Renault SUV: भारत में बनी रेनो डस्टर का एक्सपोर्ट शुरू, पहली खेप साउथ अफ्रीका रवाना
Renault SUV: फ्रांसीसी वाहन निर्माता रेनो ग्रुप की इंडिया यूनिट ने अपनी नई Duster SUV के एक्सपोर्ट प्रोग्राम की औपचारिक शुरुआत कर दी है। कंपनी ने चेन्नई स्थित अपने मैन्युफैक्चरिंग प्लांट से नई डस्टर की पहली खेप दक्षिण अफ्रीका के लिए रवाना की है। इस कदम के साथ रेनो ने भारत को अपने ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट नेटवर्क में और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
दक्षिण अफ्रीका के लिए भेजी गई पहली खेप
Renault India ने नई Duster SUV की 750 यूनिट्स की पहली खेप चेन्नई प्लांट से दक्षिण अफ्रीका भेजी है। कंपनी के अनुसार, यह नई Duster के वैश्विक निर्यात कार्यक्रम की शुरुआत है और आने वाले महीनों में अन्य देशों को भी इस कार्यक्रम में शामिल किया जाएगा।
कंपनी का मानना है कि यह पहल भारत को एक प्रमुख ऑटोमोबाइल एक्सपोर्ट हब के रूप में स्थापित करने में मदद करेगी और वैश्विक बाजारों में Renault की मौजूदगी को और मजबूत बनाएगी।
CEO ने क्या कहा?
Renault Group India के CEO स्टीफन डेब्लेज़ (Stephane Deblaise) ने इस अवसर पर कहा,
"नई Duster के निर्यात की शुरुआत Renault India के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह हमारे चेन्नई स्थित विनिर्माण केंद्र की गुणवत्ता, क्षमता और प्रतिस्पर्धात्मकता का प्रमाण है। साथ ही यह दर्शाता है कि Renault के वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्क में भारत की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है।"
उन्होंने आगे कहा कि भारत में मौजूद विश्वस्तरीय मैन्युफैक्चरिंग और इंजीनियरिंग प्रतिभा कंपनी की सबसे बड़ी ताकत है। Renault की भविष्य की वैश्विक रणनीति में भारत की भूमिका और बढ़ने वाली है तथा कंपनी ने वर्ष 2030 तक भारत से प्रतिवर्ष 2 बिलियन यूरो के निर्यात का लक्ष्य निर्धारित किया है।
आधुनिक प्लेटफॉर्म पर तैयार हुई नई Duster
नई Renault Duster कंपनी की भारत में पहली ऐसी SUV है, जिसे Renault Group Modular Platform (RGMP) पर विकसित किया गया है। यह आधुनिक और लचीला प्लेटफॉर्म विभिन्न प्रकार की पावरट्रेन तकनीकों को सपोर्ट करने में सक्षम है, जिससे वाहन को बेहतर प्रदर्शन, सुरक्षा और भविष्य की तकनीकों के लिए तैयार किया गया है।
सुरक्षा में भी अव्वल
नई Duster सुरक्षा के मामले में भी काफी मजबूत साबित हुई है। SUV को सभी वेरिएंट्स और पावरट्रेन विकल्पों के लिए 5-स्टार NCAP सेफ्टी रेटिंग प्राप्त हुई है। यह उपलब्धि वैश्विक स्तर पर इसकी गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को दर्शाती है।
भारत में Renault की मजबूत मौजूदगी
Renault India का विनिर्माण संयंत्र तमिलनाडु के ओरगडम (चेन्नई) में स्थित है। इस प्लांट की वार्षिक उत्पादन क्षमता लगभग 4.8 लाख वाहनों की है।
इसके अलावा कंपनी का देशभर में 638 से अधिक सेल्स और सर्विस टचपॉइंट्स का नेटवर्क है, जिसमें 200 से ज्यादा 'वर्कशॉप ऑन व्हील्स' सुविधाएं भी शामिल हैं। यह नेटवर्क ग्राहकों को बेहतर बिक्री और सेवा अनुभव प्रदान करने में मदद करता है।
नई Duster SUV का निर्यात शुरू होना केवल Renault India के लिए ही नहीं, बल्कि भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह कदम वैश्विक ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है और देश को एक प्रमुख एक्सपोर्ट हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक और मजबूत पहल माना जा रहा है।
(मंजू कुमारी)
Smart Features: कार में मौजूद अनजान फीचर्स बना सकते हैं ड्राइविंग को ज्यादा सेफ, जानें डिटेल
Smart Features: आजकल आधुनिक कारें सिर्फ इंजन और माइलेज तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनमें कई ऐसे स्मार्ट फीचर्स दिए जाते हैं जो ड्राइविंग को अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बनाते हैं। हालांकि अधिकांश लोग इन फीचर्स का इस्तेमाल तो दूर, इनके बारे में पूरी जानकारी भी नहीं रखते। फ्यूल टैंक लोकेटर, इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल (ESC), रोड कंडीशन अलर्ट और हेड्स-अप डिस्प्ले (HUD) जैसी तकनीकें मुश्किल हालात में ड्राइवर की मदद कर सकती हैं।
फ्यूल टैंक किस तरफ है? डैशबोर्ड देगा जवाब
नई या किसी दूसरी कार को चलाते समय अक्सर पेट्रोल पंप पर यह समझना मुश्किल हो जाता है कि फ्यूल टैंक वाहन के किस तरफ मौजूद है। इसके लिए आपको कार से उतरकर देखने की जरूरत नहीं पड़ती।
कार के इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर में बने फ्यूल गेज के पास पेट्रोल पंप का एक आइकन दिखाई देता है। इस आइकन के साथ एक छोटा तीर बना होता है, जो फ्यूल फिलर कैप की दिशा बताता है। तीर जिस ओर इशारा करता है, उसी तरफ कार का फ्यूल टैंक होता है।
बर्फीली सड़क की चेतावनी पहले ही दे देती है कार
कई आधुनिक कारों में बाहरी तापमान मापने वाला सेंसर दिया जाता है। जब तापमान लगभग 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, तो डैशबोर्ड पर स्नोफ्लेक या बर्फ के टुकड़े जैसा संकेत दिखाई देने लगता है।
कुछ कारें बीप साउंड या स्क्रीन मैसेज के जरिए भी ड्राइवर को सतर्क करती हैं। इसका उद्देश्य यह बताना होता है कि सड़क पर बर्फ जमने या फिसलन होने की संभावना बढ़ गई है। यह फीचर विशेष रूप से पहाड़ी और ठंडे इलाकों में बेहद उपयोगी साबित होता है।
इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल कैसे करता है काम?
बारिश, तेज मोड़ या अचानक ब्रेक लगाने जैसी परिस्थितियों में वाहन का संतुलन बिगड़ सकता है। ऐसे समय में इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल (ESC) सिस्टम ड्राइवर की मदद करता है।
यह तकनीक लगातार सभी पहियों की गति और ग्रिप पर नजर रखती है। यदि किसी कारण वाहन फिसलने लगता है या किसी पहिये की पकड़ कमजोर हो जाती है, तो सिस्टम स्वतः उस पहिये पर ब्रेक लगाकर कार को नियंत्रित करने की कोशिश करता है।
डैशबोर्ड पर फिसलती हुई कार के निशान वाला बटन इसी सिस्टम से जुड़ा होता है। सामान्य परिस्थितियों में इसे बंद नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण फीचर है।
हेड्स-अप डिस्प्ले से सड़क पर बनी रहती है नजर
हेड्स-अप डिस्प्ले (HUD) तकनीक पहले केवल फाइटर जेट्स में इस्तेमाल होती थी, लेकिन अब कई प्रीमियम और मिड-रेंज कारों में भी उपलब्ध है।
इस फीचर की मदद से वाहन की स्पीड, नेविगेशन निर्देश, स्पीड लिमिट और अन्य जरूरी जानकारी सीधे विंडशील्ड पर दिखाई जाती है। इससे ड्राइवर को बार-बार इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर या इंफोटेनमेंट स्क्रीन देखने की जरूरत नहीं पड़ती और उसकी नजर सड़क पर बनी रहती है।
क्यों जरूरी हैं ये स्मार्ट फीचर्स?
कार निर्माता इन तकनीकों को केवल आधुनिकता दिखाने के लिए नहीं जोड़ते, बल्कि इनका मुख्य उद्देश्य ड्राइविंग को सुरक्षित बनाना होता है। यदि ड्राइवर को इन फीचर्स की सही जानकारी हो, तो वे न केवल सफर को आरामदायक बना सकते हैं बल्कि दुर्घटना के जोखिम को भी काफी हद तक कम कर सकते हैं।
(मंजू कुमारी)
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
Haribhoomi



















