How to use Leftover Chati Patti: चाय की पत्ती फेंकने से पहले जान लें इसके ये कमाल के जुगाड़, घर की सफाई और बागवानी में आएगी काम
How to use Leftover Chati Patti: हमारे देश में चाय पीने के लिए टाइम और मौसम नहीं देखा जाता है. यहां के लोग सुबह की शुरुआत भी एक कप चाय से कर सकते हैं और कुछ लोग तो शायद रात में 1 कप चाय पी सकते हैं. चाय की बात तो हो गई. मगर सवाल यह है कि चाय के बाद बची हुई चायपत्तियों का क्या करते हैं आप? निश्चित ही आप उसे फेंक देते होंगे. अगर आप भी ऐसा करते हैं तो अभी रुक जाइए. बची हुई चायपत्ती कचरा नहीं होती है, जो आप उन्हें डस्टबिन में डालें. बल्कि आप इनका इस्तेमाल क्लीनिंग एजेंट की तरह भी कर सकते हैं. चायपत्ती में मौजूद नैचुरल तत्व घर के जिद्दी दागों से लेकर घर के पौधों में नई जान फूंक सकता है. चलिए जानते हैं चायपत्ती के कुछ आसान यूज करने के हैक्स.
बची हुई चायपत्ती इस्तेमाल करने के हैक्स
बची हुई चाय पत्ती को पहले छलनी में भरकर अच्छे से साफ पानी की मदद से साफ कर लें. दो-तीन बार वॉश करने से उसके अंदर जमा शक्कर निकल जाएगी. दूध के अंश भी खत्म हो जाएंगे. अब आपकी चायपत्ती यूज करने के लिए तैयार है.
1.शीशे और कांच की सफाई
बची हुई चायपत्ती को साफ करने के बाद एक बड़े बर्तन में पानी डालकर उबाल लें. जब ये कड़क हो जाए तो उसे एक स्प्रे बॉटल में भर दें. अब इस लिक्विड से कांच के बर्तनों, खिड़कियों, ड्रेसिंग टेबल्स और शीशों पर स्प्रे करें और फिर सूती कपड़े से उन्हें पोंछ लें. ऐसा करने से ग्लास वाले ऑबजेक्ट्स की सफाई होगी.
2.लकड़ी के फर्नीचर में लाएं न्यू शाइनिंग
चायपत्ती को उबले हुए पानी में डालकर हल्का गुनगुना होने कर लें. अब इस पानी में एक साफ-सुथरा कपड़ा डालकर निचोड़ लें. अब इस कपड़े से लकड़ी के सोफे, टेबल और कैबिनेट की सफाई करें. यह लकड़ी को नैचुरल पॉलिश और चमक देगा.
3.बर्तनों की चिकनाई दूर करें
अगर आपेके बर्तनों पर जिद्दी चिकनाई जमा हो गई है या उनमें से बदबू आ रही है तो बची हुई चायपत्ती को रगड़ कर उसे साफ कर सकते हैं. इसमें मौजूद टैनिन एसिड्स चिकनाई को तुरंत हटाते हैं और दुर्गंध को दूर करते हैं.
4.किचन सिंक और टाइल्स की सफाई करें
किचन की टाइल्स या बाथरूम की टाइल्स में चिपचिपाहट आ गई है तो चायपत्ती और बेकिंग सोडा का एक घोल तैयार करें. इसके बाद इस मिश्रण से टाइल्स को स्क्रब करें. जिद्दी से जिद्दी दाग और चिकनाहट खत्म हो जाएगी.
5.फर्श की बदबू और कीटाणु मिटाएं
घर के किसी कोने में बदबू या पोछे के पानी में महक आ रही है तो आप उसे दूर करने के लिए चाय पत्ती के पानी को पोछे की बाल्टी में मिलाकर पोछा मार सकते हैं. इस पानी से पोछा लगाने से मक्खियां भी नहीं आती है और घर में हल्की महक भी आती है.
6.पौधे में लाएं नई जान
बची हुई चाय पत्ती को आप साफ करने के बाद अपने पौधों में डाल सकते हैं. ये एक नैचुरल खाद की तरह काम करती है, जो पौधे को पोषण दे सकती है. इससे पौधे की ग्रोथ भी होती है.
7.फ्रिज की बदबू दूर करें
अगर फ्रिज खोलते ही अजीब सी बदबू आती है, तो बची हुई चायपत्ती को अच्छी तरह धोकर और सुखाकर एक छोटी कटोरी में भर लें और फ्रिज के किसी कोने में रख दें. चायपत्ती प्राकृतिक रूप से दुर्गंध को सोख लेती है, जिससे फ्रिज में आ रही महक दूर होती है.
8.जूतों की दुर्गंध से पाएं छुटकारा
बरसात या एक ही जूते को बार-बार पहनने के कारण उन जूतों में बदबू आने लगती है. ऐसे में बची हुई चायपत्ती को धोकर सुखा लें और एक कपड़े या पेपर पाउच में भरकर रातभर जूतों के अंदर रख दें. चायपत्ती नमी और दुर्गंध को अवशोषित कर लेती है, जिससे जूते काफी हद तक फ्रेश महसूस होते हैं.
Jharkhand Govt: मुख्यमंत्री सोरेन की अध्यक्षता में जल संसाधन विभाग मीटिंग, विभिन्न योजनाओं की समीक्षा
Jharkhand Govt: झारखंड सरकार राज्य में सिंचाई, पेयजल आपूर्ति और कृषि विकास को मजबूत करने के लिए तेजी से काम कर रही है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में जल संशाधन विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न सिंचाई परियोजनाओं, मेगा लिफ्ट योजनाओं और पाइपलाइन आधारित पेयजल आपूर्ति कार्यों की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई है.
कृषि उत्पादन में वृद्धि सरकार का लक्ष्य
बैठक में मुख्यमंत्रियों ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी सिंचाई और पाइपलाइन परियोजनाओं को तय सीमा के अदर पूरा किया जाए, जिससे किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों को जल्द से जल्द लाभ मिल सके. सरकार का फोकस प्रदेश की नदियों के जल को संरक्षित करके खेतोें तक पहुंचने पर है, जिससे कृषि उत्पादन में वृद्धि हो और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत बने.
मतस्य पालन को बढ़ावा देने पर चर्चा
मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से किसानों की आय बढ़ेगी. रोजगार के स्थानीय अवसर विकसित होंगे. राज्य में पलायन की समस्या को कम करने में मदद मिलेगी. बैठक में पॉली तालाबों के निर्माण और उनके माध्यम से मतस्य पालन को बढ़ावा देने की योजनाओं पर विशेष चर्चा हुई. सरकार का कहना है कि इससे किसानों और ग्रामीण युवाओं के लिए आय के अतिरिक्त स्रोत तैयार होंगे.
समग्र विकास मॉडल पर काम कर रही सरकार
राज्य सरकार जल संरक्षण, आधुनिक सिंचाई व्यवस्था और ग्रामीण विकास को जोड़ते हुए समग्र विकास मॉडल पर काम कर रही है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि परियोजना के वक्त पर पूरा होने से झारखंड में कृषि, मतस्य पालन और पेयजल व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी.

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