्यापार समझौतों और नई संभावनाएं खोलने वाली विदेश व्यापार नीति के साथ भारत निरंतर वृद्धि और समृद्धि के लिए मजबूत स्थिति में है। पनारूना ने कहा, ‘‘हम भारतीय विनिर्माण को मजबूत करने, बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करने और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में सार्थक योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।’’ उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का आत्मनिर्भरता, नवाचार, युवाओं के सशक्तीकरण, रोजगार सृजन और वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर जोर उद्योग के सामूहिक संकल्प को और मजबूत करता है। भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ (फियो) के महानिदेशक अजय सहाय ने भी इसी तरह के विचार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री का एमएसएमई से भारत के बढ़ते एफटीए नेटवर्क का पूरा लाभ उठाने का आह्वान समयानुकूल और महत्वपूर्ण है।
सहाय ने कहा, ‘‘एफटीए केवल शुल्क में रियायत तक सीमित नहीं हैं। वे एमएसएमई को वैश्विक मूल्य श्रृंखला से जुड़ने, बड़े बाजारों तक पहुंच बनाने और अपनी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने का रास्ता देते हैं। कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में तरजीही बाजार पहुंच उपलब्ध होने के साथ वास्तविक अवसर इन समझौतों को निर्यात ऑर्डर में बदलने में है।
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