कितनी खतरनाक है Sensory Neural Hearing Loss बीमारी? अलका याग्निक हुईं शिकार, जानिए इसके लक्षण और उपचार
अगर तुम साथ हो…, दिल ने ये कहा है दिल से…की मशहूर गायिका अल्का याग्निक को 23 जून को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पद्म भूषण से सम्मानित किया है. हाल ही में उन्होंने खुलाया करते हुए बताया है कि वह सेंसेरिन्यूरल हियरिंग लॉस जैसी खतरनाक बीमारी का शिकार हो गई हैं. इस बारे में उन्होंने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक पोस्ट शेयर कर जानकारी दी. उनके इस पोस्ट के मुताबिक एक सडन वायरल अटैक के कारण उन्हें Sensorineural hearing loss (SNHL) बीमारी का शिकार होना पड़ा जिसकी वजह से उन्हें सुनाई देना बंद हो गया है. ऐसे में चलिए आज हम आपको इस आर्टिकल में बताते हैं आखिर क्या है Sensorineural hearing loss और यह कितना खतरनाक है? साथ ही जानेंगे इस बीमारी के लक्षण और बचाव के तरीके के बारे में.
सेंसेरिन्यूरल हियरिंग लॉस क्या है?
सेंसोरिन्यूरल हियरिंग लॉस (SNHL) बहरेपन या सुनने की क्षमता में कमी का सबसे आम प्रकार है. यह तब होता है जब भीतरी कान (कोक्लिया) में मौजूद सूक्ष्म बाल कोशिकाएं या कान से मस्तिष्क तक जाने वाली नसें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं. यह स्थिति स्थायी होती है. सेंसोरिन्यूरल हियरिंग लॉस (SNHL) आपके इंटरनल ईयर या आपके ऑडिटरी नर्व के स्ट्रक्चर को नुकासन के कारण होता है. यह इंसान में 90 प्रतिशत से ज्यादा हियरिंग लॉस का कारण बनता है. आमतौर पर यह समस्या तेज शोर, आनुवंशिक कारक या उम्र बढ़ने के कारण हो सकती है.
कितनी खतरनाक है यह बीमारी?
सेंसेरिन्यूरल हियरिंग लॉस कोई खतरनाक या जानलेवा बीमारी नहीं है , लेकिन अगर इसे ठीक से मैनेज नहीं किया गया तो यह आपकी सुनने की क्षमता में बाधा डाल सकती है. इसके मुख्य लक्षणों में धीमी आवाज सुनने में परेशानी और कानों में बजने की आवाज शामिल हैं. यदि यह समस्या अचानक होती है तो इसे मेडिकल इमरजेंसी माना जाता है.
सेंसेरिन्यूरल हियरिंग लॉस के लक्षण
- आवाजें दबी हुआ लगना
- ऊंची आवाज सुनने में परेशानी होना
- चक्कर आना
- आवाजें सुनाई देना, लेकिन समझ न आना
- आसपास शोर होने पर सुनने में परेशानी होना
- बच्चों और महिलाओं की आवाज समझने में कठिनाई होना
सेंसरिनुरल हियरिंग लॉस के क्या कारण हैं?
उम्र बढ़ने के कारण
उम्र बढ़ने के कारण भी सुनाई देना कम या बिल्कुल बंद हो जाता है. इस बीमारी को प्रेस्बीक्यूसिस कहते हैं. दरअसल, उम्र बढ़ने के कारण दिमाग के प्रोसेस पर दबाव पड़ता है जिसके कारण सुनाई कम देने लगता है. सिर पर चोट लगने के कारण भी अचानक से सुनाई कम देने लगता है. इसकी कान के सेल्स अंदर से नष्ट हो जाते हैं. जिसे सेंसरिनुरल हियरिंग लॉस की समस्या कहते हैं.
डायबिटीज
डायबिटीज की बीमारी कान के ब्लड सर्कुलेशन को काफी ज्यादा प्रभावित करती है. जिसके कारण सेंसरिनुरल हियरिंग लॉस की समस्या होती है.
हाई बीपी
हाई बीपी के कारण कान के ब्लड वेसल्स को काफी ज्यादा नुकसान होका है. जिससे सुनने की क्षमता को काफी ज्यादा नुकसान होता है.
वायरल इंफेक्शन
कण्ठमाला, खसरा, रूबेला, साइटोमेगालोवायरस (CMV) और हर्पीज सिम्प्लेक्स वायरस के कारण कान में इंफेक्शन हो जाता है. जिससे सेंसोरिनुरल हियरिंग लॉस की समस्या होती है.
सेंसेरिन्यूरल हियरिंग लॉस से बचाव के तरीके
सेंसेरिन्यूरल हियरिंग लॉस से बचाव के लिए आप प्राइमरी कंडिशन्स जैसे डायबिटीज, थायराइड या हाइपरटेंशन, किडनी या लिवर के रोग हैं, इन सभी का सही तरह से इलाज जारी रखना चाहिए. इसके साथ ही साथ पेरोडिक चैकअप भी निरंतर कराते रहना चाहिए. नजर रखनी चाहिए कि सभी मार्कर ठीक रहें. ताकि शररी में किसी तरह के संक्रमण को फैलने से रोका जा सके. इसके अलावा आम संक्रमणों जैसे सर्दी-जुकाम याा सामान्य रेस्परेटरी इंफेक्शन होने पर बाहर जाने से बचें क्योंकि ऐसे हालात में यह संक्रमण गले, कान या नाक से शरीर में प्रवेश कर सकते हैं.
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