DMK के पूर्व मंत्री समेत 10 लोगों पर केस, CM Stalin बोले- यह Political Vendetta है, हम नहीं झुकेंगे
सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (डीवीएसी) ने तमिलनाडु के पूर्व राजमार्ग मंत्री ईवी वेलु, विभाग के नौ अधिकारियों और एक निजी निर्माण कंपनी के खिलाफ करोड़ों रुपये के कथित सड़क निर्माण घोटाले में संलिप्तता के आरोप में मामला दर्ज किया है। डीवीएसी की विशेष जांच शाखा द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी में पूर्व मंत्री वेलु के साथ-साथ राजमार्ग विभाग के कई उच्च पदस्थ अभियंताओं, संभागीय लेखाकारों और करूर स्थित ठेकेदार कंपनी शंकरानंद इंफ्रा को नामजद किया गया है।
प्राथमिकी के मुताबिक, आरोपियों ने मार्च 2022 के दौरान एक आपराधिक साजिश रची थी। आरोप है कि करूर में सड़क के चौड़ीकरण और उसकी गुणवत्ता में सुधार के लिए सात करोड़ रुपये की निविदा जारी की गई थी, जिसमें से 3.23 करोड़ रुपये का भुगतान जमीन पर कोई वास्तविक काम हुए बिना ही सीधे निजी ठेकेदार को कर दिया गया। जांच एजेंसी ने कहा कि इसी तरह इरोड जिले में राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) और ग्रामीण सड़क विभाग के तहत दो सड़कों के लिए लगभग 1.5 करोड़ रुपये का धोखाधड़ी वाला भुगतान किया गया।
यह मामला भ्रष्टाचार विरोधी गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) अरप्पोर इयक्कम के संयोजक जयराम वेंकटेशन द्वारा अप्रैल 2022 में दर्ज कराई गई एक विस्तृत शिकायत पर आधारित है। शिकायतकर्ता ने बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और सरकारी धन के आपराधिक गबन का आरोप लगाया था, जिसके बाद प्रारंभिक जांच शुरू की गई थी। साल 2022 में अनियमितताओं के शुरुआती खुलासे के बाद विभागीय जांच में गड़बड़ी की पुष्टि होने पर करूर और इरोड संभाग के नौ अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया था। इससे पहले दिन में, डीवीएसी ने राज्य में वेलु से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की, जिस पर द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के अध्यक्ष एमके स्टालिन ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। स्टालिन की अगुवाई वाली द्रमुक सरकार में वेलु के पास लोक निर्माण, राजमार्ग और बंदरगाह विभाग था।
स्टालिन ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि वेलु अधिकारियों के साथ पूरी तरह सहयोग कर रहे हैं और अदालत में कानूनी तरीके से अपनी बेगुनाही साबित करेंगे। उन्होंने इसे ‘‘राजनीति से प्रेरित कदम’’ करार दिया। पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया, ‘‘इतिहास गवाह है कि हमारे खिलाफ राजनीतिक प्रतिशोध के तहत दर्ज किया गया भ्रष्टाचार का एक भी मामला कभी साबित नहीं हो सका है।’’ पार्टी की दृढ़ता पर बल देते उन्होंने कहा, ‘‘द्रमुक ऐसा संगठन नहीं है, जो सत्तारूढ़ पार्टी की इस तरह की धमकी के आगे झुक जाएगा। हमने इससे कहीं बड़े दमन का सामना किया है। हम इसका भी सामना करेंगे और जीतकर निकलेंगे।
Ayodhya Ram Mandir चढ़ावा कांड में बड़ा एक्शन, SIT रिपोर्ट के आधार पर सभी 8 आरोपी गिरफ्तार
अयोध्या स्थित राम मंदिर में कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से आठ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने के बाद सभी नामजद आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस सूत्रों ने शुक्रवार को इसकी पुष्टि की। पुलिस सूत्रों ने बताया कि विधिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद सभी आरोपियों की न्यायिक रिमांड लेने के लिए उन्हें फैज़ाबाद के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया जाएगा।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की तहरीर पर श्रीराम जन्मभूमि थाने में बृहस्पतिवार को रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, अनुकल्प मिश्र, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, लवकुश मिश्र, रमाशंकर मिश्र, सुभाष श्रीवास्तव तथा मनीष कुमार यादव नामक व्यक्तियों और कुछ अज्ञात लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गयी है। पुलिस ने बताया कि विशेष जांच दल (एसआईटी) की ओर से 23 जून को सरकार को सौंपी गई प्रारंभिक रिपोर्ट में कठोर कार्रवाई की सिफारिश की गई है, जिसके आधार पर यह कार्रवाई की गई है। सूत्रों के अनुसार चोरी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक षड्यंत्र समेत विभिन्न आरोपों में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
अयोध्या के राम मंदिर में कथित दान और चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद ट्रस्ट ने विशेष जांच का अनुरोध किया था जिसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रकरण की जांच के लिए 13 जून को एसआईटी का गठन किया गया था। एसआईटी में लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि एसआईटी की निष्पक्ष जांच से दूध का दूध और पानी का पानी होकर रहेगा और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मामले को सात जून को एक खबर का हवाला देते हुए उठाया और उन्होंने इसमें न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की थी। बाद में इस मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया।
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