US-Hormuz Toll: 60 दिन में समझौता नहीं हुआ तो होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर लगेगा टोल? ट्रंप का ईरान डील को लेकर नया पैंतरा
US-Hormuz Toll: अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए सीजफायर समझौते के बाद एक बार फिर पश्चिम एशिया की राजनीति गरमा गई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि अगर 60 दिन की युद्धविराम अवधि के भीतर दोनों देशों के बीच अंतिम समझौता नहीं हो पाया, तो अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर टोल लगा सकता।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ पर पोस्ट करते हुए कहा कि फिलहाल 60 दिन की सीजफायर अवधि के दौरान होर्मुज स्ट्रेट में किसी भी जहाज से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि अगर तय समय के भीतर समझौता पूरा नहीं हुआ तो अमेरिका मध्य पूर्वी देशों की सुरक्षा में निभाई गई अपनी भूमिका की लागत वसूलने के लिए टोल लगाने का फैसला कर सकता।
अमेरिका होर्मुज पर लगा सकता टोल
दरअसल, अमेरिका और ईरान ने इसी हफ्ते 14 बिंदुओं वाले एक समझौता ज्ञापन पर साइन किया है। इस पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने हस्ताक्षर किए हैं। समझौते का मकसद दोनों देशों के बीच तनाव कम करना, होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा पूरी तरह खोलना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम समेत कई मुद्दों पर वार्ता शुरू करना है।
ट्रंप के पोस्ट से मची खलबली
इसी दिशा में अब कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस जल्द ही स्विट्जरलैंड पहुंच सकते हैं, जहां ईरानी अधिकारियों के साथ उनकी बातचीत होगी। अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर पहले ही वहां पहुंच चुके। दोनों देशों के बीच परमाणु समझौते पर बातचीत का पहला दौर रविवार से शुरू होने की उम्मीद है।
ईरान-अमेरिका के बीच रविवार से वार्ता शुरू होगी
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी स्विट्जरलैंड पहुंच चुके। वहीं ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ के भी वार्ता में शामिल होने की संभावना है। कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी भी मध्यस्थ की भूमिका निभाने के लिए वहां मौजूद हैं।
इस बीच ईरान ने शनिवार को होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने का ऐलान कर दिया। तेहरान का आरोप है कि अमेरिका-ईरान समझौते के बावजूद इजराइल ने लेबनान में सैन्य हमले जारी रखे हैं, जिससे युद्धविराम की भावना कमजोर हुई और क्षेत्रीय स्थिरता पर सवाल खड़े हुए हैं।
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की बाधा अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डाल सकता।
हालांकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) का कहना है कि शनिवार को इस जलमार्ग से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों की संख्या बढ़ी है। अमेरिका ने यह भी कहा कि उसकी सेनाएं क्षेत्र में सक्रिय हैं और समुद्री मार्गों की सुरक्षा तथा जहाजों की आवाजाही पक्की कर रही हैं। फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर है कि अगले 60 दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है।
(प्रियंका कुमारी)
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