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स्विट्जरलैंड जाने ही वाले थे वेंस, लेकिन इजरायल...क्या डील टूट गई?

स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच होने वाला अहम समझौता ऐन मौके पर खटाई में पड़ गया है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस बहुप्रतीक्षित समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए स्विट्जरलैंड के लिए उड़ान भरने ही वाले थे, लेकिन इजरायल के एक कदम ने पूरी कूटनीतिक बिसात पलट दी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर इजरायल, लेबनान और हिजबुल्लाह को सीधी हिदायत दी थी कि वे आपस में न उलझें। लेकिन इजरायल ने राष्ट्रपति ट्रंप की इस चेतावनी को दरकिनार कर दिया और गुरुवार-शुक्रवार की दरमियानी रात दक्षिणी लेबनान पर एक बड़ा सैन्य हमला कर दिया। इजरायल द्वारा लेबनान पर किए गए इस भीषण हमले में 16 लोगों की मौत हो गई है। वहीं, इस हमले के बाद हुए जवाबी एक्शन में इजरायली सेना को भी नुकसान उठाना पड़ा है। इजरायल ने खुद इस बात की पुष्टि की है कि लेबनान की तरफ से किए गए पलटवार में उसके 4 सैनिकों की जान चली गई। लेबनान पर हुए इस इजरायली हमले से नाराज ईरान ने स्विट्जरलैंड जाने से साफ इनकार कर दिया है। ईरानी प्रतिनिधिमंडल के इस रुख के बाद उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को भी अपना दौरा रद्द करने के लिए मजबूर होना पड़ा। ईरान की समाचार एजेंसी 'फार्स' (Fars News Agency) ने इस घटनाक्रम पर बयान जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि लेबनान में युद्धविराम (सीजफायर) लागू होने तक अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में होने वाली यह बैठक स्थगित रहेगी।

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स्विट्जरलैंड में होने वाली बातचीत रुकी

ये बातचीत शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में होनी थी। लेकिन, वेंस के ल्यूसर्न जाने को लेकर हिचकिचाहट दिखाने और ईरानी अधिकारियों के यह कहने कि बैठक की तारीख अभी तय नहीं हुई है, के बाद अनिश्चितता पैदा हो गई। व्हाइट हाउस के एक प्रवक्ता ने कहा कि बातचीत की तैयारियां चल रही हैं, लेकिन कार्यक्रम अभी भी अनिश्चित है। प्रवक्ता ने कहा कि जैसा कि उपराष्ट्रपति ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, आने वाली तकनीकी बातचीत की योजनाएँ अभी तय नहीं हुई हैं और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल सबसे पहले मिलने वाले मौके पर रवाना होने के लिए तैयार है। लेकिन इन बातचीत की प्रक्रिया कभी भी आसान या पहले से तय नहीं रही है। प्रवक्ता ने आगे कहा कि वेंस गुरुवार रात को रवाना नहीं होंगे, जैसा कि पहले तय किया गया था, और अगले कदमों की पुष्टि होने के बाद और जानकारी दी जाएगी।

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शांति समझौते को लागू करने का काम शुरू

यह देरी उस घटना के एक दिन बाद हुई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने इलाके में महीनों से चल रहे तनाव को खत्म करने के मकसद से एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। यह समझौता तुरंत लागू हो गया और दोनों देशों के बीच युद्धविराम को आगे बढ़ा दिया गया। 14-सूत्रीय MoU (समझौता ज्ञापन) की शर्तों के तहत, वॉशिंगटन और तेहरान को समझौते के तकनीकी पहलुओं पर बातचीत करने और उन्हें अंतिम रूप देने के लिए 60 दिन का समय दिया गया है।

वेंस का कहना है कि अमेरिका समझौते के लिए प्रतिबद्ध है

गुरुवार को व्हाइट हाउस में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में वेंस ने कहा कि अमेरिका समझौते के पहले चरण के तहत अपनी ज़िम्मेदारियों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि MoU में तय 60 दिन की बातचीत की अवधि आधिकारिक तौर पर गुरुवार से शुरू हो गई है और भरोसा जताया कि लॉजिस्टिक्स से जुड़ी व्यवस्थाएं पूरी होने के बाद तकनीकी बातचीत शुरू हो जाएगी। व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने कहा कि हम जल्द से जल्द तकनीकी बातचीत शुरू करने के लिए उत्सुक हैं। फिलहाल, अमेरिका-ईरान बातचीत का अगला दौर रुका हुआ है और दोनों पक्ष बातचीत के लिए नई तारीख और जगह की पुष्टि का इंतज़ार कर रहे हैं।

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28 फरवरी से अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे भीषण युद्ध का अंत एक ऐतिहासिक और चौंकाने वाले कूटनीतिक समझौते (एमओयू) के साथ हुआ है। इस समझौते के तुरंत बाद जहां अमेरिका ने कदम पीछे खींचते हुए ईरानी बंदरगाहों और तेल टैंकरों से अपनी नाकेबंदी पूरी तरह हटा ली है, वहीं ईरान ने इसे अपनी 'ऐतिहासिक जीत' करार दिया है। दुनिया के सबसे अहम व्यापारिक समुद्री रास्तों में से एक 'होर्मुज जलडमरूमध्य' पर अपना दबदबा कायम करते हुए ईरान ने दो टूक कह दिया है कि वहां जहाजों की सुरक्षा के नाम पर किसी भी यूरोपीय नौसैनिक मिशन की दखलंदाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके साथ ही, ईरान ने पश्चिमी देशों की रणनीति को झटका देते हुए एक बड़ा ऐलान किया है कि अमेरिका के साथ 60 दिनों की बातचीत की अवधि खत्म होते ही, यानी ठीक दो महीने बाद, इस रास्ते से गुजरने वाले हर जहाज से 'समुद्री टैक्स' वसूलने की एक नई व्यवस्था लागू कर दी जाएगी। 

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लेबनान का मुद्दा अभी भी बना हुआ

गौरतलब है कि तेहरान की यह ताज़ा चेतावनी तब आई जब इज़राइली अख़बार 'येदिओथ अहरोनोथ' ने रिपोर्ट दी कि इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि इज़राइल दक्षिणी लेबनान में सुरक्षा ज़ोन तब तक बनाए रखेगा जब तक हमारी सुरक्षा ज़रूरतों के लिए इसकी ज़रूरत होगी। उनका इशारा सीमा के पास इज़राइली सैनिकों के कब्ज़े वाले लेबनान के 600 वर्ग किलोमीटर से ज़्यादा इलाके की ओर था। ईरान के मामले में, इज़राइली प्रधानमंत्री ने कहा कि यहूदी देश तेहरान को परमाणु हथियार हासिल न करने देने के सर्वोच्च लक्ष्य पर कायम रहेगा। वहीं दूसरी ओर, ईरान ने ज़ोर देकर कहा कि लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता से जुड़ी डील के लिए इज़राइल का पूरी तरह से पीछे हटना ज़रूरी है, जिससे इज़राइल के पीछे हटने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ज़िम्मेदार हो जाते हैं।

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मामला सुलझा या और उलझ गया?

ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को लेबनान, हिज़्बुल्लाह और इज़राइल समेत सभी मोर्चों पर पूरी तरह से युद्धविराम की उम्मीद है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट में लिखा कि हम मध्य पूर्व क्षेत्र में सभी लोगों से अपील करते हैं कि वे हमारी बातचीत को अच्छी तरह से आगे बढ़ने देने के अपने वादे पर कायम रहें। इस बीच, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने भी इस समझौते को मंज़ूरी दे दी और ट्रंप की टीम के साथ सीधी बातचीत का समर्थन किया। खामेनेई ने कहा कि ट्रंप ने बेचैनी में यह समझौता करने के लिए हर तरह के हथकंडे अपनाए। यह ध्यान देने वाली बात है कि अपने पिता की हत्या के बाद मार्च में पद संभालने के बाद से खामेनेई सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए हैं। हालाँकि, स्थिति तब जटिल हो गई जब गुरुवार सुबह तक लेबनान के खिलाफ़ इज़राइली ड्रोन हमले और तोपखाने से गोलाबारी जारी रही। दूसरी ओर, हिज़्बुल्लाह ने हाल के दिनों में कफ़र तेबनित-अली अल-ताहेर इलाके में इज़राइली सेना पर हुए कई हमलों की ज़िम्मेदारी ली। हाल की घटनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इज़राइल की आलोचना करने वालों को आड़े हाथों लिया। व्हाइट हाउस में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान वेंस ने कहा कि डोनाल्ड जे. ट्रंप दुनिया के एकमात्र ऐसे राष्ट्राध्यक्ष हैं जो इस समय इज़राइल देश के प्रति सहानुभूति रखते हैं। अगर मैं इज़राइली सरकार की कैबिनेट में होता, तो मैं शायद उस एकमात्र शक्तिशाली सहयोगी पर हमला नहीं करता जो मेरे पास पूरी दुनिया में बचा है। वेंस की इस आलोचना पर इज़राइल ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

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  Sports

15 साल के Vaibhav Suryavanshi का List A Cricket में धमाका, 11 गेंदों में जड़ा Fastest Fifty का Record

क्रिकेट जगत की नई सनसनी वैभव सूर्यवंशी ने अपना रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन जारी रखकर भारत ए की तरफ से खेलते हुए रविवार को यहां श्रीलंका ए के खिलाफ त्रिकोणीय एकदिवसीय श्रृंखला के फाइनल में केवल 11 गेंदों में अर्धशतक जड़ा और इस तरह से लिस्ट ए में सबसे तेज अर्धशतक का 21 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया। इस 15 वर्षीय इस प्रतिभाशाली खिलाड़ी ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन फाइनल के लिए बचा रखा था। उन्होंने 29 गेंद पर 94 रन बनाए जिसमें 10 चौके और आठ छक्के शामिल हैं। सूर्यवंशी ने इस दौरान श्रीलंका के कौशल्या वीररत्ने की लिस्ट ए में बनाए गए सबसे तेज अर्धशतक के रिकॉर्ड को तोड़ा। वीररत्ने ने 2005 में 12 गेंदों में यह उपलब्धि हासिल की थी।

सूर्यवंशी लिस्ट ए में संयुक्त रूप से सबसे तेज शतक बनाने के करीब थे, लेकिन उन्होंने नौवें ओवर में मिड-ऑफ पर कैच दे दिया। उस समय भारतीय टीम का स्कोर 132 रन था। उन्होंने श्रीलंका की गेंदबाजी की धज्जियां उड़ाते हुए पांच छक्के और उतने ही चौकों की मदद से अर्धशतक पूरा किया। लीग चरण में बड़ा स्कोर न बना पाने के बाद सूर्यवंशी ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने जिन पहली पांच गेंदों का सामना किया उन पर दो छक्के और तीन चौके लगाए।

सूर्यवंशी ने तेज गेंदबाज दुलज समुदिता की गेंदों पर दो छक्के लगाकर अपना अर्धशतक पूरा किया। एक्स्ट्रा कवर के ऊपर से लगाए गए उनके तीन छक्के उनकी पारी की मुख्य विशेषता थे। सूर्यवंशी जेक फ्रेजर मैकगर्क के 29 गेंदों में शतक के रिकॉर्ड की बराबरी करने के बेहद करीब थे, लेकिन छक्का जड़ने के प्रयास में आउट हो गए। सूर्यवंशी ने आईपीएल में शानदार प्रदर्शन किया था। इसके बाद उन्हें आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे के लिए भारतीय टी20 टीम में चुना गया। इस दौरे के दौरान उन्हें सीनियर स्तर पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण का मौका मिल सकता है।

Sun, 21 Jun 2026 12:23:51 +0530

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