श्री कृष्ण कहते हैं की भूतकाल का पछतावा और भविष्य की चिंता छोड़ दो |
श्री कृष्ण कहते हैं की भूतकाल का पछतावा और भविष्य की चिंता छोड़ दो | #motivational #shorts #motivationalvideo #news18up News18 UP, Aaj Ki Taza Khabar, Hindi News Live, Lucknow fire news today, Ram Mandir chori kand, Bharat Tiwari ka encounter, Rudraprayag latest news, Iran-America war update, Qatar gas plant blast, Vaibhav Suryavanshi world record news18 live | aaj ka taaja khabar | आज की ताजा खबर | up live news | news18 up live news | up news live | aaj ke taaja khabar | hindi hews | latest news | news in hindi | hindi samachar | hindi khabar | n18oc_uttar_pradesh SUBSCRIBE to get the Latest News & Updates - http://bit.ly/News18UP News18 Mobile App - https://onelink.to/desc-youtube Follow Us on Social Media: Website: https://bit.ly/3auydBL Twitter: https://twitter.com/News18UP https://twitter.com/News18_UK Facebook: https://www.facebook.com/News18UP/ https://www.facebook.com/News18UK/ About Channel: News18 UP Uttarakhand is one of India's leading Hindi news channel and can be watched live on YouTube. News18 UP Uttarakhand news channel is a part of Network 18. Topics such as politics, education, health, environment, economy, business, sports, and entertainment are covered by this channel. The channel gives nationwide coverage. News18 UP Uttarakhand ,भारत का एक मात्र भरोसेमंद और लोकप्रिय न्यूज़ चैनल है। यह चैनल नेटवर्क १८ का हिस्सा है। यह चैनल उत्तरप्रदेश एवं उत्तराखंड के सभी क्षेत्रीय खबरों के साथ साथ सरकार, राजनीति, पर्यावरण , खेल-कूद से जुड़ी राष्ट्रीय एवं अंतराष्ट्रीय खबरें प्रसारित करता है|
लखनऊ अग्निकांड- कपल की शादी होने वाली थी:एनिमेशन आर्टिस्ट की भूखे पेट मौत, जान गंवाने वाले युवाओं की कहानी
लखनऊ अग्निकांड में मरने वाले 15 युवाओं में अनामिका और नीलेश भी थे। दोनों एक दूसरे को पसंद करते थे। इनकी शादी होने वाली थी। अनामिका पश्चिम बंगाल में न्यू अलीपुर और नीलेश लखनऊ के रहने वाले थे। दोनों हेड हॉपर एनिमेशन कंपनी में जॉब करते थे। अनामिका के पिता नीलेश के घर रिश्ता लेकर 3 बार आ चुके थे। मंगलवार को अनामिका के पिता विश्वनाथ सामंता मेडिकल कॉलेज (KGMU) के पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे थे। उनका रो रोकर बुरा हाल था। बेटी की लाश देखकर यही कह रहे थे- मेरा सब कुछ लुट गया। बेटी की शादी की तैयारी कर रहा था, आज हमारा परिवार ही उजड़ गया। अनामिका की मां बार-बार बेहोश हो रही थीं। विश्वनाथ अपने आंसुओं को छिपाते हुए उन्हें संभालते रहे। भाई का कहना है कि हादसे से कुछ देर पहले बहन से बातचीत हुई थी। वहीं, हादसे में मरने वाले सौमल्य की दिसंबर में शादी होनी थी। अनुछा सोमवार का व्रत थीं। ज्योति परिवार की जिम्मेदारी संभालने के लिए कम उम्र में ही जॉब कर रही थीं। पढ़िए लखनऊ अग्निकांड में जान गंवाने वाले युवाओं की पूरी कहानी… अनामिका के पिता बोले- शादी की बातचीत कर रहे थे अनामिका के पिता विश्वनाथ ने कहा- शादी को लेकर बातचीत चल रही थी। नीलेश के यहां हम 2-3 बार जा चुके हैं। उसके मां और पिता से भी मिले थे। दोनों में अफेयर का पता नहीं, लेकिन एकसाथ ऑफिस में काम कर रहे थे। हमारी इच्छा थी कि उनकी शादी कराई जाए। सुबह फोन पर बात हुई, दोपहर में मौत हो गई अनामिका के भाई आकाश ने बताया- हमारे माता-पिता एक हफ्ते पहले ही बहन से मिलने आए थे। सुबह उससे फोन पर बात हुई थी। उसने कहा था- मैं अब जॉब पर जा रही हूं। उसके बाद दोपहर में मौत हो गई। वह एनिमेशन आर्टिस्ट थी। तीन साल से यहां जॉब कर रही थी। इससे पहले, चंडीगढ़ में थी। 7 साल का एक्सपीरियंस था। नीलेश के परिजन बोले- पोस्टमॉर्टम हाउस से फोन आया, तब हादसे का पता चला नीलेश (28) लखनऊ के हजरतगंज के रहने वाले थे। उनके पिता शत्रुघ्न लाल यूपी बिजली विभाग से रिटायर्ड हैं। नीलेश चार भाई-बहनों में तीसरे नंबर पर थे। परिवार ने बताया कि हादसे के बारे में सोमवार शाम पोस्टमॉर्टम हाउस से फोन आने पर जानकारी मिली। हालांकि, उन्होंने इमारत में आग लगने की खबरें देखी थीं, लेकिन यह पता नहीं था कि उनके बेटे की भी इस घटना में मौत हो गई है। परिजनों ने बताया कि वे नीलेश के रिश्ते की तैयारी कर रहे थे, लेकिन उससे पहले ही हादसा हो गया। भाई की दिसंबर में शादी होनी थी, उसी की तैयारी में था सौमल्य की डेडबॉडी लेने पश्चिम बंगाल से उनके चचेरे भाई शुभम आए थे। उन्होंने कहा- सौमल्य पहले अहमदाबाद में काम करता था। 2-3 साल पहले यहां काम करने आया। इतना कहते ही वह रोने लगे। उन्होंने कहा- रात में 1 बजे खबर मिली। हमको पुलिस का फोन आया कि सौमल्य की मौत हो गई है। सौमल्य की इसी साल दिसंबर में शादी होने वाली थी। उसी की तैयारियों में वह लगा था। सोमवार को व्रत रहती थी अनुछा, बिना कुछ खाए ऑफिस गई हादसे में जान गंवाने वाली अनुछा राय मोहनलालगंज के धोधनखेड़ा की रहने वाली थीं। छोटी बहन ईशा राय ने बताया- सोमवार सुबह बड़ी बहन अनुछा से उनकी आखिरी बार बात हुई थी। अनुछा सोमवार को व्रत रहती थीं, इसलिए वे सुबह जल्दी उठकर पूजा करती थीं। ईशा ने बताया कि घर से व्रत के लिए फल और साबूदाने से बनी चीजें ले जाने को कहा गया था, लेकिन उन्होंने उस दिन कुछ खाने की इच्छा नहीं जताई थी। बहन की दोस्त ने फोन कर बताया- ऑफिस में आग लगी ईशा ने बताया कि अनुछा सुबह जल्दी काम पर चली जाती थीं और शाम को लौटती थीं, इसलिए दोनों की बातचीत अक्सर सुबह या शाम को ही हो पाती थी। सोमवार शाम छह बजे बहन की दोस्त वर्षा का फोन आया। उन्होंने पूछा कि अनुछा कहां हैं? इस पर ईशा ने बताया कि वह अभी दफ्तर में होंगी, क्योंकि उनकी ड्यूटी अक्सर शाम सात से साढ़े सात बजे तक रहती थी। कुछ देर बाद वर्षा ने दोबारा फोन कर बताया कि ऑफिस में आग लग गई है। यह सुनकर ईशा ने अनुछा के मोबाइल पर संपर्क करने की कोशिश की। दूसरी बार कॉल उठाने वाले व्यक्ति ने खुद को पुलिसकर्मी बताते हुए कहा कि अनुछा का मोबाइल उनके पास है। उन्हें तत्काल ट्रॉमा सेंटर पहुंचना चाहिए, क्योंकि आग बेहद भीषण थी। घर का खर्च चलाने के लिए कमाने लगी बेटी हादसे में जान गंवाने वाली चिनहट की ज्योति का बैकुंठ धाम में अंतिम संस्कार किया गया। परिवार में पिता हरिचरण कश्यप और मां कुसुम हैं। ज्योति के चार भाई हैं। पिता की कमता में मिठाई की दुकान है। ज्योति ने इसी साल नौकरी जॉइन की थी। वे जूनियर कैरेक्टर आर्टिस्ट के तौर पर काम करती थीं। अब पढ़िए हादसे के चश्मदीदों की जुबानी- ‘अफरा-तफरी मची थी, लोग ईंट मारकर शीशा तोड़ रहे थे’ हादसे की चश्मदीद कामिनी ने बताया- जब आग लगी तो मैं घर पर ही थी। चीख पुकार मचने पर बाहर निकली तो देखा कि अफरा-तफरी का माहौल था। लोग इमारत पर ईंट मार रहे थे, ताकि शीशा टूट जाए और धुआं बाहर निकल जाए। शीशा टूटते ही इमारत से लटककर लोग कूद रहे थे। चाहकर भी हम, लोगों की मदद नहीं कर पाए। फायर की गाड़ियां भी देर से आईं। इसलिए बहुत समस्या हुई। ‘50 से ज्यादा पक्षी और बिल्लियां थीं’ विशाल सिंह राजपूत ने बताया- मैं एक-दो दिन पहले पेट्स की दुकान पर आया था। दुकान पर 50 से ज्यादा बर्ड्स हुआ करती थीं। एशियाई कैट्स थीं। पॉपुलर शॉप थी, इसलिए यहां पर लोग दूर-दूर से आते थे। ‘आग की लपटें विकराल हो चुकी थीं’ चश्मदीद राहुल सिंह बताते हैं- जब मौके पर पहुंचा तो आग की लपटें पूरी इमारत में फैल चुकी थीं। मेरा घर इस इमारत के पीछे है। हम लोगों को सूचना तुरंत मिल गई थी। अंदर काफी बच्चे चिल्ला रहे थे। बिल्डिंग में पहले भी हम लोगों ने देखा है कि एंट्री पॉइंट एक ही तरफ से था, जिसकी वजह से कोई भी व्यक्ति बाहर नहीं निकल पाया। बिल्डिंग की साइड की दोनों दीवारें 9 इंच मोटी थीं। इसीलिए फायर कर्मियों को दीवार तोड़ने में काफी परेशानी हुई। रेस्क्यू में देरी हुई। ‘लोग बचने की कोशिश कर रहे थे, तब तक फायर की गाड़ी आ गई’ चश्मदीद अभय माहेश्वरी बताते हैं- इमारत के अंदर बच्चे फंसे हुए थे। वे चिल्ला रहे थे। मदद मांग रहे थे। फायर विभाग की गाड़ियां थोड़ा लेट आईं, इसलिए तमाम लोगों को बचाया नहीं जा सका। शायद समय से आतीं तो बचाया जा सकता था। इमारत के मालिक ने इंटीग्रेटेड और एग्जिट गेट बना रखा था, वह बिल्कुल पैक था। बाहर निकलने की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं थी। सबसे नीचे पेट्स स्टोर चलता था। ऊपर एनिमेशन की कोचिंग थी। पेट्स स्टोर में काफी डॉग्स और बिल्लियां भी थीं। यह बहुत ही दुखद घटना है। 3 वजहों से तेजी से फैली आग- 1. ज्वलनशील सामान ने आग को बड़ा बना दिया पेट्स शॉप में बड़ी मात्रा में पेडिग्री, प्लास्टिक पैकिंग, कार्डबोर्ड और अन्य ज्वलनशील सामग्री रखी हुई थी। इसके अलावा, इमारत के कुछ हिस्सों में एल्यूमीनियम शीट और प्लास्टिक आधारित स्ट्रक्चर का इस्तेमाल किया गया था। इससे आग तेजी से फैली और कुछ ही मिनटों में पूरी इमारत में घना धुआं भर गया। 2. एक ही एंट्री और एग्जिट पॉइंट बना मौत का कारण स्थानीय लोगों का कहना है कि इमारत में आने-जाने का प्रमुख रास्ता एक ही था। आग लगने के बाद रास्ता धुएं और लपटों से घिर गया, जिससे ऊपर मौजूद लोगों के पास बचने का कोई विकल्प नहीं बचा। 3. 2 मंजिला इमारत में इमरजेंसी एग्जिट नहीं भवन में आपात स्थिति में बाहर निकलने के लिए केवल एक ही रास्ता मौजूद था। भूतल पर पेट शॉप और क्लीनिक, ऊपर लाइब्रेरी, ऑफिस और एनीमेशन क्लासें चल रही थीं। बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के बावजूद सुरक्षा इंतजाम पर्याप्त नहीं दिखाई दिए। अब पूरी घटना जानिए- लखनऊ के अलीगंज इलाके में सोमवार दोपहर ढाई बजे आग लग गई। इसमें दम घुटने से 15 लोगों की मौत हो गई। जांच में पता चला है कि जिस बिल्डिंग में आग लगी, वह अवैध थी। इसे गिराने का आदेश 2016 में हुआ था, लेकिन बाद में निरस्त कर दिया गया था। लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के वीसी प्रथमेश कुमार ने बताया- बिल्डिंग मालिक को नोटिस जारी कर 15 दिन में जवाब मांगा गया है। इसके बाद बिल्डिंग पर बुलडोजर चलेगा। --------------- लखनऊ अग्निकांड से जुड़ी हुई ये खबर भी पढ़ें- लखनऊ अग्निकांड- जहां 15 लाशें मिलीं, वहां पहुंचे भास्कर रिपोर्टर: दो मंजिला बिल्डिंग में खिड़की-एग्जॉस्ट तक नहीं; दरवाजा डबल लॉक था लखनऊ की बिल्डिंग में लगी आग में 15 लोगों की दम घुटने से मौत हो गई। सभी ने बाहर निकलने की जद्दोजहद की, लेकिन धुंआ और गेट लॉक होने की वजह से बाहर नहीं निकल सके। जिस हेड हॉपर स्टूडियो से 15 लाशें निकाली गईं, भास्कर रिपोर्टर्स ने उसके अंदर जाकर पड़ताल की। हमारी पड़ताल में अंदर के हालात भयावह दिखे। पढ़ें पूरी खबर



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