इधर स्विट्जरलैंड में ईरान अमेरिका बातचीत होती है। उधर ईरान के प्रेसिडेंट मसूद पेजिश्कियान पाकिस्तान पहुंच जाते हैं। मसूद पेजिश्कियान पाकिस्तान में एक बहुत अहम मुद्दे पर चर्चा के लिए पहुंच गए हैं। स्विट्जरलैंड में सात दिनों का मैप तो मिल गया है, लेकिन इस पर कितना काम होगा, यह तो तय हुई जिम्मेदारियों को निभाने से पता चलेगा। ईरान को भी और अमेरिका को भी। इसलिए ईरान के प्रेसिडेंट ने 40 दिनों की जंग और करीब तीन माह के तनाव के बाद अपने पहले ही दौरे के लिए पाकिस्तान को चुना। उनसे पहले ईरान के फॉरेन मिनिस्टर सैयद अब्बास अरागची ओमान से सीधे इस्लामाबाद पहुंचे। जहां पाकिस्तान के राष्ट्रपति कार्यालय में उनका स्वागत हुआ। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और पीएम शहबाज शरीफ ने खुद उन्हें अटेंड किया। ईरान की सरकारी न्यूज़ एजेंसी ने यह वीडियो जारी किए हैं। इसके बाद मेराज के मिनाब 168 प्लेन से ईरानी प्रेसिडेंट डॉक्टर मसूद पेजिश्कियान भी पाकिस्तान पहुंचे। जहां पाकिस्तान एयरफोर्स ने अपने अंदाज में उनका स्वागत किया।
दरअसल पाकिस्तान ने भी ईरान अमेरिका डील के गारंटर के तौर पर साइन किया है। पाकिस्तान और क़तर ने ही ऐलान किया है कि स्विट्जरलैंड में हुई बातचीत के बाद अमेरिका और ईरान के बीच अंतिम समझौते की दिशा में 60 दिनों का रोड मैप तैयार हुआ है। ऐसे में ईरान के सुधारवादी माने जाने वाले प्रेसिडेंट मसूद पजिशियान के कार्यकाल का भी बेहद अहम डिप्लोमेटिक फैसला है यह। उनकी सरकार ने सुप्रीम लीडर आयतुल्ला मुस्तबा खामने को भरोसा दिलाकर अमेरिका के साथ डील तो कर ली है लेकिन अमेरिका और इसराइल कुछ भी दिक्कत ना करें इस पर बारीकी से नजर रखी जा रही है और पाकिस्तान पर इसका दारोमदार है। ईरान के अंदर इस समझौते को लेकर मतभेद भी है। वहां एक बड़ा तबका यह मानता है कि अमेरिका पर जरूरत से ज्यादा भरोसा करना बेईमानी है। इसलिए पज़ेशियान का एमओयू पर दस्तखत करने के बाद इस्लामाबाद जाना ये बताता है कि उन्हें इस नाजुक समझौते को राजनीतिक फायदे में भी बदलना है। उन्हें इस दौरे की पाकिस्तान से ज्यादा जरूरत है। ये एमओयू ईरान में प्रेसिडेंट पजेशयान की सियासी पारी और वहां इस्लामिक रेवोल्यूशन के साथ उनके संबंधों को भी डिसाइड करेगा। अगर इसमें कुछ भी ऊपर नीचे हुआ तो सबसे बड़ा सवाल डॉ. मसूद पेजिश्कियान के फैसले पर ही उठेगा। क्योंकि ईरान के नए सुप्रीम लीडर आयतुल्ला मोजतबा खामनेई पहले ही कह चुके हैं कि वो अमेरिका के साथ डील करने में रुचि नहीं रख रहे हैं और झुकेंगे तो किसी भी शर्त पर नहीं।
लेकिन ईरान की सरकार और नेताओं ने उन्हें भरोसा दिया है कि इस डील से ईरान के प्रॉक्सी पर कोई आंच नहीं आएगी। ईरानी रेजिस्टेंस की हिफाजत सरकार करेगी। इसके बाद ही मुस्तबा खामने ही माने हैं। इस बीच ईरान ने स्टेट ऑफ होर्मस पर झुकने के संकेत भी कुछ हद तक दिए हैं। ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने संकेत दिए हैं कि अमेरिका और ईरान होमोस स्टेट को खोलने पर मिलकर काम कर सकते हैं। स्विट्जरलैंड से लौटते वक्त उन्होंने प्लेन में ही एक इंटरव्यू दिया जिसमें उन्होंने कहा कि स्टेट ऑफ होर्मोस कभी भी जंग के पहले की हालत में नहीं लौटेगा। साथ ही उन्होंने यह भी कह दिया है कि ईरान इंटरनेशनल कानून का पूरी तरह से पालन करेगा। तो ईरान का थोड़ा सा भी झुकता दिखना वहां के सेंटीमेंट और आईआरजीसी को नाराज कर सकता है। यही वजह है कि ईरान की सरकार के मुखिया डॉक्टर पजेशियान पाकिस्तान पहुंचे हैं।
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