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Reliance का मास्टरस्ट्रोक! Jio IPO की खबर से Share Market में तूफ़ान, निवेशकों के खिले चेहरे।

सप्ताह की शुरुआत शेयर बाजार में रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए सकारात्मक रही। कंपनी की दूरसंचार और तकनीकी इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स द्वारा बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड के पास प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम से जुड़े दस्तावेज जमा किए जाने के बाद निवेशकों का उत्साह बढ़ गया। इसका असर कंपनी के शेयरों पर भी दिखाई दिया और कारोबार के दौरान रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में लगभग तीन प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई हैं।

मौजूद जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय शेयर बाजार में रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर कारोबार के दौरान 1,344.90 रुपये तक पहुंच गया। बाद में इसमें मामूली उतार-चढ़ाव देखने को मिला, लेकिन शेयर बढ़त के साथ कारोबार करता रहा हैं। कंपनी का कुल बाजार मूल्य भी 18 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया हैं।

बता दें कि जियो प्लेटफॉर्म्स ने बाजार नियामक के पास जो दस्तावेज दाखिल किए हैं, उसके तहत कंपनी 27 करोड़ नए शेयर जारी करने की योजना बना रही हैं। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस सार्वजनिक निर्गम के जरिए करीब 37,700 करोड़ रुपये जुटाए जा सकते हैं। यदि यह योजना सफल रहती है तो यह भारतीय पूंजी बाजार के इतिहास के सबसे बड़े सार्वजनिक निर्गमों में से एक साबित हो सकती हैं।

रिलायंस इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष मुकेश अंबानी ने कंपनी की 49वीं वार्षिक आम बैठक में इस प्रस्तावित सूचीबद्धता को वर्ष का सबसे महत्वपूर्ण मूल्य सृजन कदम बताया हैं। उन्होंने कहा कि जियो की बाजार में सूचीबद्धता से यह साबित होगा कि भारत वैश्विक स्तर की तकनीकी कंपनियां बनाने की क्षमता रखता हैं। साथ ही इससे रिलायंस इंडस्ट्रीज के मौजूदा शेयरधारकों के लिए भी बड़ा मूल्य सृजन होने की उम्मीद हैं।

गौरतलब है कि मुकेश अंबानी ने यह भी बताया कि इस पूरी प्रक्रिया का नेतृत्व उनके बच्चे आकाश अंबानी, ईशा अंबानी और अनंत अंबानी कर रहे हैं। इससे यह संकेत भी मिलता है कि समूह में नई पीढ़ी को बड़ी जिम्मेदारियां दी जा रही हैं।

कंपनी के अनुसार, सार्वजनिक निर्गम से जुटाई जाने वाली राशि का उपयोग मुख्य रूप से रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड के बकाया कर्ज को कम करने और अन्य सामान्य कारोबारी जरूरतों को पूरा करने में किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कंपनी की वित्तीय स्थिति और मजबूत हो सकती हैं।

इस बीच रिलायंस समूह ने अपने भविष्य के विकास की विस्तृत रूपरेखा भी प्रस्तुत की हैं। कंपनी अब उपग्रह आधारित इंटरनेट सेवाओं, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वच्छ ऊर्जा और उपभोक्ता कारोबार के विस्तार पर विशेष ध्यान दे रही हैं। मुकेश अंबानी ने कहा कि समूह अब केवल योजनाएं बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें जमीन पर उतारने की दिशा में तेजी से काम कर रहा हैं।

उन्होंने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में कंपनी ने मेटा, एनवीडिया और गूगल जैसी वैश्विक कंपनियों के साथ साझेदारी की है। इसका उद्देश्य भारत की जरूरतों के अनुरूप बड़े स्तर पर तकनीकी सेवाएं और आधारभूत ढांचा तैयार करना हैं।

इसके अलावा कंपनी सौर ऊर्जा निर्माण, हरित हाइड्रोजन, संपीड़ित जैव गैस, बैटरी भंडारण, जैव ऊर्जा और भूमिगत कोयला गैसीकरण जैसे क्षेत्रों में भी निवेश बढ़ा रही हैं। बता दें कि भारत सरकार भी स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है, ऐसे में रिलायंस की यह रणनीति भविष्य के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि जियो प्लेटफॉर्म्स का प्रस्तावित सार्वजनिक निर्गम न केवल रिलायंस समूह के लिए बल्कि पूरे भारतीय पूंजी बाजार के लिए एक बड़ा पड़ाव साबित हो सकता है। आने वाले महीनों में निवेशकों की नजर इस प्रक्रिया और इसके मूल्य निर्धारण पर बनी रहने की संभावना हैं।

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अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा विवाद: सुप्रीम कोर्ट में CBI की अगुवाई में जांच की मांग को लेकर नई याचिका दाखिल, पढ़ें खबर

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण हेतु एकत्र समर्पण निधि में कथित अनियमितताओं का मामला अब सर्वोच्च न्यायालय की दहलीज तक जा पहुंचा है, जहां एक नई याचिका दायर कर इस संवेदनशील प्रकरण की गहन जांच की मांग की गई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब कुछ ही दिन पूर्व इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इसी विषय पर दायर एक अन्य याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए उसे खारिज कर दिया था। दान में कथित हेराफेरी और पारदर्शिता के अभाव से जुड़े ये आरोप देश भर के करोड़ों रामभक्तों की आस्था और विश्वास से सीधे तौर पर जुड़े हैं, जिन्होंने अतुलनीय उत्साह और जूनून के साथ मंदिर निर्माण में अपना योगदान दिया है।

सर्वोच्च न्यायालय में दायर नवीनतम याचिका में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को प्राप्त दान में कथित अनियमितताओं और गबन की विस्तृत जांच की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं ने विशेष रूप से केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का आग्रह किया है। इसके अतिरिक्त, मामले में तत्काल प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज करने और सभी संबंधित अभिलेखों को सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर बल दिया गया है ताकि किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ या सबूतों को नष्ट किए जाने से रोका जा सके। याचिका में ट्रस्ट के धन और संपत्ति के प्रबंधन के लिए एक मजबूत ऑडिट और निगरानी प्रणाली स्थापित करने की भी मांग की गई है, जिससे भविष्य में ऐसी किसी भी अनियमितता की संभावना को समाप्त किया जा सके और पारदर्शिता सुनिश्चित हो।

हाईकोर्ट तत्काल सुनवाई से कर चुका है इनकार

उल्लेखनीय है कि इस प्रकरण की तात्कालिक सुनवाई से इलाहाबाद उच्च न्यायालय पहले ही इनकार कर चुका है। मोहित अशोक नामक व्यक्ति द्वारा दायर याचिका में राम मंदिर दान चोरी मामले में तत्काल सुनवाई की गुहार लगाई गई थी, जिसे उच्च न्यायालय ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि न्यायालय में पहले से ही बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं। मौखिक रूप से न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की कि उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले का संज्ञान ले लिया है, अतः इस स्तर पर तत्काल सुनवाई की कोई आवश्यकता प्रतीत नहीं होती। उच्च न्यायालय के इस निर्णय के उपरांत अब याचिकाकर्ताओं ने न्याय और सच्चाई की तलाश में सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया है।

अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी पहले भी उठा चुके हैं दान प्रबंधन का मुद्दा

यह पहली बार नहीं है जब राम मंदिर के लिए एकत्र दान के प्रबंधन को लेकर कानूनी प्रश्न उठाए गए हैं। इससे पहले भी अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की जा चुकी है। उस याचिका में मंदिर को प्राप्त कुल दान, इन निधियों को कैसे और कहाँ जमा किया गया, इसकी विस्तृत जानकारी के लिए एक फोरेंसिक ऑडिट की मांग की गई थी। अधिवक्ता गोस्वामी ने अपनी याचिका में दृढ़ता से कहा था कि दान से संबंधित सभी रिकॉर्ड, विशेषकर सीसीटीवी फुटेज, दस्तावेज और डिजिटल सबूत, सुरक्षित रखे जाने चाहिए, क्योंकि वे किसी भी संभावित जांच के दौरान महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में कार्य करेंगे।

याचिकाओं में एक केंद्रीय बिंदु यह उभरा है कि देवता के नाम पर दिया गया दान या चढ़ावा वस्तुतः ट्रस्ट की संपत्ति है, और इसलिए, इन योगदानों की गिनती और प्रबंधन की प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता अनिवार्य है। यह केवल कानूनी आवश्यकता ही नहीं, अपितु उन करोड़ों लोगों की भावनाओं का सम्मान भी है जिन्होंने अपनी श्रद्धा और परिश्रम की कमाई मंदिर निर्माण के लिए समर्पित की है। इन याचिकाओं के माध्यम से मांग की गई है कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में मिले सभी चढ़ावों से संबंधित जानकारी, साथ ही संबंधित सीसीटीवी फुटेज, दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों को पूर्णतः सुरक्षित रखा जाए, ताकि हर एक पैसे का हिसाब सुनिश्चित हो सके और किसी भी प्रकार के संदेह के लिए कोई गुंजाइश न बचे। यह सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है कि मंदिर निर्माण का पवित्र कार्य किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता के आरोपों से मुक्त रहे और जनता का विश्वास अक्षुण्ण बना रहे। इन कानूनी प्रयासों का उद्देश्य केवल कथित अनियमितताओं की जांच करना ही नहीं, बल्कि भविष्य के लिए एक पारदर्शी और जवाबदेह प्रणाली स्थापित करना भी है।

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IND vs IRE: आधा दर्जन खिलाड़ी चोटिल... नए कप्तान के साथ भारत से भिड़ेगा आयरलैंड, टी20 सीरीज के लिए टीम का किया ऐलान

Ireland team for t20 series against india: आयरलैंड के 6 नियमित खिलाड़ी भारत के खिलाफ दो टी20 मैचों की सीरीज में नहीं खेल पाएंगे, जिनमें सबसे अनुभवी पॉल स्टर्लिंग भी शामिल हैं. लोर्कन टकर को इस आगामी सीरीज के लिए आयरलैंड टीम का कप्तान बनाया गया है. 14 सदस्यीय टीम में कई नए चेहरे भी शामिल हैं. Mon, 22 Jun 2026 22:10:32 +0530

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