लुधियाना के स्पा सेंटरों में देह व्यापार:मसाज के नाम पर एंट्री, रूम में जाते ही ₹1500 एक्स्ट्रा सर्विस का ऑफर
लुधियाना में स्पा सेंटरों में मसाज की आड़ में देह व्यापार हो रहा है। दुगरी रोड, मॉडल टाउन, घुमार मंडी और JMD मॉल जैसे इलाकों में भास्कर ने 8 स्पा सेंटरों की पड़ताल की तो पता चला कि मसाज के साथ-साथ 'एक्स्ट्रा सर्विस' के नाम पर देह व्यापार हो रहा है। हालांकि इसका पर्दाफाश न हो जाए, इसलिए एंट्री फीस के बगैर रिसेप्शन से आगे नहीं जाने दिया जाता। जो एंट्री फीस भर देता है, उसके मोबाइल समेत सारे गैजेट्स काउंटर पर ही जमा करा लिए जाते हैं। हालांकि काउंटर पर देह व्यापार वाली एक्स्ट्रा सर्विस का जिक्र नहीं किया जाता। जब कस्टमर एंट्री फीस और मसाज चार्जेस देकर अंदर चला जाता है तो लड़की वहां पर इसके बारे में बताती है। जिसके लिए डेढ़ हजार रुपए तक लिए जाते हैं। यह भी सामने आया कि मसाज के नाम पर खुले स्पा सेंटरों के खुलने-बंद होने का कोई टाइम नहीं है। रात एक-एक बजे तक भी ये खुले रहते हैं। इस दौरान एक युवती ऐसी भी मिली, जिसने होटलों में चल रहे सेक्स रैकेट का भी खुलासा कर दिया। स्पा सेंटरों की पड़ताल में क्या निकला?, होटलों में कैसे चल रहा सेक्स रैकेट, जानने के लिए पढ़िए पूरी रिपोर्ट… स्पा सेंटरों में कैसे चलता है जिस्मफरोशी का धंधा, जानिए... 1. दुगरी रोड: बेसमेंट स्पा में ‘आज का ऑफर’ दुगरी रोड पर कार एसेसरीज की दुकानों के पास बेसमेंट में बने स्पा सेंटर में रिसेप्शन पर लगभग 23 वर्षीय युवक मैनेजर के रूप में मिला। रिपोर्टर: मसाज का क्या पैकेज है? मैनेजर: 3 हजार रुपए में 8 मसाज हैं। यह ऑफर सिर्फ आज के लिए है। रिपोर्टर: अगर सिंगल बार मसाज करवानी हो तो क्या पैकेज है? मैनेजर: सिंगल के लिए 1000 रुपए लगेंगे। रिपोर्टर: स्टाफ दिखा सकते हो? मैनेजर: हां। (इसके बाद मैनेजर ने कुछ महिलाओं को दिखाया और बताया कि वे अलग-अलग जगहों से हैं। ) रिपोर्टर: थाई स्टाफ होता है? मैनेजर: एक-दो दिन बाद आना। 1500 रुपए के हिसाब से। (1000 रुपए में मसाज तय होने पर मैनेजर ने मोबाइल बाहर रखवा दिया और एक कमरे में भेजा जहां तीन लड़कियां (नागालैंड, दिल्ली और लोकल) थीं। मैनेजर के कहने पर दिल्ली की लड़की के साथ कमरे में बातचीत हुई) रिपोर्टर: कितनी देर मसाज करोगी? लड़की: 45 मिनट मसाज होगी और 15 मिनट शावर होगा। अगर एक्स्ट्रा सर्विस चाहिए तो बताएं। रिपोर्टर: एक्स्ट्रा सर्विस में क्या होता है? लड़की: आपको खुश कर दूंगी, उसके एक्स्ट्रा चार्ज होंगे। रिपोर्टर: कितने पैसे लगेंगे? लड़की: 1500 रुपए लगेंगे और आपको एक्स्ट्रा टाइम मिल जाएगा। रिपोर्टर: मेरे पास 1500 रुपए नहीं हैं? लड़की: एक हजार रुपए दे दो काम हो जाएगा। (रिपोर्टर पैसे न होने का बहाना बनाकर बाहर आ गए।) 2. एंट्री फीस के नाम पर वसूली और पैकेज का खेल शहर के कई स्पा सेंटरों के बाहर मसाज के पोस्टर लगे थे, लेकिन अंदर नीली रोशनी और सोफे पर बैठी महिलाओं का माहौल था। सामान्य मसाज पूछने पर पहले एंट्री फीस मांगी जाती थी। रिपोर्टर: यहां क्या पैकेज है? मैनेजर: आपको पैकेज लेना है या सिंगल टाइम जाना है। रिपोर्टर: पैकेज कितने का है? मैनेजर: 3 हजार वाला पैकेज है, इसमें 6 मसाज हैं। 5 हजार वाले में 10 मसाज हैं। रिपोर्टर: स्टाफ कैसा है? मैनेजर: सभी इंडियन हैं। कुछ स्पा में थाई स्टाफ भी मिलता है, लेकिन बहुत कम जगह है। रिपोर्टर: स्टाफ दिखा सकते हो? मैनेजर: पहले एंट्री फीस जमा करवानी होगी। (पड़ताल में सामने आया कि 1,000 से 1,500 रुपए तक एंट्री फीस ली जाती है। स्टाफ पसंद न आने पर पैसे वापस नहीं होते, बल्कि अगली विजिट में 'एडजस्ट' करने की बात कही जाती है।) 3. नियम-कानून ताक पर, रात 11:30 बजे भी खुला मिला सेंटर घुमार मंडी नेशनल रोड पर स्थित एक बेसमेंट स्पा में भास्कर टीम रात 11:30 बजे पहुंची। हल्की नीली रोशनी के बीच कुछ ग्राहक सोफे पर बैठे थे। रिपोर्टर: सेंटर कितने बजे तक खुला रहता है? मैनेजर: रात 1 बजे तक। रिपोर्टर: अभी सर्विस मिल जाएगी? मैनेजर: हां, एंट्री करवा लो। रिपोर्टर: एंट्री कितने की है? मैनेजर: 1200 रुपए। होटलों से भी चल रहा जिस्मफरोशी का धंधा स्पा सेंटरों की पड़ताल करते भास्कर रिपोर्टर को पता चला कि बस स्टैंड के आसपास के होटलों में भी जिस्मफरोशी होती है। यहां नाइट स्टे के लिए लड़की की बुकिंग 6 हजार रुपए में की जाती है। दलालों ने होटलों में खुद कमरे ले रखे हैं, जहां नागालैंड, दिल्ली, लुधियाना व अन्य राज्यों से लाई गई युवतियों को रखा जाता है। ग्राहकों को एक-एक करके लड़कियां दिखाई जाती हैं और पसंद आने पर पेमेंट ऑनलाइन या कैश ली जाती है। करीब 1 घंटे में तैयार होकर युवतियां पूरी रात के लिए बाहर गाड़ियों में भी भेजी जाती हैं। युवती ने खोला सेक्स रैकेट और नशे का राज स्टिंग के दौरान एक होटल में रहने वाली युवती ने ऑफ-कैमरा पूरी दास्तान सुनाई कि कैसे दलाल उनका शोषण करते हैं और किस तरह लड़कियां नशे के गर्त में जा रही हैं। रिपोर्टर: होटल में कितनी लड़कियां रखी हुई है। युवती: वैसे तो 7 से 8 लड़कियां होती है लेकिन फिलहाल 2 से 3 अभी रह गई होगी। रिपोर्टर: लड़की को नाइट के कितने रुपए दलाल देते है? युवती: 3 हजार रुपए देते है, मेरे सामने कल किसी से नाइट के 7 हजार रुपए लिए थे। किसी से 6 हजार भी ले लेते है। रिपोर्टर: खाना वगैरह का क्या करते है? युवती: 1 टाइम का खाना देते है। रिपोर्टर: जो बाकी लड़कियां होटलों में है क्या वह नशे करती है? युवती: बहुत नशे करती है, मैं तो सिर्फ ड्रिंक ही लेती हूं। रिपोर्टर: क्या चिट्टे का नशा करने वाली लड़कियां भी होती है? युवती: ज्यादातर वहीं है। होटलों में जाते ही वहीं मिलेंगी। रिपोर्टर: चिट्टे में यदि किसी लड़की को ओवरडोज हो जाए तो कौन जिम्मेवार होगा? युवती: मरेगा तो लड़का ही। (युवती ने बताया कि बॉयफ्रेंड से विवाद और परिजनों से अनबन के बाद वह मजबूरी में छत और एक वक्त के खाने के लिए एक टैक्सी ड्राइवर दोस्त के जरिए यहां पहुंची थी, लेकिन अंदर लड़कियां चिट्टे व गांजे का नशा करती हैं। वह अब जल्द ही इस काले धंधे से बाहर निकलना चाहती है।) ॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰ यह खबर भी पढ़ें… लुधियाना में नाइजीरियन युवतियों का सेक्स रैकेट:फुल नाइट ₹7 हजार, शराब-चिकन हो तो सिर्फ ₹1500, रशियन भी अवेलेबल; अड्डे तक पहुंचा भास्कर पूरी रात साथ रहना है तो एक युवती के 7 हजार रुपए लगेंगे, अनलिमिटेड शॉट, अगर पार्टी का सामान यानी शराब-चिकन ले आते हो तो 1500 रुपए लेंगे, लेकिन सिर्फ एक शॉट ही मिलेगा। पुलिस का कोई डर नहीं, उनसे बचाने की गारंटी हमारी। शारीरिक संबंध बनाने का यह रेट लुधियाना में चल रहे विदेशी युवतियों के सेक्स रैकेट का है। ये युवतियां नाइजीरियन मूल की हैं और यहां पर खुलेआम रैकेट चला रही हैं। पढ़ें पूरी खबर…
पंजाब की महिला का गौरैया से प्यार:टूटे दरवाजे पर घोंसला देखा तो घर में बसा दीं 250 गौरैया; हथेली पर बैठकर खातीं दाना
“ये गौरैया मेरी जान हैं। मेरी कोई बेटी नहीं है, इसलिए मैंने इनको ही अपनी बेटियां बना लिया है। मैं हमेशा इनको बेटी कहकर बुलाती हूं। लाड में मैं इन्हें अपनी राजकुमारियां कहती हूं।” ये कहना है पंजाब के मोगा में निधावाला गांव की रहने वाली हरप्रीत कौर का। हरप्रीत घर और आसपास गौरैयाओं के लिए घोंसले बना रही हैं। उनके घर में इस वक्त कम से कम 175 घोंसले लगे हैं। इनमें करीब 200 से 250 गौरैया रहती हैं। घर और पेड़ों पर बनाए गए ये कृत्रिम घोंसले अब इन गौरैयाओं का आशियाना बन चुके हैं। हरप्रीत का घर हर वक्त गौरैयाओं की चहचहाहट से गूंजता रहता है। वह इनके लिए दाना-पानी का भी इंतजाम करती हैं। उनका कहना है कि ये गौरैया अब उनकी जिंदगी जीने का मकसद बन गई हैं। ऑपरेशन के बाद लेटी थी, टूटे दरवाजे पर दिखा घोंसला हरप्रीत बताती हैं कि साल 2013 में उनका ऑपरेशन हुआ था। वह घर में लेटी रहती थीं। इसी दौरान एक दिन उनकी नजर घर के पुराने टूटे दरवाजे पर गई। वहां गौरैया ने घोंसला बना रखा था। वह घंटों गौरैया को देखती रहती थीं। धीरे-धीरे इन पक्षियों से लगाव हो गया। जब उन्हें पता चला कि कई जगहों पर गौरैया की संख्या घट रही है तो उन्होंने इन्हें बचाने की ठानी। इसके बाद इनके लिए दाना-पानी का इंतजाम करने लगीं। धीरे-धीरे गौरैया उनसे घुल-मिल गईं और पास आने लगीं। पुराना घोंसला टूटा तो गत्ते के डिब्बे को बनाया आशियाना हरप्रीत बताती हैं कि एक बार गौरैया के घोंसले वाला पुराना दरवाजा तोड़कर नया लगाया गया तो उनका घोंसला भी टूट गया। मैंने सोचा कि अब उन्हें दोबारा घोंसला बनाने में कितनी परेशानी होगी। तब मैंने उनके लिए गत्ते का एक डिब्बा रखा। उसमें एक छेद किया और उसे उनके रहने की जगह बना दिया। कुछ ही समय में गौरैयाओं ने उसे अपना घर बना लिया। उन्होंने उसमें अंडे दिए और बाद में वहीं बच्चों का जन्म हुआ। धीरे-धीरे गौरैयाओं ने उस आशियाने का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। इससे उत्साहित होकर मैंने एक-दो और डिब्बे लगा दिए, जहां उन्होंने सुरक्षित तरीके से अपने बच्चों को बड़ा किया। मैंने अपनी जिंदगी गौरैयाओं के लिए समर्पित कर दी है हरप्रीत कहती हैं कि उनके गांव और घर में अब गौरैया रहती हैं और वह उन सभी की देखभाल करती हैं। मैंने अपनी जिंदगी अब इन गौरैयाओं के लिए समर्पित कर दी है। इनको छोड़कर कहीं भी नहीं जाती। जाना भी होता है तो उसी दिन लौट आती हूं। मेरे घर में इस वक्त कम से कम 175 घोंसले लगे हैं। इन घोंसलों में करीब 200 से 250 गौरैया रहती हैं। इसके अलावा गांव भर से कई और पक्षी यहां रोज खेलने और दाना खाने के लिए आते हैं। सुबह उठते ही देखती हूं- पानी ताजा है या नहीं हरप्रीत बताती हैं कि हर सुबह उठने के बाद उनका पहला काम यह देखना होता है कि पक्षियों के लिए ताजा पानी है या नहीं। नहीं हो तो वह ताजा पानी इनके कसोरों में डालती हैं। हर सुबह पहले वह इनके मिट्टी के बर्तनों को साफ करती हैं, ताकि इन्हें हर समय ताजा और साफ पानी मिले। दूसरे पक्षी भी यहीं आकर पानी पीते हैं तो उन्हें सुकून मिलता है। मौसम के हिसाब से देती हैं दाना हरप्रीत कहती हैं कि जब मैंने इनको बेटियां माना है तो देखभाल भी बेटियों की तरह करती हूं। मेरी बेटियां बहुत सेंसेटिव और नाजुक हैं। इनके दाने का ख्याल मौसम के हिसाब से रखती हूं। गर्मियों में मैं उन्हें कंगनी और बासमती चावल खिलाती हूं, जबकि सर्दियों में गेहूं और बाजरा देती हूं। गर्म तासीर होने के चलते गर्मियों में बाजरा नहीं देती। मैं दाना पूरे घर में बिखेरती हूं, ताकि सभी पक्षी बिना लड़ाई-झगड़े के आसानी से भरपेट दाना खा सकें। ये पक्षी अब मेरे साथ इतना घुल-मिल गए हैं कि मेरी हथेली में दाना खाने के लिए बैठ जाते हैं। मेरी जिंदगी को इन गौरैयाओं ने सकारात्मक बना दिया हरप्रीत कहती हैं कि इन पक्षियों को पालने और उनके संपर्क में आकर वह सकारात्मक हो गई हैं। जब वह बीमार रहती थीं तो बहुत सारी निगेटिविटी मन में घर कर गई थी। अब मेरी इन राजकुमारियों ने मेरी जिंदगी बदल दी है। इनसे बातें करते हुए मैं पॉजिटिविटी महसूस करती हूं। इनके साथ दिन कब बीत जाता है, पता ही नहीं चलता। अब तो हाल ये हो गया है कि मेरा मन इनके बिना कहीं लगता ही नहीं है। मेरा परिवार भी मुझे इनकी देखभाल करने में पूरा सहयोग देता है। मेरा एक बेटा और सैकड़ों बेटियां हैं हरप्रीत कहती हैं कि मेरा एक ही बेटा है। लेकिन ये पक्षी मेरी बेटियों की तरह हैं। मेरे जीवन में सैकड़ों बेटियां हैं। मैं ही इनको बेटियां नहीं मानती, मेरी बेटियां भी मुझे मां की तरह प्यार देती हैं। मैं इनको इनकी भाषा में ही बुलाती हूं। मैंने इनकी तरह चहचहाना सीख लिया है। जैसे ही मैं उनको आवाज लगाती हूं तो ये कहीं से भी उड़कर मेरे पास आ जाती हैं। इन्होंने मेरे जीवन में बेटियों की कमी को दूर किया है और मेरी जिंदगी का अहम हिस्सा हैं। मैं इनके साथ हंसकर या रोकर अपनी खुशी और गम साझा करती हूं। कीकर के पेड़ लगाएं लोग, सरकार करे संरक्षण मोगा में निधावाला गांव की रहने वाली हरप्रीत कौर ने बताया कि सरकार ने चाहे उनके काम को कभी नहीं सराहा, लेकिन उनकी सरकार से एक ही अपील है कि गौरेया को बचाने के लिए कीकर के पड़ों को पंजाब में संरक्षण करें। कीकर के पौधे गांव-गांव में लगाए जाएं। ताकि इन चिड़ियों को बसेरा मिल सके। हरप्रीत ने बताया कि कीकर की बात इसलिए क्योंकि ये चिड़िया कांटेदार और झाड़ी वाले पेड़ पर रहना पसंद करती है। इसे घोसला बनाना पसंद नहीं है। ये पत्तों के बीच छिपकर बैठी रहती हैं। गांवों से कीकर के पेड़ खत्म होने के चलते भी गौरेया लुप्त हो रही है क्योंकि इनके पास रहने का ठिकाना ही नहीं बचा है। चिड़ियों को संभालने के लिए बहन की शादी में नहीं गई हरप्रीत कौर कहती हैं कि चिड़ियों से उनको इतना लगाव है कि वह अपनी बहन की शादी में कनाडा नहीं जा पाई। उसका वीजा तक लग गया था लेकिन ऐन मौके पर उसने अपने पति को वहां पर भेज दिया लेकिन खुद चिड़ियों को छोड़कर जाने का मन नहीं माना। हरप्रीत कहती हैं कि फाजिल्का में मायके भी जाना होता है तो वह जल्दी वहां से लौट आती हैं। इन गौरेया के बिना उसका कहीं भी दिल नहीं लगता। शुरू में विरोध हुआ लेकिन अब पूरा गांव साथ दे रहा हरप्रीत ने बताया कि कोई भी काम शुरूआत में आसान नहीं होता। आज उनका नाम हो गया है लेकिन इसके पीछे बहुत संघर्ष रहा है। शुरूआत में जब उसने चिड़ियों को बचाना शुरू किया तो गांव के ही कई लोग कह देते थे कि तुम किस काम में पड़ गई हो। लेकिन आज सबको समझ आ गया है। अब सब लोग मेरे साथ गौरेया को बचाने के काम में लगे हैं। फसलों में पेस्टिसाइड, छत वाले पंखे पहुंचा रहे नुकसान हरप्रीत कौर ने बताया कि ये आम बात लोग कह देते हैं कि मोबाइल टावरों के चलते चिड़िया गायब हो रही हैं। लेकिन ऐसे कुछ भी नहीं है। सबसे बड़ा कारण फसलों पर कीटनाशन की स्प्रे और छतों वाले पंखे हैं। उन्होंने बताया कि ये चिड़िया घरों में रहना पसंद करती है। छतों वाले पंखे से टकराने के चलते इनको नुकसान पहुंचता है। इसके साथ ही ये चिड़िया अपने बच्चे को पहले एक हफ्ते तक कीड़े खिलाती है। फसलों से लाए गए इन कीड़ों पर कीटनाशकों का असर रहता है जिससे बच्चे मर जाते हैं। पक्षी प्रेमी संदीप सिंह धौला के घोसले बने रैन बसेरा हरप्रीत कौर बताती हैं कि गौरेया को बचाने में पक्षी प्रेमी संदीप धौला का भी बड़ा योगदान है। इनके डिजाइन किए घोसले भी गौरेया को बचाने में बड़ा योगदान दे रहे हैं। आज वह इनके सैकड़ों घोसलों का यूज कर रही हैं। इसके साथ ये पंजाब में जगह-जगह घोसले लगाते हैं जिससे इस चिड़िया को रहने के लिए घर मिलता है। हमारे घर में दादा-दादी के साथ एक चिड़िया भी रहती थी हरप्रीत ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि कोई वक्त था जब हमारे घर कच्चे होते थे। इन घरों में हमारे दादा-दादी के साथ एक चिड़िया भी रहती थी। नौजवानों को इस चिड़िया को बचाने के लिए आगे आना चाहिए। इनको अपने घरों में पनाह देनी चाहिए ताकि पर्यावरण संरक्षण में योगदान देकर इसे बचाया जा सके।
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