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Jewellery for Dandiya Night: डांडिया-गरबा नाइट में सबकी नजरें होंगी आप पर, पहनें ये यूनीक-ट्रेडिशनल ज्वेलरी

Jewellery for Dandiya Night: नवरात्रि के दौरान होने वाले डांडिया और गरबा इवेंट में आप जरूर शामिल होंगी। इसके लिए आपने ड्रेसअप भी सेलेक्ट कर ली होगी। लेकिन आपका फेस्टिव लुक तभी कंप्लीट होगा, जब आप इनके साथ मैचिंग लेकिन यूनीक ज्वेलरी कैरी करेंगी। जरूरी नहीं कि आप ओरिजिनल गोल्ड या सिल्वर की ज्वेलरी ही पहनें, आप इस मौके के लिए आर्टीफिशियल ट्रेंडी ज्वेलरी भी कैरी कर सकती हैं। इन्हें पहनकर आप आप सबसे अलग और आकर्षक दिखेंगी। 

मांग टीका: मांग टीका या माथा पट्टी, महिलाओं के ट्रेडिशनल लुक को कंप्लीट करती है। डांडिया-गरबा के खास मौके पर आप अपनी ड्रेस और पसंद के हिसाब से मांग टीका या माथा पट्टी पहन सकती हैं। इसे पहनकर आप ट्रेंडी के साथ रॉयल भी नजर आएंगी। 

ईयर रिंग्स: वैसे तो महिलाओं के पास ईयर रिंग्स की कई वैराइटीज होती हैं। लेकिन नवरात्र के दौरान होने वाले गरबा-डांडिया नाइट इवेंट के लिए आप अपनी ड्रेस से मैचिंग ईयर रिंग ही कैरी करें। अगर आप लहंगा, सूट या साड़ी पहनने वाली हैं तो इनके साथ चांद बलियां या झुमके पहन सकती हैं। अगर आप सिंपल या यूनीकलर ड्रेस पहन रही हैं तो आप डिजाइनर स्टेटमेंट ईयर रिंग्स वियर करें। इससे आपका ओवर ऑल लुक कंप्लीट नजर आएगा।

चूड़ियां: गरबा-डांडिया इवेंट के लिए आपका लुक तब तक कंप्लीट नहीं होता, जब तक आप चूड़ियां नहीं पहनती हैं। गरबा नाइट के लिए आप राजस्थानी लाख के चूड़े और चूड़ियां या फिर ऑक्सिडाइज्ड चूड़ियां भी पहन सकती हैं।

नेकपीस: गरबा इवेंट के लिए पहनी जाने वाली ज्वेलरी में चीड़ और कौड़ी का विशेष रूप से प्रयोग किया जाता है। आप इसके बने नेकपीस पहन सकती हैं। ये नेकपीस आप पर खूब फबेंगे। इसके अलावा ट्रेडिशनल ज्वेलरी से कुछ हटकर आप राजस्थानी ज्वेलरी भी पहन सकती हैं। इसमें आपको सिल्वर पॉलिश्ड लंबे हार और झुमकों का पूरा सेट मार्केट में मिल जाएगा।  

कमरबंद: यह कमर में पहनी जाने वाली ज्वेलरी है। यह भी दो तरह का होता है। एक वो जो पूरी कमर को कवर करता है और एक आधी कमर को। बाजार में आपको मोती, कौड़ी, सिल्वर-मेटल, ऑक्सीडाइज्ड, गोल्ड-मेटल के कमरबंद आसानी से मिल जाएंगे। अगर आप गरबा-डांडिया के लिए लहंगा पहनने वाली हैं तो कमरबंद जरूर पहनें।

बाजूबंद: बाजूबंद को बांह के ऊपरी हिस्से पर पहना जाता है। यह भी मोती, कांच, चीड़, लाख, सिल्वर और गोल्डन मेटल जैसी कई वैरायटीज में मिलता है। आप अपनी ड्रेस के कलर और वर्क से मिलता-जुलता बाजूबंद कैरी कर सकती हैं।
(ज्वेलरी एक्सपर्ट अर्चना अग्रवाल से बातचीत पर आधारित)

निशि

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Google Mosquito Project: 3.2 करोड़ मच्छर छोड़ने की तैयारी में Google! वजह जानकर रह जाएंगे हैरान

'लोहा ही लोहे को काटता है' वाली कहावत अब विज्ञान की दुनिया में भी सच होती नजर आ रही है। दुनिया भर में डेंगू, जीका और अन्य मच्छरजनित बीमारियों के बढ़ते खतरे के बीच Google से जुड़ी बायोटेक पहल एक अनोखे समाधान पर काम कर रही है। इसके तहत प्रयोगशाला में तैयार किए गए करोड़ों विशेष मच्छरों को प्राकृतिक वातावरण में छोड़कर खतरनाक मच्छरों की आबादी को नियंत्रित करने की योजना बनाई गई है।

फ्लोरिडा और कैलिफोर्निया में हो सकता है बड़ा प्रयोग
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगले दो वर्षों में अमेरिका के फ्लोरिडा और कैलिफोर्निया जैसे राज्यों में करीब 3.2 करोड़ विशेष नर मच्छरों को छोड़ने की योजना पर विचार किया जा रहा है। इन क्षेत्रों में गर्म और नम मौसम के कारण मच्छरों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे संक्रमण का खतरा भी बढ़ा है।

कैसे काम करेगी वोल्बाचिया तकनीक?
इस परियोजना की सबसे खास बात 'वोल्बाचिया' (Wolbachia) नामक बैक्टीरिया है। वैज्ञानिक प्रयोगशाला में तैयार किए गए नर मच्छरों को इस बैक्टीरिया से संक्रमित करते हैं।

जब ये नर मच्छर प्राकृतिक वातावरण में मौजूद मादा मच्छरों के साथ प्रजनन करते हैं, तो उनके अंडों का विकास नहीं हो पाता। परिणामस्वरूप नई पीढ़ी के मच्छरों की संख्या धीरे-धीरे कम होने लगती है और समय के साथ उनकी आबादी नियंत्रित हो जाती है।

मंजूरी का इंतजार
यह प्रस्ताव फिलहाल अमेरिकी पर्यावरण और स्वास्थ्य एजेंसियों की समीक्षा प्रक्रिया में है। विशेषज्ञ इसकी सुरक्षा, पर्यावरणीय प्रभाव और दीर्घकालिक परिणामों का अध्ययन कर रहे हैं। हालांकि वोल्बाचिया तकनीक का उपयोग पहले भी कई देशों में मच्छरजनित बीमारियों को नियंत्रित करने के लिए किया जा चुका है।

क्या डेंगू पर लगेगी लगाम?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तकनीक बड़े स्तर पर सफल होती है, तो डेंगू, जीका और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों के प्रसार को कम करने में मदद मिल सकती है। यही वजह है कि यह परियोजना दुनियाभर के वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का ध्यान आकर्षित कर रही है।

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  Sports

संजीव गोयनका के लिए जो ऋषभ पंत नहीं कर पाए वो जोस बटलर ने कर दिखाया, पहली बार किसी टूर्नामेंट में चैंपियन बनी सुपरजायंट्स की टीम

जोस बटलर की कप्तानी वाली मैनचेस्टर सुपरजायंट्स की टीम ने द हंड्रेड के फाइनल में ट्रेंट रॉकेट्स को 5 विकेट से हराकर खिताब को अपने नाम कर लिया. फाइनल में रॉकेट्स की टीम पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित 100 गेंद में 8 विकेट के नुकसान पर 158 रन का स्कोर खड़ा किया था. इसके जवाब में सुपरजायंट्स की टीम ने 2 गेंद पहले 162 रन बनाकर मैच को अपने नाम किया. Mon, 17 Aug 2026 05:46:36 +0530

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