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Sona Mohapatra: सोना मोहापात्रा ने बॉलीवुड पर उठाए सवाल, बोलीं- हार्टब्रेक गाने सिर्फ पुरुषों के लिए क्यों?

Sona Mohapatra: सिंगर सोना मोहापात्रा एक बार फिर अपने बेबाक अंदाज को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने बॉलीवुड म्यूजिक इंडस्ट्री में महिला गायकों की भूमिका को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका मानना है कि फिल्मों में प्यार, जुदाई और दिल टूटने जैसी भावनाओं को ज्यादातर पुरुष आवाजों के जरिए पेश किया जाता है, जबकि महिलाओं के नजरिए को धीरे-धीरे पीछे कर दिया गया है।

डुएट गानों को लेकर जताई नाराजगी
हाल ही में एक बातचीत के दौरान सोना ने बताया कि कई बार उन्हें डुएट गानों में सिर्फ औपचारिक मौजूदगी तक सीमित कर दिया जाता है। उनका कहना है कि गाने का मुख्य हिस्सा पुरुष गायक के पास होता है और महिला आवाज आखिर में कुछ लाइनों तक सिमट जाती है।

'जालिमा' का जिक्र कर कही बात

अपनी बात समझाने के लिए सोना ने फिल्म 'रईस' का गाना 'जालिमा' का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने इस गाने की संरचना देखी तो उन्हें हैरानी हुई। उनके मुताबिक, गाने में पुरुष किरदार की भावनाओं को विस्तार से दिखाया गया, जबकि महिला पक्ष को बहुत कम जगह मिली।

सोना ने मजाकिया लहजे में कहा कि उन्होंने संगीतकार से पूछा था कि अगर पूरी कहानी एक ही किरदार की भावनाओं के इर्द-गिर्द घूम रही है, तो इसे डुएट क्यों कहा जा रहा है।

अरिजीत सिंह को नहीं ठहराया जिम्मेदार
सोना ने स्पष्ट किया कि उनका इशारा किसी कलाकार की ओर नहीं है। उन्होंने अरिजीत सिंह की तारीफ करते हुए कहा कि वह बेहतरीन गायक हैं। उनकी आपत्ति उस सोच और व्यवस्था से है, जो लंबे समय से पुरुष-केंद्रित गानों को प्राथमिकता देती आई है।

महिला सितारों पर भी पड़ रहा असर
सोना का मानना है कि जब फिल्मों और गानों में महिलाओं की भावनाओं, संघर्षों और नजरिए को कम जगह मिलेगी, तो नई पीढ़ी की महिला गायिकाओं और कलाकारों के लिए भी मजबूत पहचान बनाना मुश्किल होगा। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ संगीत का नहीं, बल्कि प्रतिनिधित्व का भी मुद्दा है। दर्शकों तक वही कहानियां पहुंचती हैं जिन्हें इंडस्ट्री चुनती है।

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  Sports

ICC ने महिला क्रिकेटरों के लिए जारी कीं Return to Play Guidelines, अब मातृत्व और करियर साथ-साथ

इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने सोमवार को 'प्रेग्नेंसी के बाद खेल में वापसी' (Return to Play Post-Pregnancy) से जुड़ी गाइडलाइंस जारी कीं। ये गाइडलाइंस महिला क्रिकेटरों, मेंबर बोर्ड और मेडिकल स्टाफ़ को एक व्यवस्थित रूपरेखा (स्ट्रक्चर्ड फ़्रेमवर्क) देती हैं, ताकि बच्चे के जन्म के बाद कॉम्पिटिटिव क्रिकेट में लौटने वाली खिलाड़ियों की मदद की जा सके। ICC की व्यापक '100% क्रिकेट' पहल के तहत शुरू की गई इन गाइडलाइंस का मकसद यह पक्का करना है कि मातृत्व और प्रोफ़ेशनल क्रिकेट को एक-दूसरे के विरोधी के तौर पर न देखा जाए, और साथ ही खेल में महिलाओं की सेहत से जुड़े मुद्दों पर खुलकर बातचीत को बढ़ावा दिया जाए।
 

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इस फ़्रेमवर्क के केंद्र में छह चरणों वाला एक तरीका है जिसे ‘6 Rs’ कहा जाता है – रेडी (तैयार होना), रिव्यू (समीक्षा), रिस्टोर (बहाली), रीकंडीशन (फिर से कंडीशनिंग), रिटर्न (वापसी) और रिफ़ाइन (बेहतर बनाना)। यह मॉडल एक विस्तृत प्रक्रिया बताता है जिसमें शारीरिक रिकवरी, मेडिकल जांच, धीरे-धीरे ट्रेनिंग का बोझ बढ़ाना, क्रिकेट के हिसाब से कंडीशनिंग, खेल में वापसी के नियम और प्रतियोगिता शुरू होने के बाद लगातार निगरानी शामिल है।

यह पहल ऐसे समय में की गई है जब कई बेहतरीन महिला क्रिकेटर अपने खेल करियर के दौरान ही परिवार शुरू करने का फ़ैसला कर रही हैं और बाद में इंटरनेशनल कॉम्पिटिशन में वापसी कर रही हैं। इससे साफ़ और सबूतों पर आधारित सपोर्ट सिस्टम की ज़रूरत का पता चलता है। ऑस्ट्रेलिया टीम की डॉक्टर फ़िलिपा इंगे, जो ICC मेडिकल एडवाइज़री कमिटी की सदस्य भी हैं, ने कहा कि इन गाइडलाइंस का मकसद खिलाड़ियों को माँ बनने के बाद भी अपना करियर जारी रखने में मदद करना है।
 

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इंगे ने कहा कि ICC की 'प्रेग्नेंसी के बाद खेल में वापसी' (Return to Play Post-Pregnancy) गाइडलाइंस का मकसद खिलाड़ियों को यह दिखाना है कि बच्चा होने का मतलब उनके करियर का अंत नहीं है। इस पॉलिसी के ज़रिए हमारा मकसद सदस्य देशों को अपने खिलाड़ियों की क्रिकेट में वापसी में मदद करने के लिए ज़रूरी सुविधाएँ उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि हम जानते हैं कि कई सदस्य देशों के पास पहले ऐसी व्यवस्थाएँ नहीं थीं। हमारा मकसद इन्हें इस तरह से बनाना रहा है कि सदस्य देश अपनी खास परिस्थितियों के हिसाब से इन्हें अपना सकें।
 
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Mon, 22 Jun 2026 17:57:58 +0530

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