वर्किंग वुमन के लिए आए गोल्ड मंगलसूत्र के ऐसे डिजाइन, नजरें नहीं हटेंगी
Gold Chain Mangalsutra Designs: वर्किंग महिलाओं के लिए आजकल मिनिमल और हल्के गोल्ड मंगलसूत्र काफी पसंद किए जा रहे हैं। ये डायमंड टच, ज्योमेट्रिक पेंडेंट, लेयर्ड चेन और मिनिमल ब्लैक बीड्स वाले मंगलसूत्र पारंपरिक और मॉडर्न लुक का शानदार मेल पेश करते हैं।
OTT Thriller Movies: 'रमन राघव 2.0' से लेकर 'द स्टोनमैन मर्डर्स' तक, सीरियल कीलर्स की वो कहानियां जो हिला देगी दिमाग
By shristi jha
OTT Thriller Movies: ओटीटी के दौर में क्राइम और थ्रिलर कंटेंट की पॉपुलैरिटी लगातार बढ़ रही है. दर्शक अब सिर्फ एंटरटेनमेंट नहीं, बल्कि ऐसी कहानियां भी देखना चाहते हैं जो उन्हें सोचने पर मजबूर कर दें. खासकर सीरियल किलर्स पर आधारित फिल्में और सीरीज हमेशा से लोगों की एक्साइटेड करती हैं. इन कहानियों में जुर्म, साइकोलॉजी, जांच और सब कुछ होता है. जिससे दर्शक लंबे समय तक अपना पीछा नहीं छोड़तीं. अगर आपने हाल ही में रिलीज हुई 'राख' जैसी डार्क और सस्पेंस से भरी कहानी देखी है और अब उससे भी ज्यादा खौफनाक और रोमांचक कंटेंट की तलाश में हैं, तो ओटीटी पर मौजूद कुछ ऐसी फिल्में और सीरीज हैं जो आपको आखिरी मिनट तक बांधे रखेंगी. इनमें कई कहानियां एक्चुअल घटनाओं और कुख्यात सीरियल किलर्स से प्रेरित हैं.
यह भी पढ़ें: 'लव एंड वॉर' के सेट पर इस शख्स की हुई मौत, अब लाखों रुपये देकर मदद करेंगे संजय लीला भंसाली
रमन राघव 2.0 (Raman Raghav 2.0)
अनुराग कश्यप के डायरेक्टिंग में बनी 'रमन राघव 2.0 बॉलीवुड मूवीज की सबसे डार्क साइकोलॉजिकल थ्रिलर फिल्मों में गिनी जाती है. फिल्म 1960 के दशक के इन्फमोउस सीरियल किलर रमन राघव से प्रेरित है, जिसने मुंबई में कई हत्याओं को अंजाम दिया था. नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने फिल्म में जिस तरह एक मेंटली उन्स्टेबल से बिगड़ा हुआ हत्यारे का किरदार निभाया है, वह दर्शकों को असहज कर देता है. फिल्म सिर्फ हत्याओं की कहानी नहीं है, बल्कि अपराधी के दिमाग के भीतर झांकने की कोशिश भी करती है. यही वजह है कि यह फिल्म आज भी थ्रिलर प्रेमियों की पसंदीदा सूची में शामिल है.
'द स्टोनमैन मर्डर्स' (The Stoneman Murders)
'द स्टोनमैन मर्डर्स' उन मिस्ट्रियस हत्याओं पर आधारित है जिन्होंने 1980 के दशक में मुंबई को दहला दिया था. फुटपाथ पर सोने वाले लोगों की एक-एक कर हत्या की जा रही थी और पुलिस के पास कोई ठोस सुराग नहीं था. फिल्म में 'केके मेनन' ने एक पुलिस अधिकारी की भूमिका निभाई है जो इस रहस्य को सुलझाने की कोशिश करता है. कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि प्रेजेंट जीवन में भी स्टोनमैन की पहचान कभी पूरी तरह साबित नहीं हो सकी. यही अनसुलझा रहस्य फिल्म को और भी डरावना बना देता है.
'ऑटो शंकर' (Auto Shankar)
अगर आप वेब सीरीज देखना पसंद करते हैं, तो ऑटो शंकर आपके लिए एक बेहतरीन ऑप्शन हो सकती है. यह सीरीज तमिलनाडु के इन्फमोउस अपराधी गौरी शंकर उर्फ 'ऑटो शंकर' की कहानी पर आधारित है. 1980 के दशक में ऑटो शंकर पर कई हत्याओं और आपराधिक गतिविधियों के आरोप लगे थे. सीरीज उसके अपराध की दुनिया, राजनीतिक संबंधों और पुलिस जांच को बेहद रोचक तरीके से पेश करती है. जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, दर्शक अपराध और सत्ता के खतरनाक गठजोड़ को करीब से महसूस करते हैं.
'सायनाइड' (Cyanide)
'सायनाइड' एक ऐसी फिल्म है जिसे देखने के बाद लंबे समय तक उसका असर बना रहता है. यह फिल्म राजीव गांधी हत्याकांड के बाद की घटनाओं से प्रेरित मानी जाती है और उन लोगों की कहानी दिखाती है जो गिरफ्तारी से बचने के लिए सायनाइड का इस्तेमाल करते हैं. फिल्म का माहौल, तनाव और वास्तविक घटनाओं से जुड़ाव इसे बेहद प्रभावशाली बनाता है. यह सिर्फ एक क्राइम ड्रामा नहीं बल्कि उस दौर की राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों की झलक भी पेश करती है.
'संघर्ष' (Sangharsh)
1999 में रिलीज हुई 'संघर्ष' आज भी बॉलीवुड की सबसे यादगार थ्रिलर फिल्मों में गिनी जाती है. अक्षय कुमार, प्रीति जिंटा और आशुतोष राणा अभिनीत इस फिल्म में एक ऐसे सीरियल किलर की कहानी दिखाई गई है जो बच्चों का किडनैप कर उनकी बलि देता है. फिल्म में आशुतोष राणा का प्रदर्शन आज भी हिंदी सिनेमा के सबसे डरावने विलेन किरदारों में गिना जाता है. उनकी स्क्रीन प्रेजेंस और किरदार की भयावहता दर्शकों को अंदर तक झकझोर देती है.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
Asianetnews
News Nation



















