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Explainer: भारत के ऐतिहासिक स्मारकों पर खर्च घटा, क्या पर्यटन को हो सकता है नुकसान? समझें पूरी कहानी

Indian Heritage: भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां इतिहास, संस्कृति और विरासत पर्यटन का बड़ा आधार हैं. देश में हजारों साल पुरानी सभ्यताओं से लेकर मुगल, राजपूत, दक्षिण भारतीय और औपनिवेशिक दौर की कई ऐतिहासिक धरोहरें मौजूद हैं. इनमें ताजमहल, अजंता-एलोरा की गुफाएं और हम्पी जैसे विश्व प्रसिद्ध स्थल भी शामिल हैं.

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI के संरक्षण में 3,688 केंद्रीय संरक्षित स्मारक हैं. ये स्मारक न सिर्फ भारत की सांस्कृतिक पहचान हैं, बल्कि विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने का भी बड़ा माध्यम हैं.

लेकिन अब सामने आए आंकड़े एक अहम सवाल खड़ा करते हैं. ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण पर खर्च 2024 में अपने उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद कई प्रमुख पर्यटन स्थलों पर घट गया है. ऐसे समय में जब भारत विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, विरासत स्थलों के रखरखाव में यह उतार-चढ़ाव चिंता का विषय माना जा रहा है.

आइए आसान भाषा में समझते हैं कि इन आंकड़ों का क्या मतलब है और भारत के पर्यटन के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है.

ASI के खर्च में क्या बदलाव आया?

हालिया आंकड़े संसद में केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की ओर से पेश किए गए. इनके मुताबिक, ASI का कुल खर्च वित्त वर्ष 2022 के मुकाबले बढ़ा है, लेकिन देश के कई प्रमुख ऐतिहासिक पर्यटन क्षेत्रों में खर्च FY24 में सबसे ज्यादा रहा और इसके बाद इसमें कमी आई. यानी सरकार ने एक समय स्मारकों के संरक्षण पर ज्यादा पैसा खर्च किया, लेकिन अगले वर्षों में कई प्रमुख स्थलों के लिए आवंटन घट गया.

कुछ प्रमुख उदाहरणों से इसे समझ सकते हैं.

आगरा में खर्च

आगरा का नाम आते ही सबसे पहले ताजमहल का ख्याल आता है. यह भारत के सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में से एक है.

  • FY24 में आगरा सर्किल पर खर्च करीब ₹24 करोड़ था.
  • FY26 में यह घटकर करीब ₹16 करोड़ रह गया.

यानी दो वित्त वर्षों के दौरान इसमें लगभग एक-तिहाई की कमी आई.

औरंगाबाद में खर्च

औरंगाबाद सर्किल में अजंता और एलोरा जैसी विश्व प्रसिद्ध गुफाएं आती हैं.

  • FY24 में खर्च करीब ₹27 करोड़ था.
  • FY26 में यह घटकर करीब ₹11 करोड़ रह गया.

यहां कमी काफी बड़ी रही.

हम्पी में खर्च

कर्नाटक का हम्पी भी भारत के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों में शामिल है.

  • FY24 में यहां करीब ₹12 करोड़ खर्च हुए.
  • FY26 में यह राशि घटकर करीब ₹9 करोड़ रह गई.

इन आंकड़ों से साफ है कि प्रमुख पर्यटन स्थलों पर संरक्षण खर्च हर साल एक समान नहीं रहा.

क्या इसका मतलब यह है कि स्मारकों की अनदेखी हो रही है?

जरूरी नहीं कि खर्च कम होने का सीधा मतलब किसी स्मारक की अनदेखी हो. किसी खास साल में संरक्षण, मरम्मत या निर्माण से जुड़े बड़े काम होने पर खर्च अचानक बढ़ सकता है.

उदाहरण के लिए किसी स्मारक में बड़ी मरम्मत, संरचनात्मक मजबूती, पर्यटक सुविधाओं का विकास या संरक्षण परियोजना चल रही हो तो उस साल खर्च ज्यादा हो सकता है. लेकिन विशेषज्ञों की चिंता यह है कि नियमित और वैज्ञानिक रखरखाव के लिए लगातार फंडिंग जरूरी है.

हेरिटेज संरक्षण विशेषज्ञ नमिता जसपाल के मुताबिक, कुछ बड़े स्मारकों की स्थिति बेहतर हो सकती है क्योंकि वहां पर्यटकों की संख्या अधिक है और उनकी देखभाल पर लगातार ध्यान दिया जाता है. लेकिन कम चर्चित स्मारकों को नियमित वैज्ञानिक जांच और छोटे स्तर के रखरखाव से भी बचाया जा सकता है.

भारत के पर्यटन के लिए ये स्मारक इतने महत्वपूर्ण क्यों हैं?

भारत में पर्यटन सिर्फ समुद्र तटों, पहाड़ों या आधुनिक शहरों तक सीमित नहीं है. विदेशी पर्यटकों के लिए भारत की सबसे बड़ी खूबियों में से एक इसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत है. ताजमहल, अजंता-एलोरा, हम्पी, खजुराहो और अन्य ऐतिहासिक स्थल भारत की पहचान को दुनिया के सामने रखते हैं.

अगर किसी प्रसिद्ध स्मारक का रखरखाव खराब हो जाए, वहां साफ-सफाई की समस्या हो, संरचना कमजोर हो या पर्यटकों के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध न हों तो इसका असर पूरे पर्यटन अनुभव पर पड़ सकता है. यही वजह है कि विरासत संरक्षण को पर्यटन नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है.

विदेशी पर्यटकों की संख्या अभी भी चिंता का विषय

कोरोना महामारी के बाद दुनिया भर में पर्यटन धीरे-धीरे वापस पटरी पर आया है, लेकिन भारत अभी भी अपने पुराने स्तर तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाया है.

2025 में भारत आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या सालाना आधार पर 9.4% घटकर करीब 90.2 लाख रह गई. वहीं, 2019 में यानी कोरोना महामारी से पहले भारत में करीब 1.1 करोड़ विदेशी पर्यटक आए थे.

इसका मतलब है कि भारत को अभी भी महामारी से पहले के विदेशी पर्यटन स्तर को पार करने की चुनौती है. ऐसे में ऐतिहासिक स्मारकों को बेहतर स्थिति में रखना और पर्यटकों के अनुभव को सुधारना बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है.

क्या सिर्फ ज्यादा पैसा खर्च करना ही समाधान है?

विशेषज्ञों का कहना है कि समस्या सिर्फ बजट की मात्रा की नहीं है. सवाल यह भी है कि उपलब्ध पैसे का इस्तेमाल कितनी कुशलता से और किस प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है.

कई बार किसी ऐतिहासिक स्मारक को बचाने के लिए करोड़ों रुपये की बड़ी परियोजना की जरूरत नहीं होती. अगर समय पर छोटी दरारों की मरम्मत हो जाए, पानी का रिसाव रोक दिया जाए और संरचना की नियमित जांच होती रहे तो बड़े नुकसान को रोका जा सकता है.

इसे आसान भाषा में Preventive Conservation यानी नुकसान होने से पहले संरक्षण कहा जा सकता है. इसका फायदा यह है कि छोटी समस्या को समय रहते ठीक कर दिया जाए तो भविष्य में होने वाला बड़ा खर्च भी बचाया जा सकता है.

दुनिया के दूसरे देशों में कितना खर्च होता है?

स्मारकों के संरक्षण पर खर्च की तुलना करना आसान नहीं है, क्योंकि हर देश की विरासत, अर्थव्यवस्था और संरक्षण व्यवस्था अलग होती है. फिर भी UNESCO के आंकड़े बताते हैं कि सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत पर प्रति व्यक्ति खर्च दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में काफी अलग है. कुछ कम निवेश वाले क्षेत्रों में यह खर्च करीब 3 डॉलर PPP प्रति व्यक्ति तक है, जबकि अधिक खर्च करने वाले देशों में यह करीब 500 डॉलर PPP तक पहुंचता है.

यूरोप और उत्तरी अमेरिका जैसे क्षेत्र विरासत संरक्षण पर अपेक्षाकृत ज्यादा खर्च करने वालों में शामिल हैं. इन क्षेत्रों में मध्य स्तर का खर्च करीब 93 डॉलर PPP प्रति व्यक्ति बताया गया है. इससे यह संकेत मिलता है कि भारत के सामने केवल स्मारकों की संख्या बड़ी होने की चुनौती नहीं है, बल्कि उन्हें लंबे समय तक संरक्षित रखने के लिए पर्याप्त संसाधन जुटाने की भी जरूरत है.

पर्यटन मंत्रालय का अपना बजट भी पूरी तरह इस्तेमाल नहीं हुआ

यह समस्या सिर्फ ASI के खर्च तक सीमित नहीं है. पर्यटन मंत्रालय के बजट इस्तेमाल के आंकड़े भी एक तस्वीर दिखाते हैं. FY26 में 5 मार्च तक पर्यटन मंत्रालय अपने ₹2,541 करोड़ के बजट का करीब 60% ही खर्च कर पाया था. हालांकि यह पिछले वित्त वर्ष की तुलना में सुधार था. FY25 में मंत्रालय ने अपने ₹2,480 करोड़ के बजट का सिर्फ करीब 19% इस्तेमाल किया था. इससे एक महत्वपूर्ण सवाल उठता है कि अगर पर्यटन और विरासत संरक्षण के लिए बजट उपलब्ध है, तो उसे समय पर और प्रभावी तरीके से खर्च क्यों नहीं किया जा रहा?

भारत अब विरासत और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए क्या कर रहा है?

सरकार सिर्फ स्मारकों के संरक्षण पर ही ध्यान नहीं दे रही, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की सांस्कृतिक विरासत को प्रमोट करने की भी कोशिश कर रही है.

हाल ही में भारत ने BRICS देशों के सांस्कृतिक मंत्रियों की बैठक में भोपाल घोषणा को अपनाया. इसका उद्देश्य BRICS देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग बढ़ाना है.

इसके तहत—

  • विरासत संरक्षण में सहयोग बढ़ाने की कोशिश होगी.
  • कलाकारों और रचनाकारों को समर्थन देने पर जोर होगा.
  • संग्रहालयों के बीच सहयोग बढ़ाया जाएगा.
  • UNESCO की विश्व विरासत सूची में नामांकन के लिए देश एक-दूसरे की मदद कर सकेंगे.

यह कदम भारत की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने की रणनीति का हिस्सा है.

Netflix के जरिए भी होगी भारतीय विरासत की ब्रांडिंग

पर्यटन मंत्रालय ने मनोरंजन के क्षेत्र का इस्तेमाल करके भी भारत की विरासत को दुनिया तक पहुंचाने की कोशिश की है. पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और Netflix के सह-CEO टेड सारंडोस ने ‘As Seen On Netflix’ अभियान शुरू किया है. इसका उद्देश्य फिल्मों और शो के जरिए भारत के प्रमुख सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थलों को दर्शकों के सामने लाना है.

आज फिल्मों और वेब सीरीज के जरिए किसी जगह की लोकप्रियता तेजी से बढ़ सकती है. इसलिए पर्यटन प्रचार में OTT प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल भारत के लिए नए पर्यटकों को आकर्षित करने का माध्यम बन सकता है.

तो क्या कम संरक्षण खर्च से पर्यटन प्रभावित होगा?

सीधा असर तुरंत दिखाई दे, यह जरूरी नहीं है. लेकिन लंबे समय में खराब रखरखाव पर्यटन की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को प्रभावित कर सकता है. अगर किसी ऐतिहासिक स्थल की संरचना कमजोर होती है, उसकी खूबसूरती खराब होती है या वहां पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं नहीं मिलतीं, तो विदेशी पर्यटक दूसरे विकल्प चुन सकते हैं.

इसके उलट अगर भारत अपने स्मारकों को अच्छी तरह संरक्षित करे, बेहतर पर्यटन सुविधाएं दे और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित करे तो विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ाने में मदद मिल सकती है.

सबसे बड़ी चुनौती क्या है?

भारत के सामने चुनौती सिर्फ पैसा बढ़ाने की नहीं, बल्कि सही जगह और सही समय पर पैसा खर्च करने की है. देश में 3,688 केंद्रीय संरक्षित स्मारक हैं. इनमें से कुछ बेहद लोकप्रिय हैं, जबकि कई कम चर्चित और कम पर्यटक वाले स्थल हैं.

इसलिए एक प्रभावी रणनीति में तीन चीजें महत्वपूर्ण होंगी—

1. प्रमुख स्मारकों की नियमित और वैज्ञानिक देखभाल.
2. कम चर्चित स्मारकों के लिए preventive conservation.
3. पर्यटन सुविधाओं और अंतरराष्ट्रीय प्रचार पर समान रूप से ध्यान.

भारत के ऐतिहासिक स्मारक सिर्फ पुरानी इमारतें नहीं हैं. ये देश की सांस्कृतिक पहचान के साथ-साथ पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण हैं. FY24 के बाद आगरा, औरंगाबाद और हम्पी जैसे प्रमुख पर्यटन सर्किलों में संरक्षण खर्च में कमी ने इस बात पर बहस जरूर शुरू कर दी है कि भारत अपनी विरासत को बचाने के लिए कितनी प्राथमिकता और कितने संसाधन दे रहा है. 

भारत में विदेशी पर्यटकों की संख्या अभी भी 2019 के स्तर से नीचे है. ऐसे में ताजमहल से लेकर अजंता-एलोरा और हम्पी तक ऐतिहासिक स्थलों का बेहतर संरक्षण देश की पर्यटन रणनीति का अहम हिस्सा बन सकता है.  यानी चुनौती केवल यह नहीं है कि भारत के पास कितनी विरासत है, बल्कि यह भी है कि वह अपनी इस विरासत को कितनी अच्छी तरह संभालता है और दुनिया के सामने कितनी प्रभावी तरीके से पेश करता है.

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