बारिश में घर पर उगाएं छतरपुर की मशहूर पोई भाजी, पान के बरेजा में होती है तैयार! जानें इसकी खासियत
छतरपुर जिले की पारंपरिक सब्जियों में पोई भाजी एक खास पहचान रखती है. स्थानीय भाषा में प्रसिद्ध यह भाजी स्वाद में लाजवाब और सेहत के लिए फायदेमंद मानी जाती है. इसका पौधा बेल की तरह होता है, जो रस्सियों के सहारे ऊपर चढ़ाया जाता है.दिलचस्प बात यह है कि इसकी पत्तियों का उपयोग नहीं किया जाता, बल्कि इसके कोमल डंठलों को छीलकर स्वादिष्ट सब्जी बनाई जाती है.
खरीफ में आलू की खेती से अच्छी कमाई का मौका! पहाड़ी किसान इन बातों का रखें ध्यान, एक्सपर्ट ने बताए जरूरी टिप्स
कृषि विशेषज्ञ संजय यादव के अनुसार, खरीफ सीजन में आलू की खेती के लिए ढलान वाली और पानी की अच्छी निकासी वाली जमीन का चुनाव करना जरूरी है. उन्होंने कहा कि बारिश के मौसम में खेत में पानी जमा होने से आलू के कंद सड़ सकते हैं, जिससे पूरी फसल प्रभावित हो सकती है. खरीफ सीजन में पहाड़ी क्षेत्रों में आलू की बुवाई के दौरान बीज को काटकर लगाने के बजाय पूरा कंद लगाया जाता है. वहीं ठंड के मौसम में मैदानी या बलुई-कछारी क्षेत्रों में आलू के बीज को काटकर लगाया जाता है.
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