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15 करोड़ में दिल्ली कैपिटल्स के हुए ऋषभ पंत, कुलदीप यादव को लखनऊ सुपर जायंट्स ने 13.5 करोड़ में बनाया अपना

Rishabh Pant and Kuldeep Yadav : ऋषभ पंत और कुलदीप यादव ने दिल्ली कैपिटल्स और लखनऊ सुपर जायंट्स के बीच हाई-प्रोफाइल ट्रेड पूरा किया है. लखनऊ सुपर जायंट्स के पूर्व कप्तान ऋषभ पंत दिल्ली कैपिटल्स (DC) में वापसी के लिए तैयार हैं, वो पहले भी दिल्ली कैपिटल्स के लिए बतौर कप्तान खेलते थे. वहीं कुलदीप यादव लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) में शामिल होंगे, दिल्ली कैपिटल्स को छोड़कर वो लखनऊ की टीम में शामिल होंगे. ये आईपीएल 2027 से पहले सबसे पहली और सफल ट्रेड है.

ऋषभ पंत को हुआ 12 करोड़ का नुकसान

ये इन दोनों खिलाड़ियों के बीच हाल के IPL इतिहास की सबसे बड़ी प्लेयर ट्रेड में से एक है. पंत उस फ्रेंचाइजी में लौट रहे हैं जहां उन्होंने 2016 और 2024 के बीच नौ सीजन बिताए थे, जिसमें उन्होंने 111 मैच खेले थे, जो दिल्ली कैपिटल्स के लिए किसी भी खिलाड़ी द्वारा सबसे ज्यादा मैच हैं. लगभग एक दशक तक फ्रेंचाइजी के जाने-माने चेहरों में से एक रहे थे. उन्होंने 2021 से 2024 तक चार सीजन में 43 मैचों में टीम की कप्तानी भी की थी.

टाटा आईपीएल 2025 प्लेयर ऑक्शन में पंत को लखनऊ ने रिकॉर्ड तोड़ 27 करोड़ में खरीदा था. जो IPL इतिहास में सबसे बड़ी बोली थी. ट्रेड के बाद पंत 15 करोड़ की बदली हुई फीस पर दिल्ली कैपिटल्स में वापस आएंगे. ऋषभ पंत को कुल 12 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है.

ऋषभ पंत का आईपीएल करियर

प्रारूप मैच पारी नाबाद रन सर्वोच्च स्कोर औसत गेंदें स्ट्राइक रेट शतक अर्धशतक चौके छक्के
आईपीएल 139 136 21 3865 128* 33.6 2633 146.8 2 20 349 181

कुलदीप को नहीं हुआ कोई भी फायदा

कुलदीप दिल्ली कैपिटल्स के साथ पांच सीजन तक बहुत सफल रहने के बाद लखनऊ सुपर में शामिल हुए हैं. 2022 में फ्रेंचाइजी में आने के बाद से बाएं हाथ के रिस्ट स्पिनर ने 65 मैचों में 72 विकेट लिए हैं और खुद को टूर्नामेंट में सबसे असरदार विकेट लेने वाले गेंदबाजों में से एक के रूप में स्थापित किया है. भारत के प्रमुख व्हाइट-बॉल गेंदबाजों में से एक कुलदीप अपनी मौजूदा फीस 13.50 करोड़ पर लखनऊ सुपर जायंट्स में शामिल होंगे.

कुलदीप यादव आईपीएल में मुंबई इंडियंस, कोलकाता नाइट राइडर्स और दिल्ली कैपिटल्स के लिए खेल चुके हैं. उन्होंने मुंबई इंडियंस की ओर से अपने आईपीएल करियर की शुरुआत की थी. कुलदीप 2012 से 2014 तक मुंबई के लिए खेले. उनके बाद 2016 से लेकर 2021 तक केकेआर के लिए खेले. इसके बाद 2022 से लेकर 2026 तक कुलदीप यादव दिल्ली कैपिटल्स के लिए. अब वो 2027 में लखनऊ सुपर जायंट्स की ओर से खेलते हुए नजर आएंगे.

कुलदीप यादव का आईपीएल करियर

प्रारूप मैच पारी फेंकी गई गेंदें मेडन ओवर दिए गए रन विकेट सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी इकोनॉमी औसत स्ट्राइक रेट 4 विकेट
आईपीएल 110 106 2274 1 3130 112 4/14 8.26 27.9 20.3 4

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Explainer: आखिर क्यों 4 महीने पाताल लोक में विश्राम करते हैं भगवान विष्णु? जानिए माता लक्ष्मी और राजा बलि से जुड़ी रोचक कथा

Lord Vishnu Chaturmas Story: हिंदू धर्म में चातुर्मास का खास महत्व माना जाता है. हर साल आषाढ़ शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी से लेकर कार्तिक शुक्ल पक्ष की देेवउठनी एकादशी तक का समय चातुर्मास कहलाता है. यह अवधि लगभग 4 महीने तक चलती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान श्री हरि योगनिद्रा में चले जाते हैं और सृष्टि के संचालन की जिम्मेदारी भगवान शिव संभालते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि भगवान विष्णु 4 महीने के लिए विश्राम क्यों करते हैं और उनका यह विश्राम पाताल लोक से कैसे जुड़ा है? इसके पीछे एक रोचक पौराणिक कथा है, जिसमें वामन अवतार, दानवीर राजा बलि और माता लक्ष्मी की अहम भूमिका बताई गई है. 

कौन थे राजा बलि?

राजा बलि प्रह्लाद के पौत्र और विरोचन के पुत्र थे. वे असुर कुल में जन्मे थे, लेकिन अपने दान, धर्म और वचन पालन के लिए प्रसिद्ध थे. कहा जाता है कि उनके प्रताप और पराक्रम के कारण तीनों लोकों पर उनका प्रभाव बढ़ने लगा था. देवताओं को भय होने लगा कि कहीं स्वर्ग लोक भी राजा बलि के अधीन न हो जाए. देवताओं की प्रार्थना पर भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण करने का निर्णय लिया.

भगवान विष्णु ने क्यों लिया वामन अवतार?

राजा बलि एक विशाल यज्ञ का आयोजन कर रहे थे. उस यज्ञ में उन्होंने संकल्प लिया था कि जो भी याचक उनके द्वार पर आएगा, उसे वह खाली हाथ नहीं लौटाएंगे. इसी अवसर पर भगवान विष्णु एक छोटे ब्राह्मण बालक यानी वामन के रूप में राजा बलि के पास पहुंचे. वामन भगवान ने राजा बलि से केवल 3 पग भूमि दान में मांगी. राजा बलि ने बिना किसी संकोच के यह मांग स्वीकार कर ली. हालांकि उनके गुरु शुक्राचार्य ने उन्हें सावधान किया कि यह कोई साधारण बालक नहीं, बल्कि स्वयं भगवान विष्णु हैं. लेकिन राजा बलि अपने वचन से पीछे नहीं हटे. 

Lord Vishnu Chaturmas Story Photograph: (AI-Generated)

तीन पग में नाप लिया पूरा ब्रह्मांड

दान स्वीकार होते ही वामन भगवान ने विराट रूप धारण कर लिया. पहले कदम में उन्होंने पृथ्वी लोक को नाप लिया और दूसरे कदम में स्वर्ग लोक को अपने चरणों में समेट लिया. इसके बाद तीसरे कदम के लिए कोई स्थान शेष नहीं बचा. तब राजा बलि ने अपना सिर भगवान के चरणों में अर्पित कर दिया. भगवान विष्णु ने तीसरा कदम उनके सिर पर रख दिया और उन्हें पाताल लोक का स्वामी बना दिया.

भगवान विष्णु से राजा बलि ने मांगा था एक अनोखा वरदान

राजा बलि भगवान विष्णु के परम भक्त थे. उनके दान और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान ने उन्हें वरदान मांगने को कहा. तब राजा बलि ने कहा कि वह चाहते हैं कि स्वयं भगवान विष्णु उनके साथ पाताल लोक में निवास करें. भगवान विष्णु अपने भक्त की इच्छा को टाल नहीं सके और उन्होंने राजा बलि का यह वरदान स्वीकार कर लिया. इसके बाद वे पाताल लोक में रहने लगे.

माता लक्ष्मी को क्यों लेनी पड़ी राजा बलि की मदद?

भगवान विष्णु के पाताल लोक में चले जाने से माता लक्ष्मी चिंतित हो गईं. वैकुंठ भगवान के बिना सूना हो गया था। तब माता लक्ष्मी ने एक साधारण स्त्री का रूप धारण किया और पाताल लोक पहुंचीं. उन्होंने राजा बलि को अपना भाई बनाया और रक्षासूत्र बांधा. राजा बलि ने बहन के रूप में माता लक्ष्मी का सम्मान किया और उनसे उपहार मांगने को कहा. तब माता लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को अपने साथ वैकुंठ वापस ले जाने की इच्छा जताई. 

राजा बलि समझ गए कि यह कोई साधारण या मामूली स्त्री नहीं, बल्कि स्वयं देवी लक्ष्मी हैं. उन्होने प्रसन्न होकर भगवान विष्णु को वैकुंठ लौटने की अनुमति दे दी. हालांकि, राजा बलि की भक्ति को देखते हुए भगवान विष्णु ने उन्हें वचन दिया कि वह हर वर्ष चार महीने उनके साथ पाताल लोक में निवास करेंगे. मान्यता है कि यही चार महीने चातुर्मास के रूप में जाने जाते हैं.

Lord Vishnu Chaturmas Story Photograph: (AI-Generated)

चातुर्मास का धार्मिक महत्व

देवशयनी एकादशी से शुरू होने वाला चातुर्मास आध्यात्मिक साधना का समय माना जाता है. इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों को करने से बचा जाता है. साधु-संत भी एक ही स्थान पर रहकर तप, जप और धर्म प्रचार करते हैं. धार्मिक मान्यता है कि इस अवधि में भगवान विष्णु योगनिद्रा में रहते हैं, इसलिए भक्त पूजा-पाठ, व्रत और दान-पुण्य के माध्यम से उनका स्मरण करते हैं. 

क्या कहता है शास्त्रों का दृष्टिकोण?

पुराणों में वर्णित यह कथा भगवान और भक्त के अटूट संबंध को दर्शाती है. राजा बलि की भक्ति, उनके वचन की दृढ़ता और माता लक्ष्मी के प्रेम का यह प्रसंग सनातन परंपरा में विशेष स्थान रखता है. हालांकि, यह कथा धार्मिक मान्यताओं और पुराणों पर आधारित है. विभिन्न ग्रंथों में इसके अलग-अलग वर्णन मिलते हैं। श्रद्धालु इसे भगवान विष्णु की भक्तवत्सलता और चातुर्मास की महिमा से जोड़कर देखते हैं.

यह भी पढ़ें: Nirjala Ekadashi 2026: गृहस्थ और वैष्णवों की व्रत तिथियां क्या होंगी? जानें कब रखें उपवास, नोट करें सही डेट

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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  Sports

राजस्थान रॉयल्स में जाएंगे हार्दिक पंड्या? इस विस्फोटक ओपनर से ट्रेड करने को लेकर हुई बात, मुंबई इंडियंस को मिले दो ऑफर

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