Explainer: भगवान विष्णु को कब और कैसे मिला था सुदर्शन चक्र? जानिए यह कितना शक्तिशाली है
Lord Vishnu & Sudarshan Chakra: भगवान विष्णु जगत के पालनहार कहे जाते हैं. एकादशी और गुरुवार के दिन भगवान विष्णु को समर्पित किया गया है. इन दिनों में भगवान विष्णु का व्रत और विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. शास्त्रों और पुराणों में एकादशी व्रत को मोक्ष प्रदान करने वाला व्रत माना गया है. धार्मिक मान्यता है कि एकादशी का व्रत करने व्यक्ति को मृत्यु के बाद मोक्ष में स्थान प्राप्त होता है. श्री हरि के पास 4 मुख्य अस्त्र हैं जिन्हें वे अपनी चार भुजाओं में धारण करते हैं. इसमें सबसे पहला सुदर्शन चक्र, दूसरा कौमोदकी गदा, तीसरा पाञ्चजन्य शंख और तलवार (नंदन) शामिल है. सुदर्शन चक्र को संसार का सबसे शक्तिशाली अस्त्र माना जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान विष्णु को सुदर्शन चक्र किसी और ने नहीं, बल्कि स्वयं महादेव ने दिया था. इसके लिए विष्णु जी को महादेव की आराधना करनी पड़ी थी. यहीं नहीं उन्होंने अपनी 1 आंख तक त्याग दी थी. आइए जानते हैं इसके पीछे की रोचक कथा.
असुरों से परेशान थे देवता गण
पौराणिक कथा के अनुसार, बहुत समय पहले की बात है जब एक बार असुरों का देवताओं पर अत्याचार बढ़ गया. देत्य इतने शक्तिशाली हो गए कि देवताओं के लिए उन्हें पराजित करना असंभव हो गया था. देवगण जगत के पालनहार भगवान विष्णु के पास पहुंचे. उन्होंने कहा हे प्रभु हमारी रक्षा कीजिए. असूरों का बल दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है. देवगण की यह बात सुनकर श्री हरि चिंतित हो गए. वे जानते थे कि इस संकट का समाधान केवल भगवान शिव के आशीर्वाद से ही संभव है. तब भगवान विष्णु कैलाश पर्वत की और प्रस्थान कर गए. उन्होंने निश्चय किया की वो भगवान शिव को प्रसन्न करेंगे.
भगवान विष्णु ने एकत्र किए 1000 कमल
तभी उन्होंने एक पवित्र स्थान पर एक शिलविंग की स्थापना की और भगवान शिव के सहस्त्र नामों का जाप प्रारंभ किया. विष्णु जी ने संकल्प लिया में शिव जी के प्रत्येक नाम के साथ एक कमल फूल अर्पित करूंगा. उन्होंने 1000 कमल एकत्र किए और सहस्त्र नाम का पाठ शुरू किया. एक-एक नाम के साथ एक-एक कमल अर्पित होता गया. ओम शिवाय नम: एक कमल ओम महेश्वराय नम: एक कमल. ओम शंभवे नम: एक कमल. इस प्रकार पूजा चलती रही.
जब विष्णु जी ने कमल की जगह चढ़ा दी अपनी आंख
तभी भगवान शिव अपने भक्त की परीक्षा लेने यह सब देख रहे थे. जब सहस्त्र नाम का अंतिम चरण आया तब देवों के देव महादेव ने अपने माया से एक कमल पुष्प छिपा दिया. अब विष्णु जी के सामने समस्या खड़ी हो गई. एक नाम शेष था लेकिन कमल केवल 999 थे. एक कमल था. विष्णु जी को कमल नयन कहा जाता है क्योंकि उनकी आंखें कमल के सम्मान सुंदर मानी जाती है. उन्होंने कुछ पल इंतजार किया फिर मुस्कुराए और बोले यदि एक कमल कम है तो में अपना एक नेत्र अर्पित कर देता हूं. उन्होंने अपनी आंख निकालकर भगवान शिव को अर्पित करने का निर्णय लिया.
भगवान विष्णु को कैसे मिला सुदर्शन चक्र?
जैसे ही वे अपना नेत्र अर्पित करने ही वाले थे उसी समय पूरा ब्रह्मांड दिव्य प्रकाश से भर गया. भगवान शिव स्वयं प्रकट हो गए. उनके चेहरे पर प्रसन्नता थी . उन्होंने भगवान विष्णु जी का हाथ पकड़ लिया और कहा वत्स विष्णु में तुम्हारी भक्ति से अत्यंत प्रसन्न हूं. में केवल तुम्हारी परीक्षा ले रहा था. तुमने शिद्ध कर दिया कि सच्ची भक्ति में अहंकार नहीं होता. सच्चा भक्त अपने आराध्य के लिए सब कुछ अर्पित कर देता है. भगवान शिव ने विष्णु जी को वरदान दिया और अपने तेज से निर्मित दिव्य सुदर्शन चक्र उन्हें प्रदान किया.
यही कारण है कि भगवान विष्णु का नाम कमल नयन पड़ा. कहते हैं कि शिव ने ऐसा भगवान विष्णु की परीक्षा लेने के लिए किया. कहते हैं कि इसके बाद ही शिव ने भगवान विष्णु को तीनों लोगों के पालन की जिम्मेदारी सौंपी. साथ ही शिव ने भगवान विष्णु को सुदर्शन चक्र प्रदान किया. जिसके बाद विष्णुजी ने सुदर्शन चक्र से असुरों का संहार कर देवताओं को सुख प्रदान किया.
सुदर्शन चक्र का निर्माण किसने किया?
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, सुदर्शन चक्र का निर्माण देवताओं के दिव्य शिल्पी भगवान विश्वकर्मा ने किया था. उन्होंने सूर्य देव के अत्यधिक तेज (ऊर्जा) को कम करके उससे निकले अवशेष से सुदर्शन चक्र, भगवान शिव का त्रिशूल और पुष्पक विमान का निर्माण किया था. इसके अलावा, कुछ धर्मग्रंथों (जैसे शिव पुराण) में यह भी उल्लेख है कि इस चक्र की रचना स्वयं भगवान शिव ने की थी और बाद में इसे भगवान विष्णु को सौंप दिया था. वाल्मीकि रामायण के अनुसार, भगवान विष्णु ने विश्वकर्मा द्वारा बनाए गए चक्रवण पर्वत पर हयग्रीव नामक राक्षस को मारकर यह चक्र प्राप्त किया था.
भगवान विष्णु के सोते समय दुनिया को कौन चलाता है?
हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा (चातुर्मास) में जाते हैं, तो सृष्टि के संचालन और पालन-पोषण की जिम्मेदारी भगवान शिव और माता लक्ष्मी संभालते हैं. इस दौरान होने वाली व्यवस्था मुख्य रूप से इन आधारों पर चलती है. भगवान विष्णु लगभग 8 महीनों तक ब्रह्मांड के सुचारू संचालन का ध्यान रखते हैं, लेकिन बाकी 4 महीनों की देखभाल की भी आवश्यकता होती है. 'चातुर्मास', जो भगवान विष्णु के विश्राम काल का प्रतीक है, इसी दौरान आता है; ब्रह्मांड का सुचारू संचालन महत्वपूर्ण है, इसलिए सृष्टि, पालन और संहार के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए अन्य देवता अलग-अलग समय-सीमाओं में मानवता की देखभाल का दायित्व संभालते हैं.
सुदर्शन चक्र कहाँ गिरा था?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र उत्तर प्रदेश के नैमिषारण्य (सीतापुर जिले में गोमती नदी के तट पर) में गिरा था. जब ब्रह्मा जी का मनोमय चक्र ऋषि-मुनियों को तपस्या के लिए स्थान खोजने हेतु छोड़ा गया था, तब वह नैमिषारण्य में आकर गिरा और भूमि में प्रवेश कर गया. इस स्थान पर आज एक पवित्र कुंड है जिसे चक्रतीर्थ कहा जाता है. अन्य पौराणिक कथाओं (जैसे कृष्ण लीला या देवी सती के प्रसंग) में सुदर्शन चक्र के गिरने या धरती में समाने का स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता; ये माना जाता है कि कृष्ण के अंतर्धान होने के बाद चक्र अपने दिव्य लोक लौट गया.
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