'अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस' को मनाने का मुख्य मकसद विश्व भर में तेजी से घटती बाघों की आबादी को रोकने एवं उनके संरक्षण के प्रति समूची दुनिया को जागरूक करना होता है। आज का दिन जंगल की शान कहे जाने वाले बाघों के लिए समर्पित है। सालाना ये दिन 29 जुलाई को पूरे संसार में मनाया जाता है। शुरुआत रूस स्थित ‘पीटरर्सबर्ग टाइगर संरक्षण शिखर सम्मेलन’ के दौरान वर्ष-2010 में की गई थी। विश्व में बाघों की संख्या करीब 78 फीसदी तक घट चुकी है। गनीमत है कि भारत बाघों के मामले में अभी भी टाॅप पर है। वैश्विक स्तर के आंकड़ों पर गौर करें, तो अनुमानित, बाघों की संख्या पूरे विश्व में लगभग 5,500 के बीच है। इनमें से 72 प्रतिशत आबादी अकेले हिंदुस्तान में ही है। 2022 बाघ जनगणना में भारतीय जंगलों और टाइगर रिजर्व में 3,682 जंगली बाघ थे, इनमें पिछले दो वर्षों में इजाफा ठीक ठाक हुआ। 'ग्लोबल टागईर दिवस-2025' की थीम थी, 'हमारे हाथों में हैं बाघों का संरक्षण'।
बाघ आबादी में भारत के अलावा दूसरे पायदान पर रूस है। अखिल भारतीय बाघ जनगणना-2022 में बाघों की जितनी संख्या बताई गई थी, उनमें अब 12 फीसदी की वृद्धि हो चुकी है। हालांकि, संपूर्ण संख्या अगली गणना में ही सामने आएगी। बाघ संरक्षण की दिशा में बीते कुछ वर्षों से सराहनीय प्रयास हुए हैं। बाघों का सर्वेक्षण आधुनिक तकनीकों से किया जाने लगा है। प्रत्येक टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में कैमरे लगवाए गए हैं, ताकि उनकी मुकम्मल आबादी का पता चल सके और उनकी चहलकदमी पर नजर रखी जा सके। पिछली बाघ जनगणना के दौरान मध्यप्रदेश के शिवपुरी में एकाध बाघ दिखे, तो केंद्र सरकार ने 9 मार्च 2025 को उस जगह को 58 वां टाइगर रिजर्व स्थापित कर दिया जिसका नाम ‘माधव राष्ट्रीय उधान’ रखा गया। यह प्रदेश का 9वां टाइगर रिजर्व है।
गौरतलब है कि भारत में बाघों की गणना प्रत्येक 5 साल बाद की जाती है पिछली गणना 2022 में हुई थी, अगली गणना मार्च-2027 में करवाने का प्रस्ताव पारित है। बाघों की आबादी जितनी होनी चाहिए, उतनी है नहीं? बाघ संरक्षण पर केंद्र सरकार सालाना करीब 250 से 290 करोड़ रूपए खर्च करती है। वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर में रखे गए प्रत्येक बाघ पर साल में 20 लाख से ज्यादा खर्च होता है। आजादी से पूर्व 100 साल पहले यानी 1926 के आसपास में हिंदुस्तान बाघों की आबादी सर्वाधिक एक लाख से भी अधिक हुआ करती थी, जो घटती-घटती आज कुछ हजारों तक ही सिमट गई। उत्तराखंड स्थित सिर्फ जिम कॉर्बेट में ही हजारों बाघ पाए जाते थे। हालांकि, सर्वाधिक संख्या आज भी वहीं है। पिछली गणना में 231 बाघ बताए गए थे। इस समय मध्यप्रदेश में 785, कर्नाटक में 524, बाघ हैं।
बाघों के लुप्त होते कारणों में आवासों की कमी, वन-विखंडन, अवैध शिकार, मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसे मुख्य वजहें हैं। अगर ये रूक जाएं, तो बाघों की संख्या एकाएक बढ़ जाएगी। एशिया के कुछ देश ऐसे हैं जहां बाघ पूरी तरह से विलुप्त हो गए हैं उनमें, कंबोडिया, लाओस और वियतनाम शामिल हैं। कुछ मुल्क विलुप्ति की कगार पर हैं। बाघों का अवैध शिकार समूचे संसार में तेजी से जारी है। होता क्यों है? ये भी जानना जरूरी है। दरअसल, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बाघों के अंगों की सदैव से भारी डिमांड रही है जिनमें एशियाई बाघों की सबसे ज्यादा। बाघ संरक्षण क्षेत्रों में और सख्तियां बरतने की जरूरत है। कानूनों को कठोर और जुर्माने का भारी भरकम प्रावधान किए जाने की दरकार है। ताकि, कोई भी नुकसान पहुंचाने से पहले सौ बार सोचे। पिछले एक वर्ष में विभिन्न राज्यों में करीब 75 लोगों पर एफआईआर दर्ज हुई, कईयों को जेल भी हुई। नरसिंहपुर, बालाघाट और बांधवगढ़ में बाघों के अवैध शिकार व अंगों की तस्करी मामलों मार्च 2025 में एक साथ दर्जनों शिकारियों की अरेस्टिंग हुई थी। आरोपियों पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम-1972 के तहत कार्रवाही की जाती है जिसमें 3 से 7 साल की कैद का प्रावधान है। इसे रिफाॅर्म किए जाने की अब जरूरत है।
मालूम हो, कि जंगली बाघ हमारे पारिस्थितिकी तंत्र के सामंजस्य को बनाए रखने में हमेशा से महत्वपूर्ण भूमिका निभाते आए हैं। भारत में टाइगरों के संरक्षण के लिए केंद्रीय और राज्य स्तरों पर विभिन्न अभियान बीते एकाध दशकों से जारी हैं। इन अभियानों के निरंतर चलते रहने से ही भारत में इस समय 58 टाइगर रिजर्व स्थापित हैं। ये बाघ रिजर्व 19 राज्यों में फैले हैं। सर्वाधिक टाइगर रिजर्व मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक में हैं। करीब 30 पहले भारत में बाघों की आबादी अचानक से घटनी शुरू हुई, तो सरकार ने ‘टाइगर टास्क फोर्स’ का गठन किया। जिसकी रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 1 जुलाई 1973 को ‘प्रोजेक्टर टाइगर’ आरंभ करके घटती बाघों की आबादी को किसी तरह रोकना शुरू किया। इस प्रयोग से जबरदस्त फायदा भी हुआ।
बाघ संरक्षण निर्भर प्रजाति है। बाघों के संरक्षण में उनके रहने के निवास यानी अभयारण्यी की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। पर, इन जगहों पर लगातार बढ़ती शिकारियों की आमदगी ने उनकी शांत जिंदगी में खलल पहुंचा दिया है। शिकारी ज्यादातर बाघ अभयारण्यों के ईद-गिर्द घात लगाए बैठे होते हैं। बाघ को देखते ही उसका शिकार कर देते हैं। कई बार खबरें ऐसी भी आई कि शिकारियों का साथ वन्य कर्मी भी देते है। ऐसे गंभीर आरोप में कर्नाटक के कई वन्य कर्मी पकड़े भी गऐ। इस सिंडिकेट को किसी भी तरह से रोके जाने की दरकार है। अगर नहीं रोका गया हुआ, तो भारत वैश्विक स्तर पर बाघ आबादी का पहला पायदान खो देगा।
- डॉ. रमेश ठाकुर
सदस्य, राष्ट्रीय जन सहयोग एवं बाल विकास संस्थान (NIPCCD), भारत सरकार!
महाराष्ट्र के नासिक के ज्योतिष अशोक खरात से जुड़े कथित एमएमएस सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। इन वीडियो में वह अलग-अलग महिलाओं के साथ आपत्तिजनक हरकतें करते नजर आ रहे हैं। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन रोजाना नया वीडियो सामने आ जाता है, जिसके चलते यह मामला लोगों के ध्यान में आ जाता है। तथाकथित इन आपत्तिजनक वीडियो की संख्या और इनके फुल लिंक को लेकर भी तरह-तरह की भम्र की स्थिति बनी है, जिसके चलते पुलिस भी परेशान है।
मीडिया रिपोर्ट्स में पुलिस के हवाले से बताया गया कि ज्योतिष अशोक खरात के कथित आपत्तिजनक वीडियो की संख्या 58 है। यह वीडियो खरात के कार्यालय से जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों जैसे कि मोबाइल फोन, हार्ड ड्राइव और अन्य स्टोरेज डिवाइस से बरामद किए गए हैं। पुलिस ने बताया कि इन वीडियो की तकनीकी जांच की जा रही है।
साइबर एक्सपर्ट्स ने लोगों को चेताया है कि जालसाज इसका फायदा उठाकर लोगों से ऑनलाइन ठगी कर सकते हैं। सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर अशोक खरात के वीडियो शेयर करके फुल लिंक पाने के लिए दिए गए यूआरएल पर क्लिक करने को बोला जा रहा है। अगर किसी ने भी इस लिंक को क्लिक किया तो वह ठगी का शिकार हो सकता है। ऐसे में इस तरह से किसी भी लिंक पर क्लिक नहीं करना चाहिए।
19 मिनट 34 सेकेंड के वीडियो को छोड़ा पीछे
सोशल मीडिया पर 19 Minute 34 second के viral video ने इंटरनेट की दुनिया का गर्दा उड़ा दिया था। इसके बाद स्वीट जन्नत, पायल गेमिंग और पाकिस्तानी उमैर जैसे कई वीडियो वायरल हुए, जिनके नाम पर साइबर अपराधियों ने तथाकथित वायरल वीडियो की क्लिप देने के बहाने लोगों को चूना लगा दिया। अब अशोक खरात के वीडियोज ने सभी को पीछे छोड़ दिया है। हर कोई उनका पूरा वीडियो देखना चाहता है। यही वजह है कि साइबर अपराधियों को मौका मिल गया है कि लोगों को आसानी से फंसाया जा सकता है।
क्या कहते हैं साइबर एक्सपर्ट्स
साइबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि जांच एजेंसियां कभी भी ऐसे वीडियो वायरल नहीं करती है। जो भी वीडियो वायरल हो रहे हैं, उनकी भी सत्यता पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। हाल में जितने भी वीडियो वायरल हुए, उनमें से ज्यादातर डीपफेक जनरेटेड पाए गए। ऐसे में लोगों को कभी भी ऐसे लिंक पर क्लिक नहीं करना चाहिए। ऐसे ज्यादातर लिंक फर्जी होते हैं, जिसका मकसद यूजर्स को फिशिंग वेबसाइट्स या मैलवेयर से संक्रमित पेज पर ले जाना होता है। इस पेज पर जाते ही यूजर की निजी जानकारी जैसे पासवर्ड, बैंक डिटेल्स और अन्य संवेदनशील डेटा चोरी होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में इस तरह के लिंक पर क्लिक नहीं करना चाहिए।
फैक्ट चेक में भी प्रमाण नहीं
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि अशोक खरात के 100 से अधिक वीडियो की चर्चाएं चल रही हैं। लेकिन किसी भी फैक्ट चेक में यह प्रमाण नहीं मिला कि इस कथित वीडियो की संख्या ज्यादा है। जांच एजेंसियों ने भी पुष्टि नहीं की है। यह दर्शाता है कि इस घटना का फायदा उठाकर डीपफेक जनरेटेड वीडियो बनाकर लोगों को ठग सकते हैं।
पुलिस ने लोगों को चेताया
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है। किसी भी अपुष्ट जानकारी पर भरोसा नहीं करना चाहिए। पुलिस ने लोगों को चेताया कि ऐसे लिंक न तो खोलें और न ही साझा करें अन्यथा उन्हें भी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
babar azam injury: इंग्लैंड दौरे पर मौजूद पाकिस्तान क्रिकेट टीम 19 अगस्त से हेडिंग्ले में पहला टेस्ट मैच खेलने उतरेगी. इससे पहले कप्तान बाबर आजम की चोट ने पाकिस्तान की नींद उड़ा रखी है. बाबर आजम दाहिने हाथ की चोट से जूझ रहे हैं, इसी को लेकर उनके पहले टेस्ट मैच में खेलने पर सस्पेंस बना हुआ है. हालांकि, अब खबर सामने आई है कि उनका पहले मुकाबले में खेलना मुश्किल है. Mon, 17 Aug 2026 23:30:37 +0530