Neeraj Chopra: 8 साल बाद CWG में वापसी करेंगे नीरज चोपड़ा! क्वालिफाइंग राउंड में पाकिस्तान के अरशद नदीम से होगी सीधी भिड़ंत
ग्लासगो में खेले जा रहे राष्ट्रमंडल खेल 2026 के आठवें दिन भारतीय दल के लिए बेहद बड़ा और रोमांचक दिन है। भारत के स्टार भाला फेंक एथलीट और ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा 8 साल के लंबे लंबे अंतराल के बाद राष्ट्रमंडल खेलों में वापसी कर रहे हैं। जैवलिन थ्रो के क्वालिफाइंग राउंड में उतरेंगे, जहा उनका मुख्य मुकाबला पाकिस्तान के ओलंपिक चैंपियन अरशद नदीम से होगा।
नीरज के अलावा आज भारत के पास एथलेटिक्स और वेटलिफ्टिंग में कई मेडल जीतने के सुनहरे मौके हैं। तजिंदरपाल सिंह तूर शॉट पुट फाइनल में, पारुल चौधरी महिलाओं की 5000 मीटर रेस में और लवप्रीत सिंह वेटलिफ्टिंग में भारत का मान बढ़ाने उतरेंगे।
8 साल बाद CWG में उतरे नीरज चोपड़ा, अरशद नदीम से तगड़ी चुनौती
नीरज चोपड़ा ने आखिरी बार 2018 गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा लिया था और 86.47 मीटर के थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीता था। हालांकि, चोट के कारण वे 2022 बर्मिंघम खेलों से बाहर रहे थे। अब ग्लासगो में नीरज का मुख्य लक्ष्य एक बार फिर से कॉमनवेल्थ गोल्ड पर कब्जा जमाना है।
जैवलिन थ्रो क्वालिफाइंग राउंड में उनके साथ भारत के दो अन्य भाला फेंक एथलीट- रोहित यादव और यशवीर सिंह भी अपनी चुनौती पेश करेंगे। नीरज और अरशद नदीम के बीच हेड-टू-हेड आंकड़ों में भारत का पलड़ा भारी है, जहाँ 11 आमने-सामने के मुकाबलों में नीरज ने 10 बार जीत हासिल की है। हालांकि, पेरिस ओलंपिक 2024 में अरशद नदीम ने 92.97 मीटर का रिकॉर्ड थ्रो फेंककर गोल्ड जीता था, जिसके बाद ग्लासगो में यह राइवलरी और दिलचस्प हो गई है।
तजिंदरपाल, पारुल चौधरी और सीमा कलीरमाना से मेडल की उम्मीदें
देर रात भारत के कई दिग्गज एथलीट सीधे मेडल इवेंट्स में उतरेंगे:
- शॉट पुट (पुरुष): रात 11:30 बजे तजिंदरपाल सिंह तूर और समरदीप सिंह गिल पुरुष शॉट पुट के फाइनल में मेडल के लिए दावेदारी ठोकेंगे।
- डिसकस थ्रो (महिला): रात 1:10 बजे (31 जुलाई की तड़के) सीमा कलीरमाना और निधि रानी महिला डिसकस थ्रो के फाइनल मुकाबले में उतरेंगी।
- 5000 मीटर रेस (महिला): रात 1:48 बजे स्टार रनर पारुल चौधरी महिलाओं की 5000 मीटर रेस के फाइनल में अपनी चुनौती पेश करेंगी।
वेटलिफ्टिंग, डेकाथलॉन और लॉन बॉल्स में ऐसा रहेगा शेड्यूल
एथलेटिक्स के अलावा वेटलिफ्टिंग और अन्य खेलों में भी आज भारतीय खिलाड़ियों के कई अहम मुकाबले होने हैं:
- डेकाथलॉन: दोपहर 2:40 बजे तेजस्विन शंकर पुरुष डेकाथलॉन की 100 मीटर रेस, लॉन्ग जंप (3:20 PM), शॉट पुट (5:10 PM) और हाई जंप (11:38 PM) में हिस्सा लेंगे।
- वेटलिफ्टिंग (मेडल इवेंट्स): शाम 6:30 बजे मार्टिना देवी मैबाम (महिला 86+ kg) और रात 11:00 बजे लवप्रीत सिंह (पुरुष 110+ kg) फाइनल में गोल्ड के लिए उतरेंगे।
- ट्रैक साइकिलिंग व लॉन बॉल्स: दोपहर 3:26 बजे भारतीय साइकिलिंग टीम 4000 मीटर टीम पर्स्यूट क्वालिफाइंग खेलेगी। शाम को लॉन बॉल्स में दिनेश कुमार, नवनीत सिंह (पुरुष पेयर्स) और नयनमोनी सैकिया (महिला सिंगल्स) अपने-अपने मैच खेलेंगे।
आशा भोसले की लव-स्टोरी: पहले पति ने घर से निकाला, 6 साल छोटे आरडी बर्मन पर आया दिल; प्यार के खातिर परिवार से तोड़ा रिश्ता
Asha Bhosle-RD Burman love Story: 'पिया तू अब तो आजा', 'ओ हसीना ज़ुल्फों वाली', 'दम मारो दम', 'चुरा लिया है तुमने जो दिल को'... और न जाने ऐसे कितने सुपरहिट गानों की झड़ी लगाने वाली आशा भोसले और आरडी बर्मन की जोड़ी ने संगीत की दुनिया में अपना जादू चलाया। इन सदाबहार गानों के पीछे आशा और बर्मन की लव स्टोरी भी छिपी हुई है जिससे वैसे तो कई लोग वाकिफ हैं, लेकिन इस प्यार के पीछे आशा ताई को मिला संघर्ष, विरोध और दर्द।
स्वर कोकिला लता मंगेशकर के परिवार से आने वालीं आशा भोसले की पर्सनल लाइफ भी कई मुश्किलों में गुजरी। 16 की उम्र में पहला प्यार मिला, शादी भी की लेकिन किस्मत के आगे किसा जोर चलता है। हालांकि आशा भोसेल को जब आरडी बर्मन से प्यार हुआ तो जैसे उनकी सच्चे प्यार की तलाश खत्म हो गई। जानिए इस मशूहर जोड़ी की लव स्टोरी...
16 साल की उम्र में घर से भागीं आशा भोसेल
आशा भोसले ने महज 16 साल की उम्र में एक ऐसा कदम उठाया, जिसने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी। वह अपनी बहन लता मंगेशकर के सेक्रेटरी गणपतराव भोसले के प्यार में पड़ी। परिवार ने भारी विरोध किया तो उनसे अलग होने का फैसला लिया और घर से भागकर आशा ने गणपतराव भोसले से शादी रचा ली। उनके तीन बच्चे हुए लेकिन जिम्मेदारी और घरेलू तनाव के बीच उनका वैवाहिक जीवन धीरे-धीरे टूटने लगा।
बताया जाता है कि उनके पति उनपर हिंसक और अब्यूसिव व्यव्हार करते थे। वे अक्सर उन्हें काम करने से रोकते और पैसों को लेकर परेशान करते थे। आखिरकार 1960 में हालात इतने बिगड़ गए कि आशा भोसले को अपने तीन बच्चों के साथ घर छोड़ना पड़ा। इस मुश्किल दौर में उन्होंने हार नहीं मानी और अपने करियर पर पूरा ध्यान दिया।
करियर में मिली नई पहचान
इस दौर के बाद आशा भोसले का करियर तेजी से आगे बढ़ा। उन्होंने ‘वक्त’, ‘गुमराह’, ‘हमराज’ जैसी फिल्मों में गाने गाकर अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी आवाज में एक अलग अंदाज था, जिसने उन्हें अपनी बहन लता मंगेशकर से अलग पहचान दिलाई।
आर.डी. बर्मन के साथ मिला सच्चा प्यार
इसी दौरान उनकी जिंदगी में आए मशहूर संगीतकार राहुल देव बर्मन। दोनों की मुलाकात काम के दौरान हुई और धीरे-धीरे यह रिश्ता प्यार में बदल गया। उम्र में छोटे होने के बावजूद आर.डी. बर्मन ने उन्हें लंबे समय तक प्रपोज किया, लेकिन पहली शादी के अनुभव के कारण आशा तुरंत राजी नहीं हुईं।
काफी समय बाद दोनों ने 1980 में शादी कर ली। यह रिश्ता उनके जीवन का सबसे खूबसूरत अध्याय साबित हुआ। दोनों ने साथ मिलकर कई सुपरहिट गाने दिए और संगीत जगत में एक अलग मुकाम हासिल किया।
प्यार, दूरी और एक दर्दनाक विदाई
हालांकि, उनकी जिंदगी में दुख भी कम नहीं थे। 1980 के दशक के अंत में आर.डी. बर्मन की सेहत खराब रहने लगी और दोनों कुछ समय के लिए अलग हो गए। इसके बावजूद आशा भोसले हमेशा उनके साथ रहीं।
4 जनवरी 1994 को आर.डी. बर्मन का निधन हो गया, जिसने आशा भोसले को गहरा आघात पहुंचाया। इस सदमे के बाद भी उन्होंने खुद को संभाला और संगीत में वापसी की।
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