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जरूरत की खबर- बारिश में बढ़ता मच्छरों का प्रकोप:इन 5 घरेलू तरीकों से भगाएं मच्छर, डॉक्टर से जानें बचाव के लिए जरूरी सावधानियां

बारिश के मौसम में मच्छर तेजी से पनपते हैं। इस दौरान जगह-जगह पानी जमा हो जाता है, जो मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल माहौल बनाता है। यही वजह है कि इस मौसम में डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी मच्छरों से होने वाली बीमारियों का रिस्क बढ़ जाता है। इनसे बचने के लिए लोग अक्सर स्प्रे, कॉइल या रिपेलेंट का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन ये सिर्फ मच्छरों को दूर रखते हैं। असली बचाव उनके प्रजनन को रोकने में है। कुछ आसान उपाय इसमें मददगार हो सकते हैं। इसलिए ‘जरूरत की खबर’ में आज हम मच्छरों से बचाव के तरीके बताएंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- डॉ. बृज वल्लभ शर्मा, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, नारायणा हॉस्पिटल, जयपुर सवाल- मानसून में मच्छर तेजी से क्यों बढ़ते हैं? जवाब- यह मौसम मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल होता है। इसके कई कारण हैं- सवाल- कौन-से मच्छर बरसात में ज्यादा पनपते हैं? जवाब- बरसात में मुख्य रूप से ये मच्छर ज्यादा पनपते हैं- सवाल- घर में और घर के बाहर मच्छर कहां-कहां पनप सकते हैं? जवाब- 2-3 दिन तक जमा किसी भी साफ या गंदे पानी में मच्छर पनप सकते हैं। मच्छरों के कॉमन ब्रीडिंग स्पॉट ग्राफिक में देखिए- सवाल- मच्छरों से कौन-सी बीमारियां होती हैं? जवाब- मच्छरों के काटने से डेंगू, चिकनगुनिया और मलेरिया जैसी कई गंभीर बीमारियां होती हैं। मच्छरों से होने वाली बीमारियां और उनके लक्षण ग्राफिक में देखिए- सवाल- घर में और घर के बाहर मच्छरों को पनपने से कैसे रोकें? जवाब- इसके लिए घर के अंदर और बाहर कहीं भी पानी जमा न होने दें। साथ ही आसपास साफ-सफाई का खास ख्याल रखें। सभी जरूरी टिप्स ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या सिर्फ साफ-सफाई से मच्छर खत्म हो जाते हैं? जवाब- नहीं, इससे मच्छर पूरी तरह खत्म नहीं होते। हालांकि उनकी संख्या काफी हद तक कम हो जाती है। इसलिए साफ-सफाई के साथ मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाना भी जरूरी है। सवाल- घर के अंदर छिपे मच्छर भगाने के लिए क्या करें? जवाब- घर के अंदर के मच्छर भगाने के लिए बाजार में मिलने वाले रिपेलेंट प्रोडक्ट्स और कुछ घरेलू उपाय असरदार हो सकते हैं। रिपेलेंट प्रोडक्ट्स मच्छर भगाने के घरेलू उपाय नीम का धुआं कपूर लेमनग्रास ऑयल तुलसी का पौधा लहसुन का स्प्रे सवाल- मच्छरों से खुद को प्रोटेक्ट करने का बेस्ट तरीका क्या है? जवाब- इसके लिए सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करें। साथ ही घर और आसपास पानी जमा न होने दें। ग्राफिक में सभी प्रोटेक्शन टिप्स देखिए- मच्छराें से जुड़े कुछ मिथ और फैक्ट सवाल- क्या मच्छर सिर्फ गंदे पानी में ही पनपते हैं? जवाब- नहीं, यह गलतफहमी है। कई मच्छर (खासकर डेंगू फैलाने वाले मच्छर) साफ और ठहरे हुए पानी में भी पनपते हैं। सवाल- कूलर का पानी कितने दिन में बदलना चाहिए? जवाब- हर 2-3 दिन में कूलर का पानी बदलना चाहिए। साथ ही कूलर को अच्छी तरह साफ करना और सुखाना भी जरूरी है। सवाल- फ्रिज की ट्रे और AC ड्रेनेज कितने दिन में साफ करना चाहिए? जवाब- फ्रिज की ट्रे और AC ड्रेनेज को हफ्ते में कम-से-कम एक बार जरूर साफ करें। इनमें जमा पानी मच्छरों के लिए ब्रीडिंग स्पॉट बन सकता है। सवाल- डेंगू वाला मच्छर कहां पनपता है? जवाब- डेंगू फैलाने वाला एडीज मच्छर साफ और ठहरे हुए पानी में पनपता है, जैसेकि कूलर, पुराने टायर, गमले और फूलदान, पानी की टंकी/बाल्टी और फ्रिज की ट्रे। सवाल- कौन-सा मच्छर दिन में काटता है और कौन रात में? जवाब- आमतौर पर डेंगू फैलाने वाला एडीज मच्छर दिन में काटता है, जबकि मलेरिया फैलाने वाला एनोफिलीज मच्छर रात में ज्यादा एक्टिव होता है। ……………………… जरूरत की ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- मानसून में बढ़ते फूड पॉइजनिंग के केस: ये 7 लक्षण इग्नोर न करें, बचाव के लिए 12 सावधानियां, बता रहे हैं डॉक्टर ‘फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया’ (FSSAI) के मुताबिक, मानसून के दौरान ई.कोली और सल्मोनेला जैसे बैक्टीरिया तेजी से फैलते हैं। बढ़ी हुई नमी, जलभराव और दूषित भोजन-पानी इसके मुख्य कारण हैं। इस कारण फूड पॉइजनिंग, डायरिया और हैजा के मामले बढ़ जाते हैं। पूरी खबर पढ़िए…

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लंबे समय के लिए कौन है बेहतर- CNG या इलेक्ट्रिक कार? आसान भाषा में समझें पूरा कैलकुलेशन

जब भी कोई नई कार खरीदने की योजना बनाता है, तो सबसे पहले उसकी नजर शोरूम में लगी कीमत पर जाती है। लेकिन समझदारी सिर्फ शुरुआती कीमत देखने में नहीं, बल्कि आने वाले कई वर्षों तक होने वाले खर्च को समझने में है। आज पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों ने लोगों का रुझान सीएनजी और इलेक्ट्रिक कारों की ओर तेजी से बढ़ा दिया है।

अगर आप भी कार को 15 साल तक इस्तेमाल करने का सोच रहे हैं, तो यह जानना जरूरी है कि लंबे समय में आपकी जेब पर कौन सा विकल्प कम बोझ डालेगा।

शुरुआती निवेश में कौन है आगे?

बजट के लिहाज से देखें तो सीएनजी कारें अधिक आकर्षक दिखाई देती हैं। आमतौर पर किसी मॉडल का सीएनजी वेरिएंट उसके इलेक्ट्रिक वर्जन की तुलना में 2 से 3 लाख रुपये तक सस्ता पड़ता है।

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इसका मतलब है कि सीएनजी कार खरीदने के लिए आपको कम डाउन पेमेंट और अपेक्षाकृत छोटे लोन की जरूरत होगी। वहीं, इलेक्ट्रिक कार खरीदने के लिए शुरुआत में बड़ा निवेश करना पड़ सकता है।

रोजाना चलाने का खर्च किसका कम है?

मान लीजिए आप हर साल करीब 15,000 किलोमीटर कार चलाते हैं। इस हिसाब से 15 वर्षों में आपकी कार लगभग 2.25 लाख किलोमीटर चलेगी।

इलेक्ट्रिक कार का गणित

- प्रति किलोमीटर खर्च: लगभग ₹1 से ₹1.5 
- 15 साल का अनुमानित चार्जिंग खर्च: करीब ₹3.37 लाख 

सीएनजी कार का गणित

- प्रति किलोमीटर खर्च: लगभग ₹3.50 से ₹4 
- 15 साल का अनुमानित ईंधन खर्च: करीब ₹9 लाख 

यानी सिर्फ ईंधन के खर्च में इलेक्ट्रिक कार आपको करीब 5.5 लाख रुपये तक की बचत दे सकती है। लंबे समय तक अधिक ड्राइविंग करने वालों के लिए यह अंतर काफी बड़ा साबित हो सकता है।

मेंटेनेंस में किसका खर्च कम है?

सीएनजी कार में पारंपरिक इंजन, गियरबॉक्स और कई मैकेनिकल पार्ट्स मौजूद रहते हैं। इसलिए समय-समय पर इंजन ऑयल बदलवाना, सर्विसिंग कराना और सीएनजी किट की जांच करवाना जरूरी होता है।

इसके विपरीत, इलेक्ट्रिक कार में इंजन नहीं होता। इसमें मुख्य रूप से इलेक्ट्रिक मोटर और बैटरी होती है। कम चलने वाले पार्ट्स होने के कारण इसकी नियमित सर्विस का खर्च काफी कम रहता है। यही वजह है कि कई लोग ईवी को कम मेंटेनेंस वाली कार मानते हैं।

बैटरी बदलने का खर्च बदल सकता है पूरा समीकरण

इलेक्ट्रिक कार की सबसे बड़ी चिंता उसकी बैटरी है। अधिकांश कंपनियां बैटरी पर लगभग 8 साल या 1.6 लाख किलोमीटर तक की वारंटी देती हैं।

अगर आप कार को पूरे 15 साल तक चलाने का इरादा रखते हैं, तो संभावना है कि एक बार बैटरी बदलवानी पड़े। वर्तमान में नई बैटरी की कीमत लगभग 2 से 4 लाख रुपये तक पहुंच सकती है।

ऐसे में ईंधन पर होने वाली बड़ी बचत का कुछ हिस्सा बैटरी रिप्लेसमेंट में खर्च हो सकता है। इसलिए ईवी खरीदते समय इस पहलू को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

लंबी यात्रा के लिए कौन है ज्यादा सुविधाजनक?

अगर आपकी यात्रा अक्सर हाईवे पर होती है, तो सीएनजी कार ज्यादा सुविधाजनक साबित हो सकती है। गैस भरवाने में केवल कुछ मिनट लगते हैं और अब देशभर में सीएनजी स्टेशन तेजी से बढ़ रहे हैं।

वहीं, इलेक्ट्रिक कार को चार्ज होने में 45 से 60 मिनट तक लग सकते हैं। हालांकि चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर लगातार बेहतर हो रहा है, लेकिन लंबी यात्राओं में पहले से प्लानिंग करना अभी भी जरूरी है।

रीसेल वैल्यू भी है अहम फैक्टर

पुरानी सीएनजी कारों की मांग बाजार में बनी रहती है और उन्हें बेचना अपेक्षाकृत आसान होता है।

दूसरी ओर, पुरानी इलेक्ट्रिक कार की कीमत काफी हद तक उसकी बैटरी की स्थिति पर निर्भर करती है। यदि बैटरी की क्षमता कम हो चुकी है, तो रीसेल वैल्यू प्रभावित हो सकती है।

आखिर आपके लिए कौन सी कार बेहतर है?

इलेक्ट्रिक कार चुनें अगर:

- आप रोजाना 50-60 किलोमीटर या उससे अधिक ड्राइव करते हैं। 
- आपकी ड्राइविंग ज्यादातर शहर के अंदर होती है। 
- आपके घर या ऑफिस में चार्जिंग की सुविधा उपलब्ध है। 

सीएनजी कार चुनें अगर:

- आपका बजट सीमित है। 
- आप साल में 10,000 किलोमीटर से कम गाड़ी चलाते हैं। 
- आप अक्सर लंबी हाईवे यात्राएं करते हैं और चार्जिंग की चिंता नहीं चाहते। 

अंततः, 15 साल के नजरिए से देखें तो सीएनजी और इलेक्ट्रिक, दोनों ही विकल्प पेट्रोल कार की तुलना में लाखों रुपये की बचत कर सकते हैं। सही चुनाव आपकी ड्राइविंग आदतों, बजट और सुविधा की जरूरतों पर निर्भर करेगा।

- डॉ. अनिमेष शर्मा

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