Responsive Scrollable Menu

VIDEO: राम चरण का क्रेज ऐसा... जापान से हैदराबाद पहुंचे फैंस, बोले- 'पेद्दी देखने के लिए नौकरी से 5 दिन की छुट्टी ली'

Ram Charan Movie: साउथ सुपरस्टार राम चरण की पॉपुलैरिटी अब सिर्फ भारत तक ही सीमित नहीं है। खासकर जापान में उनके फैंस की संख्या लगातार बढ़ रही है। उनकी नई फिल्म 'पेद्दी' के रिलीज होते ही फैंस का क्रेज देखने लायक रहा। इस बीच राम चरण के दो जापानी फैंस ने ऐसा कर डाला जो किसी को भी हैरान कर रहा है।

दरअसल, भारत में पेद्दी की रिलीज के दौरान 2 जापानी महिला फैंस खासतौर पर सीधे जापान की राजधानी टोक्यो से हैदराबाद पहुंचे और रिलीज का जश्न मनाया।

पांच दिन की छुट्टी लेकर पहुंचे भारत
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में जापानी फैंस मसामी और क्रिस थिएटर के बाहर मीडिया से बातचीत करते नजर आए। उन्होंने बताया कि वे खास तौर पर 'पेड्डी' देखने के लिए जापान से भारत आए हैं।

दोनों ने अपने-अपने ऑफिस से 5 दिनों की छुट्टी ली और फिल्म की रिलीज से दो दिन पहले ही हैदराबाद पहुंच गए थे। उनका कहना था कि वे राम चरण की फिल्म को बड़े पर्दे पर देखने का अनुभव मिस नहीं करना चाहते थे।

तीन बार देख चुके फिल्म, 10 बार देखने का बनाया प्लान
स्थानीय लोगों के मुताबिक, मसामी और क्रिस अपनी यात्रा के दौरान पहले ही 'पेद्दी' तीन बार देख चुके हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने भारत में रहने के दौरान फिल्म को कुल 10 बार देखने की योजना बनाई है।

वीडियो में दोनों फैंस फिल्म के लोकप्रिय गानों 'राय राय रा रा' और 'मासा मासा' को गुनगुनाते हुए भी नजर आए, जिससे उनकी एक्साइटमेंट और लगाव साफ दिखाई दिया।

इन मशहूर फिल्मों से राम चरण की जापान में बढ़ी फैन फॉलोइंग
राम चरण की जापान में लोकप्रियता की शुरुआत उनकी सुपरहिट फिल्म 'मगधीरा' से मानी जाती है। फिल्म को वहां के दर्शकों ने काफी पसंद किया था। इसके बाद 'रंगस्थलम' और खासतौर से 'RRR' ने उनके फैनबेस को और मजबूत किया।

पिछले कुछ वर्षों में कई जापानी प्रशंसक भारत आकर राम चरण से मुलाकात कर चुके हैं और उनके आयोजनों में भी हिस्सा लेते रहे हैं।

'पेद्दी' में नजर आए कई बड़े सितारे
निर्देशक बुच्ची बाबू सना के निर्देशन में बनी 'पेड्डी' एक स्पोर्ट्स-एक्शन ड्रामा फिल्म है। फिल्म में राम चरण मुख्य भूमिका में हैं। उनके साथ शिव राजकुमार, जान्हवी कपूर, जगपति बाबू, दिव्येंदु और बोमन ईरानी जैसे कलाकार भी अहम भूमिकाओं में नजर आए हैं।

ट्रेड रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म ने रिलीज के शुरुआती दो दिनों में दुनिया भर में 150 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार कर लिया है। वहीं घरेलू बॉक्स ऑफिस पर भी फिल्म तेजी से 100 करोड़ रुपये के आंकड़े की ओर बढ़ रही है।

Continue reading on the app

शिवभक्तों की कांवड़ यात्रा को सकुशल संपन्न करवाना बहुत बड़ी चुनौती!

देवाधिदेव भगवान महादेव के प्रिय श्रावण मास में मां गंगा के जल से अपने आराध्य भगवान भोलेनाथ के जलाभिषेक के लिए दिल्ली और आसपास स्थित विभिन्न राज्यों के शिवभक्तों का उत्तराखंड से कांवड़ लाने के लिए अब तांता लगना शुरू हो गया है। इस बार तो कांवड़ यात्रा के शुरुआती दिनों में ही शिवभक्तों की भारी भीड़ सड़कों पर नज़र आने लगी है। कांवड यात्रा के मद्देनजर ही उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों, दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान आदि में शिवभक्तों की सुरक्षा के सिस्टम ने बेहद ही चाक-चौबंद व्यवस्था की है। शिवभक्तों के लिए रेलवे, परिवहन, विधुत विभाग आदि ने भी विशेष तैयारियां की हैं। सिस्टम ने पवित्र श्रावण मास में देवाधिदेव भगवान महादेव के करोड़ों शिवभक्तों को शांतिपूर्ण व भक्तिमय वातावरण में सकुशल कांवड़ यात्रा करवाने के लिए सुरक्षा, भोजन, पेयजल, चिकित्सा आदि व्यवस्था की बड़े पैमाने पर तैयारियां की है। कांवड़ यात्रा को सकुशल संपन्न करवाने के लिए उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा व राजस्थान आदि का पुलिस-प्रशासन दिन-रात एक करके अपने पूरे दल-बल के साथ  सड़कों पर उतरकर के धरातल पर व्यवस्था बनाने में जुटा हुआ है।

हालांकि पुलिस-प्रशासन को इस वर्ष कांवड़ियों की संख्या में भारी इज़ाफ़ा होने की उम्मीद है। ऐसी स्थिति में विशेषकर उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश के पुलिस-प्रशासन के ऊपर पर एक तरफ तो कांवड़ियों के लिए विभिन्न आवश्यक व्यवस्था बनाने की चुनौती है, वहीं दूसरी तरफ़ चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था करने कि अहम जिम्मेदारी है। वैसे भी उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव का वर्ष होने के चलते वहां के सिस्टम के सामने भगवान शिव की भक्ति के वातावरण को बनाएं रखने की बड़ी चुनौती खड़ी है। हालांकि यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों पर सिस्टम के द्वारा जिस तरह से उत्तर प्रदेश में शिवभक्त कांवड़ियों का सेवाभाव के साथ पलक-पांवड़े बिछाकर के स्वागत किया जाता है और कांवड़ियों को किसी प्रकार की कोई असुविधा ना हो इसका विशेष ध्यान रखा जाता है, इस स्थिति ने पिछले कई सालों से शिवभक्त कांवड़ियों की संख्या में भारी इज़ाफ़ा करने का कार्य कर दिया है। जिसके चलते कांवड़ियों की सुरक्षा के लिए धरातल पर एक बेहद फुलप्रूफ व्यवस्था बनाते हुए चाक-चौबंद व्यवस्था करना चुनौती पूर्ण कार्य बन गया है। 

हर वर्ष की तरह ही कांवड़ यात्रा में पुलिस-प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह लाखों शिवभक्तों के बीच छिपे हुए चंद अराजकता फैलाने वाले हुड़दंगियों व नशेड़ियों की कैसे पहचान करें। हालांकि उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के पुलिस-प्रशासन के पास भक्तों की भारी भीड़ को नियंत्रण करने व उनके लिए समुचित व्यवस्था करने का दशकों पुराना लंबा अनुभव है, जिस अनुभव के ही बलबूते पर ही इन राज्यों का सरकारी अमला हर वर्ष ऐसे मेलों में उत्पन्न विकट से भी विकट परिस्थितियों से भी आसानी से निपट लेता है। लेकिन इस बार तो शुरूआती दिनों से ही शिवभक्त कांवड़ियों की भारी भीड़ उमड़ती नज़र आ रही है, बड़ी संख्या में ही कांवड़िए मां गंगा का दिव्य जल लेकर के अपने गंतव्य स्थल की तरफ़ वापस चल दिए और एक-एक दिन के साथ ही शिवभक्त कांवड़ियों की यह संख्या तेज़ी से बढ़ती जा रही है। वहीं उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में कुछ हुड़दंगियों के द्वारा बवाल किये जाने की भी घटनाएं भी सामने आने लगी हैं। जिसके चलते ही उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश में शुरूआती दौर के दिनों में ही कांवड़ यात्रा मार्ग के अधिकांश रास्तों पर ट्रैफिक डायवर्ट करते हुए बहुत सारी जगहों पर ट्रैफिक को वन-वे तक भी करना पड़ गया है, हालांकि ऐसा करने से लोगों को काफ़ी असुविधा भी हो रही है, लेकिन पुलिस-प्रशासन के पास इसके अलावा कोई विकल्प अभी तो मौजूद नहीं है।

इसे भी पढ़ें: मेरठ में CM Yogi ने कांवड़ियों पर बरसाए फूल, बोले- 4 से 5 करोड़ शिव भक्तों के आने की उम्मीद

वैसे भी हमारे प्यारे देश में जिस तरह का माहौल चल रहा है, उस स्थिति में शिवभक्त कांवड़ियों की सुरक्षा की पूरी व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए ट्रैफिक डायवर्ट व वन-वे करने की यह व्यवस्था सिस्टम का बेहद जरूरी कदम है। इसलिए ही उत्तराखंड से लेकर के कांवड़ यात्रा के पूरे मार्ग पर अब चप्पे-चप्पे पर होमगार्ड, ट्रैफिक पुलिस, पुलिस, पीएसी, आरएएफ, एटीएस आदि तक का बेहद ही सख्त पहरा नज़र आने लग गया है। गंगा घाटों पर एनडीआरएफ, एसडीआरएफ व गोताखोरों की टीम दल-बल के साथ तैनात हैं, कांवड़ यात्रा मार्ग पर जगह-जगह अग्निशमन विभाग के जांबाजों, जिला प्रशासन की टीम, चिकित्सा विभाग की टीम, नगर निगम, नगर पालिका परिषद जिला पंचायत व ग्राम पंचायत आदि के कर्मचारियों, अधिकारियों ने चौबीस घंटे मोर्चा संभाल रखा है। वहीं पुलिस-प्रशासन के आला अधिकारी स्वयं पूरी टीम के साथ सड़कों पर उतरे हुए हैं और हर व्यवस्था को स्वयं परखने का कार्य कर रहे हैं। कांवड़ यात्रा मार्ग पर किसी भी तरह का कोई भी विवाद खड़ा होने पर पुलिस-प्रशासन तुरंत सूझबूझ से मामले को शांत कराते हुए, दोषियों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्यवाही करते हुए माहौल को सामान्य करने का कार्य बखूबी कर रहा है। सरकार व सिस्टम कांवड़ यात्रा के दौरान किसी भी तरह की कोई लापरवाही व कोई भी चूक बिल्कुल भी नहीं चाहता है।

बेहतर व्यवस्था बनाने के लिए सख्ती का आलम यह हो गया है कि गाजियाबाद तक में भी 29 जुलाई से ही भारी वाहनों के लिए कांवड़ यात्रा मार्ग को बंद करते हुए रास्ते के बहुत सारे कट बंद कर दिए है और कांवड़ियों की सुरक्षा के लिए रास्ते वन-वे करने की युद्ध स्तर पर तैयारियां चल रही हैं। वैसे कांवड़ यात्रा के दौरान हर वर्ष ही क्षेत्रवासियों को असुविधाओं का सामना करना पड़ता है। लेकिन  अलग कांवड़ यात्रा मार्ग ना होने से पुलिस-प्रशासन के पास कम से कम फिलहाल तो अन्य कोई विकल्प उपलब्ध नहीं है।

कांवड़ यात्रा में सुरक्षा व्यवस्था का आलम देखें तो गाजियाबाद जनपद में ही, पुलिस कमिश्नर जे. रविंद्र गौड़, जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड, नगरायुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक, मुख्य अग्निशमन अधिकारी राहुल पाल व अन्य सभी आवश्यक विभागों के मुखिया अपनी पूरी टीम के साथ चौबीसों घंटे मुस्तैद खड़े हुए नज़र आते हैं। कांवड़ियों की सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर पुलिस कमिश्नर जे. रविंद्र गौड़ ने जनपद में पड़ने वाले करीब 80 किलोमीटर लंबे कांवड़ यात्रा मार्ग को बीटों में विभाजित करके अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी दी हैं। उन्होंने स्थाई कंट्रोल रूम, मुख्य कंट्रोल रूम, सब कंट्रोल रूम और अस्थाई कंट्रोल रूम बनाए हैं। कांवड़ यात्रा मार्ग को लाइट व सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में रखा गया है। सुरक्षा के दृष्टिकोण से जगह-जगह पुलिस ने बैरियर लगाए गए हैं। सार्वजनिक घोषणा प्रणाली बनाई गई है, रियल टाइम मॉनिटरिंग के अनुसार व्यवस्था बनाने की तैयारी। सुरक्षा के मद्देनजर नियमित रूप से डॉग स्कवायड, बम निरोधक दस्ता और लोकल इंटेलीजेंस की टीम के साथ पुलिस चेकिंग अभियान चलाते हुए, कांवड़ यात्रा को सकुशल संपन्न करवाने में दिन-रात व्यस्त है। पीआरवी एवं चीता मोबाइलों को कांवड़ यात्रा मार्ग पर लगाया गया है। घाटों पर एनडीआरएफ, एसडीआरएफ व गोताखोरों की टीम तैनात की गयी हैं। दमकल की गाड़ियां विभिन्न स्थानों पर तैनात हैं, चिकित्सकों व पैरा मेडिकल स्टाफ की टीम तैनात हैं, एंबुलेंस तैनात हैं, पथ-प्रकाश की समुचित व्यवस्था की गयी है, पेयजल की व्यवस्था की गयी है। जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड ने कांवड़ यात्रा को सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने के लिए 6 कंट्रोल रूम और 2 विशेष हेल्पलाइन शुरू की हैं। 11 जोनल, 24 सेक्टर और 108 सब मजिस्ट्रेट तैनात किए गए हैं।

कांवड़ यात्रा मार्ग पर लगें शिविरों की अनुमति देते समय ही आग से बचाव हेतु अग्निरोधी यंत्र, रेत की बाल्टी एवं पानी का ड्रम आदि रखवाने के लिए शिविर आयोजकों को निर्देशित किया गया है। कांवड़ शिविरों में विद्युत सुरक्षा उपायों के किये जाने का निर्देश दिए गए हैं। कांवड़ मार्ग के निकट कोई नया बखेड़ा खड़ा ना हो इसके लिए मीट, मछली और अंडा आदि की दुकानों को बंद करवा दिया गया है, शराब की दुकानों को ढंक दिया गया गया है। किसी प्रकार की कोई दुर्घटना ना घट जाये इसलिए कांवड़ की ऊंचाई 10 फुट एवं चौड़ाई 12 फुट तक रखने के निर्देश दिए गए है। डाक कांवड़ में मानकों के अनुसार म्यूजिक सिस्टम पर 75 डेसीबेल तक का ही शोर मान्य है, इस तरह की चाक-चौबंद व्यवस्था उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश के पूरे कांवड़ यात्रा मार्ग के सभी जनपदों में की गई है।

हालांकि पुलिस-प्रशासन के द्वारा की गयी बेहद चाक-चौबंद व्यवस्था के बाद भी कांवड़ यात्रा मार्ग पर आने वाले दिनों किसी भी तरह से माहौल खराब करने वाले लोगों से निपटने की एक बड़ी चुनौती खड़ी है। क्योंकि यात्रा के दौरान कांवड़ छूने, कांवड़ के वाहनों से टकराने आदि छुटपुट बातों का बतंगड़ ना बने उससे निपटना बड़ा चुनौतीपूर्ण है। वैसे भी पिछले कुछ वर्षों से देश में जिस तेज़ी से धैर्य व छोटे-बड़े की शर्म, आपसी भाईचारा और सामाजिक समरसता, आपसी सहयोग का भाव दिन-प्रतिदिन बहुत तेज़ी से कम होता जा रहा है, कांवड़ यात्रा मार्ग में इसका प्रभाव अब वर्ष दर वर्ष स्पष्ट रूप से नज़र आने लगा है। जिसके चलते ही अब तो बिना सिर-पैर के विवाद भी कांवड़ यात्रा में बहुत बड़ी चुनौती पैदा करने लग गए हैं। हालांकि कांवड़ यात्रा को सकुशल संपन्न कराने के लिए उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश आदि में पुलिस-प्रशासन जबरदस्त ढंग से सक्रिय है और देवाधिदेव भगवान महादेव की कृपा से इस वर्ष भी कांवड़ यात्रा दिव्य, अलौकिक, यादगार बन कर के सकुशल संपन्न होगी।

- दीपक कुमार त्यागी
अधिवक्ता, स्वतंत्र पत्रकार, स्तंभकार व राजनीतिक विश्लेषक 

Continue reading on the app

  Sports

बांग्लादेश से हार के साथ पैट कमिंस की कप्तानी पर लगा दाग, दर्ज हुआ शर्मनाक रिकॉर्ड

बांग्लादेश के खिलाफ पहले टेस्ट में मिली हार के बाद ऑस्ट्रेलिया के कप्तान पैट कमिंस के करियर पर एक ऐसा दाग लग गया है, जिसे हटा पाना उनके लिए बहुत मुश्किल होगा. कमिंस ऑस्ट्रेलिया के सिर्फ दूसरे ऐसे कप्तान बने हैं, जिन्हें दो एशियाई देशों ने उनके घर में हराया है. इस लिस्ट में पहले नंबर पर ग्रेग चैपल का नाम आता है. Mon, 17 Aug 2026 20:33:55 +0530

  Videos
See all

Tiktoker की हत्या ! जानें क्या थी वजह ? #tiktok #shorts #tmktech #vivo #v29pro
2026-08-17T15:15:30+00:00

LIVE: Desh Ki Pathshala With Sushant Sinha | देश की पाठशाला Episode 61 | Nitin Nabin New Team | Modi #tmktech #vivo #v29pro
2026-08-17T15:14:10+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers