कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने शनिवार को 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर RSS पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आज़ादी की लड़ाई में RSS की भूमिका पर सवाल उठाए और उन्हें उन सदस्यों के नाम बताने की चुनौती दी जिन्होंने ब्रिटिश शासन के ख़िलाफ़ संघर्ष में अपनी जान दी थी। खड़गे ने कहा कि RSS से मेरा बस यही सवाल है: हमें बताएं कि आप आज़ादी की किस लड़ाई में शामिल हुए थे। उन्होंने दावा किया कि वे आज़ादी की लड़ाई के दौरान शहीद हुए 500 कांग्रेस सदस्यों की सूची दे सकते हैं और RSS को चुनौती दी कि वह ऐसे कम से कम 50 लोगों के नाम ही बता दे।
खरगे ने RSS पर बंटवारे के बाद सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने का आरोप लगाया और पूछा कि उसके बाद हुए दंगों में लोगों की सुरक्षा करने में संगठन ने क्या भूमिका निभाई थी। खरगे ने RSS के संगठन के तौर पर स्टेटस पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इसे सिर्फ़ इसलिए "बैन" नहीं किया जा सकता क्योंकि यह रजिस्टर्ड नहीं है। उन्होंने कहा कि RSS को बैन नहीं किया जा सकता। संतोष और मोहन भागवत ने जो कहा, वह सच है: उन्हें बैन नहीं किया जा सकता। इसकी वजह यह है कि वे रजिस्टर्ड ही नहीं हैं। अगर मुझे आपके संगठन को बैन करना हो, तो क्या पहले आपका रजिस्टर्ड होना ज़रूरी नहीं है?"
उनके ये बयान कर्नाटक में चल रही एक अलग राजनीतिक लड़ाई के बीच आए हैं। यह लड़ाई राज्य सरकार के उस प्रस्तावित कानून को लेकर है जो संगठनों द्वारा सरकारी जगहों और सार्वजनिक संपत्ति के इस्तेमाल को रेगुलेट करेगा। इस कदम से सार्वजनिक जगहों पर होने वाली RSS शाखाओं जैसी गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। इस बीच, खड़गे ने 'कर्नाटक सरकारी परिसर और सार्वजनिक संपत्ति के उपयोग के नियमन से संबंधित विधेयक, 2026' का बचाव किया और बीजेपी के उन आरोपों को खारिज कर दिया कि इसका मकसद खास तौर पर RSS को निशाना बनाना है।
प्रस्तावित कानून के तहत, संगठनों को सार्वजनिक संपत्ति या सरकारी परिसर में कार्यक्रम आयोजित करने से पहले सक्षम अधिकारी से अनुमति लेनी होगी, चाहे वे औपचारिक रूप से पंजीकृत हों या नहीं। उन्होंने सवाल किया कि बीजेपी प्रस्तावित कानून के प्रावधानों की जांच किए बिना ही उसका विरोध क्यों कर रही है। खड़गे ने पूछा कि क्या उस विधेयक में किसी संगठन, संघ, संस्थान या राजनीतिक दल का नाम लिखा है?
Continue reading on the app