Diwali 2024: दीपावली पर मीठे के साथ लें नमकीन का आनंद, जानें लजीज बनाने की आसान रेसिपी
Diwali 2024: दीपावली के मौके पर मेहमान घर आते ही हैं। उनके स्वागत के लिए आप जरूर स्पेशल डिशेज पेश करना चाहेंगी। कुछ मेहमान मीठा पसंद करते हैं तो कुछ नमकीन। इसीलिए हम आपको बता रहे हैं कुछ मीठे और नमकीन व्यंजनों की रेसिपी। इनमें से कुछ को आप बनाकर स्टोर भी कर सकती हैं। (मुक्ता भावसार की स्टोरी)।
मावा ब्राउनी लेयर बर्फी
सामग्री: मावा-2 कप, कोको पावडर-2 टेबल स्पून, चीनी-1 कप, घी-2 टेबल स्पून, कंडेंस्ड मिल्क-½ कप, वनीला एसेंस-1/2 टी स्पून, बारीक कटे हुए ड्राई फ्रूट्स-सजावट के लिए
विधि: सबसे पहले आपको मावा परत और ब्राउनी परत तैयार करनी होंगी। मावा परत तैयार करने के लिए एक पैन में मावा और चीनी को अच्छे से भून लें और फिर उसे प्लेट में फैलाएं। ब्राउनी परत को तैयार करने के लिए घी में कोको पावडर, चीनी, कंडेंस्ड मिल्क और वनीला एसेंस मिला लें और इसे कुछ देर तक पकाएं। जिस प्लेट में आपने मावे की परत बनाकर रखी है, उसी प्लेट में आप ऊपर से ब्राउनी की परत फैला दें। इसे अच्छे से ठंडा होने दीजिए। इसे ठंडा करके फ्रिज में 1-2 घंटे सेट हाने के लिए रख दें। अब ऊपर से ड्राई फ्रूट्स डालें और छोटे-छोटे पीस में काट लें। मावा ब्राउनी लेयर बर्फी रेडी है।
श्रीखंड टार्ट
सामग्री: मैदा-1 कप, ठंडा मक्खन-1/2 कप, पिसी हुई चीनी-1/4 कप, इलायची पावडर-1/2 टीस्पून, श्रीखंड-1 कप, केसर और पिस्ता-सजावट के लिए।
विधि: मैदा, मक्खन और पिसी चीनी को मिलाकर टार्ट के लिए आटा गूंथकर तैयार कर लें। इसे बेलकर टार्ट मोल्ड में डालें और कांटे से छेद कर लें। अब एक प्री-हीटेड ओवन में 180 डिग्री सेल्सियस पर पंद्रह से बीस मिनट तक बेक करें। अगर ओवन नहीं है तो आप कूकर या कड़ाही में भी बेक कर सकती हैं। बेक होने के बाद इसे कुछ देर ठंडा होने दें। अब टार्ट के अंदर श्रीखंड भरें। केसर और पिस्ते से सजाकर ठंडा-ठंडा श्रीखंड टार्ट मेहमानों को परोसें।
मैंगो रोज बाइट्स
सामग्री: रेडिमेड मैंगो पल्प-1 कप, नारियल का बुरादा-1/2 कप, काजू पावडर-1/4 कप, चीनी-1/4 कप, केसर-थोड़ी सी (पानी में घुली), गुलाब की पंखुड़ियां-सजावट के लिए।
विधि: एक पैन में आम का पल्प और चीनी मिलाकर गाढ़ा होने तक पकाएं। जब पल्प अच्छे से पक जाए तो उसमें नारियल का बुरादा और काजू पावडर मिलाएं। तैयार मिश्रण को चिकनाई लगी प्लेट में फैला दें। इसे अच्छे से ठंडा होने दें। मिश्रण जम जाएगा। इसकी बर्फी काट लें। ऊपर से केसर के धागों से सजाएं और गुलाब की पंखुड़ियों से गार्निश करें। इसे कुछ देर फ्रिज में ठंडा होने दें। मेहमानों के आने पर परोसें।
ज्वार की सेव
सामग्री: ज्वार का आटा-1 कप, बेसन-1/4 कप, अजवाइन-1/2 टीस्पून, लाल मिर्च पावडर-1/2 टीस्पून, हल्दी पावडर-1/4 टीस्पून, नमक-स्वादानुसार, मिश्रण में डालने के लिए घी/तेल- 1 टेबल स्पून, तेल-तलने के लिए।
विधि: ज्वार का आटा, बेसन, अजवाइन, लाल मिर्च, हल्दी, नमक, और घी को मिलाकर पानी डालते हुए सख्त आटा गूंथ लें। सेव बनाने की मशीन में डालकर गर्म तेल में कुरकुरी होने तक तलें। ठंडा करके एयरटाइट डिब्बे में स्टोर करें। गेस्ट्स के सामने चाय के संग इन्हें पेश करें।
ट्रेल सीड्स चिवड़ा
सामग्री: मुरमुरा (पफ्ड राइस)-2 कप, मूंगफली-1/4 कप, कद्दू के बीज-2 टेबल स्पून, सूरजमुखी के बीज-2 टेबल स्पून, अलसी के बीज-2 टेबल स्पून, करी पत्ते-8-10, राई-1/2 चम्मच, हल्दी पावडर-1/4 चम्मच, बारीक कटी हरी मिर्च-2, नमक-स्वादानुसार, तेल-1 टेबल स्पून ।
विधि: एक कड़ाही में तेल गर्म करें। राई, हरी मिर्च और करी पत्ते का तड़का लगाएं। अब मूंगफली, कद्दू के बीज, सूरजमुखी के बीज और अलसी के बीज डालकर भून लें। मुरमुरे और हल्दी पावडर डालें, फिर नमक मिलाकर दो-तीन मिनट तक भूनें। ट्रेल सीड्स चिवड़ा तैयार है। इसे ठंडा करके एयरटाइट डिब्बे में स्टोर करें।
इटेलियन चीज क्रैकर्स
सामग्री: मैदा-1 कप, ग्रेट किया हुआ चीज-1/2 कप, ठंडा मक्खन- 1/4 कप, ऑरेगैनो-1/2 टीस्पून, चिली फ्लेक्स-1/4 टीस्पून, नमक- 1/4 टीस्पून, बेकिंग पावडर-1/4 टीस्पून, दूध (आटा गूंथने के लिए) आवश्यकतानुसार।
विधि: मैदा, चीज, मक्खन, ऑरेगैनो, चिली फ्लेक्स, नमक और बेकिंग पावडर को अच्छे से मिलाएं। अब थोड़ा-थोड़ा दूध डालकर नर्म आटा गूंथ लें। आटे को बेलकर कुकी कटर से काट लें। इसे 180 डिग्री सेल्सियस पर 12-15 मिनट तक बेक करें। इसे ठंडा करके चाय या सूप के साथ मेहमानों को सर्व करें।
रेसिपी: रक्षिता मेहता, कुकरी एक्सपर्ट
Diwali 2024: दीवाली पर मन-जीवन के आंगन में जगमग दीप जलाएं, दूर करें मन का अंधियारा
Diwali 2024: जब-जब दीपावली का पर्व आता है, श्रीराम की अयोध्या वापसी का दृश्य स्मृति में जीवंत हो उठता है और मुझे अपना एक गीत याद हो आता है।
दीप घर-घर जले हैं अवध में पिया,
आज लौटे अयोध्या में रघुवर-सिया।
ऐसा इसलिए भी कि दीपावली त्योहार का संबंध इसी से है। वैसे दीपावली सबके लिए अलग-अलग अर्थ भी रखती है। सुख-दुख के नाना झंझटों में घिरा हुआ मन भी तीज-त्योहार पर खुशियां मना लेता है। दशहरा विजय पर्व है तो दीपावली दीप पर्व... प्रकाशपर्व। विजया दशमी के साथ ही जैसे दीपावली का उल्लास सिर पर चढ़ने लगता है। शरद की रातें सुहावनी होने लगती हैं। लिहाजा मन में उल्लास और तन में स्फूर्ति दुगनी हो उठती है। कार्तिक मास की अमावस्या को मनाई जाने वाली दीपावली यों तो भारत का प्रमुख त्योहार है किंतु जहां-जहां हिंदू समुदाय और भारत के लोग हैं, वे इस त्योहार को भारतीय रीति के अनुसार बढ़-चढ़कर मनाते हैं।
जीवन-संस्कृति में व्याप्त हैं राम
कहते हैं, विजया दशमी के दिन श्रीराम ने रावण पर विजय पाई थी। इस विजय को एक रूपक के रूप में हम बुराई पर विजय के रूप में लेते हैं। वैसे रामकथा पूरे विश्व में व्याप्त है। थोड़े-थोड़े अंतर से यह कथा ना केवल आज विश्वव्यापी जनसंस्कृति का हिस्सा बन गई है वरन साहित्य में भी रामकथा का व्यापक प्रभाव देखा जाता है। श्रीराम, रावण का वध कर अयोध्या लौटे हैं तो उत्सव क्यों ना मने! जब हमारी पूरी संस्कृति ही राममय है, लोक में, संस्कार में, गीतों में, आख्यानों में राम ही राम समाए हुए हैं।
ये भी पढ़ें: दिवाली और धनतेरस पर करें कुबेर देव की विशेष पूजा, बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा
सोहर, विवाहगीत, ज्योनार, परछन, शादी-ब्याह, पुत्र जन्म आदि कौन-सा अवसर ऐसा है कि जो राम के उल्लेख के बिना पूरा होता है। वे हमारी जीवन-संस्कृति में इस कदर समाए हैं कि गोपियां, उद्धव को विदा करते हुए श्रीकृष्ण को राम-राम कहना नहीं भूलतीं यानी नमस्कार करना, रामजोहार करना। इसलिए कि राम-राम केवल राम का नाम-स्मरण ही नहीं, धीरे-धीरे लोक में वह नमस्कार का एक पर्याय भी बनता गया। गोपियां कहती हैं, ‘नाम को बताई और जतार्इ ग्राम ऊधो बस/स्याम सों हमारी रामराम कहि दीजियो।’
शास्त्रीय-पौराणिक मान्यताएं
दीपावली का संबंध मुख्यत: श्रीराम की अयोध्या वापसी से है। अयोध्यावासियों ने श्रीराम, सीता और लक्ष्मण के बनवासोपरांत अयोध्या वापसी पर सब जगह मिट्टी के दीए जलाकर उत्सव मनाया था। यही उत्सव कालांतर में दीपावली कहलाने लगा। अयोध्यावासियों ने इस प्रसन्नता की अभिव्यक्ति के लिए घी के दीपक जलाकर श्रीराम का स्वागत किया था। इसीलिए इस दिन यानी कार्तिक की अमावस्या तिथि को दीपोत्सव के रूप में मनाया जाने लगा। कहा जाता है कि दीपावली के दिन देवी लक्ष्मी पृथ्वी पर विराजती हैं, इसलिए लक्ष्मी के स्वागत में भी दीप जलाने का विधान है। इसलिए यह पर्व श्रीराम के स्वागत के निमित्त ही नहीं बल्कि धन-धान्य की देवी लक्ष्मी के पूजन का त्योहार भी बन गया है।
पौराणिक कथानुसार, समुद्र मंथन में निकले 14 रत्नों में एक देवी लक्ष्मी भी थीं, इसलिए कार्तिक की अमावस्या को उनके प्रकटीकरण पर उनके स्वागत एवं पूजन की परंपरा विकसित हुई। इस तरह दीपावली सदियों से मनाई जा रही है। पद्मपुराण और स्कंद पुराण में भी इसका उल्लेख मिलता है। पुराणों के अनुसार दीपावली के दीप, सूर्य देवता के प्रतीक हैं। एक अन्य अर्थ में इसे प्रकाशपर्व माना जाता है, क्योंकि दीप जलाना, भौतिक रूप से उजाला तो करना ही है किंतु दीप जलाने का गूढ़ प्रतीकात्मक अर्थ भीतरी अंधकार और अज्ञान से मुक्ति भी है। ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय।’ या ‘अप्प दीपोभव’ इसी आंतरिक उजाले का पर्याय है।
पंचपर्वों की श्रंखला
दीपावली का यह प्रकाश पर्व पूरे पांच दिन के उत्सवी रंगों में डूबा रहता है। धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज। धनतेरस से आरंभ हुआ यह सिलसिला भाई दूज तक ही नहीं, देव दीपावली तक चलता है, जब कार्तिक की पूर्णिमा को समस्त देवता काशी के घाट पर गंगा किनारे मिलकर दीपावली मनाते हैं। इसीलिए दीपावली महापर्व के रूप में मनाया जाता है।
बदल गया है दीपावली का स्वरूप
यह जन-जन के मन का उल्लास है कि श्रीराम के अयोध्या शुभागमन का यह पावन पर्व अब जन-जन की इच्छा का भी पर्व बन गया है। यह उपहारों के लेन-देन का अवसर भी बन गया है। पर्वों पर मिठाइयां, नमकीन, छप्पन भोग परोसने वाले अपने भारत देश में कोई भी त्योहार बिना पकवान के नहीं मनाया जाता, जिसमें सब शामिल होते हैं। उत्सवता का बोल-बाला बढ़ गया है। बाजार झालरों से सजे हैं। मोमबत्तियों का दौर है यह, नकली बिजली की झालरों का भी युग है। बेचारे कुम्हारों को कौन पूछता है। गांव में चारागाह और तालाब पट गए। कहां से दीप बनाने की मिट्टी मिले। फिर भी कुम्हार साल भर इसी त्योहार की बाट जोहते हैं कि यह पर्व आए और उनके दीप और मिट्टी के बर्तनों की बिक्री हो। पर अब शुभ के लिए थोड़े दीए भले जला लिए जाएं पर बाकी जगहों पर मोमबत्तियां ही जलाई जाती हैं। झालरों ने घरों की सजावट को अधुनातन रूप दिया है।
दूर करें मन का अंधियारा
दीपावली हर साल आती है। हर साल हम दीप जलाकर पसरे अंधकार को भगाने का यत्न करते हैं। लेकिन अंधेरा है कि दूर होने का नाम नहीं लेता। ध्यान से देखें तो विज्ञान का उजाला तो हमने बहुत कर लिया पर अज्ञान, अधर्म, पाखंड, अंधविश्वास के अंधेरे को हम अभी भी नहीं मिटा सके। वह अंधेरा अभी भी हमारे आस-पास व्याप्त है। जहां वेद, पुराणों, उपनिषदों, महाभारत और रामायण जैसे आदि ग्रंथो में ज्ञान का प्रवाह लहराता मिलता हो, उस भारत में अभी भी बड़ी आबादी अल्पशिक्षित है, वंचित है।
आइए! दीपावली के इस महाप्रकाश पर्व में भीतर-बाहर सभी जगह से अंधकार और अज्ञान को मिटाने के लिए हम सब आगे आएं और लक्ष्मी को ऊंचा आसन देते, उनकी अर्चना करते हुए मन ही मन सरस्वती का सम्मान करना ना भूलें, जिससे वास्तव में समाज में व्याप्त जड़ता और अज्ञान पर प्रहार हो। हमारा समाज, हमारी संस्कृति और सभ्यता वास्तविक उजाले में रोशन हो सके और वैर, द्वेष के बजाय प्रेम की रोशनी धरा पर फैल जाए-
- चलो कि टूटे हुओं को जोड़ें, जमाने से रूठे हुओं को मोड़ें
- अंधेरे में इक दिया तो बालें, हम आंधियों का गुरूर तोड़ें
- धरा पे लिख दें हवा से कह दें, है महंगी नफरत औ’ प्यार सस्ता।
(लेखक डॉ. ओम निश्चल हिंदी के कवि, आलोचक और भाषाविद हैं)
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
Haribhoomi








.jpg)

