कोलकाता में प्लेन पर बिजली गिरी, 142 यात्री सवार थे:दार्जिलिंग में पुल बहा, शिमला में लैंडस्लाइड; झारखंड में बिजली गिरने से 8 की मौत
देश के कई हिस्सों में तेज हवाओं और बारिश का दौर जारी है। कोलकाता एयरपोर्ट पर शुक्रवार को अगरतला जाने वाली इंडिगो की फ्लाइट 6E6068 पर बिजली गिर गई। घटना के समय फ्लाइट एयरोब्रिज पर खड़ी थी। फ्लाइट में सवार 147 यात्रियों को दूसरी उड़ान से भेजा गया। हादसे में दो ग्राउंड स्टाफ को हल्की चोटें आईं, लेकिन दोनों सुरक्षित हैं। बंगाल के दार्जिलिंग में तेज बारिश के बाद शुक्रवार को बालासन नदी उफान पर आ गई। इससे नदी पर ह्यूम पाइप से बना पुल टूट कर बह गया। इस पुल के टूटने से मिरीक-सिलीगुड़ी सड़क पर ट्रैफिक रोक दिया गया है। वहीं उत्तरी बंगाल की पहाड़ियों में लगातार हो रही बारिश से महानदी के पास लैंडस्लाइड होने से नेशनल हाईवे और सिलीगुड़ी-कुर्सियांग रोड बंद हो गई। हिमाचल प्रदेश के शिमला में भी तेज बारिश के बाद लैंडस्लाइड हुई। इसके कारण गाड़ियों की आवाजाही रोक दी गई। झारखंड के छह जिलों में पिछले 24 घंटों के दौरान आकाशीय बिजली गिरने से 8 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में दो महिलाएं और दो साल का बच्चा शामिल है। सबसे ज्यादा तीन लोगों की मौत हजारीबाग में हुई। इसके अलावा पलामू, लोहरदगा, रामगढ़, पश्चिमी सिंहभूम और गोड्डा जिलों से भी मौतों की खबर है। नवी मुंबई एयरपोर्ट की छत से टपका पानी नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर शुक्रवार को छत से पानी टपकने के कारण बैगेज बेल्ट 5 और 6 कुछ समय के लिए बंद हो गईं। अधिकारियों ने बताया कि करीब 30 मिनट में रिसाव रोक दिया गया और एक घंटे में सफाई व मरम्मत का काम पूरा कर लिया गया। इसके बाद दोनों बैगेज बेल्ट फिर से चालू कर दी गईं। --------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… एक साथ 5 सिस्टम मानसून को रोक रहे, नमी वाली हवाएं आगे नहीं बढ़ रहीं, 19 राज्य बारिश को तरसे मानसून 15 दिन में 19 राज्यों तक पहुंच चुका है, लेकिन 8 जून से तेलंगाना में अटका हुआ है। 11 दिन हो गए हैं, ये आगे नहीं बढ़ रहा है। इससे उत्तर-मध्य भारत के 7 राज्य बारिश के लिए तरस रहे हैं। इन राज्यों में 60% तक कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। इसकी वजह एक ही समय पर 5 अलग-अलग सिस्टम एक्टिव होना है। पूरी खबर पढ़ें…
सुप्रीम कोर्ट बोला-पैदल चलने वालों को परेशानी समझते हैं ड्राइवर:फुटपाथ पर चलना बुनियादी अधिकार, अब इसका उल्लंघन हुआ तो जिम्मेदारों पर एक्शन होगा
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को फैसला सुनाया कि तय फुटपाथ पर चलने का अधिकार एक बुनियादी अधिकार है। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और एएस चंदुरकर की बेंच ने एक अहम फैसले में कहा कि तय रास्तों पर मोटर गाड़ियों के मुकाबले इस अधिकार को प्राथमिकता दी जाएगी। कोर्ट ने कहा कि यह संविधान के आर्टिकल 19 (1) (d) के तहत गारंटी वाले आने-जाने के अधिकार और आर्टिकल 21 (जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार) समेत दूसरे बुनियादी अधिकारों का हिस्सा है। बेंच ने कहा कि इस अधिकार के तहत अगर सड़क है, तो यह पक्का करना भी ड्यूटी है कि पैदल चलने वालों के लिए तय और अच्छी तरह से मेंटेन किए गए फुटपाथ हों। यह फैसला एक एक्सीडेंट केस में आया, जिसमें एक पिता ने अपने 5 साल के बेटे को खो दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने मुआवजे की रकम बढ़ाकर 11,44,628 रुपए कर दी। और इसे कम करने वाले हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट के आदेश की 2 बातें… सुप्रीम कोर्ट बोला- मौलिक अधिकार लागू करवाने निगरानी बॉडी बनाएं सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा- तय फुटपाथ पर चलने के मौलिक अधिकार को बेहतर बनाने और लागू करने के लिए एक रेगुलेटरी बॉडी बनाना जरूरी है। हमेशा काम करने वाली और लगातार बनी रहने वाली ऐसी रेगुलेटरी बॉडी संस्थागत जानकारी विकसित और सुरक्षित रखेगी, ताकि वह अपने जमा किए और प्रोसेस किए गए अनुभव, डेटा और जानकारी के आधार पर काम कर सके। बेंच ने कहा कि संस्थागत विशेषज्ञता बहुत जरूरी है और ऐसी रेगुलेटरी बॉडी खास जानकारी और हुनर वाले लोगों को काम पर रखेगी। कोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि वह इस फैसले की कॉपी केंद्र सरकार, आवास और शहरी मामलों, ग्रामीण विकास और सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालयों को भेजे ताकि जरूरी कानूनी ढांचा शुरू करने की जरूरत पर विचार किया जा सके। ------------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट बोला- महिलाएं होममेकर नहीं, राष्ट्र निर्माता हैं: सड़क दुर्घटना केस में कहा- उनके श्रम की कीमत ₹30 हजार महीना; पति को 62 लाख का मुआवजा सुप्रीम कोर्ट ने जून 2026 में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा, ‘सड़क हादसे में गृहिणियों की मौत होने पर उनके द्वारा की जाने वाली परिवार की देखभाल और घरेलू काम की कीमत कम से कम ₹30 हजार प्रति महीना (₹3.6 लाख सालाना) मानी जाएगी।’ घर संभालने वाली महिलाओं को राष्ट्र निर्माता (नेशन बिल्डर) का दर्जा मिलना चाहिए। उनके काम की तुलना किसी पेशेवर से करके उनके योगदान को कम नहीं आंका जा सकता। पढ़ें पूरी खबर…
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
















