PM Modi meets President Droupadi Murmu: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार, 23 जून को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। यह बैठक पद्म पुरस्कार समारोह के तुरंत बाद हुई है। हालांकि इस मुलाकात का कोई आधिकारिक एजेंडा साझा नहीं किया गया है, लेकिन राष्ट्रीय राजधानी के राजनीतिक गलियारों में इसे केंद्रीय मंत्रिपरिषद (Union Council of Ministers) में संभावित फेरबदल से जोड़कर देखा जा रहा है।
राष्ट्रपति कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस बैठक की तस्वीरें भी साझा की हैं।
— President of India (@rashtrapatibhvn) June 23, 2026
जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा स्वीकार मंत्रिमंडल में बदलाव की चर्चाओं को बल देने वाली सबसे बड़ी घटना वरिष्ठ बीजेपी नेता जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा है। राज्यसभा का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्होंने केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दे दिया है। कुरियन अल्पसंख्यक मामलों के साथ-साथ मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में कार्य कर रहे थे।
राष्ट्रपति भवन ने पुष्टि की है कि प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति ने उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है।
रवीनीत सिंह को लेकर भी चर्चा केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवीनीत सिंह का राज्यसभा कार्यकाल भी 21 जून को समाप्त हो गया है। बीजेपी ने उन्हें उच्च सदन के लिए दोबारा नामांकित नहीं किया है। रवीनीत सिंह, जो अगस्त 2024 से राजस्थान से राज्यसभा सदस्य थे, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय का प्रभार भी संभाल रहे हैं। मंत्री के संसदीय कार्यकाल का खत्म होना भी कैबिनेट में संभावित बदलावों की ओर इशारा कर रहा है।
बीजेपी में संगठनात्मक बदलाव और कैबिनेट पर असर कैबिनेट में फेरबदल की अटकलों के पीछे बीजेपी के हालिया संगठनात्मक फैसले भी एक बड़ा कारण माने जा रहे हैं। केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा को 28 मई को दिल्ली बीजेपी का अध्यक्ष बनाया गया था, जबकि वे सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के साथ कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय की जिम्मेदारियां भी संभाल रहे हैं।
इसी तरह, केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी को पिछले साल दिसंबर में यूपी बीजेपी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। इन नियुक्तियों और मंत्रियों के संसदीय कार्यकाल के समाप्त होने ने केंद्रीय मंत्रिमंडल में बड़े फेरबदल की संभावनाओं को और गहरा कर दिया है, हालांकि सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
कुछ ही दिनों पहले अपने बड़े कारोबारी पुनर्गठन को लेकर चर्चा में रही वेदांता लिमिटेड अब शेयर बाजार में आई तेज गिरावट की वजह से सुर्खियों में है। मंगलवार को कंपनी के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली, जिसके बाद निवेशकों के बीच हलचल बढ़ गई है।
मौजूद जानकारी के अनुसार वेदांता लिमिटेड का शेयर मंगलवार को 7.7 प्रतिशत की गिरावट के साथ 282.20 रुपये पर बंद हुआ। इससे पहले शेयर 305.85 रुपये के स्तर पर बंद हुआ था। बाजार में आई इस कमजोरी की बड़ी वजह ब्लॉक डील के जरिए कंपनी की करीब 1.8 प्रतिशत हिस्सेदारी की बिक्री को माना जा रहा है।
शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक लगभग 7.3 करोड़ शेयर 292 रुपये प्रति शेयर के भाव पर कारोबार किए गए। इस सौदे का कुल मूल्य करीब 2,149 करोड़ रुपये आंका गया है। हालांकि सौदे में शामिल खरीदार और विक्रेता की आधिकारिक पहचान तत्काल सामने नहीं आई है, लेकिन बाजार में यह चर्चा रही कि प्रमोटर समूह की इकाई ट्विन स्टार होल्डिंग्स इस बिक्री से जुड़ी हो सकती है।
बता दें कि ट्विन स्टार होल्डिंग्स वेदांता लिमिटेड की सबसे बड़ी शेयरधारक इकाई है। 31 मार्च 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार कंपनी में ट्विन स्टार होल्डिंग्स की हिस्सेदारी 40.02 प्रतिशत थी, जबकि पूरे प्रमोटर समूह की हिस्सेदारी 56.38 प्रतिशत के आसपास थी। इससे पहले भी खबरें आई थीं कि ट्विन स्टार होल्डिंग्स ब्लॉक डील के जरिए लगभग 6.5 करोड़ शेयर बेच सकती है।
गौरतलब है कि इस संभावित बिक्री के लिए 291 रुपये प्रति शेयर का न्यूनतम मूल्य तय किए जाने की चर्चा थी, जो सोमवार के बंद भाव से लगभग 4.9 प्रतिशत कम था। ऐसे में बाजार खुलते ही शेयर पर दबाव बढ़ गया और निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी।
मौजूद जानकारी के अनुसार मंगलवार को वेदांता के शेयरों में सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक कारोबार हुआ। कारोबार की मात्रा पूरे सत्र के औसत स्तर से करीब छह गुना अधिक रही। इसके साथ ही कंपनी से जुड़े विकल्प सौदों में भी गतिविधि बढ़ी, जो निवेशकों की बढ़ती सतर्कता को दर्शाती है।
बता दें कि यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब वेदांता ने हाल ही में भारत के सबसे बड़े कॉरपोरेट पुनर्गठन में से एक को पूरा किया है। कंपनी ने अपने एल्युमिनियम, तेल एवं गैस, बिजली तथा लोहा एवं इस्पात कारोबार को अलग-अलग सूचीबद्ध इकाइयों के रूप में बाजार में उतारा है। इस डीमर्जर का उद्देश्य विभिन्न कारोबारों की वास्तविक कीमत को सामने लाना और निवेशकों को अधिक स्पष्ट मूल्यांकन उपलब्ध कराना बताया गया था।
हालांकि मंगलवार की गिरावट के बावजूद कंपनी का शेयर अभी भी 30 अप्रैल के डीमर्जर के बाद के बंद भाव 271.55 रुपये से ऊपर बना हुआ है। गौरतलब है कि डीमर्जर से पहले 29 अप्रैल को वेदांता का शेयर 773.60 रुपये पर बंद हुआ था।
विश्लेषकों का मानना है कि हालिया उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशक अब नई सूचीबद्ध इकाइयों और मूल कंपनी की अलग-अलग संभावनाओं का आकलन कर रहे हैं। हाल के दिनों में वेदांता और उसकी चार नई सूचीबद्ध कंपनियों का संयुक्त बाजार मूल्य डीमर्जर से पहले के मूल्यांकन से भी अधिक पहुंच चुका है, जिससे संकेत मिलता है कि बाजार इन अलग-अलग कारोबारों को बेहतर मूल्य दे रहा है। फिलहाल निवेशकों की नजर प्रमोटर हिस्सेदारी और कंपनी की आगे की रणनीति पर बनी हुई हैं।
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