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चिदंबरम बोले, ‘दिमागी नक्सली होने पर गर्व’:मोदी के बयान पर पलटवार, पीएम ने ऐसे लोगों को पहचानकर अलग करने को कहा
नई दिल्ली में 16 अगस्त, रविवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘दिमागी नक्सली’ बयान पर पलटवार किया। उन्होंने कहा, “मुझे दिमागी नक्सली होने पर गर्व है।” चिदंबरम ने यह प्रतिक्रिया मोदी के बयान के एक दिन बाद दी। प्रधानमंत्री ने देश को ऐसे ‘दिमागी नक्सलियों’ से सावधान किया था, जो कथित तौर पर सिस्टम में जमे हुए हैं और नीतियों में बदलाव कर समाज के लिए खतरा बने हुए हैं। मोदी ने नागरिकों से ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें अलग-थलग करने की अपील की थी। मोदी ने लाल किले से नक्सलवाद पर क्या कहा 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा था कि देश जंगलों से हथियारबंद नक्सलवाद हटाने में सफल रहा है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि इसके वैचारिक समर्थक हिंसा और अराजकता फैलाने के मौके तलाश रहे हैं। मोदी ने कहा था, “माओवादी सोच वाले लोगों ने वर्षों तक सत्ता के गलियारों में अपनी जगह बना ली थी। वे सरकारी समितियों में सलाहकार रहे और उन्होंने सरकारी नीतियों को प्रभावित किया।” प्रधानमंत्री ने कहा कि इस चुनौती को कम करके नहीं आंकना चाहिए। इसके लिए देश को और ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि दशकों से चले आ रहे नक्सलवाद और माओवादी हिंसा ने लाखों युवाओं की जिंदगी और उनके सपनों को बर्बाद कर दिया। इस संघर्ष में 3,500 से ज्यादा पुलिसकर्मी और सुरक्षा बलों के जवान मारे गए, जो युद्धों में मारे जाने वाले सैनिकों की संख्या से काफी ज्यादा है। मोदी ने कहा, “नक्सलवाद ने भारत के बहुत बड़े हिस्से और बड़ी आबादी को बंदूक के दम पर अपने कब्जे में रखा था।” 2014 से नक्सलवाद खत्म करना प्राथमिकता प्रधानमंत्री ने कहा था कि 2014 में सत्ता संभालने के बाद उनकी सरकार ने नक्सलवाद खत्म करने को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा, “दशकों पुरानी चुनौतियों को खत्म करना होगा। नक्सलवाद और माओवाद ने लाखों युवाओं का भविष्य बर्बाद कर दिया। उन्होंने अनगिनत माताओं के बेटे छीन लिए, परिवारों को बर्बाद किया और माता-पिता के सपने तोड़ दिए।” मोदी ने कहा था, “आज मुझे खुशी है कि नक्सली और माओवादी हिंसा खत्म हो रही है। जिन इलाकों में कभी नक्सलियों की गोलियां चलती थीं और खून-खराबा आम बात था, वहां अब विकास, भरोसे और प्रयास का तिरंगा लहरा रहा है। ये इलाके नक्सलवाद से मुक्त हो चुके हैं।”
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