पिछले मैच का खिलाड़ियों के शरीर पर असर पड़ा, सभी ने अपनी जरूरतों के हिसाब से ट्रेनिंग की: अर्शदीप सिंह
चेन्नई, 20 जून (आईएएनएस)। भारतीय क्रिकेट टीम के बाएं हाथ के तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह ने स्वीकारा है कि अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज के दूसरे मैच के दौरान लखनऊ में गर्मी के बीच खिलाडियों के शरीर पर असर पड़ा था। सीरीज के तीसरे और आखिरी मैच के लिए सभी ने अपनी जरूरतों के हिसाब से ट्रेनिंग की।
Explainer: खाटू श्याम की इस कहानी में छिपा है जीवन का बड़ा संदेश, बाबा के दरबार में भूलकर भी न मांगें यह वरदान, जानें कथा
Khatu Shyam Ji Story: खाटू श्याम बाबा को कलियुग का देवता कहते हैं. उनके दरबार में हर साल लाखों श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं. मान्यता है कि जो भी सच्चे मन से की उनकी प्रार्थना करता है, बाबा उनकी पुकार को जरूर सुनते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि खाटू श्याम की प्रसिद्ध कथा में ऐसा गहरा जीवन संदेश भी छिपा है, जो हर व्यक्ति को सही राह दिखा सकता है? महाभारत के वीर बर्बरीक की यह कथा बताती है कि सिर्फ शक्ति और सामर्थ्य ही सब कुछ नहीं होती, बल्कि विनम्रता, समर्पण और विवेक का होना भी उतना ही जरूरी है. यही कारण है कि बाबा के दरबार में कुछ ऐसी इच्छाएं और वरदान भी हैं, जिन्हें मांगने से बचना चाहिए. आइए जानते हैं खाटू श्याम बाबा की उस प्रेरणादायक कथा के बारे में.
कौन हैं खाटू श्याम बाबा?
खाटू श्याम बाबा हिंदूओं के देवता है. इन्हें कलियुग में पूजा जाता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, खाटू श्याम भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र है. उनका नाम बर्बरीक था. भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें कलियुग में श्रीकृष्ण के अवतार के रूप में पूजा जाने का वरदान दिया था. इसलिए, उनका नाम बाबा श्याम कहते हैं. उन्हें हारे का सहारा कहते हैं. बर्बरीक के बारे में कहे तो वह महाभारत काल के योद्धा थे. भगवान शिव ने उन्हें तीन अमोघ बाण दिए थे, जिस वजह से उन्हें तीनबाण धारी कहते हैं. भगवान कृष्ण ने उनसे गुरु दक्षिणा में उनका शीश मांगा था. उन्होंने हंसते-हंसते अपनी शीश उन्हें दे दिया था. इसके बाद ही श्रीकृष्ण ने उन्हें वरदान दिया था. इसके बाद उन्हें शीश के दानी नाम से भी जाना जाने लगा.
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महाभारत युद्ध में खाटू श्याम की भूमिका
खाटू श्याम जी भगवान का संबंध महाभारक काल यानी द्वापर काल में भी है. जब महाभारत का युद्ध शुरू हुआ तो वे भी युद्ध का हिस्सा बनने आए थे. उन्होंने अपनी माता को वचन दिया था कि वे हारने वाले पक्ष का सहारा बनेंगे. अपनी माता अहिलावती को दिए इस वचन के कारण ही आज भी उन्हें भक्त संकट के समय उन्हें याद करते हैं.
महाभारत के युद्ध के समय, बर्बरीक युद्ध देखने के लिए कुरुक्षेत्र पहुंचे थे. उनके पास तीन ऐसे दिव्य बाण थे, जो पल भर में युद्ध का परिणाम तय कर सकते थे. भगवान कृष्ण जानते थे कि बर्बरीक हमेशा कमजोर पक्ष की ओर से लड़ेंगे. इसलिए, युद्ध को असंतुलित होने से बचाने के लिए श्री कृष्ण ने ब्राह्मण रूप धारण कर उनसे दान में उनका शीश मांग था.
बाबा खाटू श्याम से कौन सा वरदान नहीं मांगना चाहिए?
राजस्थान की प्रचलित लोक कथा के अनुसार, खाटू श्याम बाबा के दरबार में जो मांगों वो मिलता है. लेकिन एक चीज नहीं मांगनी चाहिए क्योंकि उसे मांगते ही सब कुछ खत्म हो जाता है. कहानी है राजस्थान के गांव में रहने वाले वीर नाम के शख्स की. वीर बजपन से बाबा श्याम का बड़ा भक्त था. हर साल वह नंगे पैर खाटू श्याम तक जाता था और अपनी मनोकामना मांगता था. उसकी आस्था इतनी गहरी थी कि हर मनोकामना पूरी हो जाती थी.
धीरे-धीरे उसका विश्वास इतना गहरा हो गया कि उसे लगने लगा कि वो जो मांगेगा, उसे वह सब कुछ मिलने लगेगा. फिर एक दिन वीर के गांव में एक साधु बाबा आए. उन्होंने वीर को कहा कि बाबा से सबकुछ मांगना लेकिन सिर्फ एक चीज नहीं तो वीर ने पूछा क्या? बाबा ने कहा की खाटू श्याम जी से कभी भी किसी दूसरे का बुरा मत मांगना.
समय बीत गया और धीरे-धीरे खाटू श्याम जी के आशीर्वाद से वीर बहुत धनवान बन गया. फिर एक बार उसके साथी ने व्यापार में उसे धोखा दे दिया. उसने सारी जमीन जायदाद अपने नाम कर ली. इसके बाद गुस्से में वीर खाटू श्याम पहुंचा. वहां उसने आगबबूला होकर खाटू श्याम जी से बोला कि भगवान मुझे न्याय नहीं बदला चाहिए.
सपने में आए खाटू श्याम जी
इसके बाद उसी रात को वीर के सपने में खाटू श्याम बाबा जी आए. उन्होंने वीर से कहा कि मैं तुझे बदला दे सकता है, लेकिन तुझे भी उसकी कीमत चुकानी होगी. वीर क्रोधित था और उसने कह दिया कि मुझे मंजूर है. कुछ दिनों के अंदर उस शख्स के साथ वहीं सब हुआ, जो वीर ने बाबा से मांगा था. वह अपना सब कुछ खो बैठा था. मगर दूसरी तरफ वीर भी बहुत ज्यादा परेशान होने लगा. उसके जीवन में कठिनाइयां आने लगी. व्यापार में मंदा पड़ गया, पिता बीमार हो गए और घर में भी क्लेश होने लगे थे. तब वीर को समझ आया कि आखिर क्यों खाटू श्याम जी ने उसे ऐसा करने से मना किया था. फिर वीर वो रोता हुआ बाबा खाटू श्याम के दरबार पहुंचा.
वीर ने मांगी क्षमा
बाबा श्याम के दरबार पर आकर वीर ने उनसे क्षमा मांगी. उसने कहा कि बाबा मुझसे गलती हो गई. मुझे कोई बदला नहीं, बस आपका आशीर्वाद चाहिए. तब उसके अंदर से एक आवाज आई कि मैं अपने भक्तों को सब कुछ देता हूं, मगर बदला और तकलीफ नहीं. इसलिए, कहा जाता है कि खाटू श्याम के दरबार में सब मांगना चाहिए, लेकिन किसी का बुरा या बर्बाद करने का वरदान नहीं मांगना चाहिए.
FAQs
प्रशन1. कौन थे खाटू श्याम जी?
खाटू श्याम जी महाभारत काल के वीर योद्धा बर्बरीक थे.
प्रशन2. बर्बरीक को खाटू श्याम नाम कैसे मिला?
शीश दान से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने उन्हें कलियुग में श्याम नाम से पूजे जाने का वरदान दिया था.
प्रशन3. खाटू श्याम जी का सबसे बड़ा संदेश क्या है?
अहंकार त्यागकर भगवान के प्रति समर्पण और निस्वार्थ सेवा करना.
प्रशन4. बाबा के दरबार में क्या मांगना चाहिए?
सद्बुद्धि, भक्ति, स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और सही मार्गदर्शन मांगना चाहिए.
प्रशन5. बाबा के दरबार में क्या नहीं मांगना चाहिए?
दूसरों का बुरा और लालच नहीं दिखाना चाहिए.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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