'होर्मूज पर अमेरिका लगाएगा टोल अगर...', शांति समझौते के बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने फिर दी ईरान को धमकी
US-Iran Peace Deal: अमेरिका और ईरान के बीच भले ही शांति समझौता हो गया हो लेकिन अभी भी दोनों तरफ से बयानबाजी और धमकियों का दौर जारी है. अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को धमकी दी है अगर परमाणु वार्ता सफल नहीं होती है तो अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य पर टोल वसूलेगा. ट्रंप ने शनिवार को कहा कि ईरान के साथ 60 दिनों के अंतरिम युद्धविराम के दौरान या उसके बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने पर कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा. इसके साथ ही उन्होंने शांति वार्ता विफल होने की स्थिति में होर्मूज पर खुद टोल वसूलने की ईरान को धमकी दी.
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की ईरान को धमकी
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट किया. जिसमें उन्होंने कहा कि अगर ईरान वार्ता, जो रविवार को स्विट्जरलैंड में शुरू होने की उम्मीद है, निर्धारित 60 दिनों में सफल नहीं होती है, तो अमेरिका जलडमरूमध्य से आवागमन पर अपना शुल्क लगा सकता है. अंतरिम समझौते के तहत वार्ताकारों को परमाणु समझौते पर पहुंचने के लिए 60 दिन का समय दिया गया है, लेकिन इसे बढ़ाया जा सकता है.
“There will be NO TOLLS in the Hormuz Strait for 60 days during the Cease Fire Period, and there will be NO TOLLS after the 60 day period has expired, unless they are imposed by and for the United States of America…” - President Donald J. Trump pic.twitter.com/js9NpwE4M0
— The White House (@WhiteHouse) June 20, 2026
ट्रंप ने पोस्ट में लिखा, "युद्धविराम अवधि के दौरान 60 दिनों तक होर्मुज जलडमरूमध्य में कोई शुल्क नहीं लगेगा, और 60 दिनों की अवधि समाप्त होने के बाद भी कोई शुल्क नहीं लगेगा, जब तक कि समझौता पूरा न होने की स्थिति में संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा मध्य पूर्व के देशों के संरक्षक देवदूत के रूप में दी गई सेवाओं के लिए, अतीत, वर्तमान और भविष्य में होने वाले खर्चों की प्रतिपूर्ति के उद्देश्य से, शुल्क न लगाया जाए." इन घोषणाओं से संकेत मिलता है कि तकनीकी स्तर पर अमेरिका-ईरान वार्ता की शुरुआत कठिन रही है. प्रमुख मध्यस्थ पाकिस्तान ने कहा है कि वार्ता रविवार से शुरू होगी, जिसमें कतर के मध्यस्थ भी भाग लेंगे.
होर्मुज जलडमरूमध्य पर दावों का खंडन
वहीं दूसरी ओर ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को अमेरिका द्वारा युद्ध समाप्त करने में विफल रहने के कारण "अपनी प्रतिबद्धताओं का स्पष्ट उल्लंघन" करने के चलते बंद कर दिया गया है. अंतरिम समझौते का उद्देश्य सभी मोर्चों पर लड़ाई रोकना है.
होर्मुज पर ईरान की नियंत्रण नहीं- अमेरिका
इसके साथ ही अमेरिका ने जलडमरूमध्य पर ईरान की घोषणा का खंडन किया. अमेरिकी केंद्रीय कमान के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने कहा, "ईरान का होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण नहीं है. यातायात सुचारू रूप से चल रहा है, और अमेरिकी सेना यह सुनिश्चित करने के लिए स्थिति पर नजर रख रही है कि ऐसा ही बना रहे."
परमाणु वार्ता के लिए रवाना हुआ ईरानी प्रतिनिधिमंडल
अमेरिकी सेना ने कहा कि शनिवार को 55 व्यापारिक जहाज 17 मिलियन बैरल से अधिक तेल लेकर होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरे. अमेरिका-ईरान के बीच होने वाली परमाणु वार्ता शुक्रवार को रद्द कर दी गई थी. उसके बाद ईरान के सरकारी प्रसारक ने बताया कि वार्ताकार दल स्विट्जरलैंड के लिए रवाना हो रहा है. सरकारी मीडिया ने बताया कि दल में संसदीय अध्यक्ष मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़, विदेश मंत्री अब्बास अराघची और केंद्रीय बैंक एवं तेल मंत्रालय के अधिकारी शामिल हैं. समझौते के तहत ईरान की संपत्तियों को फ्रीज से मुक्त किया जाएगा.
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भारत बोला- PAK राष्ट्रपति का बयान नफरत फैलाने वाला:हमारे मामलों में दखल न दें; जरदारी बोले थे- वाराणसी की मस्जिद खतरे में, कार्रवाई रोकी जाए
पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के भारत की मस्जिद को लेकर दिए भड़काऊ बयान पर भारत ने रिएक्शन दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, पाकिस्तान को भारत के आंतरिक मामलों पर कमेंट करने का कोई अधिकार नहीं है। विदेश मंत्रालय की तरफ से शनिवार को जारी प्रेस रिलीज में कहा गया कि मानवाधिकारों के मामले में पाकिस्तान का अपना रिकॉर्ड बहुत खराब रहा है, जिस पर दुनिया भर में चर्चा होती है। ऐसे में पाकिस्तान की तरफ से ऐसी बयानबाजी बेतुकी लगती हैं। अलग-अलग धर्मों के अल्पसंख्यकों को सुनियोजित तरीके से निशाना बनाने और उनका उत्पीड़न करने का पाकिस्तान का लंबा इतिहास जगजाहिर है। दरअसल जरदारी ने कहा था कि भारत में कई ऐतिहासिक मुस्लिम धार्मिक स्थल खतरे में हैं। उन्होंने खास तौर पर वाराणसी की गंज शहीदा मस्जिद का जिक्र किया। जिसे रेलवे ने अवैध निर्माण का नोटिस जारी किया है। जरदारी बोले थे- भारत में मुस्लिम धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई से तनाव बढ़ सकता है पाकिस्तान के राष्ट्रपति कार्यालय ने शनिवार को एक प्रेस नोट जारी किया। जिसमें जरदारी ने कहा कि भारत में कई ऐतिहासिक मुस्लिम धार्मिक स्थल खतरे में हैं। उन्होंने खास तौर पर वाराणसी की गंज शहीदा मस्जिद का जिक्र किया, जिसे उन्होंने करीब 1000 साल पुरानी मस्जिद बताया। जरदारी ने भारत से अपील की कि ऐसे धार्मिक स्थलों के खिलाफ किसी भी कार्रवाई को तुरंत रोका जाए। उनका कहना है कि इससे सामाजिक तनाव बढ़ सकता है और देश में अस्थिरता पैदा हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत को अल्पसंख्यकों के अधिकारों और साझा सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करनी चाहिए। अब जानिए क्या है वाराणसी की गंज शहीदा मस्जिद विवाद… वाराणसी के काशी रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास और मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब परियोजना के तहत रेलवे प्रशासन ने स्टेशन के पास स्थित गंज शहीदा मस्जिद को नोटिस जारी कर 20 जून तक परिसर खाली करने को कहा था। रेलवे का कहना है कि मस्जिद रेलवे की जमीन पर बना अवैध ढांचा है और 1991 में दायर एक दीवानी मुकदमे में अगस्त 2024 में आए फैसले के बाद कार्रवाई की जा रही है। रेलवे का कहना है कि 1991 में दायर मुकदमा 28 अगस्त 2024 को खारिज होने के बाद मस्जिद हटाने का रास्ता साफ हो गया। वहीं, मस्जिद प्रबंधन समिति का दावा है कि मामला मस्जिद के अस्तित्व से नहीं, बल्कि उसके पूर्वी हिस्से की जमीन से जुड़ा था और रेलवे अदालत के फैसले की गलत व्याख्या कर रहा है। मस्जिद की 3 तस्वीरें… रेल प्रशासन का क्या कहना है, 4 पॉइंट… मस्जिद कमेटी का पक्ष; बोले- हाईकोर्ट जाएंगे ---------------------------
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