Ganesh Ji: क्यों सबसे पहले पूजे जाते हैं विघ्नहर्ता गणेश? जानें इसके पीछे की कहानी
Ganesha worship: सनातन धर्म में किसी भी बड़े अनुष्ठान, नई शुरुआत, या व्यापारिक सौदे से पहले 'श्री गणेशाय नमः' कहना अनिवार्य माना गया है। आखिर क्यों? क्या गणेश जी केवल रिद्धि-सिद्धि के दाता हैं, या इसके पीछे कोई गहरा आध्यात्मिक रहस्य छिपा है?
प्रथम पूज्य होने का वरदान
पुराणों के अनुसार, एक बार सभी देवताओं में प्रतियोगिता हुई कि सबसे पहले किसकी पूजा की जाएगी। भगवान शिव ने कहा कि जो पूरी पृथ्वी की तीन परिक्रमा सबसे पहले करेगा, वही प्रथम पूज्य कहलाएगा। सभी देवता अपने वाहनों पर सवार होकर निकल पड़े, लेकिन गणेश जी ने अपनी बुद्धि का प्रयोग किया।
उन्होंने अपने माता-पिता (शिव-पार्वती) को ही अपना संसार मानकर उनकी तीन परिक्रमा की। उनकी इस भक्ति और बुद्धिमत्ता से प्रसन्न होकर शिव जी ने उन्हें 'प्रथम पूज्य' होने का वरदान दिया।
बुद्धि और विवेक के प्रतीक
गणेश जी का स्वरूप स्वयं एक बड़ा संदेश है। उनका बड़ा सिर 'विवेक' का, बड़े कान 'ध्यान से सुनने' का और उनकी छोटी आंखें 'एकाग्रता' का प्रतीक हैं। जब हम किसी काम की शुरुआत करते हैं, तो हमे उसी एकाग्रता और विवेक की जरूरत होती है। इसलिए गणेश जी की पूजा करने का अर्थ है- कार्य को बुद्धि और संतुलन के साथ शुरू करना।
विघ्नहर्ता- बाधाओं के नाश करने वाले
'विघ्नहर्ता' का अर्थ है वह शक्ति जो आने वाली मुश्किलों को पहले ही भांप ले और उन्हें समाप्त कर दे। माना जाता है कि गणेश जी की पूजा करने से नकारात्मक ऊर्जा नष्ट हो जाती है और कार्य में आने वाली रुकावटें स्वतः दूर हो जाती हैं।
ये भी पढ़ें: हनुमान जी को क्यों चढ़ाया जाता है चमेली का तेल और सिंदूर? जानें सही विधि
ये भी पढ़ें: पूजा में पंचामृत क्यों है जरूरी? जानें इसके पीछे छिपे स्वास्थ्य और अध्यात्म के गहरे राज
डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह लेख पौराणिक कथाओं और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। वेबसाइट इन तथ्यों की पूर्ण ऐतिहासिक सटीकता का दावा नहीं करती है। यह जानकारी केवल पाठकों की आध्यात्मिक रुचि को बढ़ाने के लिए साझा की गई है।
23 June 2026 Ka Panchang: यहां जानें आज का पंचांग, तिथि, शुभ मुहूर्त, योग; नक्षत्र और राहुकाल
23 June 2026 Ka Panchang: हिंदू पंचांग के अनुसार, 23 जून 2026, मंगलवार का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आज ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि है, जो शाम 04:40 बजे तक रहेगी। इसके बाद दशमी तिथि शुरू हो जाएगी। यहां जानें ज्योतिषाचार्य डॉक्टर मनीष गौतम जी महाराज से आज के दिन का पंचांग, सूर्य, चंद्रमा की स्थिति और शुभ-अशुभ समय।
23 जून 2026 का पंचांग
- तिथि: ज्येष्ठ शुक्ल नवमी (शाम 4:40 बजे तक)
- योग: वरियान योग (सुबह 10:14 बजे तक)
- नक्षत्र: हस्त (11:54 बजे तक), इसके बाद चित्रा
- विशेष पर्व: ज्येष्ठ माह का अंतिम बड़ा मंगल (बुढ़वा मंगल)
आज के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:37 बजे से 5:19 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:14 बजे से 1:07 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 2:54 बजे से 3:47 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 7:18 बजे से 7:39 बजे तक
सूर्योदय और सूर्यास्त
- सूर्योदय: सुबह 5:23 बजे
- सूर्यास्त: शाम 7:21 बजे
विभिन्न शहरों में राहुकाल
- दिल्ली: 3:53 PM से 5:37 PM
- मुंबई: 4:00 PM से 5:39 PM
- चंडीगढ़: 3:57 PM से 5:43 PM
- लखनऊ: 3:36 PM से 5:20 PM
- भोपाल: 3:46 PM से 5:27 PM
- कोलकाता: 3:01 PM से 4:43 PM
- अहमदाबाद: 4:05 PM से 5:46 PM
- चेन्नई: 3:24 PM से 5:01 PM
क्यों खास है इस वर्ष का बड़ा मंगल?
आमतौर पर ज्येष्ठ माह में चार बड़े मंगल पड़ते हैं, लेकिन वर्ष 2026 में अधिक मास के कारण यह संख्या बढ़कर आठ हो गई। यही वजह है कि इस बार का बड़ा मंगल बेहद दुर्लभ और विशेष माना जा रहा है। 23 जून को पड़ने वाला यह अंतिम बड़ा मंगल श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है।
बड़ा मंगल का धार्मिक महत्व
बड़ा मंगल, जिसे बुढ़वा मंगल भी कहा जाता है, भगवान हनुमान की आराधना को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से हनुमान जी की पूजा, सुंदरकांड का पाठ और जरूरतमंदों को दान करने से साहस, ऊर्जा और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। भक्त इस दिन व्रत रखकर बजरंगबली का आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बड़े मंगल पर हनुमान जी की भक्ति करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

















.jpg)









