अंक ज्योतिष 22 जून: मूलांक 1 वालों की बढ़ सकती है चिंता, खर्चों पर रखें नजर
मूलांक 1 के लोगों के लिए आज का दिन धैर्य और समझदारी से काम लेने का है। करियर और रोजमर्रा के कामों में कुछ रुकावटें महसूस हो सकती हैं, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है। घर के छोटे-मोटे खर्च बढ़ सकते हैं। रिश्तों में नरमी और संतुलित बातचीत आपके पक्ष में रहेगी।
Diplomatic Crisis: ज्यूरिख टेबल टॉक मे बिगड़ी बात- ईरान की अमेरिका को दो टूक, लेबनान में युद्धविराम के बिना अब कोई बातचीत नहीं!
स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख में पश्चिम एशिया के तनाव को कम करने के लिए चल रही अमेरिका-ईरान उच्चस्तरीय शांति वार्ता एक बार फिर गंभीर संकट में घिर गई है। वार्ता शुरू होने के कुछ ही मिनटों बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर ईरान को सीधे तौर पर धमकाते हुए एक आक्रामक पोस्ट कर दिया।
ट्रंप ने अपने बयान में साफ कहा कि ईरान को तुरंत लेबनान में अपने भारी फंडिंग वाले प्रॉक्सी समूहों को रोकना होगा, और यदि ऐसा नहीं हुआ तो अमेरिका पिछले सप्ताह से भी ज्यादा ताकत के साथ ईरान पर एक बहुत बड़ा सैन्य हमला करेगा। इस तीखे और आक्रामक रुख के विरोध में ज्यूरिख में मौजूद ईरानी प्रतिनिधिमंडल वार्ता को बीच में ही छोड़कर मीटिंग हॉल से बाहर निकल गया।
फोटो सेशन से किया इनकार, लेबनान में युद्धविराम तक आगे कोई बात नहीं
ट्रंप की इस आक्रामक बयानबाजी का सीधा असर ज्यूरिख के वार्ता स्थल पर देखने को मिला। बैठक की शुरुआत से पहले आयोजकों ने दोनों पक्षों के बीच हाथ मिलाने और एक संयुक्त तस्वीर खिंचवाने की योजना बनाई थी, लेकिन ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने अमेरिकी अधिकारियों के साथ इस प्रस्तावित फोटो सेशन में शामिल होने से साफ मना कर दिया।
ईरानी दल के सदस्य मेहंदी गोरबनजादेह ने सरकारी मीडिया को स्पष्ट बताया कि जब तक लेबनान में पूर्ण युद्धविराम का मसला हल नहीं हो जाता और वहां इजरायली हमले बंद नहीं होते, तब तक ईरान अमेरिका के साथ अन्य किसी भी विषय पर वार्ता को आगे नहीं बढ़ाएगा।
हमारी सेनाएं जवाब देने को तैयार, गालिबाफ ने ट्रंप को दी भाषा सुधारने की सलाह
ट्रंप द्वारा दिए गए उस बयान ने आग में घी का काम किया, जिसमें उन्होंने जरूरत पड़ने पर रणनीतिक समुद्री मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' पर अमेरिकी नियंत्रण की बात कही थी। इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने ट्रंप को अपनी भाषा पर सावधानी बरतने की सख्त सलाह दी।
गालिबाफ ने कहा कि अगर अमेरिकी धमकियों का कोई असर होता, तो वे आज इस हताशा की स्थिति में नहीं पहुंचते। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान अमेरिकी धमकियों को कोई महत्व नहीं देता है और उनकी सशस्त्र सेनाएं किसी भी स्थिति का अलग तरीके से मुकाबला करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं; अमेरिका चाहे जो कहे, जमीनी कार्रवाई अब ईरान ही तय करेगा।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
Hindustan
Haribhoomi



















