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Explainer: शिवसेना उद्धव का कांग्रेस में हो रहा विलय? क्या सांसदों की बगावत के पीछे यही है वजह, क्यों उठी ये चिंगारी समझें पूरी कहानी

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर शिवसेना का नाम सुर्खियों में है. फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार विवाद सत्ता को लेकर नहीं, बल्कि विचारधारा और पार्टी की पहचान को लेकर खड़ा हुआ है. शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के छह लोकसभा सांसदों की बगावत ने राजनीतिक गलियारों में एक नया सवाल खड़ा कर दिया है...क्या उद्धव ठाकरे की पार्टी धीरे-धीरे कांग्रेस के प्रभाव में जा रही है? और क्या यही वजह है कि पार्टी के भीतर असंतोष विस्फोटक रूप ले चुका है?

इन सवालों को हवा तब मिली जब बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को सौंपे गए पत्र में दावा किया कि शिवसेना (UBT) अब बालासाहेब ठाकरे की मूल विचारधारा से भटक चुकी है और कांग्रेस के ज्यादा करीब पहुंचती जा रही है.

आखिर कहां से शुरू हुआ पूरा विवाद?

पिछले कुछ दिनों से शिवसेना (UBT) के भीतर असंतोष की खबरें सामने आ रही थीं. स्थिति तब गंभीर हो गई जब उद्धव ठाकरे ने दिल्ली में पार्टी सांसदों की बैठक बुलाई और उसमें 9 में से केवल 3 सांसद ही पहुंचे.

बैठक से छह सांसदों की गैरमौजूदगी ने साफ संकेत दे दिया कि पार्टी के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है. इसके बाद पार्टी ने इन सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी. लेकिन असली राजनीतिक विस्फोट तब हुआ जब खबर आई कि बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर से मुलाकात कर अपनी अलग राजनीतिक स्थिति दर्ज कराई है.

कांग्रेस का नाम बीच में क्यों आया?

सूत्रों के मुताबिक, बागी सांसदों ने अपने पत्र में यह आशंका जताई है कि शिवसेना (UBT) भविष्य में कांग्रेस के साथ और गहरे राजनीतिक रिश्तों की ओर बढ़ सकती है. सांसदों का तर्क है कि बालासाहेब ठाकरे ने जिस हिंदुत्व और मराठी अस्मिता की राजनीति के आधार पर शिवसेना खड़ी की थी, वर्तमान नेतृत्व उससे दूर होता जा रहा है.

उनका आरोप है कि महाविकास आघाड़ी के गठन के बाद से पार्टी की वैचारिक दिशा बदल गई है. कांग्रेस और अन्य सहयोगी दलों के साथ लगातार बढ़ती नजदीकी ने संगठन के पारंपरिक कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच असहजता पैदा की है.

क्या वास्तव में कांग्रेस में विलय की तैयारी है?

फिलहाल ऐसा कोई आधिकारिक संकेत नहीं है कि शिवसेना (UBT) कांग्रेस में विलय करने जा रही है. न तो उद्धव ठाकरे ने और न ही कांग्रेस नेतृत्व ने ऐसी किसी संभावना का जिक्र किया है.

हालांकि राजनीति में कई बार वास्तविक घटनाओं से ज्यादा धारणा असर डालती है. बागी सांसद इसी धारणा को आधार बनाकर अपने फैसले को वैचारिक संघर्ष के रूप में पेश कर रहे हैं.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि "कांग्रेस में विलय" की चर्चा फिलहाल एक राजनीतिक नैरेटिव ज्यादा है, जिसके जरिए बागी नेता अपने कदम को उचित ठहराने की कोशिश कर रहे हैं.

क्या यह सिर्फ विचारधारा का मामला है?

इस सवाल का जवाब इतना आसान नहीं है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विचारधारा का मुद्दा जरूर है, लेकिन इसके साथ-साथ राजनीतिक भविष्य और संगठन में प्रभाव भी बड़ा कारण हो सकता है. 2022 में एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद शिवसेना का बड़ा हिस्सा पहले ही उद्धव ठाकरे से अलग हो चुका है.

चुनाव आयोग ने पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह भी शिंदे गुट को सौंप दिया था. ऐसे में कई सांसदों को लग सकता है कि भविष्य की राजनीति में शिंदे गुट के साथ रहना ज्यादा लाभदायक होगा. यानी वैचारिक बहस के साथ-साथ राजनीतिक गणित भी इस बगावत के पीछे अहम भूमिका निभा रहा है.

एकनाथ शिंदे को क्या फायदा?

यदि छह सांसद आधिकारिक रूप से शिंदे गुट में शामिल होते हैं तो लोकसभा में शिंदे की ताकत और बढ़ जाएगी. पहले से ही एनडीए का हिस्सा होने के कारण शिंदे राष्ट्रीय राजनीति में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकेंगे. साथ ही वह यह संदेश देने में भी सफल होंगे कि शिवसेना की असली विरासत अब उनके पास है. यही वजह है कि "ऑपरेशन टाइगर" की चर्चा लगातार तेज होती जा रही है.

उद्धव ठाकरे के सामने सबसे बड़ी चुनौती

उद्धव ठाकरे के लिए यह सिर्फ छह सांसदों को बचाने की लड़ाई नहीं है. असली चुनौती पार्टी की वैचारिक पहचान और राजनीतिक अस्तित्व को बचाए रखने की है. यदि बागी सांसदों का यह नैरेटिव मजबूत होता है कि UBT कांग्रेस की ओर झुक रही है, तो इसका असर पार्टी के कार्यकर्ताओं और पारंपरिक वोट बैंक पर भी पड़ सकता है. इसी कारण उद्धव ठाकरे अब संगठनात्मक कार्रवाई के साथ-साथ राजनीतिक डैमेज कंट्रोल में भी जुट गए हैं.

बागी सांसदों के अगले कदम पर नजर?

आने वाले दिनों में बागी सांसदों का अगला कदम महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा तय करेगा. यदि वे औपचारिक रूप से शिंदे गुट में शामिल हो जाते हैं तो यह उद्धव ठाकरे के लिए 2022 के बाद दूसरा सबसे बड़ा झटका होगा.

फिलहाल इतना साफ है कि शिवसेना (UBT) के भीतर उठी यह चिंगारी केवल सांसदों की नाराजगी तक सीमित नहीं है. इसके केंद्र में पार्टी की विचारधारा, कांग्रेस से रिश्ते और बालासाहेब ठाकरे की राजनीतिक विरासत पर दावा जैसी बड़ी लड़ाई छिपी हुई है. यही लड़ाई आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति का नया अध्याय लिख सकती है.

एकनाथ के लिए भी अहम वक्त

हालांकि एकनाथ शिंदे ने इन बागी सांसदों को दिल्ली से जयपुर भेज दिया है. ताकि इन सांसदों के मन बदलने का असर न दिखाई दे. यानी कहीं ये सांसद एक बार फिर उद्धव गुट में न चले जाएं. ऐसे में इन सांसदों को जयपुर के किसी रिसोर्ट में शिफ्ट कर दिया है. हालांकि विरोध होर्स ट्रेडिंग का आरोप लगा रहे हैं, लेकिन एकनाथ शिंदे इन शिवसैनिकों को अपनी पार्टी में मिलाकर अपनी स्थिति को सरकार में और मजबूत करने की कोशिश में जुटे हैं. 6 सांसदों के शिंदे गुट में आने से निश्चित रूप से पार्टी में उनके कद में इजाफा हो सकता है. बरहाल आगे क्या होता है इस सियासी घटनाक्रम पर हर किसी की नजरें टिकी हैं. माना जा रहा है कि ये सभी सांसदे अगले एक दो दिन में शिंदे गुट में शामिल हो जाएंगे. 

यह भी पढ़ें - Explainer: सिर्फ सुरक्षा नहीं, बड़ा संकेत! बागी सांसदों को Y सिक्योरिटी मिलते ही तेज हुई सियासी हलचल

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आदित्य धर की 'धुरंधर' के बाद एक और बड़ी फिल्म:प्रियदर्शन के 'धुरंधर' आकाशादित्य लामा ला रहे हैं 'दुल्हनिया ले आएगी'

फिल्म इंडस्ट्री में 'धुरंधर' नाम की चर्चा के बीच अब एक और नई फिल्म का एलान हुआ है। फिल्ममेकर आदित्य धर की फिल्म 'धुरंधर' के बाद अब दिग्गज निर्देशक प्रियदर्शन के एक और 'धुरंधर' आकाशादित्य लामा अपनी नई फिल्म लेकर आ रहे हैं। उनकी इस आगामी फिल्म का नाम 'दुल्हनिया ले आएगी' है। यह एक पारिवारिक मनोरंजन फिल्म होगी, जिसमें महेश मांजरेकर, पीयूष मिश्रा और खुशाली कुमार मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे। इस नए प्रोजेक्ट की घोषणा के बाद प्रियदर्शन ने खुद सोशल मीडिया पर आकाशादित्य लामा और उनकी टीम को बधाई दी है। फिल्म की रिलीज डेट और फर्स्ट लुक की घोषणा आने वाले महीनों में की जा सकती है। प्रियदर्शन ने अपने 'धुरंधर' पर जताया भरोसा प्रियदर्शन और आकाशादित्य लामा का पुराना क्रिएटिव जुड़ाव रहा है। लामा ने प्रियदर्शन के साथ कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम किया है और उनके निर्देशन की बारीकियों को सीखा है। सोशल मीडिया पर प्रियदर्शन ने लिखा, 'आकाशादित्य लामा और दुल्हनिया ले आएगी की पूरी टीम को बधाई। आकाशादित्य ने मेरे साथ काम किया है और उन्हें इस अनोखे फैमिली एंटरटेनर को आगे बढ़ाते देखना वाकई बहुत अच्छा है। मैं पूरी टीम को सफलता की शुभकामनाएं देता हूं।' प्रियदर्शन के इस भरोसे से फिल्म को लेकर सिनेमा प्रेमियों के बीच उत्सुकता बढ़ गई है। फिल्म में दिखेंगे अनुभवी कलाकार इस फिल्म की स्टार कास्ट काफी मजबूत है। इसमें महेश मांजरेकर और पीयूष मिश्रा जैसे मंझे हुए कलाकार शामिल हैं, जो अपनी बेहतरीन एक्टिंग और कॉमेडी के लिए जाने जाते हैं। इनके अलावा फिल्म में एक्ट्रेस खुशाली कुमार भी एक महत्वपूर्ण किरदार में दिखाई देंगी, जो फिल्म की कहानी में एक नया और युवा एंगल लेकर आएंगी। फिल्म के मेकर्स को उम्मीद है कि इन सभी कलाकारों की जुगलबंदी दर्शकों को पसंद आएगी। कैसी होगी फिल्म की कहानी मेकर्स ने अभी तक फिल्म की कहानी को लेकर ज्यादा खुलासे नहीं किए हैं। हालांकि, फिल्म के टाइटल और शुरुआती जानकारी से पता चलता है कि यह एक पारिवारिक ड्रामा होगी। इसमें रिश्तों, त्योहारों, शादी के जश्न और अचानक पैदा होने वाली मजेदार परिस्थितियों को दिखाया जाएगा। यह फिल्म हर उम्र के दर्शकों को ध्यान में रखकर बनाई जा रही है, जिसमें हल्के-फुल्के मनोरंजन के साथ-साथ इमोशनल पल भी होंगे।

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  Sports

Shubman Gill की 'विराट' कप्तानी, 154 रन बनाकर Sachin-Virat के Elite क्लब में हुए शामिल

लखनऊ के इकाना मैदान में भारतीय कप्तान शुभमन गिल की  शानदार बल्लेबाजी की बदौलत भारत ने अफगानिस्तान को एकतरफा मुकाबले में हराकर श्रृंखला अपने नाम कर ली और गिल ने भारतीय क्रिकेट के कई दिग्गजों की सूची में अपना नाम दर्ज करा लिया है।

लखनऊ के इकाना मैदान में खेले गए दूसरे एकदिवसीय मुकाबले में भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने शानदार 154 रन की पारी खेलकर टीम को बड़ी जीत दिलाई। उनकी कप्तानी पारी की बदौलत भारत ने अफगानिस्तान को 170 रन से हराते हुए तीन मैचों की श्रृंखला में 2-0 की अजेय बढ़त हासिल कर ली है।

गौरतलब है कि यह शुभमन गिल के कप्तानी करियर का पहला ऐसा अवसर है जब उन्होंने एकदिवसीय मुकाबले में 150 से अधिक रन बनाए हैं। इसके साथ ही वह एकदिवसीय क्रिकेट में 150 से ज्यादा रन बनाने वाले भारत के सातवें कप्तान बन गए हैं। इस उपलब्धि के साथ उनका नाम सचिन तेंदुलकर, विराट कोहली, रोहित शर्मा, वीरेंद्र सहवाग, कपिल देव और मोहम्मद अजहरुद्दीन जैसे दिग्गज खिलाड़ियों की सूची में शामिल हो गया है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, भारतीय कप्तानों में सबसे बड़ी एकदिवसीय पारी खेलने का रिकॉर्ड वीरेंद्र सहवाग के नाम है, जिन्होंने वर्ष 2011 में वेस्टइंडीज के खिलाफ 219 रन बनाए थे। वहीं रोहित शर्मा और वीरेंद्र सहवाग ही ऐसे भारतीय कप्तान हैं जिन्होंने दोहरा शतक लगाया है। विराट कोहली एकमात्र भारतीय कप्तान हैं जिन्होंने कप्तानी करते हुए दो बार 150 से अधिक रन बनाए हैं।

मुकाबले की बात करें तो भारत को शुरुआत में यशस्वी जायसवाल के रूप में झटका लगा था। इसके बाद शुभमन गिल ने रोहित शर्मा के साथ पारी को संभाला। हालांकि मैच का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब गिल और ईशान किशन ने तीसरे विकेट के लिए विशाल साझेदारी की।

बता दें कि शुभमन गिल ने केवल 110 गेंदों में 154 रन बनाए। उनकी पारी में 22 चौके और दो छक्के शामिल रहे। दूसरी ओर ईशान किशन ने भी आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए 79 गेंदों में 125 रन बनाए। दोनों बल्लेबाजों के बीच तीसरे विकेट के लिए 224 रन की साझेदारी हुई, जिसने अफगानिस्तान को मुकाबले से लगभग बाहर कर दिया।

इन दोनों पारियों की बदौलत भारत ने निर्धारित ओवरों में 402 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। हालांकि भारतीय टीम अंतिम ओवर में ऑल आउट हो गई, लेकिन तब तक वह अफगानिस्तान के सामने बेहद कठिन लक्ष्य रख चुकी थी।

403 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी अफगानिस्तान की टीम शुरुआत से ही दबाव में दिखाई दी। टीम की ओर से रहमत शाह ने संघर्षपूर्ण 79 रन बनाए और कुछ देर तक उम्मीद बनाए रखी। लेकिन दूसरे छोर से लगातार विकेट गिरते रहे।

भारतीय गेंदबाजों ने भी शानदार प्रदर्शन किया। अर्शदीप सिंह और गुरनूर बराड़ ने नियमित अंतराल पर विकेट लेकर अफगानिस्तान की बल्लेबाजी को संभलने का मौका नहीं दिया। परिणामस्वरूप पूरी टीम 44.3 ओवर में 232 रन पर सिमट गई।

यह शुभमन गिल की कप्तानी में भारत की पहली एकदिवसीय श्रृंखला जीत भी है। ऐसे में यह मुकाबला उनके लिए व्यक्तिगत और टीम दोनों स्तर पर बेहद खास बन गया है। युवा कप्तान की इस पारी ने न केवल भारत को जीत दिलाई, बल्कि यह भी दिखाया कि आने वाले वर्षों में वह भारतीय क्रिकेट की अगुवाई करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
Thu, 18 Jun 2026 21:46:57 +0530

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