'दिमागी नक्सली' होने पर गर्व है; प्रधानमंत्री मोदी की टिप्पणी पर कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम का पलटवार
P Chidambaram: कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने पीएम मोदी की दिमागी नक्सली वाली टिप्पणी पर पलटवार किया है। उन्होंने एक पोस्ट में लिखा कि उन्हें दिमागी नक्सली होने पर गर्व है।
ITR Notice: समय पर आईटीआर भरने के बाद भी आ सकता टैक्स नोटिस, ये 3 गलतियां पड़ सकती हैं भारी
31 जुलाई की समयसीमा से पहले इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने के बाद भी टैक्स से जुड़ी परेशानी पूरी तरह खत्म नहीं होती। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट आपके आईटीआर में दी गई जानकारी का मिलान बैंक, नियोक्ता और दूसरे स्रोतों से मिलने वाले डेटा से करता है। अगर दोनों जगह की जानकारी में अंतर मिलता है, तो विभाग आपसे स्पष्टीकरण मांग सकता है। ऐसे में समय पर ITR दाखिल करने के बावजूद टैक्स नोटिस आ सकता है।
ITR में बताई इनकम और विभाग के डेटा में अंतर
टैक्स नोटिस आने की सबसे बड़ी वजह आय से जुड़ी जानकारी में अंतर हो सकता है। उदाहरण के लिए, अगर ITR में बताई गई सैलरी और नियोक्ता के Form 16 में दर्ज रकम अलग है, तो विभाग सवाल पूछ सकता है।
इसी तरह एनुअल इंफॉर्मेशन सिस्टम यानी AIS में दिखाई गई आय और आईटीआर में घोषित आय में अंतर होने पर भी नोटिस आ सकता है। इसलिए ITR भरने से पहले फॉर्म 16, AIS और दूसरे आय संबंधी दस्तावेजों का मिलान करना जरूरी है।
TDS या TCS क्रेडिट में गड़बड़ी
टीडीएस और TCS की जानकारी में अंतर भी टैक्स नोटिस की वजह बन सकता। कई बार नियोक्ता या अन्य डिडक्टर ने TDS रिटर्न दाखिल नहीं किया हो या उसमें सुधार नहीं किया हो। ऐसे में टैक्सपेयर के रिकॉर्ड में सही जानकारी समय पर अपडेट नहीं होती। अगर आईटीआर में दावा किया गया TDS/TCS और फॉर्म 26AS में दिखाई देने वाली रकम अलग है, तो विभाग स्पष्टीकरण मांग सकता है।
गलत आयकर रिटर्न फॉर्म का इस्तेमाल करना, अधूरी जानकारी देना या दोषपूर्ण रिटर्न दाखिल करना भी परेशानी खड़ी कर सकता है। इसके अलावा ऐसी कर कटौती या कर छूट का दावा करना, जिसके समर्थन में जरूरी दस्तावेज नहीं हैं, विभाग की नजर में आ सकता है।
इसलिए धारा 80सी, मकान किराया भत्ता (एचआरए) या अन्य कर छूट का दावा करते समय संबंधित दस्तावेजों को सुरक्षित रखना जरूरी है।
कर नोटिस आए तो क्या करें?
सबसे पहले नोटिस की वास्तविकता आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर जांचें। इसके लिए स्थायी खाता संख्या (पैन) और दस्तावेज पहचान संख्या (डीआईएन) जैसी जानकारी की जरूरत पड़ सकती है। इसके बाद नोटिस को ध्यान से पढ़ें और पता करें कि विभाग ने किस वजह से जवाब मांगा है।
फिर फॉर्म 16, वार्षिक सूचना विवरण (एआईएस), फॉर्म 26एएस और अन्य जरूरी दस्तावेज जुटाकर तय समयसीमा के भीतर जवाब दें। अगर आयकर रिटर्न में कोई गलती या कमी है, तो कुछ मामलों में संशोधित रिटर्न दाखिल करके उसे ठीक करना पड़ सकता है।
(प्रियंका कुमारी)
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