UP TET 2026: सिटी इंटिमेशन स्लिप जारी, 30 जून को आएंगे एडमिट कार्ड
UP TET 2026 City Intimation Slip: उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपी टीईटी) 2026 में शामिल होने वाले लाखों उम्मीदवारो के लिए जरूरी सूचना है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने परीक्षा के लिए सिटी इंटिमेशन स्लिप जारी कर दी है। जो उम्मीदवार इस परीक्षा के लिए पंजीकृत हैं, वे अब आधिकारिक वेबसाइट upsssc.gov.in पर जाकर अपने परीक्षा शहर की जानकारी देख सकते हैं।
परीक्षा का कार्यक्रम
आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, यूपी टीईटी 2026 का आयोजन 2, 3 और 4 जुलाई 2026 को किया जाएगा। यह परीक्षा ऑफलाइन मोड में आयोजित होगी। फिलहाल जारी की गई स्लिप केवल परीक्षा शहर की जानकारी देने के लिए है, ताकि उम्मीदवार अपनी यात्रा की योजना पहले से बना सकें।
एडमिट कार्ड कब मिलेंगे?
उम्मीदवारो को यह ध्यान रखना चाहिए कि सिटी इंटिमेशन स्लिप और एडमिट कार्ड दो अलग दस्तावेज हैं। सिटी स्लिप में परीक्षा केंद्र का सटीक विवरण या समय नहीं होता है। एडमिट कार्ड 30 जून 2026 को जारी किए जाएंगे। परीक्षा केंद्र का पता, रिपोर्टिंग समय और अन्य जरूरी निर्देश केवल एडमिट कार्ड में ही दर्ज होंगे।
UP TET 2026 City Intimation Slip: कैसे डाउनलोड करें सिटी स्लिप?
उम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप्स का पालन कर अपनी स्लिप प्राप्त कर सकते हैं:
- सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट upsssc.gov.in पर जाएं।
- होम पेज पर टॉप नोटिस सेक्शन में यूपी टीईटी 2026 सिटी इंटिमेशन स्लिप के लिंक पर क्लिक करें।
- अब अपनी लॉगिन जानकारी दर्ज करें और सबमिट बटन दबाएं।
- स्लिप स्क्रीन पर दिखाई देगी, इसे डाउनलोड करके इसका प्रिंट आउट सुरक्षित रख लें।
यूपी टीईटी का महत्व
यूपी टीईटी राज्य के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलो में शिक्षक बनने के लिए एक अनिवार्य पात्रता परीक्षा है। इसमें दो पेपर होते हैं। पेपर 1 उन उम्मीदवारो के लिए है जो कक्षा 1 से 5 तक पढ़ाना चाहते हैं, जबकि पेपर 2 कक्षा 6 से 8 तक के अध्यापन के लिए होता है। सभी नवीनतम अपडेट और एडमिट कार्ड के लिए उम्मीदवारो को समय-समय पर आधिकारिक वेबसाइट चेक करते रहना चाहिए।
Share Market Today: सेंसेक्स 372 अंक ऊपर, निफ्टी 24,120 के पार, एआई शेयरों के दम पर एशियाई बाजार भी चढ़े
मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को वापसी देखने को मिली। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत, विदेशी निवेशकों की खरीदारी और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसे दिग्गज शेयरों में खरीदारी के दम पर सेंसेक्स और निफ्टी दोनों मजबूत बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए। सुबह 11 बजे तक सेंसेक्स 503.45 अंक यानी 0.66 प्रतिशत बढ़कर 77,306.35 अंक पर कारोबार कर रहा था। इसके बाद शुरु हुई प्राफिट बुकिंग की वजह से कुछ गिरावट आई। 12.33 बजे तक सेंसेक्स 372.98 अंक या 0.45% की बढ़त के साथ 77,180.34 पर आ गया। जबकी, एनएसई का निफ्टी 109.35 अंक या 0.46% बढ़त के साथ 24,122.45 पर आ गया है। एफएमसीजी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स को छोड़कर निफ्टी के लगभग सभी प्रमुख सेक्टर हरे निशान में हैं। व्यापक बाजार में भी मजबूती देखने को मिल रही है।
बाजार में तेजी के प्रमुख कारण
निवेशकों का भरोसा उस समय बढ़ा जब अमेरिका और ईरान के बीच हुई वार्ता के पहले दौर में सकारात्मक प्रगति की खबर सामने आई। दोनों पक्षों ने अगले 60 दिनों के भीतर एक अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए रोडमैप तैयार करने की दिशा में प्रगति की है। ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता आगे बढ़ने से बाजार की रिकवरी जारी रहने की संभावना है। फिलहाल सबसे बड़ी चिंता केवल वर्षा की कमी (रेनफॉल डेफिसिट) को लेकर है। वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत 1.5 प्रतिशत गिरकर 79.36 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने भारतीय शेयर बाजार में खरीदारी जारी रखी। उन्होंने 4,859.07 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर खरीदे, जिससे बाजार को अतिरिक्त समर्थन मिला।
एशिया के उभरते बाजारों में देखने को मिली तेजी
उधर, अधिकांश उभरते हुए एशियाई शेयर बाजारों में सोमवार को मजबूती देखने को मिली। इस तेजी का नेतृत्व ताइवान और दक्षिण कोरिया के बाजारों ने किया, जहां कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में जोरदार खरीदारी हुई। हालांकि, दूसरी ओर एशियाई मुद्राओं पर दबाव बना रहा, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता को लेकर अनिश्चितता निवेशकों की चिंता बढ़ा रही है। एमएससीआई इमर्जिंग एशिया इंडेक्स 1.5 प्रतिशत से अधिक बढ़कर रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया। इस बढ़त में ताइवान और दक्षिण कोरिया की एआई तथा सेमीकंडक्टर कंपनियों की अहम भूमिका रही, जिनका इस सूचकांक में लगभग 60 प्रतिशत योगदान है।
ताइवान और द. कोरिया के बाजारों में रिकॉर्ड तेजी
ताइवान का प्रमुख शेयर सूचकांक 3 प्रतिशत से अधिक उछलकर 47,871.190 अंकों के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। यह लगातार छठे कारोबारी सत्र की संभावित बढ़त की ओर बढ़ता दिखाई दिया। वहीं दक्षिण कोरिया का मुख्य कोस्पी सूचकांक 2 प्रतिशत से अधिक चढ़ गया और हाल ही में बने अपने रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गया। ब्रोकरेज फर्म एसीसीएम के रिसर्च डायरेक्टर ग्लेन यिन ने कहा कि सोमवार का कारोबार यह दिखाता है कि एआई सेक्टर अभी भी भू-राजनीतिक तनाव और ऊंची ब्याज दरों जैसी चुनौतियों के मुकाबले निवेशकों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण बना हुआ है।
एआई निवेश का उत्साह भू-राजनीतिक चिंताओं पर भारी
विशेषज्ञों के अनुसार, दक्षिण कोरिया और ताइवान को सेमीकंडक्टर तथा एआई निवेश चक्र का सबसे बड़ा लाभार्थी माना जा रहा है। वहीं जापान को भी बड़ी तकनीकी और एआई आधारित कंपनियों के कारण अतिरिक्त समर्थन मिल रहा है। पिछले कुछ महीनों में वैश्विक शेयर बाजारों में एआई से जुड़ा निवेश तेजी से बढ़ा है। निवेशक मान रहे हैं कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी कंपनियों की भविष्य की कमाई इतनी मजबूत हो सकती है कि वह ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े जोखिमों जैसी चिंताओं को पीछे छोड़ दे।
अमेरिका-ईरान वार्ता और होर्मुज की चिंता
मध्यस्थ देशों द्वारा जारी बयान में कहा गया कि अमेरिका और ईरान ने 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए एक रोडमैप पर सहमति बनाई है। लेकिन इसके साथ ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान ने एक बार फिर होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की बात कही, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमले फिर से शुरू करने की चेतावनी दोहराई। इन विरोधाभासी संकेतों ने निवेशकों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है।
एशियाई मुद्राओं पर बढ़ा दबाव
दूसरी ओर, मजबूत अमेरिकी डॉलर के कारण एशियाई मुद्राएं दबाव में रहीं। एमएससीआई इमर्जिंग मार्केट करेंसी इंडेक्स लगातार तीसरे सत्र में 0.3 प्रतिशत गिर गया। इंडोनेशियाई रुपिया कमजोर होकर 17,818 प्रति डॉलर तक पहुंच गया, जबकि भारतीय रुपया छह दिनों की लगातार बढ़त के बाद फिसलकर 94.405 प्रति डॉलर पर आ गया। इंडोनेशिया में निवेशकों की नजर अब एमएससीआई की उस महत्वपूर्ण रिपोर्ट पर है, जिसमें देश की उभरते बाजार की स्थिति पर फैसला दिया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह रिपोर्ट इंडोनेशियाई बाजार को नई मजबूती दे सकती है या फिर दक्षिण-पूर्व एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए एक और चुनौती साबित हो सकती है।
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