Dhinchak Pooja: ‘सेल्फी मैंने ले ली आज’ फेम ढिंचैक पूजा ने की शादी, क्यों छिपाया पति का चेहरा? वायरल वीडियो ने बढ़ाई एक्साइटमेंट
Dhinchak Pooja Wedding: सोशल मीडिया सेंसेशन और ‘सेल्फी मैंने ले ली आज’ गाने से रातोंरात मशहूर हुईं ढिंचैक ने अपनी शादी की खबर देकर फैंस को चौंका दिया है। ढिंचैक पूजा ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें उनकी शादी की कुछ खास झलकियां दिखाई गईं।
वीडियो में पूजा दुल्हन के लिबास में नजर आ रही हैं, लेकिन सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने अपने पति का चेहरा पूरी तरह छिपाकर रखा। इस रहस्य ने इंटरनेट यूजर्स की एक्साइटमेंट और बढ़ा दी है।
गुलाबी लहंगे में दिखीं ढिंचैक पूजा, छिपाया पति का चेहरा
शेयर किए गए वीडियो में धिंचैक पूजा गुलाबी रंग के ब्राइडल आउटफिट में दिखाई दीं। उन्होंने भारी ज्वेलरी और बड़ी नथ के साथ अपना ब्राइडल लुक पूरा किया था। वीडियो में वरमाला सेरेमनी और सेल्फी लेते हुए कई पल भी दिखाए गए। पोस्ट के कैप्शन में पूजा ने लिखा, “मेरी शादी की कुछ क्लिप्स… बाकी जल्द शेयर करूंगी।”
फैंस ने मांगा नया वेडिंग सॉन्ग
ढिंचैक पूजा की शादी की पोस्ट वायरल होते ही सोशल मीडिया पर मजेदार कमेंट्स की बाढ़ आ गई। कई यूजर्स ने उन्हें बधाई दी, जबकि कुछ लोगों ने मजाकिया अंदाज में उनसे नया वेडिंग सॉन्ग बनाने की मांग कर डाली। एक यूजर ने लिखा, “अब गाना आएगा- शादी मैंने कर ली आज।” वहीं दूसरे ने कमेंट किया, “हमें क्वीन का वेडिंग ट्रैक चाहिए।”
कुछ लोगों ने यह भी कहा कि अकाउंट नाम देखने के बाद ही उन्हें यकीन हुआ कि वीडियो में नजर आ रही दुल्हन सच में धिंचैक पूजा ही हैं।
इंटरनेट की पहली वायरल सेंसेशन में से एक रहीं पूजा
एक्साइटमेंट पूजा, जिनका असली नाम पूजा जैन है, साल 2016-17 के दौरान इंटरनेट पर तेजी से वायरल हुई थीं। शुरुआत में उनके गाने ‘स्वैग वाली टोपी’ और ‘दारू’ चर्चा में आए, लेकिन असली पहचान उन्हें ‘सेल्फी मैंने ले ली आज’ से मिली।
उनके अनोखे अंदाज, अलग तरह की सिंगिंग और मजेदार लिरिक्स ने उन्हें सोशल मीडिया पर ‘क्रिंज पॉप क्वीन’ बना दिया था। उनके गाने मीम्स और वायरल वीडियोज का हिस्सा बनने लगे। इसके बाद उन्होंने ‘दिलों का शूटर’, ‘बापू देदे थोड़ा कैश’, ‘आफरीन फातिमा बेवफा है’ और ‘नाच के पागल’ जैसे कई गाने रिलीज किए।
बिग बॉस 11 में भी आई थीं नजर
एक्साइटमेंट पूजा ने बाद में बिग बॉस 11 में वाइल्ड कार्ड कंटेस्टेंट के तौर पर एंट्री ली थी। शो में उनकी मौजूदगी ने काफी चर्चा बटोरी थी। वर्तमान में इंस्टाग्राम पर उनके लाखों फॉलोअर्स हैं और वह सोशल मीडिया पर लगातार एक्टिव रहती हैं।
Bakra Eid 2026: हज में शैतान को पत्थर क्यों मारा जाता है? जानिए इस रहस्यमयी परंपरा का सच
Bakra Eid 2026: ईद-उल-अजहा, जिसे आम भाषा में बकरीद कहा जाता है, इस्लाम धर्म के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह त्योहार पैगंबर इब्राहिम (अब्राहम) की आस्था और कुर्बानी की याद में मनाया जाता है। इसी समय मक्का में हर साल हज यात्रा भी होती है, जिसमें लाखों मुसलमान शामिल होते हैं। हज के दौरान कई धार्मिक रस्में निभाई जाती हैं, जिनमें से एक बेहद महत्वपूर्ण रस्म है- “शैतान को पत्थर मारना”। क्या है ये रस्म और क्या है इसके पीछे की वजह, जानिए...
‘रमी अल-जमारात’ क्या है?
इस रस्म को अरबी में “रमी अल-जमारात” कहा जाता है। इसका मतलब होता है “पत्थर फेंकना”। यह हज के दौरान मिना नामक स्थान पर किया जाने वाला एक प्रतीकात्मक धार्मिक कार्य है।
इसमें तीर्थयात्री तीन खंभों पर कंकड़ फेंकते हैं, जिन्हें शैतान का प्रतीक माना जाता है। इसका उद्देश्य बुराई, पाप और बहकावे से दूर रहने का संदेश देना है।
क्या है रस्म की धार्मिक कहानी
इस परंपरा की जड़ें पैगंबर इब्राहिम (अब्राहम) की कथा से जुड़ी हैं। मान्यता के अनुसार, जब अल्लाह ने इब्राहिम को अपने बेटे की कुर्बानी देने का आदेश दिया, तब शैतान ने उन्हें इस आदेश से रोकने और भ्रमित करने की कोशिश की।
लेकिन इब्राहिम ने शैतान की बातों में न आकर उसे पत्थर मारकर दूर किया और अपने ईमान पर डटे रहे। इसी घटना की याद में यह रस्म निभाई जाती है, जो विश्वास और धैर्य का प्रतीक मानी जाती है।
Muslim pilgrims perform 'STONING OF THE DEVIL' ritual in Mina, Saudi Arabia pic.twitter.com/PLu5tY2dVm
— RT (@RT_com) May 27, 2026
हज के दौरान यह रस्म कैसे होती है?
हज के दौरान तीर्थयात्री मिना घाटी में जाते हैं और तीन बड़े खंभों पर कंकड़ फेंकते हैं। आमतौर पर प्रत्येक खंभे पर कई कंकड़ फेंके जाते हैं, और यह प्रक्रिया क्रम से पूरी की जाती है। यह रस्म बुराई को त्यागने और आत्मिक शुद्धता की ओर बढ़ने का प्रतीक है।
बकरीद और इसकी वैश्विक परंपरा
हज के अंतिम दिनों में यह रस्म पूरी की जाती है, जो सीधे तौर पर ईद-उल-अजहा के त्योहार से जुड़ी होती है। इस दिन दुनिया भर के मुसलमान जानवरों की कुर्बानी देते हैं और उसका मांस जरूरतमंदों में बांटते हैं।
इस तरह बकरीद केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि त्याग, आस्था और मानवता का संदेश देने वाला अवसर माना जाता है।
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