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Explainer: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपनी कथित ‘भविष्यवाणी’ को लेकर चर्चा में हैं. दरअसल कई मौकों पर ट्रंप दुनिया को पहले ही आने वाली घटना से अवगत कराते रहे हैं. इसके पीछे उनकी सोची समझी रणनीति है या फिर कुछ और लेकिन एक बार फिर उनकी कही बात सच साबित हुई है. दरअसल 21 जून 2026 को ट्रंप ने संकेत दिया कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर जल्द पद छोड़ सकते हैं.
बस उनके कहने के अगले 24 घंटे में ही ब्रिटेन के पीएम कीर स्टार्मर ने इस्तीफे का ऐलान कर दिया. ट्रंप की बात एक बार फिर पुख्ता हो गई. लेकिन अब सवाल उठ रहा है कि आखिर ट्रंप इस तरह की भविष्यवाणी कर कैसे देते हैं. क्या वाकई उनका नेटवर्क और उस अनुभव इतना जबरदस्त है कि आने वाले घटनाओं की सटीक जानकारी दे देता है. आइए समझते हैं...
पहले भी कर चुके हैं भविष्यवाणियां
ये पहला मौका नहीं है जब यूएस राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कोई भविष्यवाणी की हो और सही साबित हुई है. इससे पहले भी भारत-पाकिस्तान संघर्षविराम, ईरान से समझौते और कई अंतरराष्ट्रीय घटनाओं को लेकर ट्रंप ऐसे दावे करते रहे हैं, जिनके बाद दुनिया भर में यह सवाल उठता है कि आखिर उन्हें घटनाओं की जानकारी पहले कैसे मिल जाती है?
क्या है कहते हैं राजनीतिक विश्वेशक
ट्रंप के इस तरह की भविष्यवाणियों को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों का क्या माना है तो बता दें कि जानकारों के मुताबिक यह किसी रहस्यमयी भविष्यवाणी का मामला नहीं, बल्कि एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति है.
भारत-पाकिस्तान संघर्षविराम पर ट्रंप का दावा
बता दें कि मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया था. चार दिनों तक चली सैन्य गतिविधियों के बाद दोनों देशों ने संघर्षविराम की घोषणा की। उसी दिन ट्रंप ने दावा किया कि यह समझौता अमेरिका की मध्यस्थता से संभव हुआ.
इसके बाद उन्होंने कई मंचों पर बार-बार यही बात दोहराई. लेकिन भारत सरकार ने लगातार इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि संघर्षविराम दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच सीधे संवाद का परिणाम था और इसमें किसी तीसरे पक्ष की भूमिका नहीं थी. इसके बावजूद ट्रंप ने इस दावे को अपनी कूटनीतिक सफलता के रूप में प्रस्तुत किया.
ईरान समझौते की बार-बार घोषणा
ट्रंप ने ईरान को लेकर भी कई बार दावा किया कि दोनों देशों के बीच बड़ा समझौता होने वाला है. मार्च 2026 से लेकर कई महीनों तक उन्होंने बार-बार कहा कि डील "कुछ ही दिनों" दूर है. हालांकि लंबे समय तक कोई औपचारिक समझौता सामने नहीं आया. इससे आलोचकों ने सवाल उठाया कि क्या ट्रंप वास्तविक घटनाओं की जानकारी साझा कर रहे थे या फिर राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश कर रहे थे.
विशेषज्ञों के अनुसार, कई बार ट्रंप संभावित घटनाओं को पहले सार्वजनिक कर देते हैं ताकि उन पर दबाव बने और बातचीत उनकी इच्छानुसार आगे बढ़े.
कीर स्टार्मर का इस्तीफा और नई बहस
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर लंबे समय से राजनीतिक दबाव का सामना कर रहे थे. उनकी लोकप्रियता लगातार गिर रही थी और ब्रिटिश मीडिया में उनके भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज थीं. ऐसे माहौल में ट्रंप ने सोशल मीडिया पर स्टार्मर के इस्तीफे की बात कही. जब अगले ही दिन इस्तीफा सामने आया तो उनके समर्थकों ने इसे ट्रंप की दूरदर्शिता बताया.
लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह कोई गुप्त जानकारी नहीं थी. ब्रिटेन के प्रमुख समाचार पत्रों और राजनीतिक गलियारों में पहले से ही इस संभावना पर चर्चा हो रही थी. ट्रंप ने केवल उस माहौल को भांपते हुए खुद को कहानी के केंद्र में स्थापित कर लिया.
‘मैडमैन थ्योरी’ क्या है?
ट्रंप की राजनीति को समझने के लिए अक्सर Madman Theory का उल्लेख किया जाता है. इस सिद्धांत के अनुसार कोई नेता खुद को इतना अप्रत्याशित और आक्रामक दिखाता है कि विरोधी उसकी अगली चाल का अनुमान न लगा सके. इससे सामने वाला पक्ष दबाव में आ जाता है और समझौते के लिए तैयार हो सकता है. ट्रंप कई बार सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि किसी को नहीं पता होता कि वह अगला कदम क्या उठाने वाले हैं. यही अनिश्चितता उनकी राजनीतिक शैली का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है.
पहले डराओ, फिर समझौता करो
ट्रंप की एक और रणनीति को 'Escalate to De-escalate' कहा जाता है. इसमें पहले स्थिति को बेहद गंभीर बताया जाता है, कड़े बयान दिए जाते हैं और फिर समाधान प्रस्तुत किया जाता है. ईरान के मामले में भी उन्होंने पहले सख्त चेतावनियां दीं और बाद में बातचीत की संभावनाओं की बात की. ट्रंप ने सबसे पहले यह चेतावनी दी थी कि सभ्यता ही खत्म हो जाएगी. हालांकि ऐसा कुछ भी नहीं किया. विश्लेषकों का मानना है कि यह तरीका उन्हें एक मजबूत और निर्णायक नेता की छवि बनाने में मदद करता है.
मीडिया एजेंडा सेट करने की कला
ट्रंप की सबसे बड़ी राजनीतिक ताकतों में से एक है मीडिया का ध्यान अपनी ओर खींचना. जब कोई बड़ा नेता किसी महत्वपूर्ण घटना की भविष्यवाणी करता है, तो मीडिया उसे व्यापक कवरेज देता है. चाहे भविष्यवाणी सही साबित हो या नहीं, चर्चा का केंद्र वही व्यक्ति बन जाता है जिसने दावा किया था. यही कारण है कि ट्रंप अक्सर ऐसी बातें कहते हैं जो सुर्खियां बन सकें. इससे उनके समर्थकों के बीच उनकी प्रभावशाली छवि और मजबूत होती है.
क्या ट्रंप को सचमुच पहले से जानकारी मिलती है?
इस सवाल का सीधा जवाब है कुछ मामलों में हां, लेकिन उतना नहीं जितना उनके समर्थक मानते हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति होने के नाते ट्रंप को दुनिया की सबसे शक्तिशाली खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट्स मिलती हैं. अमेरिका के पास वैश्विक राजनीतिक घटनाओं पर व्यापक जानकारी होती है. ऐसे में कई बार उन्हें संभावित घटनाओं का संकेत पहले मिल सकता है.
इसके अलावा राजनयिक संपर्क, मीडिया रिपोर्ट्स, राजनीतिक अफवाहें और आंतरिक सूत्र भी ऐसी जानकारियां उपलब्ध कराते हैं जो आम जनता तक बाद में पहुंचती हैं.
भविष्यवाणी नहीं, राजनीतिक सिस्टम
असल में ट्रंप की कथित भविष्यवाणियां किसी जादुई क्षमता का परिणाम नहीं हैं. यह खुफिया सूचनाओं, राजनीतिक संकेतों, मीडिया नैरेटिव और रणनीतिक संचार का मिश्रण है. उनकी शैली का उद्देश्य केवल भविष्य बताना नहीं, बल्कि घटनाओं की दिशा और चर्चा दोनों को प्रभावित करना होता है. यही वजह है कि कई बार उनकी बातें सच होती दिखाई देती हैं और कई बार केवल राजनीतिक संदेश बनकर रह जाती हैं.
डोनाल्ड ट्रंप को लेकर यह धारणा जरूर बन गई है कि उन्हें घटनाओं की जानकारी पहले मिल जाती है, लेकिन वास्तविकता इससे कहीं अधिक जटिल है. उनकी कथित भविष्यवाणियां दरअसल एक राजनीतिक उपकरण हैं, जिनके जरिए वे खुद को वैश्विक घटनाओं के केंद्र में रखते हैं. यही रणनीति उन्हें समर्थकों के लिए एक शक्तिशाली नेता और आलोचकों के लिए एक कुशल राजनीतिक नैरेटिव-निर्माता बनाती है.
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