देश की राजधानी दिल्ली के कपल्स के वीडियो आए दिन वायरल (Delhi Couple Video Viral) होते रहते हैं। कभी कपल्स मेट्रो में रोमांस करते नजर आते हैं, तो वहीं सड़कों पर। लेकिन, रोहिणी वेस्ट मेट्रो स्टेशन के पास स्थित जापानी पार्क से ऐसा वीडियो वायरल (Japanese Park Viral Video) हुआ है, जिसे देखकर आप भी भड़क जाएंगे। दरअसल, इस वीडियो में एक शख्स अपनी कथित प्रेमिका पर थप्पड़ों की बरसात करता दिखाई देता है। वायरल वीडियो में दावा किया गया है कि वह अपनी प्रेमिका पर 3-4 नहीं बल्कि 30-40 थप्पड़ जड़ देता है। इस वायरल वीडियो पर न केवल दिल्ली के रहने वाले बल्कि बाहरी राज्यों में रहने वाले यूजर्स की भी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ यूजर्स ऐसे हैं, जो राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसे कथित तौर पर स्वर्ण जयंती पार्क यानी जापानी पार्क का बताया जा रहा है। यह वीडियो किसी राहगीर ने बनाया है। इस वीडियो में एक जोड़ा बैंच पर बैठा दिखाई देता है। अचानक शख्स अपनी प्रेमिका को थप्पड़ जड़ देता है। इसके बाद वह उठता है और उसके बाद फिर से चिल्लाता और थप्पड़ मारता दिखाई देता है।
किसी ने नहीं किया लड़की का बचाव
जापानी पार्क में लोगों की चहल पहल रहती है। इस दृश्य को कई लोगों ने लाइव देखा होगा, लेकिन किसी ने भी विरोध करने की हिम्मत नहीं की। खास बात है कि महिला भी अपने बचाव में कुछ भी नहीं करती और उसकी मार झेलती रहती है। इस वायरल वीडियो को देख यूजर्स की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। प्रतिक्रियाएं जानने से पहले देखिये दिल्ली के इस जोड़े का वायरल वीडियो
Shocking Visuals at a Park in Delhi of Toxic Couple arguing. Man slaps his Girlfriend repeatedly. According to Guy recording the video, the Man had already slapped her 30-40 times before he recorded the video. pic.twitter.com/gH1Hdr8riP
एक्स यूजर रोजी ने इस वीडियो को शेयर किया है। उन्होंने कैप्शन में लिखा कि दिल्ली के एक पार्क में झगड़ा करते एक दंपत्ति के चौंकाने वाले दृश्य सामने आया है। आदमी अपनी प्रेमिका को बार-बार थप्पड़ मारता है। वीडियो रिकॉर्ड करने वाले व्यक्ति के अनुसार, वीडियो रिकॉर्ड करने से पहले ही आदमी उसे 30-40 बार थप्पड़ मार चुका था।
यूजर्स ने दी तीखी प्रतिक्रियाएं
इस वीडियो को देखकर ज्यादातर यूजर्स भड़क गए हैं। अवधेश शर्मा ने लिखा कि वीडियो शूट करने वाले को वीडियो बनाने की बजाए उस महिला को बचाने का प्रयास करना चाहिए था। बंदोपध्याय ने लिखा कि मुझे आश्चर्य होता है कि उसने ऐसा क्या किया होगा, जिससे वह आदमी पागल हो गया। एक अन्य यूजर ने लिखा कि ऐसे थप्पड़ मारने से रिश्ता नहीं सुधरेगा, उलटा बिगड़ेगा। इसी तरह अमन नामक यूजर ने तंज कसते हुए लिखा कि इस वजह से ब्लू ड्रम की खबरें ज्यादा आने लगी हैं।
भारत में ‘राष्ट्रीय प्रसारण दिवस’ प्रत्येक 23 जुलाई को मनाया जाता है। सूचना विधाओं के लिहाज से आज का दिन रेडियो क्रांति और प्रसारण का प्रतीक भी है। दिवस की शुरुआत वर्ष-1927 में हुई थी जिसका आज का 99 वां संस्करण है। सर्वविदित है कि 23 जुलाई 1927 को ‘इंडियन ब्रॉडकास्टिंग कंपनी’ नाम से एक प्राइवेट संस्था ने ‘बॉम्बे रेडियो क्लब’ स्टेशन से हिंदुस्तान में पहला प्रसारण किया गया था जो ब्रिटिश औपनिवेशिक हुकूमत द्वारा लाइसेंस प्राप्त थी। कुछ वर्षों बाद 'ऑल इंडिया रेडियो' और फिर आकाशवाणी के रूप में स्थापित हुई। वैसे, विधिवत रूप से प्रसारण मंच का शुभारंभ 8 जून 1936 से हुआ था। इसी दिन से विविध भाषाओं, संस्कृतियों और विचारों को एक सूत्र में पिरोने का चलन आरंभ हुआ। आकाशवाणी का नाम प्रसिद्व रचनाधर्मी ‘एमबी गोपालस्वामी’ द्वारा दिया गया था, जो संस्कृत शब्द से गढ़ा गया था। जिसका शाब्दिक मतलब होता है ‘आकाश से आवाज’। इस शब्द को आधिकारिक रूप से 1935 में मैसूर में भारत के पहले निजी रेडियो स्टेशन की स्थापना के वक्त इस्तेमाल हुआ, जिसे बाद में भारत सरकार ने सार्वजनिक और आधिकारिक रूप से सरकारी रेडियो के लिए प्रयोग किया।
प्रसार भारती के नाम से प्रचलित भारतीय प्रसारण तंत्र आज विश्व का बससे बड़ा ब्राॅडकास्ट डिविजन है। 15 सिंतबर 1959 को, दिल्ली स्थित आॅल इंडिया रेडियो के स्टूडियों में, भारत का पहला टीवी चैनल शुरू किया गया था जो आज ‘दूरदर्शन’ यानी डीडी न्यूज के नाम से प्रसिद्व है। प्रसारण के विस्तार पर अगर नजर डालें, तो वर्तमान में आकाशवाणी के कुल 591 रेडियो के्रंद्र और प्रसारण के 230 स्टेशन संचालित हैं। वहीं, सूचना एंव प्रसारण मंत्रालय के नवीनतम आंकड़ो के अनुसार, भारत में इस समय 908 निजी सैटेलाइट टीवी न्यूज चैनल सार्वजनिक प्रसारण सेवा में हैं। इनमें 40 फीसदी यानी करीब 350-400 के बीच केवल समाचार श्रेणी के हैं, जो हिंदी, अंग्रेजी के अलावा विभिन्न राज्यस्तरीय भाषाओं में संचालित हैं। निजी प्रसारण में आगमन सबसे पहले 1992 में ‘जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज’ से हुआ, उसके बाद तो निजी क्षेत्र में प्रसारणों की बाढ़ आ गई। करीब 3 हजार से अधिक नए लाइसेंसों के लिए मंत्रालय में आवेदन आवेदित हैं।
भारत में प्रसारण का कलर 25 अप्रैल 1982 में बदला गया। यहीं से रंगीन टीवी की शुरुआत हुई, वरना इससे पहले तक पर्दा सफेद ही था। ये वह वक्त था जब दिल्ली में एशियाई खेलों का महाकुंभ आरंभ होना था। तब तेजी से वैश्विक स्तर पर मांग उठ रही थी कि खेलों का प्रसारण रंगीन पर्दे पर किया जाए। इसके बाद ‘ब्लैक एंड व्हाइट’ के दौर का अंत हुआ और टीवी का पर्दा रातों-रात कलरफुल हो गया। टीवी प्रसारण का मतलब होता है ऑडियो और वीडियो सामग्री को विधुत चुम्बकीय तरंगों जैसे केबल, सैटेलाइट या इंटरनेट के जरिए जन जन तक पहुंचाना। प्रसारण आज के समय में सभी के जीवन का हिस्सा बन गया है। प्रसारण ऐसी संचार प्रणाली है जो दर्शकों को घर बैठे न्यूज से लेकर मनोरंजन के सभी माध्यमों को परोसता है। हालांकि, तकनीकी विकास के साथ प्रसारण विधाओं में काफी बदलाव हुआ है। अब दर्शक केबल या सैटेलाइट यंत्रों पर ही निर्भर नहीं रहते। दर्शक डाटा खर्च करके मोबाइल से ही हर प्रकार के प्रसारण का लुफ्त उठा लेते हैं। फिर चाहे, मैच हो या समाचार।
प्रसारण के क्षेत्र में अब इंटरनेट, डिजिटल और ओटीटी ने और विस्तार कर दिया है। सरकार सालाना प्रसारण से विज्ञापनों और फ्रीडिश से करीब 1200 से 1600 करोड़ रूपए कमाती है। वित्त वर्ष 2024-25 में प्रसार भारती का कुल राजस्व 1643 करोड़ था जिसमें से प्रमुख हिस्सा सरकारी डीटीएच प्लेटफार्म का था। साल 2025 के शीतकालीन सत्र में लोकसभा में सूचना एंव प्रसारण मंत्रालय द्वारा बताया गया था कि आॅल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन ने निजी विज्ञापनों से तीन साल यानी 2022 से 2025 के बीच कुल 587.78 करोड़ कमाए। वहीं, 2025-2026 के अतं तक 650 करोड़ कमाने का लक्ष्य प्रसार भारती ने रखा हुआ है। ये ऐसा लक्ष्य है जिसे भी आसानी से हासिल किया जा सकता है।
राष्ट्र निर्माण में प्रसारण की जो स्वर्णिम यात्रा सदियों पहले आरंभ हुई थी वह आज भी निरंतर जारी है। प्रसारण का क्षेत्र जनमानस के मन के तारों को छूता है। प्रसारण के जरिए ही बदलती तकनीकों के साथ संवाद भी निरंतर जारी हैं। केंद्र सरकार ने फ्री और निशुल्क चैनलों का वर्गीकरण भी बीते कुछ सालों से किया है, ताकि कोई भी दर्शक प्रसारण के रस से अछूता न रहे। ‘बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय’ ऐसा प्रसारण नारा है जिसमें किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जाता। प्रसारण परिंदों की भांति है जिसकी कोई सीमा और बंदिशें नहीं? केंद्र सरकार प्रसारण में नए रस घोलने के लिए हमेशा कुछ न कुछ बदलाव करती है। मंनोरंजन के नए-नए कार्यक्रमों का शुभारंभ और समाचार की प्रस्तुतीकरण में समय-समय पर बदलाव किया जाता है, ताकी दर्शक बोर न हों। वर्ष-2012 से भारत सरकार ने मनोरंजन, समाचार, खेल, खेतीबाड़ी आदि क्षेत्रों में प्रसारण के विस्तार को बढ़ाया हैं। फ्री-डिश बिना किसी मासिक शुल्क के करीब 400 से अधिक चैनल शहरी-ग्रामीण दर्शकों को मुहैया करवाता है। यही कारण है भारतीय प्रसारण आज विश्व का बससे बड़ा प्रसारण क्षेत्र बनकर उभरा है।
- डॉ. रमेश ठाकुर
सदस्य, राष्ट्रीय जन सहयोग एवं बाल विकास संस्थान (NIPCCD), भारत सरकार!
Umpire Dharmesh Bhardwaj Admitted in DPL: अंपायर धर्मश भारद्वाज को उस वक्त आईसीयू में एडमिट करवाया गया, जब वह सोमवार को दिल्ली प्रीमियर लीग 2026 में एक मैच के दौरान जानलेवा हादसे का शिकार हो गए. बल्लेबाज लक्ष्य थरेजा के जोरदार स्ट्रेट ड्राइव पर वह खुद को बचा नहीं पाए और उनके चेहरे पर गेंद लगी. जिसके बाद उन्हें हॉस्पिटल ले जाया गया. Tue, 18 Aug 2026 19:54:59 +0530