महाराष्ट्र विधान परिषद (MLC) चुनावों में सत्ताधारी महायुति गठबंधन ने शानदार जीत हासिल की और राज्य भर में हुई 17 सीटों के चुनाव में से 16 सीटें अपने नाम कीं। इन नतीजों से महाराष्ट्र की राजनीति पर BJP के नेतृत्व वाले गठबंधन की पकड़ और मजबूत हो गई है। वोटिंग से पहले ही महायुति के कई उम्मीदवार निर्विरोध चुने जा चुके थे, जिससे गठबंधन को काफी बढ़त मिल गई थी। बाकी सीटों पर भी गठबंधन का दबदबा कायम रहा और विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA) के हाथ सिर्फ़ एक सीट लगी।
महायुति को एकमात्र झटका नासिक में लगा, जहाँ भाजपा के बागी उम्मीदवार गोकुल गीते ने गठबंधन समर्थित शिवसेना उम्मीदवार नरेंद्र दराडे को हरा दिया। इससे पता चलता है कि गठबंधन की कुल सफलता के बावजूद, अंदरूनी मतभेद की कुछ जगहें अभी भी मौजूद हैं। इस नतीजे को आने वाले स्थानीय निकाय चुनावों से पहले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और महायुति नेतृत्व के लिए एक बड़ी बढ़त के तौर पर देखा जा रहा है, जबकि विपक्ष के लिए अपनी संगठनात्मक ताकत और चुनावी रणनीति को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं।
मतदान शुरू होने से पहले ही महायुति को बढ़त मिल गई थी, क्योंकि चुनाव से पहले उसके छह उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए थे। नांदेड़, नागपुर, भंडारा-गोंदिया, छत्रपति संभाजीनगर-जालना, परभणी-हिंगोली, जलगांव, सांगली-सतारा, नासिक, सोलापुर, धाराशिव-लातूर-बीड और अमरावती सहित 11 निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान हुआ। महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में नासिक सीट से बीजेपी के बागी उम्मीदवार गोकुल गीते ने जीत हासिल की। उन्होंने शिवसेना के उम्मीदवार नरेंद्र दराडे को हराया। चुनाव अधिकारियों के मुताबिक, गीते को 357 वोट मिले, जबकि दराडे को 248 वोट ही मिल पाए।
इस नतीजे ने कई राजनीतिक जानकारों को चौंका दिया, क्योंकि उम्मीद की जा रही थी कि शिवसेना का उम्मीदवार चुनाव में कड़ी टक्कर देगा। हालांकि, गीते ने अपने प्रतिद्वंद्वी को पीछे छोड़ते हुए आसानी से जीत दर्ज की।
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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर पूरी दुनिया की नजरें कोलकाता पर थी। पीएम मोदी योग कर रहे थे। हजारों लोग उनके साथ थे और पूरी दुनिया भारत की शांति और संस्कृति की ताकत देख रही थी। मगर दूसरी तरफ बंगाल की खाड़ी में ऐसा खेल शुरू हो चुका था जिसकी भनक तक दुनिया को नहीं थी। कहते हैं शांति की बात वही करता है जिसके पास शक्ति होती है और योग दिवस पर भारत ने यही करके दिखाया। जिस वक्त कोलकाता में योग चल रहा था उसी वक्त बंगाल की खाड़ी में भारत ने एक ऐसा कदम उठाया जिसकी गूंज इस्लामाबाद और बीजिंग तक सुनाई दी और वहां हलचल मच गई। एक तरफ योग का मंच था तो दूसरी तरफ समुद्र में शक्ति प्रदर्शन। एक तरफ पीएम मोदी थे तो दूसरी तरफ भारत के तीन युद्धपोत।
जब यह तीनों नए युद्धपोत बंगाल की खाड़ी में उतरे तो संदेश सिर्फ समुद्र तक सीमित नहीं रहा बल्कि यह साफ हो गया कि भारत शांति चाहता है लेकिन अपनी सुरक्षा और सामरिक हितों से कोई समझौता नहीं करेगा। दरअसल हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी में रणनीतिक कंपटीशन तेजी से बढ़ रहा है। चीन लगातार अपनी नौसैनिक मौजूदगी यहां बढ़ा रहा है और पाकिस्तान भी चीनी सहयोग से समुद्री ताकत को मजबूत कर रहा है। इसी माहौल में भारत ने एक साफ संदेश दिया है। हिंद महासागर में उसकी स्थिति किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में तीन नए स्वदेशी युद्धपोत भारतीय नौसेना में शामिल किए गए आईएएस दूनागिरी आईएएस अग्रय और आईएएस संशोधक और यह सिर्फ जहाज नहीं है। यह भारत की बदलती समुद्री रणनीति की एक साफ झलक है। सबसे पहले बात करते हैं आईएएस दूनागिरी की। यह एक स्टिल्थ फ्रिगेट है। यानी एक ऐसा युद्धपोत जिसे दुश्मन के रडार पर पकड़ना बेहद मुश्किल है। इसकी मारक क्षमता इसे और भी ज्यादा खतरनाक बनाती है। आधुनिक हथियार प्रणाली और ब्रह्मोस जैसी सुपरसोनिक क्षमता के साथ यह दुश्मन के लिए बड़ा खतरा बन गई है। लेकिन अगर आपको लगता है कि यही सबसे खतरनाक युद्धपोत है तो जरा रुकिए। आईएएस संशोधक जहाज समुद्र की गहराइयों में छिपी जानकारी जुटाता है।
यह हर भारतीय नौसेना की आंख और कान है और अब आते हैं उस जहाज पर जिसकी वजह से पाकिस्तान की पनडुपियों की नींद उड़ सकती है। आईएएस अग्रे यह एंटी सबमरीन वॉरफेयरशिप है। मतलब साफ है अगर कोई दुश्मन पनडुपी समुद्र में छिपने की कोशिश करे तो उसे खोज कर खत्म करने की क्षमता इसी प्लेटफार्म में है। यानी दुश्मन चाहे सतह पर दिखे या समुद्र की गहराइयों में छिप जाए। भारतीय नौसेना ने दोनों के लिए इंतजाम पहले ही कर रखे हैं और यह सिर्फ शुरुआत है। आज भारतीय नौसेना के पास 140 से ज्यादा सक्रिय युद्धपोत है जो हिंद महासागर से लेकर बंगाल की खाड़ी तक लगातार निगरानी और सुरक्षा में तैनात रहते हैं। यानी तस्वीर बिल्कुल साफ है। भारत योग भी करता है और जरूरत पड़े तो समुद्र में शक्ति प्रदर्शन भी कर सकता है। शांति उसका संदेश है। लेकिन सुरक्षा उसकी नीति है।
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