नीट यूजी री एग्जाम के दौरान राजस्थान के अजमेर से एक विवादित मामला सामने आया है। यहां एग्जाम शुरू होने से ठीक पहले बुर्का और दुपट्टा पहनकर आई एक मुस्लिम छात्रा को कथित तौर पर परीक्षा केंद्र के अंदर जाने से रोक दिया गया, जिसके बाद केंद्र पर काफी देर तक बहस और हंगामा हुआ।
पीड़ित छात्रा ने कहा, परीक्षा से बढ़कर है मेरा बुर्का और पहचान
ब्यावर से परीक्षा देने अजमेर पहुंची उम्मीदवार कुलसुम बानो ने अपना गुस्सा जाहिर करते हुए कहा, "जब मैंने 3 मई को एग्जाम दिया था, तब भी यही कपड़े पहने थे। आज चेकिंग के वक्त पहले उन्होंने मेरा दुपट्टा हटाने को कहा और फिर बुर्का भी उतारने पर अड़ गए। अगर एनटीए के नियमों में हमें इसकी परमिशन है, तो ये लोग हमें कैसे रोक सकते हैं? मेरे लिए परीक्षा से ज्यादा मेरा बुर्का और मेरी पहचान मायने रखती है। अगर वे मुझे इस लिबास में अंदर नहीं जाने देंगे, तो मैं एग्जाम ही नहीं दूंगी।"
3 साल की मेहनत दांव पर, पिता ने उठाए सवाल
छात्रा के पिता मोहम्मद आलिम ने प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी बेटी पिछले 3 साल से इस मेडिकल एग्जाम की तैयारी कर रही है। एनटीए के नियम 18 के मुताबिक, छात्रों को अपने धार्मिक लिबास में परीक्षा देने की अनुमति है। उन्होंने केंद्र के स्टाफ से अपील भी की थी कि किसी महिला स्टाफ को बुलाकर पर्दे के पीछे बेटी की अच्छी तरह से चेकिंग कर ली जाए, लेकिन शुरुआत में स्टाफ ने उनकी एक न सुनी।
पुलिस और सीनियर अधिकारियों ने दखल देकर खत्म किया विवाद
मामला बढ़ने पर पुलिस और प्रशासन के बड़े अधिकारी मौके पर पहुंचे। सीओ नॉर्थ शिवम जोशी ने इस पूरे विवाद पर अपडेट देते हुए बताया, "बुर्के से जुड़ा जो मामला था, उसे पूरी तरह सुलझा लिया गया है। नियमों को लेकर सेंटर के स्टाफ में थोड़ी उलझन थी, जिसे सीनियर अधिकारियों ने आकर क्लियर कर दिया। इसके बाद मामला शांत हो गया, सभी स्टूडेंट्स को तय समय पर एंट्री मिल गई और परीक्षा पूरी तरह शांति से संपन्न हुई।"
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