Uttarakhand News: धामी सरकार की CM कौशल उन्नयन योजना से युवती को मिली जर्मनी में बड़ी नौकरी
मुख्यमंत्री कौशल उन्नयन एवं वैश्विक रोजगार योजना के तहत प्रशिक्षित सपना राणा का जर्मनी के हैम्बर्ग स्थित अस्पताल में नर्स के रूप में चयन हुआ है।
Monsoon Gardening: बारिश में पौधों की देखभाल हो सकती है मुश्किल? प्लांट केयर के लिए इन बातों का रखें ख्याल
Monsoon Gardening: मानसून का मौसम पौधों के लिए किसी वरदान से कम नहीं माना जाता। बारिश की बूंदें जहां पौधों को प्राकृतिक पानी और ठंडक देती हैं, वहीं यह मौसम उनकी तेजी से ग्रोथ में भी मदद करता है। लेकिन कई बार जरूरत से ज्यादा बारिश और नमी पौधों के लिए फायदे की जगह नुकसान का कारण बन जाती है।
गार्डनिंग के शौकीन लोग अक्सर यह गलती कर बैठते हैं कि बारिश के मौसम में पौधों को पूरी तरह प्रकृति के भरोसे छोड़ देते हैं। नतीजा यह होता है कि पौधों की जड़ें सड़ने लगती हैं, फंगल संक्रमण बढ़ जाता है और पौधे धीरे-धीरे खराब होने लगते हैं।
बारिश में ध्यान रखने वाली बातें
पानी जमा न होने दें
बारिश के मौसम में सबसे बड़ी समस्या गमलों और क्यारियों में पानी भरने की होती है। लगातार पानी जमा रहने से जड़ों तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती और रूट रॉट यानी जड़ सड़ने की समस्या हो सकती है। इसलिए गमलों के ड्रेनेज होल्स को समय-समय पर चेक करते रहें और अतिरिक्त पानी निकालते रहें।
फंगल संक्रमण से बचाएं
अधिक नमी के कारण पौधों में फंगस और कीटों का खतरा बढ़ जाता है। पत्तियों पर सफेद या काले धब्बे दिखाई दें तो तुरंत प्रभावित हिस्से को हटा दें। नीम के तेल का स्प्रे या जैविक फंगीसाइड का उपयोग भी पौधों को सुरक्षित रखने में मदद कर सकता है।
धूप की उपलब्धता सुनिश्चित करें
मानसून में कई दिनों तक धूप नहीं निकलती, जिससे पौधों की ग्रोथ प्रभावित हो सकती है। यदि संभव हो तो गमलों को ऐसी जगह रखें जहां उन्हें कुछ घंटे प्राकृतिक रोशनी मिल सके। इनडोर पौधों को भी समय-समय पर खुले स्थान पर रखना फायदेमंद होता है।
खाद का इस्तेमाल सोच-समझकर करें
बारिश के मौसम में पौधों की पोषण जरूरतें बदल जाती हैं। इस दौरान अधिक मात्रा में खाद डालने से पौधों को नुकसान हो सकता है। हल्की मात्रा में जैविक खाद या वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग करें और मिट्टी की स्थिति को देखते हुए ही पोषण दें।
पौधों की नियमित सफाई करें
बारिश के कारण पत्तियों पर धूल, कीड़े और फंगस जमा हो सकते हैं। सूखी, पीली या संक्रमित पत्तियों को समय पर हटा दें। इससे पौधों की ऊर्जा नई और स्वस्थ पत्तियों के विकास में लगेगी तथा संक्रमण फैलने का खतरा कम होगा।
कीटों पर रखें नजर
मानसून में घोंघे, स्लग, एफिड्स और अन्य कीट तेजी से बढ़ते हैं। ये पौधों की पत्तियों और नई शाखाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं। नियमित निरीक्षण करें और जरूरत पड़ने पर प्राकृतिक कीटनाशकों का इस्तेमाल करें।
नाजुक पौधों को दें अतिरिक्त सुरक्षा
कुछ सजावटी और फूलों वाले पौधे तेज बारिश को सहन नहीं कर पाते। ऐसे पौधों को शेड नेट, पॉलीथीन कवर या किसी सुरक्षित स्थान पर रखकर बचाया जा सकता है। इससे उनकी पत्तियां और फूल खराब होने से बचेंगे।
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लेखक: (कीर्ति)
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