हाईकोर्ट ने SP-SDM कुल्लू की ट्रांसफर के आदेश दिए:जंगलों में रेव पार्टियों पर सख्त; ऑर्गेनाइजरों पर कार्रवाई नहीं होने से नाराज, प्रशासन पर सवाल
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कसोल के जंगलों में होने वाली रेव पार्टियों के मामले में पुलिस अधीक्षक (एसपी) कुल्लू और संबंधित एसडीएम को ट्रांसफर करने के आदेश दिए है। यह आदेश रेव पार्टी के आयोजनकर्ताओं पर कार्रवाई नहीं होने दिए गए है। अब यह मामला 6 अगस्त को दोबारा सुना जाएगा। चीफ जस्टिस गुरमीत सिंह संधावालिया और जस्टिस बीसी नेगी की बैंच ने कहा कि जंगलों में इस तरह की पार्टियों का आयोजन नहीं होना चाहिए। इससे कानून व्यवस्था प्रभावित होती है। पर्यावरण को भी नुकसान पहुंच सकता है। दरअसल, मई महीने में हाईकोर्ट ने इन पार्टियों के आयोजनकर्ताओं पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। आदेशों की अनुपालना नहीं होने पर कोर्ट ने सख्ती दिखाई है। अश्लील डांस पार्टियों का मामला हाईकोर्ट कैसे पहुंचा... एनवायरमेंट प्रोटेक्शन सोसाइटी ने हाईकोर्ट में PIL डाली: हिमाचल एनवायरमेंट प्रोटेक्शन सोसाइटी ने एक साल पहले हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) डालकर इस तरह की पार्टियों के आयोजन और नशे की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता जाहिर की है। याचिका में कहा गया है कि कुल्लू के अलग अलग क्षेत्रों में ऐसी पार्टियों का आयोजन हो रहा है। इन पार्टियों के वीडियो वेबसाइटों पर उपलब्ध है और खुलेआम ड्रग्स की उपलब्धता बताई गई। मीडिया में छपी खबर पर हाईकोर्ट सख्त: सोसाइटी की याचिका एक साल से हाईकोर्ट में विचाराधीन है। सरकार से पहले भी हाईकोर्ट जवाब तलब कर चुका है। इस बीच कुछ दिन पहले मीडिया में छपी खबर कोर्ट के ध्यान में लाई गई। जिसमे रिपोर्ट किया गया कि कसोल में 7 जून से 11 जून 2026 तक होने वाली रेव पार्टी का सोशल मीडिया में बड़े स्तर पर प्रचार किया जा है। इसमें बड़ी संख्या में चंडीगढ़, दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, गोवा और इज़राइल से लोगों के आने के दावे किए जा रहे है। ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को आकर्षित करके पैसे कमाने के लिए तेज़ आवाज़ वाले संगीत के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे थे। 10 से 16 हजार में बिकती है टिकटें: खबरों के अनुसार, रेव पार्टी के लिए टिकट की कीमत 10 हजार से 16 हजार रुपए तक रखी गई थी। इसमें देश के कई राज्यों और विदेशों से लोगों के पहुंचने की बात सामने आई थी। आयोजनकर्ताओं द्वारा इसका जोर-शोर से प्रचार किया जा रहा था। इस पर कोर्ट ने संज्ञान लिया। जंगलों और होटल परिसर में भी होता है आयोजन कसोल के जंगलों और कई बार होटलों के भीतर व होटल परिसर में भी इस तरह की पार्टी का आयोजन होता है। इनमें अश्लील डांस के साथ नशा करते हुए लोग देखे जा सकते हैं। बीते सप्ताह भी एक विदेशी महिला डीजे ऑपरेटर की मौत हो गई थी। तब बताया गया कि महिला की मौत नशे की ओवरडोज से हुई है। हालांकि, पुलिस को अभी पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है। परमिशन लेकर होती है पार्टी इन पार्टियों का आयोजन बाकायदा प्रशासन की परमिशन से होता है। ज्यादातर रेव पार्टियां विदेशी लोग ऑर्गेनाइज करते हैं और परमिशन के लिए लोकल लोगों को आगे किया जाता है। लिहाजा प्रशासन भी लोकल लोगों को कल्चरल पार्टी की परमिशन देता है। मगर वहां कल्चरल पार्टी के बजाय अश्लील डांस और नशा परोसा जाता है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियों में स्मोकिंग अश्लील डांस अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सरेआम स्मोकिंग, अश्लील डांस के वीडियो वायरल हो रहे हैं। इन पर सोशल मीडिया यूजर 'नग्नता, फूहड़ता, ड्रग्स और अश्लीलता परोसने को लेकर सरकार पर ही सवाल खड़े कर रहे हैं। कुल्लू के कसोल, जीभी, कलगा, मणिकरण, मलाणा, आदि क्षेत्रों में ऐसे दृश्य आम हो गए हैं। क्या होती रेव पार्टी? ऐसी पार्टी को कहा जाता है जिसमें आमतौर पर तेज इलेक्ट्रॉनिक म्यूजिक, डीजे, डांस और देर रात तक मनोरंजन होता है। ये पार्टियां अक्सर खुले स्थानों, क्लबों या निजी जगहों पर आयोजित की जाती हैं। कुछ रेव पार्टियां सामान्य संगीत और मनोरंजन कार्यक्रम होती हैं, लेकिन कई मामलों में इन पर नशीले पदार्थों के इस्तेमाल या अवैध गतिविधियों के आरोप भी लगते रहे हैं। इसलिए पुलिस और प्रशासन ऐसी पार्टियों पर निगरानी रखते हैं।
लकवा-स्पाइनल इंजरी के मरीजों को रोबोट करा रहा एक्सरसाइज:जयपुर के SMS अस्पताल में शुरुआत, तय मानकों के अनुसार जितने चाहो, उतने मूवमेंट
बीमारी की वजह से खुद एक्सरसाइज न कर पाने वाले मरीजों को रोबोट एक्सरसाइज करा रहा है। इसके लिए सवाई मान सिंह (SMS) हॉस्पिटल के रीजनल रिहैबिलिटेशन सेंटर में करीब 2 करोड़ रुपए की लागत से रोबोटिक फिजियोथेरेपी की शुरुआत हो चुकी है। दावा किया जा रहा है कि यह फिजियोथेरेपी पैरालाइसिस, स्पाइनल इंजरी, ब्रेन इंजरी जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे मरीजों के लिए मददगार साबित हो रही है। इसकी खास बात यह है कि एक बार तय एक्सरसाइज का कमांड देने के बाद जितने चाहो उतने मूवमेंट कराए जा सकते हैं। पढ़िए यह खास रिपोर्ट… एक्सपट्र्स का कहना है कि पैरालाइसिस, स्पाइनल इंजरी, ब्रेन इंजरी जैसी बीमारियों में फिजियोथेरेपिस्ट द्वारा मरीजों को लगातार एक्सरसाइज कराना चुनौती भरा होता है। लकवा या स्पाइनल इंजरी के मरीजों को रोजाना एक्सरसाइज कराना जरूरी होता है, ताकि शरीर का मूवमेंट बना रहे। वे रिकवर कर सकें। इसके लिए रोबोटिक फिजियोथैरेपी गेम चेंजर साबित हो रही है। रोबोट की सबसे बड़ी विशेषता इसकी प्रोग्रामिंग क्षमता है। फिजियोथेरेपिस्ट को केवल एक बार मरीज की स्थिति और आवश्यकता के अनुसार डेटा सेट करनी पड़ती है। इसके बाद यह मशीन खुद-ब-खुद तय मानकों के अनुसार मरीज को एक्सरसाइज कराती है। मशीन यह सुनिश्चित करती है कि हर मूवमेंट बिल्कुल सटीक हो। इससे मरीज की रिकवरी तेज गति से होती है। रोबोट के जरिए एक्सरसाइज कर रहे मरीज मनोज ने बताया कि छत से नीचे गिरने के बाद हाथ और पैरों ने काम करना बंद कर दिया था। अब रोबोट के जरिए एक्सरसाइज कराने से कुछ फायदा हो रहा है। हाथ–पैर में धीरे धीरे मूवमेंट होने लगी है। चुनौती : मरीजों के हिसाब से 1 रोबोट नाकाफी रीजनल रिहैबिलिटेशन सेंटर की ओपीडी में रोजाना 300-350 मरीज आते हैं, जबकि आईपीडी में 60 मरीज होते हैं। एक मरीज की थेरेपी में करीब 45 मिनट लगते हैं। जिस अनुपात में मरीज आते हैं, उस हिसाब से तो सिर्फ 1 रोबोट नाकाफी है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि ये शुरुआत है, भविष्य में और बढ़ाए जा सकते हैं। रोबोट से किस मरीज की थेरेपी होगी, यह डॉक्टर तय करते हैं। आसानी से कराई जा सकती है एक्सरसाइज : डॉ. जोशी SMS हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉ. मृणाल जोशी बताते हैं- रोबोट से अपर और लोवर लिम्ब की एक्सरसाइज बड़ी आसानी से कराई जा सकती है। इससे उन मरीजों को फायदा होगा, जो बिल्कुल भी मूवमेंट नहीं कर सकते हैं। इसे ऐसे भी समझा जा सकता है कि एक सामान्य इंसान जिसे कोई काम करना है तो सबसे पहले ब्रेन एक्टिव होता है। फिर बॉडी तय करती है कि कौन-कौन सी मांसपेशियां इसमें काम करेंगी। फिर पूरे कॉर्डिनेशन के साथ बॉडी रेस्पॉन्ड करती है। किसी को स्ट्रोक, ब्रेन इंजरी या कोई अन्य गंभीर बीमारी होती है तो ये कॉर्डिनेशन बिगड़ जाता है। ऐसे मामलों में लगातार मूवमेंट से ये कॉर्डिनेशन रोबोट के जरिए हो सकेगा। इससे न सिर्फ मांसपेशियों में सुधार हो सकता है बल्कि मांसपेशियों और ब्रेन का कॉर्डिनेशन भी बेहतर हो सकता है। रोबोट मरीज के मूवमेंट पर बारीकी से नजर रखता है और जरूरत के अनुसार उसे नियंत्रित करता है।
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