CM योगी ने आठ राज्यों से आए कलाकारों से किया संवाद, सम्मानित कर एकता का दिया संदेश
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर विधानभवन के बाहर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रस्तुति देने वाले यूपी समेत विभिन्न राज्यों के कलाकारों से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को अपने सरकारी आवास पर संवाद किया और उन्हें सम्मानित किया. जम्मू-कश्मीर से लेकर अरुणाचल प्रदेश और गुजरात से लेकर छत्तीसगढ़ तक आठ राज्यों के कलाकारों ने अपनी लोक संस्कृति की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं.
भ्रमण की व्यवस्था करने के निर्देश दिए
सीएम योगी ने इन कलाकारों से उत्तर प्रदेश में उनके अनुभव और यहां घूमने की इच्छा के बारे में जानकारी ली. संवाद के दौरान कई कलाकारों ने अयोध्या और लखनऊ घूमने की इच्छा जताई. मुख्यमंत्री ने तत्काल अधिकारियों को उनके भ्रमण की व्यवस्था करने के निर्देश दिए. कलाकारों से कहा कि जब भी किसी राज्य में जाएं तो एक दिन अतिरिक्त समय निकालकर स्थानीय स्थलों, संस्कृति और खान-पान को जरूर जानें. हर भारतीय का दायित्व है कि वह अपने देश की विशालता और विविधता को देखे. सीएम ने कहा कि कलाकारों के माध्यम से देश के अलग-अलग हिस्सों की संस्कृति एक-दूसरे से जुड़ती है और यही सांस्कृतिक एकता भारत की सबसे बड़ी ताकत है.
नई अयोध्या देखने के लिए उत्सुक
छत्तीसगढ़ के कुलभूषण चंद्राकर ने मुख्यमंत्री को बताया कि करीब 15 वर्ष पहले उन्हें अयोध्या जाने का अवसर मिला था, लेकिन अब वह नई अयोध्या देखने के लिए उत्सुक हैं. सीएम ने कहा कि तब की अयोध्या और आज की अयोध्या में जमीन-आसमान का अंतर है. आज की अयोध्या त्रेता युग का स्मरण कराती है.
भारत श्रेष्ठ भारत का संकल्प साकार होगा
कुलभूषण ने कहा कि पूरे छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री योगी को 'बुलडोजर बाबा' के नाम से जाना जाता है. इस पर मुख्यमंत्री मुस्कुराए और कहा कि बुलडोजर पसंद है ना आपको? आप गा सकते हैं, मैं गा नहीं सकता, लेकिन कम से कम गलत लोगों पर बुलडोजर तो चलवा ही सकता हूं. उन्होंने कहा कि देश के अलग-अलग राज्यों से कलाकारों का एक मंच पर आना ही भारत की विविधता और सांस्कृतिक एकता का परिचायक है. उन्होंने कहा कि यही एक भारत श्रेष्ठ भारत है. बंगाल से महाराष्ट्र और जम्मू-कश्मीर से कन्याकुमारी, अरुणाचल प्रदेश से द्वारिका-पुरी तक जब सभी एक-दूसरे से जुड़ेंगे, तभी एक भारत श्रेष्ठ भारत का संकल्प साकार होगा.
श्रीराम मंदिर के दर्शन की इच्छा जताई
उन्होंने कहा कि श्रेष्ठ भारत के लिए एकता और सुरक्षा दोनों जरूरी हैं. अरुणाचल प्रदेश की नीलम से बातचीत करते हुए सीएम ने लखनऊ के अनुभव पूछे और अयोध्या सहित भगवान बुद्ध से जुड़े उत्तर प्रदेश के स्थलों को देखने की सलाह दी. बिहार के सुबोध से कहा कि आप लोगों को अयोध्या जरूर जाना चाहिए, क्योंकि मां जानकी का संबंध भी उस पावन भूमि से है. मध्य प्रदेश के लेखपाल धुर्वे से बातचीत में कहा कि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश भले ही आपस में जुड़े हुए हैं, लेकिन कलाकारों के आने से मां नर्मदा का संदेश भी यहां पहुंचता है. जम्मू-कश्मीर से पहली बार उत्तर प्रदेश आईं श्रुति ने अयोध्या में श्रीराम मंदिर के दर्शन की इच्छा जताई.
अतिथि का सम्मान करना हमारा दायित्व
मुख्यमंत्री ने उनकी इच्छा पर सहमति जताते हुए अधिकारियों को व्यवस्था करने के निर्देश दिए. वाराणसी की सुनिधि पाठक ने दर्शन की बेहतर व्यवस्था के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया. इस पर सीएम ने कहा कि बाहर से आने वाले श्रद्धालु भारत की परंपरा में अतिथि हैं और अतिथि का सम्मान करना हमारा दायित्व है. गुजरात के पोरबंदर से आए राजू भाई से बातचीत में मुख्यमंत्री ने महात्मा गांधी की जन्मभूमि पोरबंदर और भगवान कृष्ण के सखा सुदामा से जुड़ी मान्यताओं का उल्लेख किया. पोरबंदर से कलाकारों का आना उनके लिए खुशी की बात है. महोबा के जितेंद्र कुमार की आल्हा प्रस्तुति की सराहना करते हुए सीएम ने कहा कि जब वह आल्हा गा रहे थे तो सभापति भी जोश में आ गए थे. उन्होंने कहा कि कलाकार आल्हा की वीर परंपरा को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं.
स्रोत:-आईएएनएस
बिहार में शराबबंदी के बाद भी महिलाओं पर नहीं थम रहे अपराध, नई रिपोर्ट में दावा
Bihar Alcohol Ban 2026: बिहार में वर्ष 2016 में लागू किए गए पूर्ण शराबबंदी कानून को लेकर एक बार फिर बड़ी बहस छिड़ गई है. नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च की एक नई शोध रिपोर्ट में दावा किया गया है कि राज्य में शराब पर रोक लगाए जाने के बाद भी महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में कोई कमी नहीं आई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि अब इतने वर्षों का पर्याप्त डेटा मौजूद है जिससे यह आंका जा सके कि यह कानून असल में कितना प्रभावी रहा. आंकड़ों के मुताबिक 2016 के बाद से राज्य में महिलाओं के खिलाफ दर्ज होने वाले कुल मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है. इस अध्ययन के सामने आते ही शराबबंदी के सामाजिक और आर्थिक प्रभावों को लेकर प्रदेश भर में चर्चाएं तेज हो गई हैं.
राजस्व में भारी बढ़ोतरी और नियंत्रित बिक्री का सुझाव
इस अध्ययन रिपोर्ट में बिहार सरकार को पूर्ण शराबबंदी की नीति खत्म करने और इसके स्थान पर नियंत्रित तरीके से शराब की बिक्री शुरू करने का प्रस्ताव दिया गया है. थिंक टैंक का कहना है कि पुरानी आबकारी व्यवस्था को नए नियमों के साथ बहाल करने से राज्य के अपने राजस्व में लगभग 14 से 15 प्रतिशत तक की बड़ी बढ़ोतरी हो सकती है. रिपोर्ट में इस बात का भी विस्तार से उल्लेख किया गया है कि पूर्ण पाबंदी के बाद राज्य में अवैध शराब बनाने और उसकी तस्करी का एक बड़ा नेटवर्क खड़ा हो गया है. इसके साथ ही युवाओं में अन्य नशीले पदार्थों के इस्तेमाल का चलन बढ़ा है और प्रशासन के लिए इस कानून को जमीन पर लागू करना एक बहुत बड़ी चुनौती साबित हुआ है.
अध्ययन के आधार पर समीक्षा की तैयारी में भाजपा
थिंक टैंक की इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने पूरे मामले पर बेहद सधी हुई प्रतिक्रिया दी है. भाजपा के बिहार प्रवक्ता कुंतल कृष्ण ने कहा कि उनकी पार्टी इस तरह के शोध अध्ययनों और सुझावों की समय-समय पर समीक्षा करती रहती है. उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी इस नई रिपोर्ट के हर पहलू और उसमें दिए गए आंकड़ों की बारीकी से जांच करेगी. जांच के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर तय किया जाएगा कि राज्य और जनता के हित में आगे क्या कदम उठाए जाने चाहिए. भाजपा के इस बयान से यह संकेत मिल रहा है कि शराबबंदी के व्यावहारिक पहलुओं पर पुनर्विचार के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं हैं.
राजद ने उठाए शुरुआती फैसले पर सवाल
दूसरी तरफ राष्ट्रीय जनता दल ने भी इस कानून के मौजूदा स्वरूप को लेकर कड़ा रुख दिखाया है. राजद नेता भाई वीरेंद्र ने कहा कि उनकी पार्टी वर्तमान समय में शराबबंदी के इस रूप का समर्थन नहीं करती है. उन्होंने कहा कि जब नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली महागठबंधन सरकार ने इसे लागू किया था, तब इसे बिना किसी जमीनी सर्वे या ठोस तैयारी के बहुत जल्दबाजी में लागू कर दिया गया था. भाई वीरेंद्र का कहना है कि उस समय उनकी पार्टी भी सरकार का हिस्सा थी, लेकिन योजना को ठीक से तैयार नहीं किया गया था. उनका मानना है कि बिना तैयारी के लिए गए इस फैसले के कारण आज कई तरह की परेशानियां पैदा हो रही हैं.
कानून के भविष्य को लेकर बढ़ती राजनीतिक सुगबुगाहट
बिहार में शराबबंदी एक ऐसा सामूहिक निर्णय था जिसे शुरू में सभी राजनीतिक दलों और मतदाताओं का पूरा समर्थन मिला था. विशेष रूप से महिला मतदाताओं ने इसे सामाजिक सुधार की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम माना था. हालांकि पिछले कुछ वर्षों में अवैध शराब से होने वाली मौतों, पुलिस पर बढ़ते काम के दबाव और पड़ोसी राज्यों से होने वाली तस्करी ने नीति पर सवाल खड़े किए हैं. अब जब एक प्रतिष्ठित थिंक टैंक ने अपराध और राजस्व से जुड़े स्पष्ट आंकड़े पेश कर दिए हैं, तो शराबबंदी कानून के भविष्य को लेकर राजनीतिक गलियारों में नए समीकरण बनने लगे हैं. आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि सरकार इन नए सुझावों पर क्या रुख अपनाती है.
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